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सतना जिले के सिंहपुर थाना अंतर्गत एक आदिवासी के साथ कथित मारपीट की घटना में अब एक नया मोड़ सामने आया है। दरअसल, आदिवासी और उसके परिवार ने पुलिस के सामने दिए अपने बयान में स्पष्ट किया है कि उनके साथ कोई मारपीट नहीं हुई थी। उन्होंने बताया कि यह पूरी शिकायत चुनावी रंजिश के चलते उन्हें मोहरा बनाकर की गई थी।
Shiv Singh rajput dahiya journ
सतना जिले के सिंहपुर थाना अंतर्गत एक आदिवासी के साथ कथित मारपीट की घटना में अब एक नया मोड़ सामने आया है। दरअसल, आदिवासी और उसके परिवार ने पुलिस के सामने दिए अपने बयान में स्पष्ट किया है कि उनके साथ कोई मारपीट नहीं हुई थी। उन्होंने बताया कि यह पूरी शिकायत चुनावी रंजिश के चलते उन्हें मोहरा बनाकर की गई थी।
More news from Satna and nearby areas
- बिरसिंहपुर में तेज़ हवाओं के साथ बारिश का दौर शुरू हो गया है। इस बारिश के आगमन से क्षेत्र के लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिली है।1
- पूरे संदेश में इस बात पर बार-बार जोर दिया गया है कि गरीबों को न्याय क्यों नहीं मिल पा रहा है।1
- मैहर के सरलानगर में शासन-प्रशासन की नाक के नीचे अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्ध नागरिकों ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) और जिला कलेक्टर तक को लिखित शिकायत दी है, लेकिन इसके बावजूद अवैध शराब की पैकारी बंद होने का नाम नहीं ले रही है। जिम्मेदार अधिकारियों की इस बेरुखी से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। क्षेत्र में बढ़ते इस अवैध कारोबार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए ग्रामीणों ने बीते 19 मई 2026 को एसपी और कलेक्टर को एक लिखित शिकायती पत्र सौंपा था। इस पत्र में प्रशासन को बताया गया था कि अवैध शराब विक्रेताओं के कारण आम जनमानस, विशेषकर महिलाओं और बच्चों का जीवन दूभर हो गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इन शराब ठिकानों को तत्काल बंद करने या अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग की थी। हालांकि, इस शिकायत को एक महीने से भी अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। प्रशासन की इस निष्क्रियता के कारण शराब माफियाओं के हौसले और बुलंद हो गए हैं। सरलानगर के निवासियों का कहना है कि अवैध शराब पैकारी के कारण गली-मोहल्लों में अराजकता का माहौल बना रहता है। शराबियों के जमावड़े के चलते महिलाओं और युवतियों का रास्ते से निकलना मुश्किल हो गया है। क्षेत्र के युवा और दैनिक मजदूर इस अवैध शराब की लत के शिकार होकर अपने परिवारों को बर्बाद कर रहे हैं। पैकारी स्थलों के आसपास देर रात तक असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे कभी भी कोई बड़ी अप्रिय घटना घटित होने की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों ने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा है कि उन्होंने कानून व्यवस्था पर भरोसा करके शांतिपूर्वक कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन सौंपा था, परंतु एक महीना बीतने के बाद भी पुलिस या आबकारी विभाग ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। उनका मानना है कि प्रशासन को उनकी परेशानियों से कोई सरोकार नहीं है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सरलानगर को इस अवैध शराब के अभिशाप से मुक्ति नहीं दिलाई गई, तो वे उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। अब देखना यह है कि इस गंभीर स्थिति के बावजूद "कुंभकर्णी नींद में सोया" आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस जागेगी या शराब माफियाओं को यूं ही खुली छूट मिलती रहेगी।2
- सतना जिला मुख्यालय में वाहन चेकिंग के दौरान यातायात पुलिस ने एक नाबालिग चालक को बाइक पर अवैध हूटर लगाकर सायरन बजाते हुए तथा नंबर प्लेट छुपाकर वाहन चलाते हुए पकड़ा। इस मामले में पुलिस ने चालक और उसके परिजनों को थाने बुलाकर चालानी कार्रवाई की और उनसे ₹2500 का समन शुल्क वसूला। यातायात पुलिस द्वारा की गई यह कार्रवाई केवल नियम उल्लंघन पर जुर्माना ही नहीं, बल्कि युवाओं में बढ़ रही खतरनाक प्रवृत्ति के खिलाफ एक कड़ी चेतावनी भी है। विभाग ने इस बात पर जोर दिया है कि रफ्तार, स्टाइल, स्टंट और सोशल मीडिया रील्स बनाने की होड़ में युवा वर्ग न सिर्फ अपनी, बल्कि दूसरों की जान भी जोखिम में डाल रहा है। ऐसे मामलों में युवाओं के साथ-साथ उनके अभिभावकों की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। सड़क सुरक्षा के लिए जागरूकता फैलाने और सख्त कार्रवाई करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया है।1
- सरकार भले ही सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने का दावा करती है, लेकिन सतना जिले के अस्पताल की जमीनी हकीकत इन दावों के विपरीत है। यहाँ मरीजों को इलाज के लिए भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि जिला अस्पताल में जरूरी दवाएं और मरहम-पट्टी का सामान, जैसे कि घाव भरने वाली ट्यूब, तक उपलब्ध नहीं है। पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब एक मरीज को चोट लगने के बाद घाव भरने वाली ट्यूब की जरूरत पड़ी। अस्पताल के कर्मचारियों ने सीधे तौर पर दवा की अनुपलब्धता बताई और मरीज को यह दवा बाहर से खरीदने की सलाह दी, जिससे मरीजों की जेब पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इस स्थिति को लेकर मरीजों और उनके साथ आए लोगों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर सरकारी अस्पताल में ही बुनियादी दवाएं नहीं मिलेंगी, तो गरीब जनता आखिर कहाँ जाएगी। यह घटना अस्पताल प्रबंधन की लचर व्यवस्था और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को उजागर करती है, जिससे इलाज के लिए आने वाले लोगों को लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर ये दवाएं अस्पताल तक क्यों नहीं पहुँच रही हैं और क्या जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर ध्यान देंगे।1
- मध्य प्रदेश के रीवा जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला एक दिलदहला देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक युवक साहिल ने अपनी पहचान छिपाकर एक युवती गोल्डी साकेत से पहले दोस्ती की और फिर शादी रचा ली। शादी के बाद साहिल ने गोल्डी को रूह कंपा देने वाली प्रताड़ना दी, जिसका अंत उसकी दर्दनाक मौत से हुआ। मृतका के माता-पिता के आंसुओं और बयानों ने इस क्रूरता की पूरी कहानी बयां की है। गोल्डी साकेत की मां बेबी साकेत ने रोते हुए बताया कि उनकी बेटी उन्हें छिप-छिपकर फोन किया करती थी। फोन पर गोल्डी बताती थी कि साहिल उसे नंगा करके बेरहमी से मारता था और उसे अपनी चीखें सुनकर सुकून मिलता था। मां ने कलेजा फाड़ देने वाले दर्द के साथ बताया कि बेटी लगातार इस प्रताड़ना की जानकारी परिवार को दे रही थी, लेकिन किसी ने इस खौफनाक अंजाम का अंदाज़ा नहीं लगाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए, घटना के 35 दिन बाद प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में मृतका गोल्डी साकेत के शव को कब्र से बाहर निकाला गया है। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और हर एंगल से बारीकी से जांच कर रही है। इस रूह कंपा देने वाली घटना के बाद से पूरे इलाके में गहरा आक्रोश है और पीड़ित परिवार लगातार न्याय की गुहार लगा रहा है।1
- नागौद के हॉस्पिटल चौराहा पर चल रहे चौड़ीकरण कार्य के दौरान एक जेसीबी चालक ने पानी की मुख्य लाइन तोड़ दी। इस घटना के चलते शहर में अगले एक-दो दिन तक पानी की आपूर्ति बाधित रहने की आशंका है। स्थानीय लोगों ने ठेकेदार को पहले ही बताया था कि उस स्थान पर पानी की मेन लाइन का पाइप निकला हुआ है, लेकिन ठेकेदार ने इस चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया। शहर में पहले से ही गर्मी के कारण पानी की समस्या बनी हुई है, ऐसे में इस लापरवाही से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है। इसको लेकर ठेकेदार और जेसीबी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है।1
- सतना जिले के सिंहपुर के भंवर में एक आदिवासी पीड़ित की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उनके परिजन उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचे हैं। इस पूरे मामले में सिंहपुर पुलिस ने अभी तक कोई प्रकरण दर्ज नहीं किया है। हालांकि, अब जानकारी मिल रही है कि पीड़ित के जिला अस्पताल पहुंचने के बाद सिंहपुर टीआई भी उनके पीछे-पीछे अस्पताल पहुंच रहे हैं।1