सुखद जीवन संस्थान (ट्रस्ट), चित्तौड़गढ़ द्वारा केकड़ी में 31 मई 2026, रविवार को एक जीसा (JeeSa) थेरेपी शिविर का आयोजन किया गया। होटल एम्ब्रोसिया डाइन में प्रातः 11 बजे हुए इस शिविर का शुभारंभ अतिरिक्त जिला कलेक्टर केकड़ी चंद्रशेखर भंडारी के मुख्य आतिथ्य में हुआ। आध्यात्मिक गुरु स्थितप्रज्ञानंद के अनुसार, जीसा थेरेपी जीवन के रहस्यों को जानकर व्यक्ति से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने, उसे तनावमुक्त व सुखी जीवन जीने और जीवन को उद्देश्यपूर्ण, ऐश्वर्यपूर्ण, सार्थक व परोपकारमय बनाकर आध्यात्मिक जीवन का मार्ग प्रशस्त करने में सहायक है। इस उद्घाटन समारोह में निवर्तमान प्रधान पंचायत समिति केकड़ी होनहार सिंह राठौड़ और मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी केकड़ी गोपीलाल कीर विशिष्ठ अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे, जबकि सुखद जीवन संस्थान के चेयरमैन और आध्यात्मिक गुरु स्थितप्रज्ञानंद ने अध्यक्षता की। संस्थान स्वयं को एक गैर-लाभकारी संगठन बताता है जो सुखी और समृद्ध जीवन के लिए समर्पित है, और दावा करता है कि यह जीसा थेरेपी के आधार पर जीवन की समस्याओं को सुलझाकर तनावमुक्त व सुखी जीवन प्रदान करने वाला भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में अपनी तरह का एकमात्र चैरिटेबल ट्रस्ट है। शिविर को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि भंडारी ने संस्थान की आध्यात्मिक गतिविधियों की सराहना की और जीसा थेरेपी को जनकल्याण का एक महत्वपूर्ण माध्यम बताया। होनहार सिंह राठौड़ ने संभागियों से जीवन की समस्याओं के समाधान के लिए संस्थान द्वारा बताए गए मार्ग का अनुसरण करने का आह्वान किया, वहीं गोपीलाल कीर ने वर्तमान सामाजिक परिप्रेक्ष्य में ऐसे आध्यात्मिक शिविरों के महत्व पर प्रकाश डाला। शिविर प्रभारी राधेश्याम कुमावत ने जानकारी दी कि जीसा थेरेपी एक अद्वितीय और वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो संस्थान के संस्थापक चेयरमैन एवं हैप्पीनेस गुरु श्री स्थितप्रज्ञानंद जी द्वारा भारत के 368 गांवों/शहरों और 8 देशों के 1.50 लाख लोगों पर किए गए 35 वर्षों के शोध एवं अध्ययन का परिणाम है। यह थेरेपी व्यक्ति के जीवन में समाधान, निर्माण और रूपांतरण (Solution, Creation and Transformation) लाने में सक्षम है। शिविर संयोजक डॉ. अमित पारीक ने बताया कि केकड़ी में संस्थान द्वारा यह पहला शिविर था, जिसमें लगभग 130 संभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में हर्षा जी ने तकनीकी सहयोग दिया और शैलेष बंदवाल ने इसका सफल संचालन किया। इस अवसर पर चित्तौड़गढ़ से आए संस्थान के सदस्य सुरेश मेहता, दिलीप खत्री, मुकेश सारस्वत, भरत सोनी, राजेश सोनी, संजय प्रकाश तिवारी, सुमित पारीक, विकास अमरवाल और कैलाश वैष्णव भी उपस्थित रहे। यह शिविर व्यक्ति के आध्यात्मिक जीवन को सशक्त बनाने और उसे तनावमुक्त व उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
सुखद जीवन संस्थान (ट्रस्ट), चित्तौड़गढ़ द्वारा केकड़ी में 31 मई 2026, रविवार को एक जीसा (JeeSa) थेरेपी शिविर का आयोजन किया गया। होटल एम्ब्रोसिया डाइन में प्रातः 11 बजे हुए इस शिविर का शुभारंभ अतिरिक्त जिला कलेक्टर केकड़ी चंद्रशेखर भंडारी के मुख्य आतिथ्य में हुआ। आध्यात्मिक गुरु स्थितप्रज्ञानंद के अनुसार, जीसा थेरेपी जीवन के रहस्यों को जानकर व्यक्ति से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने, उसे तनावमुक्त व सुखी जीवन जीने और जीवन को उद्देश्यपूर्ण, ऐश्वर्यपूर्ण, सार्थक व परोपकारमय बनाकर आध्यात्मिक जीवन का मार्ग प्रशस्त करने में सहायक है। इस उद्घाटन समारोह में निवर्तमान प्रधान पंचायत समिति केकड़ी होनहार सिंह राठौड़ और मुख्य ब्लॉक शिक्षा
अधिकारी केकड़ी गोपीलाल कीर विशिष्ठ अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे, जबकि सुखद जीवन संस्थान के चेयरमैन और आध्यात्मिक गुरु स्थितप्रज्ञानंद ने अध्यक्षता की। संस्थान स्वयं को एक गैर-लाभकारी संगठन बताता है जो सुखी और समृद्ध जीवन के लिए समर्पित है, और दावा करता है कि यह जीसा थेरेपी के आधार पर जीवन की समस्याओं को सुलझाकर तनावमुक्त व सुखी जीवन प्रदान करने वाला भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में अपनी तरह का एकमात्र चैरिटेबल ट्रस्ट है। शिविर को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि भंडारी ने संस्थान की आध्यात्मिक गतिविधियों की सराहना की और जीसा थेरेपी को जनकल्याण का एक महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
होनहार सिंह राठौड़ ने संभागियों से जीवन की समस्याओं के समाधान के लिए संस्थान द्वारा बताए गए मार्ग का अनुसरण करने का आह्वान किया, वहीं गोपीलाल कीर ने वर्तमान सामाजिक परिप्रेक्ष्य में ऐसे आध्यात्मिक शिविरों के महत्व पर प्रकाश डाला। शिविर प्रभारी राधेश्याम कुमावत ने जानकारी दी कि जीसा थेरेपी एक अद्वितीय और वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो संस्थान के संस्थापक चेयरमैन एवं हैप्पीनेस गुरु श्री स्थितप्रज्ञानंद जी द्वारा भारत के 368 गांवों/शहरों और 8 देशों के 1.50 लाख लोगों पर किए गए 35 वर्षों के शोध एवं अध्ययन का परिणाम है। यह थेरेपी व्यक्ति के जीवन में समाधान, निर्माण और रूपांतरण (Solution, Creation
and Transformation) लाने में सक्षम है। शिविर संयोजक डॉ. अमित पारीक ने बताया कि केकड़ी में संस्थान द्वारा यह पहला शिविर था, जिसमें लगभग 130 संभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में हर्षा जी ने तकनीकी सहयोग दिया और शैलेष बंदवाल ने इसका सफल संचालन किया। इस अवसर पर चित्तौड़गढ़ से आए संस्थान के सदस्य सुरेश मेहता, दिलीप खत्री, मुकेश सारस्वत, भरत सोनी, राजेश सोनी, संजय प्रकाश तिवारी, सुमित पारीक, विकास अमरवाल और कैलाश वैष्णव भी उपस्थित रहे। यह शिविर व्यक्ति के आध्यात्मिक जीवन को सशक्त बनाने और उसे तनावमुक्त व उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
- सरवाड़ शहर स्थित पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में पीएम श्री योजना के अंतर्गत आयोजित 15 दिवसीय अभिरुचि शिविर का आज विधिवत समापन हो गया। शिविर प्रभारी लालचंद रातावाल ने जानकारी दी कि इस शिविर में कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया और प्रतिदिन विभिन्न प्रकार की गतिविधियाँ सीखीं। शिविर का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में शैक्षिक सुदृढ़ीकरण, कला एवं रचनात्मकता, खेल तथा शारीरिक शिक्षा के माध्यम से आत्मविश्वास के प्रति जागृति लाना था। इस दौरान पहेली, पेंटिंग, पोस्टर निर्माण, संगीत, नृत्य, हस्तशिल्प, योग, प्राणायाम और खेलकूद जैसी गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। छात्रों ने अपनी रुचि के अनुसार रंग-बिरंगे पोस्टर, भवन, विद्यालय-भवन और प्रातःकालीन उगते हुए सूर्य जैसे प्राकृतिक दृश्यों को अपनी लेखनी से उकेरा। अभिरुचि शिविर एवं समाज सेवा शिविर का समापन राममूर्ति पारीक की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। समापन समारोह के दौरान, सत्यनारायण दाधीच की आठ वर्षीय सुपोत्री अन्विका दाधीच ने चक्रासन, कुर्मासन, एक पाद शीर्षासन, गोमुखासन, धनुरासन, हल मुद्रा, पद्मासन, पूर्ण भुजंगासन और समकोणासन जैसे विभिन्न योगासनों का अभ्यास करके विद्यार्थियों को प्रेरित किया। इसके अतिरिक्त, कक्षा 12 की छात्रा मोनिका कुमावत ने भी योगासन का अभ्यास करवाया। सत्यनारायण शर्मा ने मानव जीवन में योग-प्राणायाम की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस अवसर पर शिक्षाविद् सुरेश कुमार लौहार (उपप्रधानाचार्य), सत्यनारायण शर्मा, बृजेश कुमार आसोपा, गोविंदराम लोहार और विद्यालय स्टाफ सहित अनेक विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मंच संचालन बृजेश कुमार आसोपा ने किया।2
- नसीराबाद में जल संरक्षण के लिए एक विशाल महाअभियान चलाया गया है, जिसे 'वन्दे गंगा अभियान' का नाम दिया गया है। इस अभियान ने क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है और जल संकट से निपटने के लिए एक बड़ी पहल के रूप में उभरा है। इस महाअभियान के तहत, तालाबों पर बड़े पैमाने पर सफाई अभियान चलाया गया, जिसमें आम जनता ने सक्रिय रूप से भाग लिया और जल बचाने का संकल्प लिया। लोग सड़कों पर उतरकर 'जल है तो कल है' का नारा लगाते हुए देखे गए, जो पूरे नसीराबाद में गूंज उठा। नागरिकों ने एकजुट होकर तालाबों की सफाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 'वन्दे गंगा अभियान' अब सिर्फ एक पहल नहीं, बल्कि एक व्यापक जनआंदोलन बन चुका है। जल संकट के खिलाफ नसीराबाद के लोगों ने अपनी एकता प्रदर्शित की है, और इस बड़ी पहल के माध्यम से उन्होंने पूरे राजस्थान को जल संरक्षण का एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है।1
- बुलंदशहर की कचहरी में एक अनोखी घटना सामने आई, जहाँ एक बंदर ने नोटों से भरा एक बैग छीन लिया। बैग लेकर बंदर तत्काल एक पेड़ पर चढ़ गया। पेड़ पर पहुँचकर, उसने बैग से नोटों को नीचे बरसाना शुरू कर दिया, जिससे चारों ओर नोटों की बारिश होने लगी। यह देख मौके पर मौजूद लोग तुरंत नीचे गिरे नोटों को उठाने के लिए दौड़ पड़े।1
- राजस्थान के अंता में 'वंदे गंगा अभियान' की शुरुआत की गई है। इस पहल के माध्यम से जल बचाने का एक महत्वपूर्ण संदेश दिया जा रहा है।1
- ब्यावर में नारी जन जागृति संस्थान और अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला समिति की स्थानीय ब्यावर शाखा ने संयुक्त तत्वाधान में केरी पानी का वितरण किया।2
- अजमेर के गेगल थाना क्षेत्र में बालाजी के पास स्थित गणगौर होटल को कल आए तेज आंधी-तूफान ने भारी नुकसान पहुँचाया। तेज हवाओं के कारण होटल परिसर में लगा टीन शेड पूरी तरह से उखड़ कर क्षतिग्रस्त हो गया। इस घटना से होटल को लाखों रुपये का नुकसान होने की जानकारी सामने आई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गनीमत रही कि हादसे के वक्त कोई जनहानि नहीं हुई, अन्यथा यह एक बड़ा हादसा हो सकता था। मौसम विभाग ने पहले ही तेज आंधी और तूफान का अलर्ट जारी किया था, इसके बावजूद तूफान की तीव्रता ने क्षेत्र में काफी नुकसान पहुँचाया। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि वे इस नुकसान का आकलन करें और प्रभावित व्यवसायियों को उचित राहत प्रदान करें।1