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More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कल बिजनौर के दौरे पर रहेंगे, वे 1 जून 2026 को बिजनौर के अफजलगढ़ पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री के इस आगामी आगमन को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है और सुरक्षा सहित अन्य आवश्यक तैयारियों में जुट गया है। इसी सिलसिले में, डीआईजी मुरादाबाद मुनिराज शर्मा ने भी मौके पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया है।1
- सिद्धार्थनगर जिले के ग्रामीण इलाकों में भयंकर आंधी-तूफान और बारिश का मंजर देखने को मिला है, जिसके चलते क्षेत्र के गाँवों में बिजली आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। इस प्रचंड तूफान और बारिश के कारण इन इलाकों में बिजली गुल हो गई है।1
- तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता अभिषेक बनर्जी को एक इलाके के दौरे के दौरान स्थानीय महिलाओं के भारी विरोध का सामना करना पड़ा, जिन्होंने उनके काफिले पर अंडे बरसाकर अपना कड़ा आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शनकारी महिलाओं का आरोप है कि अभिषेक बनर्जी जिस व्यक्ति की मृत्यु पर शोक व्यक्त करने के लिए वहां पहुंचे थे, वह क्षेत्र का एक कुख्यात अपराधी था जिसका आपराधिक इतिहास रहा है और वह 20 से अधिक महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाओं में शामिल था। प्रदर्शन में शामिल एक स्थानीय महिला ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि मृतक व्यक्ति गांव की एक लड़की को भगा ले गया था, उसे अपने साथ रखा, लेकिन उससे शादी करने से इनकार कर दिया। महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि वह व्यक्ति तृणमूल कांग्रेस का कार्यकर्ता था, मगर स्थानीय लोग उसे पार्टी का वैध सदस्य नहीं मानते थे। उन्होंने दावा किया कि वह अपनी दबंगई और आपराधिक गतिविधियों के लिए जाना जाता था, और पार्टी के नाम पर लोगों से पैसे भी वसूलता था। महिलाओं ने स्पष्ट किया कि यह विरोध किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि उस गुंडागर्दी के खिलाफ है जिसे राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी के इस दौरे से अपराधियों को बढ़ावा मिल रहा है और वे इस व्यवस्था के खिलाफ न्याय चाहती हैं। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने सवाल उठाया कि एक अपराधी को राजनीतिक संरक्षण क्यों दिया जा रहा है, और इसी बात को लेकर उनका गुस्सा फूटा। इस घटना के बाद इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, और महिलाओं ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वे इस अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगी।1
- उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह बताया गया है कि भाजपा की व्यवस्था हर जगह धराशायी हो रही है।1
- बस्ती ज़िले के चौरी बाज़ार में एक सड़क लगभग दो साल से टूटी हुई है, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। सड़क की इस खराब हालत के कारण आए दिन दुर्घटनाएँ होती रहती हैं, जिससे लोग लगातार परेशान हैं।1
- बहुजन मुक्ति पार्टी ने केंद्र सरकार की कथित गलत नीतियों के विरोध में एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू किया है, जो तीन चरणों में देश के 625 जिलों में जिलाधिकारी कार्यालयों पर आयोजित किया जा रहा है। पार्टी ने महामहिम राष्ट्रपति और सिद्धार्थ नगर के जिलाधिकारी को संबोधित करते हुए एक ज्ञापन भी सौंपा है। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार द्वारा प्रतिदिन बढ़ाई जा रही महंगाई और बेरोजगारी के साथ-साथ स्मार्ट मीटर, महंगे घरेलू और कमर्शियल गैस, तथा पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का विरोध करना है, जिसे पार्टी 'बहुजन समाज की आर्थिक कमर तोड़ने का सुनियोजित षड्यंत्र' मानती है। पार्टी ने स्मार्ट मीटर को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ये मीटर पारदर्शी नहीं हैं और प्राइवेट कंपनियां इन्हें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की तरह गैर-कानूनी तरीके से इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे लोगों के रोजगार छिन रहे हैं। बहुजन मुक्ति पार्टी के अनुसार, स्मार्ट मीटर में 'सिम' होने की वजह से बिजली की यूनिट को आसानी से बढ़ाया जा सकता है, और ये मीटर 20-30 प्रतिशत तेजी से चल रहे हैं, जिससे अंधाधुंध बिजली बिल बढ़ रहे हैं। पार्टी का आरोप है कि जिस तरह EVM जनता के वोटों की चोरी कर रही है, उसी तरह स्मार्ट मीटर यूनिट की चोरी कर जनता के नोटों को लूट रहे हैं और सरकार की मदद से प्राइवेट कंपनियां जनता को लूट रही हैं। ज्ञापन में यह भी उल्लेख है कि मात्र 20 रुपये या इससे कम माइनस बैलेंस होने पर प्राइवेट कंपनी वाले तुरंत बिजली काट देते हैं, और विद्युत आपूर्ति चालू रहने के बावजूद बहुसंख्यक लोगों की एक साथ विद्युत कटौती की जाती है, साथ ही आपूर्ति न होने पर भी बिल थोपा जा रहा है। बहुजन मुक्ति पार्टी ने महंगे घरेलू और कमर्शियल गैस की कीमतों को कम करने की मांग की है। उनका आरोप है कि सिलेंडर गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं को लंबी लाइनों में खड़ा रहना पड़ रहा है, बावजूद इसके गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। पार्टी का दावा है कि ये सभी केंद्र सरकार की ऐसी गलत नीतियां हैं, जो देश की आम जनता को परेशान कर रही हैं और केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा जनता को भुखमरी की आग में धकेलने की एक सुनियोजित योजना है, जबकि लोकतंत्र में लोगों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर नीतियां बनाई जानी चाहिए और प्रत्येक नागरिक को रोजी-रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा मिलनी चाहिए।2
- बलरामपुर जिले की ग्राम सभा बालापुर लोकहवा में 20 साल के लंबे इंतजार के बाद बनी एक सड़क निर्माण के मात्र तीन दिन के भीतर ही ध्वस्त हो गई, जिस पर ग्रामीणों ने सड़क की खराब गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क का निर्माण बिना गिट्टी और पत्थर के किया गया था, जिसके कारण इसकी गुणवत्ता बेहद खराब रही। निर्माण कार्य शुरू होने के तीन दिन बाद ही सड़क कई जगहों से उखड़ गई और टूट गई। इस घटना ने सड़क निर्माण में शामिल इंजीनियरों, अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। ग्रामवासियों ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें ऐसी खराब गुणवत्ता वाली सड़क नहीं चाहिए। उनका यह भी कहना है कि एक तरफ सरकार निष्पक्ष और ईमानदार काम का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे खुलेआम घटिया निर्माण कार्य हो रहे हैं। ग्रामीणों ने जिला अधिकारी महोदय से इस मामले की तत्काल जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है और यहाँ तक कहा है कि यदि ऐसी ही सड़कें बनानी हैं, तो बेहतर है कि ठेकेदारों को सीधे भुगतान कर दिया जाए और सड़क न बनाई जाए।1
- थाना शोहरतगढ़ पुलिस और सर्विलांस सेल की संयुक्त टीम ने चोरी की एक घटना का सफलतापूर्वक अनावरण किया है। इस कार्रवाई के दौरान एक शातिर चोर को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार अभियुक्त के कब्जे से चोरी की हुई एक सोने की चेन, दो चांदी की पायल, दस चांदी की बिछिया और ₹5,000/- नकद राशि बरामद हुई है। इस बरामदगी के संबंध में क्षेत्राधिकारी शोहरतगढ़ मयंक द्विवेदी ने एक वीडियो बाइट जारी की है।1
- सिद्धार्थ नगर के जोगिया ग्राम पंचायत उदयपुर जोगिया स्थित पंचायत भवन में खुलेआम ई-रिक्शा चार्ज किए जाने का मामला सामने आया है। इन ई-रिक्शा का इस्तेमाल सवारी ढोने जैसे व्यावसायिक कार्यों के लिए किया जाता है, जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत भवन की बिजली का मुफ्त में उपयोग करके ई-रिक्शा चार्ज किए जाते हैं, और फिर उनसे सड़क पर किराया कमाया जाता है। ग्राम पंचायत के पैसे का इस तरह दुरुपयोग पंचायत सचिव और प्रधान प्रशासक की देखरेख में 'लूट' का सीधा मामला है। ग्रामीणों का कहना है कि राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा ग्राम पंचायत के विकास के लिए भेजा गया पैसा इस तरह ई-रिक्शा चार्ज करने और उनसे सवारी ढोने में इस्तेमाल हो रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में ग्राम पंचायत को ई-रिक्शा चार्ज का बिजली बिल भरना पड़ रहा है, जिसमें पंचायत सचिव और ग्राम प्रधान प्रशासक की 'मिलीभगत की बू' आ रही है।1