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Suresh Chandra Agrawal: सभी कृष्ण भक्तों को सादर दंडवत प्रणाम 🙏🌹 सदा जपिये हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे I हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे और हमेशा खुश रहिये Ii हमेशा प्रसन्न रहो 🌹🙏🏾 *Bhagavad Gita App* *Chapter:* 2 *श्लोक:* 28 *श्लोक:* अव्यक्तादीनि भूतानि व्यक्तमध्यानि भारत । अव्यक्तनिधनान्येव तत्र का परिदेवना ॥ २८ ॥ *अनुवाद:* सारे जीव प्रारम्भ में अव्यक्त रहते हैं, मध्य अवस्था में व्यक्त होते हैं और विनष्ट होने पर पुन: अव्यक्त हो जाते हैं। अत: शोक करने की क्या आवश्यकता है? *तात्पर्य:* यह स्वीकार करते हुए कि दो प्रकार के दार्शनिक हैं—एक तो वे जो आत्मा के अस्तित्व को मानते हैं, और दूसरे वे जो आत्मा के अस्तित्व को नहीं मानते, कहा जा सकता है कि किसी भी दशा में शोक करने का कोई कारण नहीं है। आत्मा के अस्तित्व को न मानने वालों को वेदान्तवादी नास्तिक कहते हैं। यदि हम तर्क के लिए इस नास्तिकतावादी सिद्धान्त को मान भी लें तो भी शोक करने का कोई कारण नहीं है। आत्मा के पृथक् अस्तित्व से भिन्न सारे भौतिक तत्त्व सृष्टि के पूर्व अदृश्य रहते हैं। इस अदृश्य रहने की सूक्ष्म अवस्था से ही दृश्य अवस्था आती है, जिस प्रकार आकाश से वायु उत्पन्न होती है, वायु से अग्नि, अग्नि से जल और जल से पृथ्वी उत्पन्न होती है। पृथ्वी से अनेक प्रकार के पदार्थ प्रकट होते हैं—यथा एक विशाल गगनचुम्बी महल पृथ्वी से ही प्रकट है। जब इसे ध्वस्त कर दिया जाता है, तो वह अदृश्य हो जाता है, और अन्तत: परमाणु रूप में बना रहता है। शक्ति-संरक्षण का नियम बना रहता है, किन्तु कालक्रम से वस्तुएँ प्रकट तथा अप्रकट होती रहती हैं—अन्तर इतना ही है। अत: प्रकट होने (व्यक्त) या अप्रकट (अव्यक्त) होने पर शोक करने का कोई कारण नहीं है। यहाँ तक कि अप्रकट अवस्था में भी वस्तुएँ समाप्त नहीं होतीं। प्रारम्भिक तथा अन्तिम दोनों अवस्थाओं में ही सारे तत्त्व अप्रकट रहते हैं, केवल मध्य में वे प्रकट होते हैं और इस तरह इससे कोई वास्तविक अन्तर नहीं पड़ता। यदि हम भगवद्गीता के इस वैदिक निष्कर्ष को मानते हैं कि ये भौतिक शरीर कालक्रम में नाशवान हैं (अन्तवन्त इमे देहा:) किन्तु आत्मा शाश्वत है (नित्यस्योक्ता: शरीरिण:) तो हमें यह सदा स्मरण रखना होगा कि यह शरीर वस्त्र (परिधान) के समान है, अत: वस्त्र परिवर्तन होने पर शोक क्यों? शाश्वत आत्मा की तुलना में भौतिक शरीर का कोई यथार्थ अस्तित्व नहीं होता। यह स्वप्न के समान है। स्वप्न में हम आकाश में उड़ते या राजा की भाँति रथ पर आरूढ़ हो सकते हैं, किन्तु जागने पर देखते हैं कि न तो हम आकाश में हैं, न रथ पर। वैदिक ज्ञान आत्म-साक्षात्कार को भौतिक शरीर के अनस्तित्व के आधार पर प्रोत्साहन देता है। अत: चाहे हम आत्मा के अस्तित्व को मानें या न मानें, शरीर-नाश के लिए शोक करने का कोई कारण नहीं है। जय श्री कृष्ण 🙏 श्री मद भागवत स्कन्द 5,अधाय 8,शलोक 28. तत्रापि ह वा आत्मनो मृगत्वकारणं भगवदाराधनसमीहानुभावेनानुस्मृत्य भृशमनुतप्यमान आह. ॥ २८॥ मृग शरीर प्राप्त करने पर भी भरत महाराज अपने पूर्वजन्म की दृढ़ भक्ति के कारण उस शरीर को धारण करने का कारण जान गये थे। अपने विगत तथा वर्तमान शरीर पर विचार करते हुए वे अपने कृत्यों पर पश्चात्ताप करते हुए इस प्रकार बोले । भक्त के लिए यह विशेष छूट है । यदि उसे अ- मानव शरीर प्राप्त होता भी है, तो भी श्रीभगवान् के अनुग्रह से उसे अपनी भक्ति को आगे बढ़ाने का अवसर अपने गत जीवन का स्मरण करके या अन्य प्राकृतिक कारणों से प्राप्त होता है । जनसामान्य के लिए गत जीवन के कार्यों को स्मरण रखना कोई सरल काम नहीं, किन्तु भरत महाराज को अपने यज्ञों तथा भक्ति के कारण अपने पूर्वकर्मों की स्मृति बनी रही। श्री मद भागवत स्कन्द 5,अधाय 8,शलोक 29. अहो कष्टं भ्रष्टोऽहमात्मवतामनुपथाद्यद्विमुक्तसमस्तसङ्गस्य विविक्तपुण्यारण्यशरणस्यात्मवत आत्मनि सर्वेषामात्मनां भगवति वासुदेवे तदनुश्रवणमननसङ्कीर्तनाराधनानुस्मरणाभियोगेनाशून्यसकलयामे न कालेन समावेशितं समाहितं कात्स्र्त्स्न्येन मनस्तत्तु पुनर्ममाबुधस्यारान्मृगसुतमनु परिसुस्राव. ॥ २९॥ मृग के शरीर में भरत महाराज पश्चात्ताप करने लगे - कैसा दुर्भाग्य है कि मैं स्वरूपसिद्धों के पथ से गिर गया हूँ! आध्यात्मिक जीवन बिताने के लिए मैंने अपने पुत्रों, पत्नी तथा घर का परित्याग किया और वन के एकान्त पवित्र स्थान में आश्रय लिया। मैं आत्मसंयमी तथा स्वरूप- सिद्ध बना और पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् वासुदेव की भक्ति, श्रवण, चिन्तन, कीर्तन, पूजन तथा स्मरण में निरन्तर लगा रहा। मैं अपने प्रयत्न में सफल रहा, यहां तक कि मेरा मन सर्वदा भक्ति में डूबा रहता था । किन्तु, अपनी मूर्खता के कारण मेरा मन पुनः आसक्त हो गया – इस बार मृग दुख में। अब मुझे मृग शरीर प्राप्त हुआ है और मैं अपनी भक्ति - साधना से बहुत नीचे गिर चुका हूँ । अपनी कठोर भक्ति-साधना के कारण महाराज भरत को अपने विगत जन्म के कर्मों का और इसका कि वे किस प्रकार आध्यात्मिक स्तर पर पहुंचे थे, स्मरण था । अपनी ही मूर्खता से वे एक साधारण से मृग पर आसक्त होकर च्युत हुए जिससे उन्हें मृग का शरीर धारण करना पड़ा। यह प्रत्येक भक्त के लिए अत्यन्त महत्त्व की बात है । यदि हम अपने पद का दुरुपयोग करते हैं और सोचते हैं कि हम तो भक्ति में पूर्णतया समर्पित हैं, अत: चाहे जैसा भी आचरण करें, तो हमें भरत महाराज की भाँति भोगना पड़ेगा और जिस प्रकार के शरीर से भक्ति को बाधा पहुँचती है, वही शरीर धारण करना पड़ेगा। केवल मनुष्य रूप में भक्ति की जा सकती है, किन्तु यदि हम जानबूझ कर इन्द्रियतृप्ति के कारण भक्ति का परित्याग करते हैं, तो हमें निश्चय ही दण्ड मिलेगा। यह दण्ड सामान्य भौतिकतावादी पुरुष का सा नहीं होता। परमेश्वर भक्त को इस प्रकार दण्डित करते हैं कि श्रीवासुदेव के चरणकमलों के प्रति उसकी उत्सुकता बढ़ती है और इस उत्कट इच्छा के कारण वह अगले जन्म में अपने घर वापस चला जाता है। यहाँ भक्ति का सम्यक वर्णन इस प्रकार किया गया है - तद् - अनुश्रवण-मनन- संकीर्तनाराधनानुस्मरणाभियोगेन। भगवद्गीता में ईश्वर के यश का निरन्तर श्रवण तथा कीर्तन करने की संस्तुति की गई है— सततं कीर्तयन्तो मां यतन्तश्च दृढव्रताः । जिन्होंने कृष्णभावनामृत अंगीकार किया है उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि एक भी क्षण वृथा न जाने दें और कोई भी क्षण श्रीभगवान् के संकीर्तन - तथा उनके कार्यकलापों के स्मरण के बिना न बीतने पाए । श्रीकृष्ण अपने स्वयं के कार्यों से तथा अपने भक्तों के कार्यों से हमें शिक्षा देते हैं कि भक्ति में किस प्रकार सतर्क रहा जाये । भरत महाराज के माध्यम से श्रीकृष्ण हमें शिक्षा देते हैं कि हम भक्ति करने में सावधान रहें । यदि हम चाहते हैं कि हमारे मन तनिक भी विचलित न हों तो हमें चाहिए कि हम उन्हें पूरे समय भक्ति में लगाये रखें। जहाँ तक अन्तर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ के सदस्यों का प्रश्न है उन्होंने कृष्णभावनामृत आन्दोलन को आगे बढ़ाने के लिये सब कुछ त्याग दिया है । तो भी उन्हें भरत महाराज के जीवन से शिक्षा लेनी चाहिए कि उन्हें एक भी क्षण अनर्गल बात, निद्रा या अधिक खाने में नहीं गँवाना है। भोजन करना मना नहीं है, किन्तु अधिक खाने से अधिक नींद आयेगी । इससे इन्द्रियतृप्ति की अभिलाषा होगी और हमें निम्न योनि में जाना पड़ेगा। इस प्रकार हमारी प्रगति रुक जाएगी, भले ही कुछ काल के लिए क्यों न हो। अतः सबसे उत्तम मार्ग है कि हम श्रील रूप गोस्वामी का उपदेश ग्रहण करें - अव्यर्थ - कालत्वम् । हमें ध्यान रहे कि हमारा प्रत्येक क्षण भक्ति के अतिरिक्त अन्य किसी कार्य में न लगे। भगवद्धाम वापस जाने के इच्छुक भक्तों के लिए यह सर्वश्रेष्ठ साधन है । सेवा धर्म एक साधु स्वामी विवेकानन्द जी के पास आया।अभिवादन करने के बाद उसने स्वामी जी को बताया कि वह उनके पास किसी विशेष काम से आया है। "स्वामी जी, मैने सब कुछ त्याग दिया है,मोह माया के बंधन से छूट गया हूँ परंतु मुझे शांति नहीं मिली। मन  सदा भटकता रहता है। एक गुरु के पास गया था जिन्होंने एक मंत्र भी दिया था और बताया था कि इसके जाप से अनहदनाद सुनाई देगा और फिर शांति मिलेगी। बड़ी लगन से मंत्र का जाप किया,फिर भी मन शांत नहीं हुआ।अब मैं परेशान हूँ।" इतना कहकर उस साधु की आँखे गीली हो गई। "क्या आप सचमुच शान्ति चाहते हैं",विवेकानन्द जी ने पूछा। बड़े उदासीन स्वर में साधु बोला ,इसीलिये तो आपके पास आया हूँ। स्वामी जी ने कहा,"अच्छा,मैं तुम्हें शान्ति का सरल मार्ग बताता हूँ। इतना जान लो कि सेवा धर्म बड़ा महान है।घर से निकलो और बाहर जाकर भूखों को भोजन दो,प्यासों को पानी पिलाओ,विद्यारहितों को विद्या दो और दीन,दुर्बल,दुखियों एवं रोगियों की तन,मन और धन से सहायता करो। सेवा द्वारा मनुष्य का अंतःकरण जितनी जल्दी निर्मल,शान्त,शुद्ध एवं पवित्र होता है,उतना किसी और काम से नहीं। ऐसा करने से आपको सुख,शान्ति मिलेगी।" साधु एक नए संकल्प के साथ चला गया। उसे समझ आ गयी कि मानव जाति की निः स्वार्थ सेवा से ही मनुष्य को शान्ति प्राप्त हो सकती है। *वजन बढ़ाने के लिए* जिन लोगों का वजन कम है वे अपनी डायट में दूध, दही, गोभी रस, पालक, गाजर, नारियल और चुकन्दर का अधिक से अधिक सेवन करें। जय जय श्री राधे 🌹🙏

9 hrs ago
user_Suresh Chandra Agrawal
Suresh Chandra Agrawal
चौमू, जयपुर, राजस्थान•
9 hrs ago

Suresh Chandra Agrawal: सभी कृष्ण भक्तों को सादर दंडवत प्रणाम 🙏🌹 सदा जपिये हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे I हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे और हमेशा खुश रहिये Ii हमेशा प्रसन्न रहो 🌹🙏🏾 *Bhagavad Gita App* *Chapter:* 2 *श्लोक:* 28 *श्लोक:* अव्यक्तादीनि भूतानि व्यक्तमध्यानि भारत । अव्यक्तनिधनान्येव तत्र का परिदेवना ॥ २८ ॥ *अनुवाद:* सारे जीव प्रारम्भ में अव्यक्त रहते हैं, मध्य अवस्था में व्यक्त होते हैं और विनष्ट होने पर पुन: अव्यक्त हो जाते हैं। अत: शोक करने की क्या आवश्यकता है? *तात्पर्य:* यह स्वीकार करते हुए कि दो प्रकार के दार्शनिक हैं—एक तो वे जो आत्मा के अस्तित्व को मानते हैं, और दूसरे वे जो आत्मा के अस्तित्व को नहीं मानते, कहा जा सकता है कि किसी भी दशा में शोक करने का कोई कारण नहीं है। आत्मा के अस्तित्व को न मानने वालों को वेदान्तवादी नास्तिक कहते हैं। यदि हम तर्क के लिए इस नास्तिकतावादी सिद्धान्त को मान भी लें तो भी शोक करने का कोई कारण नहीं है। आत्मा के पृथक् अस्तित्व से भिन्न सारे भौतिक तत्त्व सृष्टि के पूर्व अदृश्य रहते हैं। इस अदृश्य रहने की सूक्ष्म अवस्था से ही दृश्य अवस्था आती है, जिस प्रकार आकाश से वायु उत्पन्न होती है, वायु से अग्नि, अग्नि से जल और जल से पृथ्वी उत्पन्न होती है। पृथ्वी से अनेक प्रकार के पदार्थ प्रकट होते हैं—यथा एक विशाल गगनचुम्बी महल पृथ्वी से ही प्रकट है। जब इसे ध्वस्त कर दिया जाता है, तो वह अदृश्य हो जाता है, और अन्तत: परमाणु रूप में बना रहता है। शक्ति-संरक्षण का नियम बना रहता है, किन्तु कालक्रम से वस्तुएँ प्रकट तथा अप्रकट होती रहती हैं—अन्तर इतना ही है। अत: प्रकट होने (व्यक्त) या अप्रकट (अव्यक्त) होने पर शोक करने का कोई कारण नहीं है। यहाँ तक कि अप्रकट अवस्था में भी वस्तुएँ समाप्त नहीं होतीं। प्रारम्भिक तथा अन्तिम दोनों अवस्थाओं में ही सारे तत्त्व अप्रकट रहते हैं, केवल मध्य में वे प्रकट होते हैं और इस तरह इससे कोई वास्तविक अन्तर नहीं पड़ता। यदि हम भगवद्गीता के इस वैदिक निष्कर्ष को मानते हैं कि ये भौतिक शरीर कालक्रम में नाशवान हैं (अन्तवन्त इमे देहा:) किन्तु आत्मा शाश्वत है (नित्यस्योक्ता: शरीरिण:) तो हमें यह सदा स्मरण रखना होगा कि यह शरीर वस्त्र (परिधान) के समान है, अत: वस्त्र परिवर्तन होने पर शोक क्यों? शाश्वत आत्मा की तुलना में भौतिक शरीर का कोई यथार्थ अस्तित्व नहीं होता। यह स्वप्न के समान है। स्वप्न में हम आकाश में उड़ते या राजा की भाँति रथ पर आरूढ़ हो सकते हैं, किन्तु जागने पर देखते हैं कि न तो हम आकाश में हैं, न रथ पर। वैदिक ज्ञान आत्म-साक्षात्कार को भौतिक शरीर के अनस्तित्व के आधार पर प्रोत्साहन देता है। अत: चाहे हम आत्मा के अस्तित्व को मानें या न मानें, शरीर-नाश के लिए शोक करने का कोई कारण नहीं है। जय श्री कृष्ण 🙏 श्री मद भागवत स्कन्द 5,अधाय 8,शलोक 28. तत्रापि ह वा आत्मनो मृगत्वकारणं भगवदाराधनसमीहानुभावेनानुस्मृत्य भृशमनुतप्यमान आह. ॥ २८॥ मृग शरीर प्राप्त करने पर भी भरत महाराज अपने पूर्वजन्म की दृढ़ भक्ति के कारण उस शरीर को धारण करने का कारण जान गये थे। अपने विगत तथा वर्तमान शरीर पर विचार करते हुए वे अपने कृत्यों पर पश्चात्ताप करते हुए इस प्रकार बोले । भक्त के लिए यह विशेष छूट है । यदि उसे अ- मानव शरीर प्राप्त होता भी है, तो भी श्रीभगवान् के अनुग्रह से उसे अपनी भक्ति को आगे बढ़ाने का अवसर अपने गत जीवन का स्मरण करके या अन्य प्राकृतिक कारणों से प्राप्त होता है । जनसामान्य के लिए गत जीवन के कार्यों को स्मरण रखना कोई सरल काम नहीं, किन्तु भरत महाराज को अपने यज्ञों तथा भक्ति के कारण अपने पूर्वकर्मों की स्मृति बनी रही। श्री मद भागवत स्कन्द 5,अधाय 8,शलोक 29. अहो कष्टं भ्रष्टोऽहमात्मवतामनुपथाद्यद्विमुक्तसमस्तसङ्गस्य विविक्तपुण्यारण्यशरणस्यात्मवत आत्मनि सर्वेषामात्मनां भगवति वासुदेवे तदनुश्रवणमननसङ्कीर्तनाराधनानुस्मरणाभियोगेनाशून्यसकलयामे न कालेन समावेशितं समाहितं कात्स्र्त्स्न्येन मनस्तत्तु पुनर्ममाबुधस्यारान्मृगसुतमनु परिसुस्राव. ॥ २९॥ मृग के शरीर में भरत महाराज पश्चात्ताप करने लगे - कैसा दुर्भाग्य है कि मैं स्वरूपसिद्धों के पथ से गिर गया हूँ! आध्यात्मिक जीवन बिताने के लिए मैंने अपने पुत्रों, पत्नी तथा घर का परित्याग किया और वन के एकान्त पवित्र स्थान में आश्रय लिया। मैं आत्मसंयमी तथा स्वरूप- सिद्ध बना और पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् वासुदेव की भक्ति, श्रवण, चिन्तन, कीर्तन, पूजन तथा स्मरण में निरन्तर लगा रहा। मैं अपने प्रयत्न में सफल रहा, यहां तक कि मेरा मन सर्वदा भक्ति में डूबा रहता था । किन्तु, अपनी मूर्खता के कारण मेरा मन पुनः आसक्त हो गया – इस बार मृग दुख में। अब मुझे मृग शरीर प्राप्त हुआ है और मैं अपनी भक्ति - साधना से बहुत नीचे गिर चुका हूँ । अपनी कठोर भक्ति-साधना के कारण महाराज भरत को अपने विगत जन्म के कर्मों का और इसका कि वे किस प्रकार आध्यात्मिक स्तर पर पहुंचे थे, स्मरण था । अपनी ही मूर्खता से वे एक साधारण से मृग पर आसक्त होकर च्युत हुए जिससे उन्हें मृग का शरीर धारण करना पड़ा। यह प्रत्येक भक्त के लिए अत्यन्त महत्त्व की बात है । यदि हम अपने पद का दुरुपयोग करते हैं और सोचते हैं कि हम तो भक्ति में पूर्णतया समर्पित हैं, अत: चाहे जैसा भी आचरण करें, तो हमें भरत महाराज की भाँति भोगना पड़ेगा और जिस प्रकार के शरीर से भक्ति को बाधा पहुँचती है, वही शरीर धारण करना पड़ेगा। केवल मनुष्य रूप में भक्ति की जा सकती है, किन्तु यदि हम जानबूझ कर इन्द्रियतृप्ति के कारण भक्ति का परित्याग करते हैं, तो हमें निश्चय ही दण्ड मिलेगा। यह दण्ड सामान्य भौतिकतावादी पुरुष का सा नहीं होता। परमेश्वर भक्त को इस प्रकार दण्डित करते हैं कि श्रीवासुदेव के चरणकमलों के प्रति उसकी उत्सुकता बढ़ती है और इस उत्कट इच्छा के कारण वह अगले जन्म में अपने घर वापस चला जाता है। यहाँ भक्ति का सम्यक वर्णन इस प्रकार किया गया है - तद् - अनुश्रवण-मनन- संकीर्तनाराधनानुस्मरणाभियोगेन। भगवद्गीता में ईश्वर के यश का निरन्तर श्रवण तथा कीर्तन करने की संस्तुति की गई है— सततं कीर्तयन्तो मां यतन्तश्च दृढव्रताः । जिन्होंने कृष्णभावनामृत अंगीकार किया है उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि एक भी क्षण वृथा न जाने दें और कोई भी क्षण श्रीभगवान् के संकीर्तन - तथा उनके कार्यकलापों के स्मरण के बिना न बीतने पाए । श्रीकृष्ण अपने स्वयं के कार्यों से तथा अपने भक्तों के कार्यों से हमें शिक्षा देते हैं कि भक्ति में किस प्रकार सतर्क रहा जाये । भरत महाराज के माध्यम से श्रीकृष्ण हमें शिक्षा देते हैं कि हम भक्ति करने में सावधान रहें । यदि हम चाहते हैं कि हमारे मन तनिक भी विचलित न हों तो हमें चाहिए कि हम उन्हें पूरे समय भक्ति में लगाये रखें। जहाँ तक अन्तर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ के सदस्यों का प्रश्न है उन्होंने कृष्णभावनामृत आन्दोलन को आगे बढ़ाने के लिये सब कुछ त्याग दिया है । तो भी उन्हें भरत महाराज के जीवन से शिक्षा लेनी चाहिए कि उन्हें एक भी क्षण अनर्गल बात, निद्रा या अधिक खाने में नहीं गँवाना है। भोजन करना मना नहीं है, किन्तु अधिक खाने से अधिक नींद आयेगी । इससे इन्द्रियतृप्ति की अभिलाषा होगी और हमें निम्न योनि में जाना पड़ेगा। इस प्रकार हमारी प्रगति रुक जाएगी, भले ही कुछ काल के लिए क्यों न हो। अतः सबसे उत्तम मार्ग है कि हम श्रील रूप गोस्वामी का उपदेश ग्रहण करें - अव्यर्थ - कालत्वम् । हमें ध्यान रहे कि हमारा प्रत्येक क्षण भक्ति के अतिरिक्त अन्य किसी कार्य में न लगे। भगवद्धाम वापस जाने के इच्छुक भक्तों के लिए यह सर्वश्रेष्ठ साधन है । सेवा धर्म एक साधु स्वामी विवेकानन्द जी के पास आया।अभिवादन करने के बाद उसने स्वामी जी को बताया कि वह उनके पास किसी विशेष काम से आया है। "स्वामी जी, मैने सब कुछ त्याग दिया है,मोह माया के बंधन से छूट गया हूँ परंतु मुझे शांति नहीं मिली। मन  सदा भटकता रहता है। एक गुरु के पास गया था जिन्होंने एक मंत्र भी दिया था और बताया था कि इसके जाप से अनहदनाद सुनाई देगा और फिर शांति मिलेगी। बड़ी लगन से मंत्र का जाप किया,फिर भी मन शांत नहीं हुआ।अब मैं परेशान हूँ।" इतना कहकर उस साधु की आँखे गीली हो गई। "क्या आप सचमुच शान्ति चाहते हैं",विवेकानन्द जी ने पूछा। बड़े उदासीन स्वर में साधु बोला ,इसीलिये तो आपके पास आया हूँ। स्वामी जी ने कहा,"अच्छा,मैं तुम्हें शान्ति का सरल मार्ग बताता हूँ। इतना जान लो कि सेवा धर्म बड़ा महान है।घर से निकलो और बाहर जाकर भूखों को भोजन दो,प्यासों को पानी पिलाओ,विद्यारहितों को विद्या दो और दीन,दुर्बल,दुखियों एवं रोगियों की तन,मन और धन से सहायता करो। सेवा द्वारा मनुष्य का अंतःकरण जितनी जल्दी निर्मल,शान्त,शुद्ध एवं पवित्र होता है,उतना किसी और काम से नहीं। ऐसा करने से आपको सुख,शान्ति मिलेगी।" साधु एक नए संकल्प के साथ चला गया। उसे समझ आ गयी कि मानव जाति की निः स्वार्थ सेवा से ही मनुष्य को शान्ति प्राप्त हो सकती है। *वजन बढ़ाने के लिए* जिन लोगों का वजन कम है वे अपनी डायट में दूध, दही, गोभी रस, पालक, गाजर, नारियल और चुकन्दर का अधिक से अधिक सेवन करें। जय जय श्री राधे 🌹🙏

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    Post by Kishan Lal jangid
    user_Kishan Lal jangid
    Kishan Lal jangid
    Real Estate Developer Jaipur, Rajasthan•
    14 min ago
  • 🚨 ब्रेकिंग न्यूज़ | ड्राइवर भाई ध्यान दें 🚨 जयपुर शहर के सभी ड्राइवर भाइयों को सूचित किया जाता है कि ओला कंपनी हर बुकिंग पर कस्टमर से इंश्योरेंस और सुविधा शुल्क के नाम पर अतिरिक्त पैसा वसूल रही है। अगर आपके पास ऐसी कोई बुकिंग आती है जिसमें कस्टमर से अलग-अलग चार्ज लिए जा रहे हैं, तो उसका वीडियो बनाकर तुरंत “Just Jaipur Live” को भेजें। 👉 ताकि सच्चाई सभी के सामने लाई जा सके और ड्राइवर तथा कस्टमर दोनों को गुमराह होने से बचाया जा सके। 📢 जयपुर शहर के सभी ड्राइवर भाई ध्यान दें: अगर कहीं भी इस तरह की वसूली दिखाई दे, तो उसका प्रमाण (वीडियो/स्क्रीन रिकॉर्डिंग) बनाकर तुरंत भेजें। 📲 Just Jaipur Live हमेशा ड्राइवर और कस्टमर की आवाज उठाने के लिए आपके साथ है। Mobile 9828042457
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    🚨 ब्रेकिंग न्यूज़ | ड्राइवर भाई ध्यान दें 🚨
जयपुर शहर के सभी ड्राइवर भाइयों को सूचित किया जाता है कि ओला कंपनी हर बुकिंग पर कस्टमर से इंश्योरेंस और सुविधा शुल्क के नाम पर अतिरिक्त पैसा वसूल रही है।
अगर आपके पास ऐसी कोई बुकिंग आती है जिसमें कस्टमर से अलग-अलग चार्ज लिए जा रहे हैं, तो उसका वीडियो बनाकर तुरंत “Just Jaipur Live” को भेजें।
👉 ताकि सच्चाई सभी के सामने लाई जा सके और ड्राइवर तथा कस्टमर दोनों को गुमराह होने से बचाया जा सके।
📢 जयपुर शहर के सभी ड्राइवर भाई ध्यान दें:
अगर कहीं भी इस तरह की वसूली दिखाई दे, तो उसका प्रमाण (वीडियो/स्क्रीन रिकॉर्डिंग) बनाकर तुरंत भेजें।
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    Just Jaipur Live
    Journalist जयपुर, जयपुर, राजस्थान•
    1 hr ago
  • कांग्रेस MLA मुकेश भाकर जी की शादी अच्छा ट्रेंड कर चुकी है... कारण साफ है कि मारवाड़ से ढूंढाड़ तक की रिश्तेदारी और साथ मे दो बड़ी सामाजिक जातियों से वर वधु इन सबके बीच ये तस्वीर भी खास बन गई।
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    user_पुरुषोत्तम तिवाड़ी
    पुरुषोत्तम तिवाड़ी
    रिपोर्टर जयपुर, जयपुर, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • Tarun Murder Case: गुब्बारा समझने वाली महिला पहली बार बोली, सामने आई पूरी घटना दिल्ली में हुए तरुण हत्याकांड को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। घटना के दौरान मौजूद एक मुस्लिम महिला ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी और बताया कि उसे शुरुआत में लगा था कि कोई गुब्बारा फटा है। बाद में जब सच्चाई सामने आई तो पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। महिला के बयान के बाद मामले की जांच कर रही पुलिस अब पूरे घटनाक्रम को जोड़कर देख रही है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश और घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। इस सनसनीखेज मामले को लेकर इलाके में लोगों में गुस्सा और डर दोनों का माहौल है। 👉 Breaking News और Latest Updates के लिए Deshtak Media को Follow और Subscribe करें। #TarunMurderCase #DelhiCrime #BreakingNews #CrimeNews #IndiaNews #DeshtakMedia #ViralNews #PoliceInvestigation #DelhiNews #TrendingNews
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    Tarun Murder Case: गुब्बारा समझने वाली महिला पहली बार बोली, सामने आई पूरी घटना
दिल्ली में हुए तरुण हत्याकांड को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। घटना के दौरान मौजूद एक मुस्लिम महिला ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी और बताया कि उसे शुरुआत में लगा था कि कोई गुब्बारा फटा है।
बाद में जब सच्चाई सामने आई तो पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। महिला के बयान के बाद मामले की जांच कर रही पुलिस अब पूरे घटनाक्रम को जोड़कर देख रही है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश और घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। इस सनसनीखेज मामले को लेकर इलाके में लोगों में गुस्सा और डर दोनों का माहौल है।
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#TarunMurderCase #DelhiCrime #BreakingNews #CrimeNews #IndiaNews #DeshtakMedia #ViralNews #PoliceInvestigation #DelhiNews #TrendingNews
    user_Ppsingh (Deshtak.com)
    Ppsingh (Deshtak.com)
    Media company आंधी, जयपुर, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • जयपुर : RTO की कार से एक्सीडेंट, RTO ने गलती नहीं मानी तो मौके पर मौजूद लोगों ने कराया गलती का एहसास , मामला जयपुर का बताया जा रहा है हालांकि हम इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करते।
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    जयपुर : RTO की कार से एक्सीडेंट, RTO ने गलती नहीं मानी तो मौके पर मौजूद लोगों ने कराया गलती का एहसास , मामला जयपुर का बताया जा रहा है हालांकि हम इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करते।
    user_Neha Chaturvedi
    Neha Chaturvedi
    Local News Reporter Aandhi, Jaipur•
    14 hrs ago
  • रैणी-राजगढ़ मार्ग पर ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का आतंक, हादसों को न्योता। *नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट* (माचाड़ीअलवर):- टैहटड़ा- रैणी उपखंड क्षेत्र में रैणी से टहटड़ा होते हुए राजगढ़ जाने वाले मुख्य मार्ग पर इन दिनों ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का आतंक देखने को मिल रहा है। सरसों की तूड़ी से क्षमता से अधिक भरे ट्रैक्टर और ट्रक बेखौफ होकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे आमजन और राहगीरों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। बताया जा रहा है कि इन वाहनों में निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक तूड़ी भरी जा रही है। चलते समय तूड़ी सड़क पर गिरती रहती है, जिससे मार्ग पर फिसलन और अवरोध पैदा हो जाता है। तथा तुडी उड़कर आंखों में चली जाती है। इसके कारण दोपहिया वाहन चालकों और पैदल राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कई बार इन ओवरलोड वाहनों के कारण दुर्घटना होने की नौबत आ चुकी है। यदि समय रहते प्रशासन द्वारा सख्त कार्यवाही नहीं की गई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन और परिवहन विभाग से मांग की है कि रैणी-टहटड़ा-राजगढ़ मार्ग पर चल रहे ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और ट्रकों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए, ताकि सड़क पर आवागमन सुरक्षित और सुचारु रूप से हो सके।
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    रैणी-राजगढ़ मार्ग पर ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का आतंक, हादसों को न्योता।
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):- टैहटड़ा- रैणी उपखंड क्षेत्र में रैणी से टहटड़ा होते हुए राजगढ़ जाने वाले मुख्य मार्ग पर इन दिनों ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का आतंक देखने को मिल रहा है। सरसों की तूड़ी से क्षमता से अधिक भरे ट्रैक्टर और ट्रक बेखौफ होकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे आमजन और राहगीरों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
बताया जा रहा है कि इन वाहनों में निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक तूड़ी भरी जा रही है। चलते समय तूड़ी सड़क पर गिरती रहती है, जिससे मार्ग पर फिसलन और अवरोध पैदा हो जाता है। तथा तुडी उड़कर आंखों में चली जाती है। इसके कारण दोपहिया वाहन चालकों और पैदल राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कई बार इन ओवरलोड वाहनों के कारण दुर्घटना होने की नौबत आ चुकी है। यदि समय रहते प्रशासन द्वारा सख्त कार्यवाही नहीं की गई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और परिवहन विभाग से मांग की है कि रैणी-टहटड़ा-राजगढ़ मार्ग पर चल रहे ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और ट्रकों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए, ताकि सड़क पर आवागमन सुरक्षित और सुचारु रूप से हो सके।
    user_जनतंत्र की आवाज
    जनतंत्र की आवाज
    City Star जयपुर, जयपुर, राजस्थान•
    15 hrs ago
  • जयपुर, 9 मार्च। राजस्थान में मिलावट और एक्सपायरी खाद्य सामग्री के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा विभाग ने जयपुर में बड़ी कार्रवाई करते हुए अमूल ब्रांड की करीब डेढ़ लाख किलो एक्सपायरी खाद्य सामग्री को नष्ट करवा दिया। यह कार्रवाई राज्य सरकार की 181 हेल्पलाइन पर मिली शिकायत के आधार पर की गई। निरीक्षण के दौरान खो नागोरियान इलाके में स्थित मैसर्स एथलीट डिस्ट्रीब्यूटर के गोदाम से बड़ी मात्रा में अमूल ब्रांड के नॉन-डेयरी उत्पाद—जैसे नूडल्स, केचअप, मेयोनीज और एनर्जी ड्रिंक—बरामद किए गए। जांच में करीब 12 हजार कार्टन एक्सपायरी पाए गए, जिनमें से लगभग 3000 कार्टनों पर लिखी एक्सपायरी डेट को मिटाया जा चुका था। मौके पर थिनर, एसीटोन और अन्य केमिकल भी मिले, जिनसे पुरानी तिथि मिटाकर नई डेट प्रिंट करने की तैयारी की जा रही थी। जांच में सामने आया कि कारोबारी गगन आहूजा नियर एक्सपायरी माल को औने-पौने दामों पर खरीदकर उस पर नई तिथि अंकित कर भारी मुनाफे में बेचने की योजना बना रहा था। चार दिन तक चली कार्रवाई में 27 ट्रकों में भरकर एक्सपायरी सामग्री को कचराघर ले जाकर नष्ट कराया गया। खाद्य सुरक्षा विभाग ने गोदाम को सील कर दिया है और संबंधित फर्म के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में परिवाद दायर करने की तैयारी की जा रही है।
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    जयपुर, 9 मार्च।
राजस्थान में मिलावट और एक्सपायरी खाद्य सामग्री के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा विभाग ने जयपुर में बड़ी कार्रवाई करते हुए अमूल ब्रांड की करीब डेढ़ लाख किलो एक्सपायरी खाद्य सामग्री को नष्ट करवा दिया। यह कार्रवाई राज्य सरकार की 181 हेल्पलाइन पर मिली शिकायत के आधार पर की गई।
निरीक्षण के दौरान खो नागोरियान इलाके में स्थित मैसर्स एथलीट डिस्ट्रीब्यूटर के गोदाम से बड़ी मात्रा में अमूल ब्रांड के नॉन-डेयरी उत्पाद—जैसे नूडल्स, केचअप, मेयोनीज और एनर्जी ड्रिंक—बरामद किए गए। जांच में करीब 12 हजार कार्टन एक्सपायरी पाए गए, जिनमें से लगभग 3000 कार्टनों पर लिखी एक्सपायरी डेट को मिटाया जा चुका था। मौके पर थिनर, एसीटोन और अन्य केमिकल भी मिले, जिनसे पुरानी तिथि मिटाकर नई डेट प्रिंट करने की तैयारी की जा रही थी।
जांच में सामने आया कि कारोबारी गगन आहूजा नियर एक्सपायरी माल को औने-पौने दामों पर खरीदकर उस पर नई तिथि अंकित कर भारी मुनाफे में बेचने की योजना बना रहा था। चार दिन तक चली कार्रवाई में 27 ट्रकों में भरकर एक्सपायरी सामग्री को कचराघर ले जाकर नष्ट कराया गया।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने गोदाम को सील कर दिया है और संबंधित फर्म के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में परिवाद दायर करने की तैयारी की जा रही है।
    user_Isha sharma
    Isha sharma
    Jaipur, Rajasthan•
    17 hrs ago
  • Post by Kishan Lal jangid
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    Post by Kishan Lal jangid
    user_Kishan Lal jangid
    Kishan Lal jangid
    Real Estate Developer Jaipur, Rajasthan•
    2 hrs ago
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