मंगलवार को बांदा के बिसंडा थाना क्षेत्र स्थित ओरन रोड एक बार फिर मानवीय लापरवाही और अवैध ओवरलोडिंग का गवाह बनी, जहाँ तेज रफ्तार मौरंग से लदे एक ट्रक ने पहले एक राहगीर को टक्कर मारी। कानून और जवाबदेही से बचने की कोशिश में, घबराया चालक ट्रक लेकर भागा, लेकिन प्रकृति का संतुलन और सड़क की क्षमता इस ओवरलोड वाहन का भार नहीं संभाल पाए। अनियंत्रित ट्रक सड़क पर चल रहे एक ई-रिक्शा पर पलट गया, जिससे छह जिंदगियां मलबे के नीचे दब गईं। इस भीषण हादसे में तीन लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि तीन अन्य ने जिला अस्पताल में अपनी जिंदगी की लड़ाई हार दी। हादसे के बाद ट्रक चालक फरार हो गया, लेकिन यह घटना कई ऐसे गंभीर सवाल छोड़ गई है जिनका जवाब केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरा तंत्र देने से बचता रहा है। यह सवाल उठता है कि आखिर मौरंग और गिट्टी से ओवरलोड वाहन सड़कों पर बेलगाम कैसे दौड़ते हैं और क्या प्रशासनिक कार्रवाई केवल कागजों तक ही सीमित रह गई है। हर बड़े हादसे के बाद जांच, मुआवजे और कार्रवाई की घोषणाएँ तो होती हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद वही ओवरलोड ट्रक फिर से सड़कों पर मौत ढोते नजर आते हैं। ओरन रोड पर हुआ यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उस लापरवाह व्यवस्था का सीधा आईना है जहाँ नियमों से अधिक महत्व अवैध कमाई को दिया जाता है, जिससे सड़क पर चलने वाला आम आदमी हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करता है कि सामने से आने वाला कोई ओवरलोड वाहन कब उसकी जिंदगी छीन ले। घटना की सूचना मिलने पर जिलाधिकारी अमित आसेरी तत्काल मौके पर पहुंचे और पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। हालाँकि, जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके लिए यह हादसा सिर्फ एक खबर नहीं बल्कि जीवनभर का असहनीय शोक बन गया है। यह स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है कि जब तक ओवरलोडिंग को संरक्षण देने वाली ढिलाई खत्म नहीं होगी, तब तक सड़कें यूँ ही निर्दोष लोगों के खून से लाल होती रहेंगी। बांदा के ओरन रोड पर मौरंग की इस अंधी दौड़ ने अंततः 8 जिंदगियां निगल लीं।
मंगलवार को बांदा के बिसंडा थाना क्षेत्र स्थित ओरन रोड एक बार फिर मानवीय लापरवाही और अवैध ओवरलोडिंग का गवाह बनी, जहाँ तेज रफ्तार मौरंग से लदे एक ट्रक ने पहले एक राहगीर को टक्कर मारी। कानून और जवाबदेही से बचने की कोशिश में, घबराया चालक ट्रक लेकर भागा, लेकिन प्रकृति का संतुलन और सड़क की क्षमता इस ओवरलोड वाहन का भार नहीं संभाल पाए। अनियंत्रित ट्रक सड़क पर चल रहे एक ई-रिक्शा पर पलट गया, जिससे छह जिंदगियां मलबे के नीचे दब गईं। इस भीषण हादसे में तीन लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि तीन अन्य ने जिला अस्पताल में अपनी जिंदगी की लड़ाई हार दी। हादसे के बाद ट्रक चालक फरार हो गया, लेकिन यह घटना कई ऐसे गंभीर सवाल छोड़ गई है जिनका जवाब केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरा तंत्र देने से बचता रहा है। यह सवाल उठता है कि आखिर मौरंग और गिट्टी से ओवरलोड वाहन सड़कों पर बेलगाम कैसे दौड़ते हैं और क्या प्रशासनिक कार्रवाई केवल कागजों तक ही सीमित रह गई है। हर बड़े हादसे के बाद जांच, मुआवजे और कार्रवाई की घोषणाएँ तो होती हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद वही ओवरलोड ट्रक फिर से सड़कों पर मौत ढोते नजर आते हैं। ओरन रोड पर हुआ यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उस लापरवाह व्यवस्था का सीधा आईना है जहाँ नियमों से अधिक महत्व अवैध कमाई को दिया जाता है, जिससे सड़क पर चलने वाला आम आदमी हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करता है कि सामने से आने वाला कोई ओवरलोड वाहन कब उसकी जिंदगी छीन ले। घटना की सूचना मिलने पर जिलाधिकारी अमित आसेरी तत्काल मौके पर पहुंचे और पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। हालाँकि, जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके लिए यह हादसा सिर्फ एक खबर नहीं बल्कि जीवनभर का असहनीय शोक बन गया है। यह स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है कि जब तक ओवरलोडिंग को संरक्षण देने वाली ढिलाई खत्म नहीं होगी, तब तक सड़कें यूँ ही निर्दोष लोगों के खून से लाल होती रहेंगी। बांदा के ओरन रोड पर मौरंग की इस अंधी दौड़ ने अंततः 8 जिंदगियां निगल लीं।
- मौदहा नगर में ईदगाह सहित कुल दो दर्जन मस्जिदों में बकरीद की नमाज़ शांतिपूर्ण ढंग से अदा की गई। नमाज़ियों ने मुल्क में अमन-चैन और खुशहाली के लिए दुआएं मांगीं। इस अवसर पर जिलाधिकारी अभिषेक गोयल और पुलिस अधीक्षक मृगांक शेखर पाण्डेय ने ईदगाह पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। अधिकारियों ने सभी लोगों को बकरीद की मुबारकबाद दी और भाईचारा बनाए रखने की अपील भी की। सुरक्षा के मद्देनज़र, संवेदनशील क्षेत्रों और मस्जिदों में भारी पुलिस बल तैनात रहा। नमाज़ के बाद कुर्बानी का सिलसिला शुरू हो गया, जो अगले तीन दिनों तक जारी रहेगा।1
- हमीरपुर के मौदहा कस्बे सहित ग्रामीण क्षेत्रों में ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार बड़े हर्षोल्लास और अकीदत के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कस्बे की ईदगाह और लगभग दो दर्जन मस्जिदों में सामूहिक रूप से नमाज अदा की, जिसमें मुल्क में अमन-चैन और खुशहाली के लिए विशेष दुआएं मांगी गईं। सुबह से ही ईदगाह और मस्जिदों में नमाजियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान प्रशासन सुरक्षा एवं व्यवस्थाओं को लेकर पूरी तरह सतर्क रहा। उपजिलाधिकारी कर्णवीर सिंह, क्षेत्राधिकारी राजकुमार पाण्डेय, अधिशाषी अधिकारी सीमा तोमर, तहसीलदार शिखर मिश्रा और नायब तहसीलदार महेंद्र गुप्ता ने ईदगाह पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। साथ ही, कस्बे की सभी प्रमुख मस्जिदों और संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात रहा। जिलाधिकारी अभिषेक गोयल (आईएएस) एवं पुलिस अधीक्षक मृगांक शेखर पाठक ने भी ईदगाह का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्थाएं देखीं और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी लोगों से शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में त्योहार मनाने की अपील की। नमाज अदा होने के बाद कुर्बानी का सिलसिला शुरू हो गया, जो आगामी तीन दिनों तक जारी रहेगा। पूरे मौदहा कस्बे में भाईचारे और उत्साह का माहौल देखने को मिला।4
- क्षेत्र में युवाओं को डिजिटल और कंप्यूटर कौशल सिखाने के उद्देश्य से एक निःशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र का शुभारंभ किया गया है। यहां छात्रों और बेरोजगार युवाओं को बुनियादी कंप्यूटर ज्ञान, इंटरनेट के उपयोग और विभिन्न डिजिटल कार्यों का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य उन्हें रोजगार दिलाने और ऑनलाइन काम सीखने में मदद करना है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह प्रशिक्षण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खोलेगा। बड़ी संख्या में छात्रों का प्रशिक्षण के लिए पहुंचना इसे रोजगार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में रेखांकित करता है।1
- हमीरपुर जिले के मौदहा कस्बे और आसपास के क्षेत्रों में इस्लामिक कैलेंडर के आखिरी महीने की दसवीं तारीख को मनाया जाने वाला ईद उल अजहा का त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर कस्बे की ईदगाह सहित लगभग तेईस मस्जिदों में बकरीद की नमाज़ अदा की गई। त्योहार के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त रही, जिसमें उपजिलाधिकारी कर्णवीर सिंह, क्षेत्राधिकारी राजकुमार पाण्डेय, अधिशाषी अधिकारी सीमा तोमर सहित तहसीलदार शिखर मिश्रा और नायब तहसीलदार महेंद्र गुप्ता ईदगाह में व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे। एहतियात के तौर पर कस्बे की सभी मस्जिदों और मोहल्लों में भी पुलिस व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी। नमाज़ अदा होने के बाद, कुर्बानियों का सिलसिला शुरू हो गया है, जो अगले तीन दिनों तक जारी रहेगा।4
- बबेरू में आयोजित सर्व वैश्य समाज शादी समारोह के दौरान राजू चौरसिया, अनिल कुमार गुप्ता, विजयपाल गुप्ता, ठाकुरदीन गुप्ता और राधेश्याम गुप्ता को सम्मानित किया गया।4
- सन 1990 की एक बारात को अब तक 1 मिलियन व्यूज प्राप्त हुए हैं।1
- हमीरपुर जनपद में ईद उल अजहा की नमाज़ शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुई। लोगों ने ईदगाह पर नमाज़ अदा करने के बाद एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी। नमाज़ के दौरान सुरक्षा के मद्देनज़र पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा, और ईदगाह के बाहर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का पुख्ता इंतज़ाम किया गया था। ईद की नमाज़ का यह पूरा आयोजन जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की सीधी निगरानी में शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।4
- हमीरपुर में दिन-ब-दिन बढ़ती उमस और भीषण गर्मी से आमजन को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से महिला समाजसेविकाओं ने एक सराहनीय पहल की है। भरुआ सुमेरपुर रेलवे स्टेशन सहित कस्बे के अन्य मार्गों पर, इन महिलाओं ने राहगीरों और रेलयात्रियों को शरबत वितरित कर उन्हें गर्मी से राहत पहुंचाई। सुमेरपुर क्षेत्र के टेढ़ा से आईं उर्मिला सिंह और तनुजा सिंह के साथ-साथ कस्बे की दया सिंह और उमा साहू ने विशेष रूप से स्टेशन परिसर में यह शरबत वितरण अभियान चलाया। उन्होंने बताया कि पुराने समय से ही पानी पिलाने को एक पुण्य का कार्य माना जाता रहा है, और इसी सोच को जीवंत रखते हुए उन्होंने राहगीरों तथा रेलयात्रियों को मीठे शरबत का वितरण कर भीषण गर्मी से राहत देने का प्रयास किया। इस प्रकार, ये महिला समाजसेविकाएं भीषण गर्मी से आमजन को राहत दिलाने के लिए आगे आई हैं।4
- हमीरपुर जिले में स्थित अतरार गाँव की वर्तमान स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की गई है।1