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मध्य प्रदेश में वन विभाग की इस मनमानी और दमनकारी कार्रवाई पर सीधा सवाल उठाया गया है कि आखिर विभाग को ये अधिकार किसने दिए हैं। वन विभाग द्वारा जंगल से मुरम, पत्थर या रेत ढोने के नाम पर, या फिर झूठा पीओआर (POR) दर्ज कर आम लोगों के 10 लाख रुपये के कीमती ट्रैक्टरों को जब्त कर लिया जाता है। इसके बाद पीड़ित परिवारों के वाहन कोर्ट के चक्कर लगाते-लगाते और पेशी पर पेशी भुगतते हुए खड़े-खड़े ही नष्ट हो जाते हैं। इस पूरी व्यवस्था में दोषी अधिकारियों का कुछ नहीं बिगड़ता, जबकि आम लोग पूरी तरह बर्बाद होकर भिखारी बन जाते हैं।
Kamlesh Yadav
मध्य प्रदेश में वन विभाग की इस मनमानी और दमनकारी कार्रवाई पर सीधा सवाल उठाया गया है कि आखिर विभाग को ये अधिकार किसने दिए हैं। वन विभाग द्वारा जंगल से मुरम, पत्थर या रेत ढोने के नाम पर, या फिर झूठा पीओआर (POR) दर्ज कर आम लोगों के 10 लाख रुपये के कीमती ट्रैक्टरों को जब्त कर लिया जाता है। इसके बाद पीड़ित परिवारों के वाहन कोर्ट के चक्कर लगाते-लगाते और पेशी पर पेशी भुगतते हुए खड़े-खड़े ही नष्ट हो जाते हैं। इस पूरी व्यवस्था में दोषी अधिकारियों का कुछ नहीं बिगड़ता, जबकि आम लोग पूरी तरह बर्बाद होकर भिखारी बन जाते हैं।
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- महोबा जनपद के ग्राम दुलारा में प्रशासनिक सुस्ती और अधिकारियों की मनमानी इस समय अपने चरम पर है। स्थानीय प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये के कारण गांव के सचिवालय की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे ग्रामीणों का हाल भी बेहाल बना हुआ है। अधिकारियों की इस मनमर्जी और काम के प्रति लापरवाही की वजह से स्थानीय जनता बेहद परेशान है और पूरा क्षेत्र प्रशासनिक उपेक्षा झेलने को मजबूर है।1
- नीट परीक्षा (#neetexam), संसद मार्च (#संसद_मार्च), सोनम वांगचुक (#SonamWangchuk) और विरोध प्रदर्शन (#protest) के बीच छात्रों के आंदोलन को पूरा समर्थन दिया गया है। हालांकि, उन भांडों का कड़ा विरोध किया जा रहा है जो इस छात्र आंदोलन के नाम पर सनातन को गाली दे रहे हैं और देश की संवैधानिक व्यवस्था को तार-तार कर रहे हैं। इसके साथ ही उन देशविरोधियों को भी आड़े हाथों लिया गया है जो 'भारत माता का पति कौन है' जैसे आपत्तिजनक सवाल पूछ रहे हैं। यह स्पष्ट किया गया है कि समर्थन केवल असली छात्रों के लिए है, आंदोलन की आड़ में देशविरोधी हरकतें करने वालों के लिए नहीं।1
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- दिल्ली के जंतर-मंतर से सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को हटाए जाने के बाद देशभर में छात्रों का भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। इसी सिलसिले में उत्तर प्रदेश के बांदा में छात्रों ने जमकर हल्ला बोलते हुए जोरदार प्रदर्शन किया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान आंदोलित छात्रों ने जोरदार नारेबाजी की और वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा छात्रों की आवाज को उचित सम्मान देने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट रूप से कहना है कि जब तक उनकी इन मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक उनका यह आंदोलन इसी तरह जारी रहेगा।4
- सतना में हुई बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी और उमस से तो राहत दी है, लेकिन इसके साथ ही शहर के 'ओवर स्मार्ट सिटी' होने के दावों की भी पोल खोल दी है। मौसम विभाग ने पहले ही बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई थी। बारिश शुरू होते ही शहर के कई इलाकों में नालियां ओवरफ्लो हो गईं और सड़कों पर जगह-जगह पानी भर गया, जिससे आम नागरिकों, दोपहिया वाहन चालकों और राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों का आक्रोश है कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए स्मार्ट सिटी के दावे पहली ही तेज बारिश में धराशायी हो गए हैं। जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण सड़कों पर जलभराव हो गया और यातायात भी बुरी तरह प्रभावित हुआ। इस बदहाली पर एन.डी. न्यूज़ चैनल सतना ने सीधा सवाल उठाया है कि जब पहली ही बारिश में शहर की सड़कें तालाब बन जाएं, तो आखिर 'स्मार्ट सिटी' का सपना कब पूरा होगा?2
- स्मार्ट सिटी सतना में 'जल ही जीवन है' का नारा बुलंद करते हुए जल संग्रहण के नाम पर अनोखा काम किया गया है। यहाँ स्मार्ट सिटी फंड से करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाकर काबिल इंजीनियरों द्वारा पूरे शहर में छोटी-बड़ी जल संरचनाएं बनवा दी गई हैं। करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाकर बनाई गई ये जल संरचनाएं स्मार्ट सिटी सतना के विकास का असली नजारा दिखा रही हैं।1