हाथी आमने-सामने आए तो जान बचाने के ये नियम बनें ढाल वन विभाग की सलाह: सही तरीका अपनाएं, गलत कदम से बढ़ सकता है खतरा हाथियों से बचने के लिए क्या करें? 1. हाथी आने की सूचना तत्काल निकटवर्ती वन विभाग के कर्मचारियों को दें। 2. यदि हाथी से सामना हो जाए तो तुरंत उसके लिए रास्ता छोड़ें। पहाड़ी स्थानों में सामना होने पर ढलान की ओर दौड़ें, ऊपर की ओर नहीं। सीधे न दौड़कर आड़े-तिरछे दौड़ें, कुछ दूर दौड़ने पर गमछा, पगड़ी, टोपी अथवा कोई वस्त्र फेंक दें ताकि कुछ समय तक हाथी उसमें उलझा रहे और आपको सुरक्षित स्थान पर पहुँचने का मौका मिल जाए। 3. अगर हाथी गांव में आ ही जाता है तो मशाल के साथ कम से कम आठ-दस लोग मिलकर एक साथ ढोल या टीना पीटकर उसे भगाने का प्रयास करें। इस प्रक्रिया में भी हाथी के बहुत नजदीक न जाएं। हाथी प्रभावित क्षेत्रों के गांवों में रात्रि में दल बनाकर मशाल के साथ पहरा दें। 4. अगर मचान बनाकर खेत की रखवाली करनी हो, तो मचान ऊँचा बनाएं, विशेषकर उसे ऊँचे मजबूत पेड़ के ऊपर बनाएं और उसे नीचे जमीन पर लकड़ी से आग जलाये रखें। 5. हाथी जिस जंगल में दिखे उस क्षेत्र में चारा, जलावन एकत्र करने नहीं जाएं। हाथी जिन क्षेत्रों में हो उसके आस-पास के गांवों में संध्या से प्रातः काल तक आवागमन से बचें। 6. हाथी द्वारा कान खड़े कर, सुंढ़ ऊपर कर आवाज देना, इस बात का संकेत है कि वह आप पर हमला करने आ रहा है। अतः तत्काल सुरक्षित स्थान पर चले जाए। 7. हाथियों की सूंघने की शक्ति अत्यधिक प्रबल होती है। अतः हाथी को भगाने के क्रम में हवा की दिशा का ध्यान रखें। 8. वैज्ञानिक प्रयोग के आधार पर पाया गया है कि मधुमक्खियों के गुनगुनाने की आवाज हाथियों को भगाने में सहायक साबित होती है। हाथियों से बचने के लिए क्या न करें? 1. हाथी के चारों ओर कौतुहलवश भीड़ न लगाएं। हाथियों के चलने दौड़ने की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती है। अतः हाथी से कम से कम 200 मीटर की दूरी बनाएं रखें। बच्चों, स्त्रियों एवं वृद्धों को कभी भी हाथी के समक्ष नहीं जाने दें। 2. हाथियों को छेड़े नहीं, विशेषकर उन पर पत्थर, तीर, जलता हुआ टायर या मशाल आदि फेंककर प्रहार न करें। पटाखें आदि का प्रयोग से हाथियों को गुस्सा आ सकता है एवं इससे क्षति की संभावना बढ़ सकती है, अतः इसके प्रयोग से बचें। 3. हाथियों को अनाज अथवा अन्य खाद्य सामग्री न दें, क्योंकि इससे उनकी खाद्य सामग्री के प्रति रूचि बढ़ेगी एवं इस कारण वे मकानों को तोड़कर खाद्य सामग्री प्राप्त करने का प्रयास कर सकते हैं। हाथी प्रभावित क्षेत्र में जिस कमरे में अनाज का भंडारण हो उसमें न सोएं एवं कुछ दिनों के लिए किसी सुरक्षित जगह पर अनाज को रख दें। 4. क्षेत्र में जबतक हाथी रहे, तबतक हड़िया या देशी शराब (महुआ) नहीं बनाएं। इसका भंडारण भी न करें। हाथी शराब की ओर आकर्षित होते हैं और प्राप्त करने के उद्देश्य से ये घरों को क्षति पहुँचाते हैं। 5. गर्भवती हथिनी अथवा नवजात शिशु के साथ होने पर हथिनी या उसके झुण्ड को भगाने का प्रयास न करें, उसे थोड़ा समय दें। 6. हाथियों को भगाने के क्रम में श्वेत वस्त्र या लाल वस्त्र का प्रयोग नहीं करना चाहिए। यह रंग उन्हें चिड़चिड़ा बनाता है। 7. हाथी को देखकर पूजा या प्रणाम करने के उद्देश्य से उनके नजदीक न जाएं।
हाथी आमने-सामने आए तो जान बचाने के ये नियम बनें ढाल वन विभाग की सलाह: सही तरीका अपनाएं, गलत कदम से बढ़ सकता है खतरा हाथियों से बचने के लिए क्या करें? 1. हाथी आने की सूचना तत्काल निकटवर्ती वन विभाग के कर्मचारियों को दें। 2. यदि हाथी से सामना हो जाए तो तुरंत उसके लिए रास्ता छोड़ें। पहाड़ी स्थानों में सामना होने पर ढलान की ओर दौड़ें, ऊपर की ओर नहीं। सीधे न दौड़कर आड़े-तिरछे दौड़ें, कुछ दूर दौड़ने पर गमछा, पगड़ी, टोपी अथवा कोई वस्त्र फेंक दें ताकि कुछ समय तक हाथी उसमें उलझा रहे और आपको सुरक्षित स्थान पर पहुँचने का मौका मिल जाए। 3. अगर हाथी गांव में आ ही जाता है तो मशाल के साथ कम से कम आठ-दस लोग मिलकर एक साथ ढोल या टीना पीटकर उसे भगाने का प्रयास करें। इस प्रक्रिया में भी हाथी के बहुत नजदीक न जाएं। हाथी प्रभावित क्षेत्रों के गांवों में रात्रि में दल बनाकर मशाल के साथ पहरा दें। 4. अगर मचान बनाकर खेत की रखवाली करनी हो, तो मचान ऊँचा बनाएं, विशेषकर उसे ऊँचे मजबूत पेड़ के ऊपर बनाएं और उसे नीचे जमीन पर लकड़ी से आग जलाये रखें। 5. हाथी जिस जंगल में दिखे उस क्षेत्र में चारा, जलावन एकत्र करने नहीं जाएं। हाथी जिन क्षेत्रों में हो उसके आस-पास के गांवों में संध्या से प्रातः काल तक आवागमन से बचें। 6. हाथी द्वारा कान खड़े कर, सुंढ़ ऊपर कर आवाज देना, इस बात का संकेत है कि वह आप पर हमला करने आ रहा है। अतः तत्काल सुरक्षित स्थान पर चले जाए। 7. हाथियों की सूंघने की शक्ति अत्यधिक प्रबल होती है। अतः हाथी को भगाने के क्रम में हवा की दिशा का ध्यान रखें। 8. वैज्ञानिक प्रयोग के आधार पर पाया गया है कि मधुमक्खियों के गुनगुनाने की आवाज हाथियों को भगाने में सहायक साबित होती है। हाथियों से बचने के लिए क्या न करें? 1. हाथी के चारों ओर कौतुहलवश भीड़ न लगाएं। हाथियों के चलने दौड़ने की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती है। अतः हाथी से कम से कम 200 मीटर की दूरी बनाएं रखें। बच्चों, स्त्रियों एवं वृद्धों को कभी भी हाथी के समक्ष नहीं जाने दें। 2. हाथियों को छेड़े नहीं, विशेषकर उन पर पत्थर, तीर, जलता हुआ टायर या मशाल आदि फेंककर प्रहार न करें। पटाखें आदि का प्रयोग से हाथियों को गुस्सा आ सकता है एवं इससे क्षति की संभावना बढ़ सकती है, अतः इसके प्रयोग से बचें। 3. हाथियों को अनाज अथवा अन्य खाद्य सामग्री न दें, क्योंकि इससे उनकी खाद्य सामग्री के प्रति रूचि बढ़ेगी एवं इस कारण वे मकानों को तोड़कर खाद्य सामग्री प्राप्त करने का प्रयास कर सकते हैं। हाथी प्रभावित क्षेत्र में जिस कमरे में अनाज का भंडारण हो उसमें न सोएं एवं कुछ दिनों के लिए किसी सुरक्षित जगह पर अनाज को रख दें। 4. क्षेत्र में जबतक हाथी रहे, तबतक हड़िया या देशी शराब (महुआ) नहीं बनाएं। इसका भंडारण भी न करें। हाथी शराब की ओर आकर्षित होते हैं और प्राप्त करने के उद्देश्य से ये घरों को क्षति पहुँचाते हैं। 5. गर्भवती हथिनी अथवा नवजात शिशु के साथ होने पर हथिनी या उसके झुण्ड को भगाने का प्रयास न करें, उसे थोड़ा समय दें। 6. हाथियों को भगाने के क्रम में श्वेत वस्त्र या लाल वस्त्र का प्रयोग नहीं करना चाहिए। यह रंग उन्हें चिड़चिड़ा बनाता है। 7. हाथी को देखकर पूजा या प्रणाम करने के उद्देश्य से उनके नजदीक न जाएं।
- *केन्द्र सरकार द्वारा मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने के विरोध में एक दिवसीय उपवास कार्यक्रम संपन्न* हजारीबाग : जिला कांग्रेस के तत्वावधान में केन्द्र सरकार द्वारा महत्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ( मनरेगा ) से महात्मा गांधी के नाम हटाए जाने के विरोध में मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत डिस्ट्रिक्ट बोर्ड चौक स्थित डाॅ.भीमराव अंबेडकर प्रतिमा के निचे एक दिवसीय उपवास एंव प्रतीकात्मक कार्यक्रम का आयोजन किया गया । आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला कांग्रेस के मीडिया अध्यक्ष निसार खान ने कहा कि मनरेगा से महत्मा गांधी का नाम मिटाना सोचा-समझा राजनीति से प्रेरित है । उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का नाम हटाने का सचेत निर्णय वैचारिक है । गांधी जी की श्रम की गरिमा, समाजिक न्याय और सबसे गरीबों के प्रति राज्य की नैतिक जिम्मेदारी के प्रतीक है । यह नाम परिवर्तन गांधी जी के मुल्यों के प्रति भाजापा-आरएसएस की दीर्घकालिक असहजता और अविश्वास को दर्शाता है तथा एक जन केन्द्रित कल्याणकारी कानून से राष्ट्रपिता के जुड़ाव को मिटाने का प्रयास है । प्रदेश महासचिव बिनोद कुशवाहा ने कहा कि प्रस्तावित नया विधेयक उस कानूनी काम के अधिकार को समाप्त कर देता है जो, मनरेगा ने प्रदान किया था । यह मांग आधारित, वैधानिक अधिकार की जगह एक केन्द्र नियंत्रित योजना लाता है, जिसमे न तो रोजगार की कोई कानून लागू की जा सकने वाली गारंटी है न सार्वभौमिक कबरेज और न ही यह आश्वासन कि आवश्यकता के समय लोंगो को काम मिलेगा । वस्तुत: काम के अधिकार को ही समाप्त किया जा रहा है मनरेगा के तहत मजदुरी के वित्तपोषण की प्राथमिक जिम्मेवारी केन्द्र सरकार की थी, जिससे यह एक वास्तविक राष्ट्रीय रोजगार गारंटी बनाती थी । प्रदेश सचिव बिनोद सिंह ने कहा कि नया विधेयक इस जिम्मेदारी से पिछे हटना चाहती है, बोझ राज्यों पर डालता है, आवंटनों पर सीमा लगता है और मांग आधारित कार्यक्रम की बुनियाद को कमजोर करता है । इससे संघवाद कमजोर होता है और वित्तीय बाधाओं के कारण राज्यों को काम की मांग दबाने के लिए मजबूर होना पड़ता है । प्रदेश सचिव शशि मोहन सिंह ने कहा कि गांधी जी की विरासत, श्रामिकों के अधिकार और संघीय जिम्मेदारी पर यह संयुक्त हमला भाजापा-आरएसएस की उस बड़ी साजिश को उजागर करता है, जिसके तहत अधिकार आधारित कल्याण को समाप्त कर केन्द्र नियंत्रित दया-दान की व्यव्स्था से बदला जा रहा है । कार्यक्रम के पश्चात इन्द्रपुरी चौक स्थित पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री पुण्यतिथि पर उनके प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनहे श्रद्धांजली दी गई । मौके पर प्रदेश सचिव अवधेश कुमार सिंह पूर्व जिला अध्यक्ष आबिद अंसारी ओबीसी के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सुरजीत नागवाला सचिव रेणु कुमारी, कोमल कुमारी, वरिष्ठ कांग्रेसी विरेन्द्र कुमार सिंह, लाल बिहारी सिंह, अजय गुप्ता, दिगम्बर मेहता, मकसुद आलम, नगर अध्यक्ष परवेज अहमद, दिलीप कुमार रवि, विजय कुमार सिंह, जावेद इकबाल, रघु जायसवाल, उदय पाण्डेय, ओमप्रकाश गोप, संगीता कुमारी, ओमप्रकाश पासवान, डाॅ.प्रकाश यादव, गुड्डू सिंह, मुस्ताक अंसारी, अनिल कुमार भुईंया, बाबु खान, दरगाही खान, मोहम्मद वारिस, नरसिंह प्रजापती, अजय प्रजापती, नौशाद आलम, मंसुर आलम, निसार अहमद भोला, नागेश्वर मेहता, पंचम पासवान, राजीव कुमार मेहता, विवेक कुमार पासवान, विवेक चौरसिया, मोहम्मद शहबान रजा, अर्जुन नायक, माशूक रजा, राजेश कुमार, शब्बा करीम, सदरूल होदा के अतिरिक्त कई कांग्रेसी उपस्थित थे ।4
- स्कॉलरशिप की मांग को लेकर झारखंड में #nsui छात्रों का बड़ा प्रदर्शन? #jharkhand#shorts #breakingnews1
- जेल ब्रेक करने वाला तीन बंदी महाराष्ट्र के सोलापुर जिला के करमाला थाना क्षेत्र से गिरफ्तार, पहले से जेल ब्रेक किया बंदी देवा के अगुवाई में फरार हुए थे तीनों बंदी हजारीबाग पुलिस को आज एक बड़ी सफलता मिली है. लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा से फरार तीन कैदियों को हजारीबाग पुलिस ने महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के करमाला थाना क्षेत्र से गिरफ्तार कर हजारीबाग ले आया है. इसकी पुष्टि हजारीबाग एसपी अंजनी अंजान ने की है. 31 दिसंबर को सुबह 7:00 बजे हजारीबाग पुलिस को यह पता चली थी कि 3 कैदियों ने जेल ब्रेक की घटना को अंजाम देते हुए रात के 1:30 बजे के आसपास फरार हो गए थे. लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा से फरार तीन बंदी देव भुईयां ,राहुल रजवार और जितेंद्र रवानी को हजारीबाग पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. जिसे न्यायिक हिरासत में लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा भेज दिया गया है. 31 दिसंबर 2025 को रात के 1:30 बजे के आसपास तीनों कैदी जेल ब्रेक की घटना को अंजाम देते हुए फरार हो गए थे .तीनों धनबाद के रहने वाले थे. हजारीबाग एसपी अंजनी अंजन नु बताया कि जेल का खिड़की का रोड काटकर बेडशीट के सहारे नीचे उतर कर जेल का आंतरिक दीवार को लांघ कर तीनों भागे थे. लोहे के हुक एवं चादर से बनी रस्सी और लकड़ी का डंडा के सहारे तीनों कैदी फरार हुए थे.तीनों कैदी में राहुल रजवार आजीवन कारावास अन्य 20 और 27 वर्ष का सजा काट रहा था.1
- भीषण ठंड में राहत की मजबूत ढाल बना हजारीबाग यूथ विंग, अब तक 850 जरूरतमंदों को मिला संबल ठंड से जंग में सक्रिय हजारीबाग यूथ विंग हर सप्ताह और रात्रि सेवा में जरूरतमंदों तक पहुंच रही राहत ठंड में जरूरतमंदों को राहत देना हमारा दायित्व है, अभियान पूरे मौसम जारी रहेगा : चंद्र प्रकाश जैन जरूरतमंदों की सेवा ही संस्था का सौभाग्य पूरे ठंड भर राहत सेवा रहेगी जारी : करण जायसवाल हजारीबाग कड़ाके की ठंड के बीच हजारीबाग यूथ विंग द्वारा चलाया जा रहा शीतकालीन राहत अभियान पूरी सक्रियता और प्रतिबद्धता के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में रविवार को लक्ष्मी सिनेमा हॉल कैंपस में आयोजित सेवा कार्यक्रम के दौरान आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे 100 जरूरतमंदों के बीच कंबल का वितरण किया गया। संस्था अब तक 850 कंबलों का वितरण कर चुकी है, जो उसके संगठित प्रयासों और मजबूत सेवा-संकल्प को दर्शाता है। संस्था ने स्पष्ट किया है कि यह शीतकालीन राहत अभियान पूरे ठंड के मौसम में बिना किसी बाधा के जारी रहेगा। इसके साथ ही रात्रिकालीन सेवाएं भी निरंतर संचालित की जा रही हैं, ताकि अचानक सामने आने वाले जरूरतमंदों को भी तुरंत सहायता मिल सके। कंबल पाकर जरूरतमंदों के चेहरों पर दिखाई दी राहत और संतोष इस अभियान की सार्थकता को स्वयं बयान कर रही थी। भीषण ठंड में यह सहायता उनके लिए केवल वस्त्र नहीं, बल्कि सुरक्षा और भरोसे का प्रतीक बनकर सामने आई। कार्यक्रम के सफल संचालन में प्रभारी के रूप में सांसद प्रतिनिधि एवं युवा समाजसेवी लब्बू गुप्ता की सक्रिय भूमिका रही, जबकि उनके सहयोगी के रूप में कुणाल कुमार उर्फ हैप्पी ने पूरी तत्परता से जिम्मेदारी निभाई। दिसंबर माह से प्रारंभ हुआ यह शीतकालीन राहत अभियान अब जिले में अपनी एक सशक्त पहचान स्थापित कर चुका है। प्रत्येक सप्ताह 100 कंबल वितरण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित हो रहे इन कार्यक्रमों से सेवा की एक सशक्त श्रृंखला विकसित हो रही है, जो समाज में सकारात्मक ऊर्जा और विश्वास का संचार कर रही है। संस्था के संरक्षक चंद्रप्रकाश जैन ने कहा कि हजारीबाग यूथ विंग सेवा को दान नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व मानकर कार्य कर रहा है। हमारा लक्ष्य है कि ठंड के मौसम में कोई भी जरूरतमंद असहाय न रहे और हर व्यक्ति को गरिमा के साथ राहत मिले। वहीं संस्था के अध्यक्ष करण जायसवाल ने कहा ने हजारीबाग यूथ विंग द्वारा संचालित शीतकालीन राहत अभियान केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि पूरी ठंड भर चलने वाली सुव्यवस्थित सेवा प्रक्रिया है। कंबल वितरण के साथ-साथ रात्रि सेवा,आपात स्थिति में तत्काल सहायता और अचानक सामने आने वाले जरूरतमंदों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए संस्था ने संस्था सदैव एक्टिव है। राहत अभियान न केवल ठंड से जूझ रहे लोगों के लिए ठोस सहारा बन रहा है, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय संवेदना की एक मजबूत मिसाल भी कायम कर रहा है। मौके पर अध्यक्ष करण जायसवाल, सचिव रितेश खण्डेलवाल,उपाध्यक्ष विकास तिवारी,संस्था के मार्गदर्शक जयप्रकाश खण्डेलवाल,संजय कुमार विकास केसरी,कार्यकारिणी सदस्य प्रमोद खण्डेलवाल,सत्यनारायण सिंह,कैलाश कुमार,प्रिंस कसेरा,राजेश जैन,आलोक कुमार, लब्बू गुप्ता,कुणाल कुमार उर्फ हैप्पी,पवन गुप्ता,अजय पांडे,कुश पांडे एवं विशाल वाल्मीकि सहित कई लोग उपस्थित रहें।1
- नशा का मुख्य केंद्र बनता जा रहा है हजारीबाग । ईन दिनो हजारीबाग शहर नशा कारोबार का अडडा बनता जा रहा है। यह भीडीओ बहुत मुश्किल से मीला है । जो आप तक पहुंच रहा है । पुलिस प्रशासन भी जानती है कहा कया हो रहा है पर मौन है । कयो यह समझना मुश्किल है । लेकीन हजारीबाग के बच्चो का भविष्य अंधकार मय होता जा रहा है । यहा कि नयी पीढ़ी नशे के चपेट मे फसती जा रहा है । S.S.P साहब कुछ तो किजीऐ हजारीबाग के जनता को बचाईऐ ।1
- नशा छोड़ो, जीवन जोड़ोः हजारीबाग में छात्रों से गांवों तक पहुंचा नशा मुक्ति का संदेश1
- #जल #संरक्षण #संकट !!! #पेलावल उत्तरी स्थित गूही आहार जिसमें वर्षों पहले सालों भर पानी रहता था और #मछली_पालन भी होता था...आज इसकी दुर्दशा को देखकर रोना आता है। हमारे दोनों तालाबों को बचा लें... #गहरीकरण तथा #सुंदरीकरण ही एकमात्र उपाय है। Hemant Soren Yogendra Prasad Hafizul Hassan Office of Chief Minister, Jharkhand Manish Jaiswal Pradip Prasad प्रदीप प्रसाद समर्थक हजारीबाग DC Hazaribagh Pooja Kumari #SavePond #Pelawal #katkamsandi #hazaribagh #jharkhand1
- रजत कुमार/हजारीबाग हजारीबाग में झामुमो कार्यालय में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की 82वीं जयंती श्रद्धा से मनाई गई, सैकड़ों ने ली पार्टी सदस्यता Anchor हजारीबाग जिले के अटल चौक स्थित झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के जिला कार्यालय में मंगलवार को दिशोम गुरु शिबू सोरेन की 82वीं जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान सैकड़ों लोगों ने झामुमो की सदस्यता भी ग्रहण की। जिला अध्यक्ष संजीव बेदिया ने कहा कि यह पहला अवसर है जब दिशोम गुरु का जन्मदिवस उनके बिना मनाया जा रहा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से उनके सपनों का झारखंड बनाने का संकल्प लेने की अपील की। साथ ही आगामी नगर निकाय चुनाव को लेकर पूरी मजबूती से तैयारी करने का आह्वान किया। जिला सचिव नीलकंठ महतो ने शिबू सोरेन को झारखंड का निर्माता बताया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।1