बस्ती जिले के गणेशपुर चौकी अंतर्गत सुकरौली गांव में दबंगई का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। सोमवार रात गांव के ही दबंग सुनील सिंह यादव पर एक ग्रामीण राधेश्याम के साथ मारपीट करने और उन्हें जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगा है। पीड़ित राधेश्याम ने बताया कि सुनील सिंह यादव ने न केवल उनके साथ मारपीट की, बल्कि जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी। आरोपी ने कथित तौर पर यह भी कहा कि अगर वे पुलिस के पास गए, तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा। इस घटना के बाद से पूरे गांव में दहशत का माहौल है, और पीड़ित परिवार खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। पीड़ित का आरोप है कि गणेशपुर चौकी इंचार्ज इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, जिससे दबंगों के हौसले लगातार बुलंद हो रहे हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि क्या पुलिस किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रही है? फिलहाल, पीड़ित राधेश्याम ने उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है और आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
बस्ती जिले के गणेशपुर चौकी अंतर्गत सुकरौली गांव में दबंगई का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। सोमवार रात गांव के ही दबंग सुनील सिंह यादव पर एक ग्रामीण राधेश्याम के साथ मारपीट करने और उन्हें जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगा है। पीड़ित राधेश्याम ने बताया कि सुनील सिंह यादव ने न केवल उनके साथ मारपीट की, बल्कि जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी। आरोपी ने कथित तौर पर यह भी कहा कि अगर वे पुलिस के पास गए, तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा। इस घटना के बाद से पूरे गांव में दहशत का माहौल है, और पीड़ित परिवार खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। पीड़ित का आरोप है कि गणेशपुर चौकी इंचार्ज इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, जिससे दबंगों के हौसले लगातार बुलंद हो रहे हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि क्या पुलिस किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रही है? फिलहाल, पीड़ित राधेश्याम ने उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है और आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
- उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं, विशेषकर गौर थाना क्षेत्र में। आरोप है कि यह क्षेत्र अपराधियों के लिए एक 'अघोषित सुरक्षित जोन' बन चुका है, जहां बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दिया जा रहा है। इसके विपरीत, पुलिस की कार्यप्रणाली पर संदेह व्यक्त किया गया है, क्योंकि वह अपराध दर्ज करने के नाम पर पीड़ितों को थाने के चक्कर लगवा रही है, जबकि पुलिसिया फाइलों में सब कुछ 'ऑल इज वेल' दिखाया जा रहा है। यह स्थिति महिला सुरक्षा के बड़े-बड़े दावों के ठीक उलट है। हाल ही में एक महिला और उसके परिजनों पर घर में घुसकर हमला किया गया। पीड़िता का गंभीर आरोप है कि न्याय मांगने पर पुलिस ने कार्रवाई तो दूर, उसकी तहरीर ही बदल दी, जिससे गंभीर आरोपों को हल्का करने का प्रयास किया गया। सिर्फ महिला सुरक्षा ही नहीं, गौर थाना क्षेत्र में चोरी और मोटरसाइकिल गायब होने जैसी घटनाएं भी आम हैं, और इन मामलों में भी प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा रही है। इस पर सवाल उठाया जा रहा है कि क्या पुलिस का एकमात्र लक्ष्य अपराध नियंत्रण के बजाय सिर्फ 'आंकड़ों' को चमकाना रह गया है, और क्या यह एक सुनियोजित साजिश है जिसके तहत गंभीर घटनाओं को कागजों से दूर रखकर जिले की अपराध रिपोर्ट को 'सफेद' बनाए रखा जा रहा है। थाने की इस नकारात्मक कार्यशैली के कारण पीड़ितों में गहरा रोष व्याप्त है। चेतावनी दी गई है कि यदि गौर पुलिस की कार्यप्रणाली में समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो यह न केवल जनता का पुलिस पर से विश्वास उठा देगा, बल्कि क्षेत्र में अपराध के नए आयामों को जन्म देगा। अब लोगों की उम्मीदें उच्च अधिकारियों के सख्त रुख और पुलिस की जवाबदेही तय करने की दिशा में होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं, यह देखने के लिए कि क्या जिला प्रशासन पुलिस के दावों और वास्तविक धरातल के बीच के अंतर को देख पाएगा, या फिर आम आदमी इसी तरह फाइलों और थानों के बीच पिसता रहेगा।2
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- खलीलाबाद नगर पालिका क्षेत्र में तितौवा चौराहा से स्टेशन रोड होते हुए बिधियानी मोड़ तक की सड़क की जर्जर हालत को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। सड़क की इस बदहाली के विरोध में छात्रों ने सड़क पर धान की रोपाई करके अपना प्रदर्शन दर्ज कराया। इस मामले में सदर विधायक अंकुर राज तिवारी के प्रयासों से अब सड़क निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। उम्मीद है कि अगले एक से डेढ़ महीने के भीतर इस सड़क का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा और लोगों को इस समस्या से समाधान मिलेगा।1
- विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन पर संवादहीनता और उत्पीड़न भरी कार्रवाई जारी रखने का गंभीर आरोप लगाया है। समिति का कहना है कि प्रबंधन की इन गतिविधियों से ऊर्जा निगमों का औद्योगिक वातावरण लगातार बिगड़ रहा है, जिसका सीधा और नकारात्मक असर बिजली व्यवस्था पर पड़ना स्वाभाविक है। संघर्ष समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि बिजली कर्मियों के विरुद्ध की जा रही दंडात्मक कार्रवाई को नहीं रोका गया, तो इसकी स्वाभाविक और तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। समिति के पदाधिकारी सुनील प्रजापति ने वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उपभोक्ताओं को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए स्वस्थ कार्य वातावरण और पर्याप्त मानव संसाधन अत्यंत अनिवार्य हैं। उन्होंने मांग की है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन अपनी हठधर्मिता छोड़कर संघर्ष समिति के साथ तत्काल सार्थक संवाद शुरू करे और बिजली कर्मियों के विरुद्ध की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां तुरंत वापस ले। प्रजापति ने यह भी आरोप लगाया कि बिजली कर्मियों के खिलाफ की जा रही अधिकांश दंडात्मक कार्रवाई निजीकरण की नीति से प्रेरित है, जिसके तहत 45 प्रतिशत से अधिक संविदा कर्मियों की सेवाएं समाप्त की गई हैं। उनका कहना है कि इससे बिजली व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले कर्मचारियों को भी दंडित किया जा रहा है। एक अन्य पदाधिकारी नारायण चंद्र चौरसिया ने मार्च 2023 में हुए आंदोलन का जिक्र करते हुए बताया कि उस दौरान बिजली कर्मियों पर की गई कार्रवाई आज तक वापस नहीं ली गई है। उन्होंने याद दिलाया कि उस आंदोलन के समय ऊर्जा मंत्री और संघर्ष समिति के बीच हुए एक समझौते में इन कार्रवाइयों को वापस लेने का आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद, संबंधित कर्मचारियों को कठोर दंड दिए जा रहे हैं, जिससे कार्य का वातावरण गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। पदाधिकारी दिलीप सिंह ने जोर देकर कहा कि जिन मामलों में कार्रवाई हो रही है, उन सभी में बिजली कर्मियों ने आंदोलन के दौरान भी उपभोक्ता हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन किया था। संघर्ष समिति ने ऊर्जा मंत्री के निर्देशों और पूर्व समझौते की भावना का सम्मान करते हुए सभी लंबित उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को तत्काल वापस लेने तथा स्वस्थ औद्योगिक वातावरण बहाल करने के लिए समिति के साथ तुरंत वार्ता शुरू करने की मांग की है। इसी क्रम में, मंगलवार को संतकबीरनगर में विद्युत कर्मियों ने अपना विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें सुनील प्रजापति, नारायण चंद्र चौरसिया, चंद्रकेश मौर्य, प्रदुम्न कुमार, रितेश कुमार, राघवेंद्र सिंह, अमरनाथ यादव, अशोक कुमार, भास्कर पांडेय, ओंकार चौरसिया और विजय कुमार सहित बड़ी संख्या में विद्युत कर्मचारी शामिल हुए।1
- संत कबीर नगर के मेंहदावल में हर वर्ष की तरह इस साल भी ज्येष्ठ माह के बड़े मंगलवार पर एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। भाजपा नेता मदन नारायण सिंह द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में हनुमान भक्तों ने पूरे उत्साह के साथ छोले चावल और हलवे का प्रसाद वितरित किया। इस भव्य भंडारे की व्यवस्था अभिषेक मदन सिंह और अन्य लोगों ने की, जिन्होंने पहले विधिवत पूजन-अर्चन करवाया और फिर राहगीरों सहित सभी लोगों को प्रसाद दिया। वरिष्ठ भाजपा नेता मदन नारायण सिंह हर साल ज्येष्ठ माह के बड़े मंगलवार को भगवान हनुमानजी के बाल स्वरूप भगवान बाला जी का पूजन कर प्रसाद वितरण करते हैं। इस बार भी टड़वरिया चौराहे पर पूरे उत्साह के साथ एक स्टाल लगाकर छोला चावल, हलवे और पानी का प्रसाद बांटा गया। इस दौरान सैकड़ों भक्तों और राहगीरों ने भक्तिभाव से प्रसाद ग्रहण कर भगवान हनुमानजी को नमन किया। भगवान बाला जी के जयकारे और भक्तिमय माहौल में प्रसाद वितरण का दृश्य बेहद मनमोहक था। इस अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता मदन नारायण सिंह ने कहा कि ऐसे सामाजिक कार्य हमें सनातन धर्म संस्कृति से प्रेरणा देते हैं, जहाँ 'नर सेवा ही नारायण सेवा' के महत्व पर बल दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि हिन्दू धर्म में भंडारा करवाना बेहद पूण्य का कार्य माना जाता है। इस कार्यक्रम के आयोजक अभिषेक मदन सिंह ने भक्तिमय वातावरण में लोगों को प्रसाद वितरित किया, जिसमें मदन नारायण सिंह, अजीत गुप्ता, विकास अग्रहरि और प्रशांत श्रीवास्तव सहित अनेक भक्तों ने सैकड़ों लोगों में प्रसाद बांटा।4
- अयोध्या में राम मंदिर निर्माण कार्य के दौरान चर्चा में आए चंपत राय के करीबी रामशंकर यादव, जिन्हें 'टिन्नू' के नाम से भी जाना जाता है, ने अपने ऊपर लग रहे 50 करोड़ रुपये की संपत्ति से जुड़े आरोपों पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। एक वीडियो बयान जारी करते हुए, टिन्नू ने इन सभी दावों को पूरी तरह से निराधार और गलत बताया है। उन्होंने अपनी संपत्ति का ब्योरा देते हुए स्पष्ट किया कि उनके पास मौजूद जमीन और मकान पूरी तरह से वैध हैं, जिसे उन्होंने वर्ष 2008 में विधिवत बैनामा कराकर खरीदा था और उस पर भवन का निर्माण वर्ष 2015-16 के दौरान कराया था। रामशंकर यादव ने उन दावों को भी खारिज किया जिनमें उनकी संपत्ति को अवैध बताया जा रहा है। उन्होंने स्पष्टीकरण दिया कि वर्ष 2020 में, जब एलएनटी (LNT) कंपनी को परियोजना कार्य के लिए आवास की आवश्यकता थी, तब उन्होंने अपना खाली पड़ा आवास उन्हें किराए पर दिया था। यह लेनदेन पूरी तरह से व्यावसायिक था और इसे गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया जा रहा है। अपनी आर्थिक स्थिति पर टिन्नू ने बताया कि उनके पास जो भी धन है, वह उनकी कड़ी मेहनत का फल है, क्योंकि वे लंबे समय तक स्वयं ऑटो चलाते रहे और संगठन के कार्य से उन्हें जो मानदेय प्राप्त होता था, उसी की बचत से उन्होंने यह आशियाना खड़ा किया है। रामशंकर यादव ने जोर देकर कहा कि सोशल मीडिया पर उन पर लगाए जा रहे 50 करोड़ रुपये की संपत्ति के आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग बिना तथ्यों के आधार पर उन पर कीचड़ उछाल रहे हैं, भगवान ही उनका सही निर्णय करेंगे। इस बयान के बाद अयोध्या के स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक हलकों में यह मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।1
- उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में हरैया थाना क्षेत्र के मुरादीपुर चौराहे के पास नेशनल हाईवे पर एक तेज़ रफ़्तार अनियंत्रित कार ने स्कूटी सवार महिला और एक बच्चे को जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण टक्कर के कारण स्कूटी सवार महिला व बच्चा सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए गंभीर रूप से घायल महिला को एम्बुलेंस की मदद से अस्पताल भिजवाया। राहगीरों द्वारा पुलिस को सूचित किए जाने पर हरैया पुलिस मौके पर पहुंची और टक्कर मारने वाली कार के साथ-साथ स्कूटी को भी अपने कब्जे में ले लिया। गंभीर रूप से घायल हुई महिला की पहचान बरहपुर गाँव की निवासी के रूप में हुई है।1