16 अप्रैल को लोकसभा में देश में 543 लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव महिला सशक्तिकरण के नाम से मोदी सरकार ने किया ।जबकि असलियत में ये है जनता की जेब काटकर फालतू नेताओं की नई कॉलोनी बसाकर अपनी सत्ता बचाए रखने का प्लान है। अभी 543 सांसद हैं, हर एक पर सरकार महीने का लगभग 8 से 12 लाख खर्च करती है। मतलब एक सांसद साल का लगभग 1 करोड़ के आसपास बैठता है। अब 300 नए सांसद जोड़ दे तो हर साल 500 से 700 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ हम सभी के ऊपर पड़ेगा। अगर उसमें बंगले, सुरक्षा, हवाई यात्रा, मुफ्त बिजली 50,000 यूनिट, पानी लाखों लीटर जोड़ दे, तो सांसदों पर सालाना खर्च 1500 करोड़ पार जाएगा। क्या इससे देश तरक्की करेगा या खर्च के बोझ का दर्द झेलेगा? भाजपा ने 33% महिला आरक्षण के लिए 2023 में कानून पास किया।लेकिन ऐसा पेंच फसाया कि पहले जनगणना, फिर परिसीमन, होगा तब जाकर महिला आरक्षण लागू किया जाएगा। यानी सीधा-सीधा 2029 में चुनाव के बाद। अगर नीयत साफ होती तो अभी 543 में से करीब 180 सीटें महिलाओं को दे देते। लेकिन ऐसा करते ही आधे बड़े-बड़े नेताओं की कुर्सी जाती और पार्टी में बगावत खड़ी हो जाती। क्योंकि 543 सांसदों में 180 महिला सांसदों को एडजस्ट करते तो बीजेपी के लगभग 120 पुरुष सांसद घर पर बैठते लेकिन सीटें 850 कर दो और उसमें से 280 सीटें महिलाओं के नाम पर दे दो, तो पुराने नेता भी सेट हो जाएंगे। मतलब जनता को बीजेपी बोलेगी कि क्रांति हो गई ? आज भी पंचायत में महिला सरपंच जीतती है, लेकिन कुर्सी पर उसका पति बैठता है। “प्रधान पति” । वही मॉडल बीजेपी अब संसद में भी लागू करना चाहती है। बड़े नेता अपनी पत्नी-बेटी को टिकट देंगे और खुद पीछे से रिमोट से चलाएंगे। नाम नारी शक्ति का, सत्ता पुरुष के हाथ में होगी। ये नारी सशक्तिकरण नहीं, बीजेपी की सत्ता में बने रहने की सेटिंग है। मोदी सरकार खुद को महिला हितैषी बताती है। लेकिन मोदीराज में गुजरात की बिलकिस बानो के रेप केस में बीजेपी सरकार की सिफारिश पर दोषियों को जेल से रिहा करने के बाद बीजेपी ने अपने रिश्तेदारों की तरह फूल माला पहनाकर उनका स्वागत किया था क्योंकि उन्होंने एक नारी का नहीं एक मुस्लिम महिला का रेप करने की बहादुरी दिखाई थी। दिल्ली में महिला पहलवान महीनों तक सड़क पर बैठकर न्याय मांगती रहीं, लेकिन बीजेपी मोदी किसके साथ खड़ा था ?अपने MP ब्रजभूषण सिंह के साथ।सबने देखा। हाथरस,उन्नाव,मणिपुर में महिलाओं के साथ रेप पर मोदी चुप,बीजेपी चुप थी।रेप के आंकड़े बीजेपी के रामराज में बढ़ रहे हैं, लेकिन मोदी के भाषणों में *“नारी शक्ति वंदन”* का नारा चल रहा है। जिन राज्यों ने जनसंख्या कंट्रोल किया, जैसे तमिलनाडु, केरल उनकी सीटें कम बढ़ेंगी। और जहां आबादी बेकाबू बढ़ी, जैसे यूपी, बिहार वहां सीटों की बढ़ोत्तरी अधिक होगी। मतलब जिस राज्य ने आबादी कंट्रोल किया वो सजा पाएगा, जिसने आबादी बढ़ने दी उसे अधिक सीटें मिलेंगी। जिन राज्यों में विपक्ष की पकड़ है, वहां सीटें कम बढ़ेंगी। जहां भाजपा मजबूत है, वहां सीटें ऐसे बढ़ाई जायेंगे जिससे उनके प्रत्याशी जीतें। अभी 543 सांसदों में ही बहस का टाइम नहीं मिलता, 850 में क्या होगा? संसद नहीं, मेला लगेगा। कानून ऐसे पास होंगे जैसे टिकट कटते हैं बस स्टैंड पर। ये महिला आरक्षण के पीछे 2029 के लिए मोदी का चुनावी ट्रैप( फंदा)है। ये सीटें बढ़ाकर मूर्ख,अज्ञानी भक्त नेताओं की फौज खड़ी करना है। ये संसदीय लोकतंत्र को भीड़तंत्र के मेले में बदलना है जहां सबको बोलने सुनने का मौका ही नहीं मिलेगा। *अगर अभी भी किसी को लग रहा है कि मोदी महिलाओं के भले के लिए कर रहा है, तो वो या तो भक्ति में डूबा है,या फिर उसे सच जानने की उसे फुर्सत नहीं है।* जनता को भावनाओं में उलझाओ, आंकड़ों से डराओ, और फिर टैक्स बढ़ाकर अपनी सरकार मुद्दतों तक कायम रखो ।
16 अप्रैल को लोकसभा में देश में 543 लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव महिला सशक्तिकरण के नाम से मोदी सरकार ने किया ।जबकि असलियत में ये है जनता की जेब काटकर फालतू नेताओं की नई कॉलोनी बसाकर अपनी सत्ता बचाए रखने का प्लान है। अभी 543 सांसद हैं, हर एक पर सरकार महीने का लगभग 8 से 12 लाख खर्च करती है। मतलब एक सांसद साल का लगभग 1 करोड़ के आसपास बैठता है। अब 300 नए सांसद जोड़ दे तो हर साल 500 से 700 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ हम सभी के ऊपर पड़ेगा। अगर उसमें बंगले, सुरक्षा, हवाई यात्रा, मुफ्त बिजली 50,000 यूनिट, पानी लाखों लीटर जोड़ दे, तो सांसदों पर सालाना खर्च 1500 करोड़ पार जाएगा। क्या इससे देश तरक्की करेगा या खर्च के बोझ का दर्द झेलेगा? भाजपा ने 33% महिला आरक्षण के लिए 2023 में कानून पास किया।लेकिन ऐसा पेंच फसाया कि पहले जनगणना, फिर परिसीमन, होगा तब जाकर महिला आरक्षण लागू किया जाएगा। यानी सीधा-सीधा 2029 में चुनाव के बाद। अगर नीयत साफ होती तो अभी 543 में से करीब 180 सीटें महिलाओं को दे देते। लेकिन ऐसा करते ही आधे बड़े-बड़े नेताओं की कुर्सी जाती और पार्टी में बगावत खड़ी हो जाती। क्योंकि 543 सांसदों में 180 महिला सांसदों को एडजस्ट करते तो बीजेपी के लगभग 120 पुरुष सांसद घर पर बैठते लेकिन सीटें 850 कर दो और उसमें से 280 सीटें महिलाओं के नाम पर दे दो, तो पुराने नेता भी सेट हो जाएंगे। मतलब जनता को बीजेपी बोलेगी कि क्रांति हो गई ? आज भी पंचायत में महिला सरपंच जीतती है, लेकिन कुर्सी पर उसका पति बैठता है। “प्रधान पति” । वही मॉडल बीजेपी अब संसद में भी लागू करना चाहती है। बड़े नेता अपनी पत्नी-बेटी को टिकट देंगे और खुद पीछे से रिमोट से चलाएंगे। नाम नारी शक्ति का, सत्ता पुरुष के हाथ में होगी। ये नारी सशक्तिकरण नहीं, बीजेपी की सत्ता में बने रहने की सेटिंग है। मोदी सरकार खुद को महिला हितैषी बताती है। लेकिन मोदीराज में गुजरात की बिलकिस बानो के रेप केस में बीजेपी सरकार की सिफारिश पर दोषियों को जेल से रिहा करने के बाद बीजेपी ने अपने रिश्तेदारों की तरह फूल माला पहनाकर उनका स्वागत किया था क्योंकि उन्होंने एक नारी का नहीं एक मुस्लिम महिला का रेप करने की बहादुरी दिखाई थी। दिल्ली में महिला पहलवान महीनों तक सड़क पर बैठकर न्याय मांगती रहीं, लेकिन बीजेपी मोदी किसके साथ खड़ा था ?अपने MP ब्रजभूषण सिंह के साथ।सबने देखा। हाथरस,उन्नाव,मणिपुर में महिलाओं के साथ रेप पर मोदी चुप,बीजेपी चुप थी।रेप के आंकड़े बीजेपी के रामराज में बढ़ रहे हैं, लेकिन मोदी के भाषणों में *“नारी शक्ति वंदन”* का नारा चल रहा है। जिन राज्यों ने जनसंख्या कंट्रोल किया, जैसे तमिलनाडु, केरल उनकी सीटें कम बढ़ेंगी। और जहां आबादी बेकाबू बढ़ी, जैसे यूपी, बिहार वहां सीटों की बढ़ोत्तरी अधिक होगी। मतलब जिस राज्य ने आबादी कंट्रोल किया वो सजा पाएगा, जिसने आबादी बढ़ने दी उसे अधिक सीटें मिलेंगी। जिन राज्यों में विपक्ष की पकड़ है, वहां सीटें कम बढ़ेंगी। जहां भाजपा मजबूत है, वहां सीटें ऐसे बढ़ाई जायेंगे जिससे उनके प्रत्याशी जीतें। अभी 543 सांसदों में ही बहस का टाइम नहीं मिलता, 850 में क्या होगा? संसद नहीं, मेला लगेगा। कानून ऐसे पास होंगे जैसे टिकट कटते हैं बस स्टैंड पर। ये महिला आरक्षण के पीछे 2029 के लिए मोदी का चुनावी ट्रैप( फंदा)है। ये सीटें बढ़ाकर मूर्ख,अज्ञानी भक्त नेताओं की फौज खड़ी करना है। ये संसदीय लोकतंत्र को भीड़तंत्र के मेले में बदलना है जहां सबको बोलने सुनने का मौका ही नहीं मिलेगा। *अगर अभी भी किसी को लग रहा है कि मोदी महिलाओं के भले के लिए कर रहा है, तो वो या तो भक्ति में डूबा है,या फिर उसे सच जानने की उसे फुर्सत नहीं है।* जनता को भावनाओं में उलझाओ, आंकड़ों से डराओ, और फिर टैक्स बढ़ाकर अपनी सरकार मुद्दतों तक कायम रखो ।
- उत्तर पुस्तिका भी जमा कर दे, तब भी उसे 2 अंक दिए जाते हैं। मॉस्को विश्वविद्यालय में जब मुझे यह बात पहले दिन पता चली, तो मैं सचमुच हैरान रह गया। मुझे यह बिल्कुल तर्कसंगत नहीं लगा। मेरे मन में सवाल उठा — अगर किसी ने कुछ भी नहीं लिखा, तो उसे शून्य अंक क्यों नहीं मिलते? जिज्ञासा के कारण मैंने डॉ. थियोडोर मेद्रायेव से पूछा, “सर, यह कैसे सही है कि जिसने कुछ भी नहीं लिखा, उसे भी 2 अंक दिए जाएँ?” डॉ. मेद्रायेव मुस्कराए। फिर शांत और विचारशील स्वर में बोले : “शून्य का अर्थ है—अस्तित्वहीन। जब तक कोई व्यक्ति प्रयास कर रहा है, वह शून्य कैसे हो सकता है ? ज़रा सोचिए—कक्षा तक पहुँचने के लिए एक छात्र कितना प्रयास करता है। हो सकता है वह ठिठुरती ठंड में सुबह-सुबह उठा हो, दूर से बस, ट्राम या ट्रेन में खड़े-खड़े आया हो। भले ही उसने खाली काग़ज़ जमा किया हो, लेकिन उसका आना ही यह बताता है कि उसने कोशिश की। फिर मैं उसे शून्य कैसे दे सकता हूँ ?” उन्होंने आगे कहा : “हो सकता है छात्र उत्तर न लिख पाया हो। लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि उसका पूरा प्रयास मिटा दिया जाए ? जिन रातों में वह जागा, जिन कॉपियों को उसने खरीदा, जिन किताबों को खोला, जिन संघर्षों से वह गुज़रा—क्या हम सब कुछ नज़रअंदाज़ कर दें ? नहीं, मेरे प्रिय ! *इंसान कभी शून्य नहीं होता। जब हम शून्य देते हैं, तो हम उसका आत्मविश्वास छीन लेते हैं, उसके भीतर की आग बुझा देते हैं।* एक शिक्षक के रूप में हमारा उद्देश्य छात्रों को बार-बार खड़ा होने में मदद करना है—उन्हें हार मानने पर मजबूर करना नहीं।” मैं चुपचाप सुनता रहा। उस क्षण मेरे भीतर कुछ हिल गया। तब मुझे समझ आया— *शिक्षा केवल अंकों या लिखे गए उत्तरों का नाम नहीं है। शिक्षा लोगों को जीवित रखने की प्रक्रिया है, प्रयास को पहचानने की कला है, आशा की रक्षा करने का माध्यम है।* उस दिन डॉ. मेद्रायेव ने मुझे एक गहरी सच्चाई सिखाई : *शिक्षा केवल ज्ञान का वितरण नहीं है, बल्कि मानवता का अभ्यास है।* काग़ज़ पर लगा शून्य अक्सर छात्रों के लिए मृत्यु-घंटी बन जाता है। वह शून्य उन्हें भय से भर देता है, रुचि छीन लेता है और धीरे-धीरे सीखने से घृणा पैदा कर देता है। लेकिन एक शिक्षक का दायित्व है प्रोत्साहित करना, आश्वस्त करना और कहना— _*“तुम कर सकते हो। फिर से कोशिश करो।”*_ जब हम खाली उत्तर पुस्तिका पर भी न्यूनतम अंक देते हैं, तो हम वास्तव में यह कहते हैं— “तुम शून्य नहीं हो। तुम अब भी महत्वपूर्ण हो। तुम सक्षम हो। तुम असफल नहीं हुए—बस इस बार सफल नहीं हो पाए। फिर से प्रयास करो।” यही सच्ची शिक्षा है। एक छात्र का भविष्य शिक्षक के हाथों में आकार लेता है। अगर शिक्षक थोड़ा और मानवीय बन जाएँ, अगर वे अंकों से परे प्रयास को देखना सीख लें, तो कितने ही हतोत्साहित छात्र फिर से सपने देखने का साहस कर सकते हैं। मुझे लगता है यह कहानी केवल रूस तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसे दुनिया भर के शिक्षकों तक पहुँचना चाहिए। क्योंकि शून्य अंक कभी शिक्षा नहीं होते। शून्य अंक अक्सर किसी की यात्रा का अंत होते हैं। जब तक कोई व्यक्ति प्रयास कर रहा है, वह कम से कम आश्वासन और पहचान का अधिकारी है। — *रूस में अध्ययनरत एक अज्ञात भारतीय छात्र द्वारा लिखित*1
- पचपदरा रिफाइनरी राजस्थान के बालोतरा जिले में स्थित एक मेगा पेट्रोकेमिकल प्लांट है! जिसे 72000 करोड़ की लागत से यह कंपलेक्स बनाया गया था! इसका उद्घाटन 21 अप्रैल 2026 को नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाना था !उद्घाटन से एक दिन पहले इसमें भीषण आग लग गया 😢😢1
- 20 अप्रैल 2026। राजस्थान के पचपदरा रिफाइनरी में सोमवार को भीषण आग लग गई, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। यह घटना उद्घाटन से एक दिन पहले हुई, जिसमें नरेंद्र मोदी के शामिल होने की संभावना थी। आग लगते ही दमकल टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की इस महत्वपूर्ण परियोजना में आग लगने से सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।1
- Post by संवाददाता दैनिक कंचन केसरी1
- भिवाड़ी: चौपानकी औद्योगिक क्षेत्र में स्थित Balkrishna Industries Limited (BKT) में श्रमिकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल शुरू कर दी1
- आज दिनांक 20 अप्रैल 2026 सोमवार को महाराजा सूरजमल सभागार भरतपुर में अधिवक्ता परिषद राजस्थान जिला भरतपुर इकाई द्वारा अक्षय तृतीया एवं भगवान श्री परशुराम जन्मोत्सव के उपलक्ष में समय दोपहर 11:00 से 2:00 तक अधिवक्ता मिलन एवं स्नेह भोज का आयोजन किया गया जिसका विधिवत प्रारंभ भगवान श्री राधा कृष्ण एवं भगवान श्री परशुराम जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं भोग अर्पण कर किया गया उक्त कार्यक्रम में अधिवक्ता परिषद के समस्त कार्यकर्ता एवं अन्य सभी अधिवक्ता साथियों ने स्नेह भोज का आनंद लिया वह सहभागी रहे उक्त जानकारी अधिवक्ता परिषद के प्रदेश मंत्री चंद्र किशोर भारद्वाज द्वारा दी गई4
- Post by पत्रकार1
- अलवर के मत्स्य औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरों को 10 से ₹12000 मासिक वेतन मिलना एक आर्थिक शोषण का संकेत देता है जिले के अधिकारियों को इन पर विशेष ध्यान देना चाहिए 🙏🙏1