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बेरसिया की बड़ी खबर क्या किसानों के हक पर डाका डाल रहे हैं विधायक *किसानों के नाम पर खुली लूट के संरक्षक हैं बैरसिया विधायक विष्णु खत्री* *क्या किसानों के हक पर डाका डाल रहे हैं विधायक?* *किसान हितैषी दावों के बीच सवालों में भाजपा विधायक* *किसानों के हक पर प्रहार? विष्णु खत्री पर उठते गंभीर सवाल* *क्‍या विधायक जैसे पद पर रहना चाहिए खत्री को?* *विजया पाठक, एडिटर, जगत विजन* मध्यप्रदेश में एक ओर जहां राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बोनस देने और कृषि को लाभकारी बनाने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर सत्ताधारी दल के ही एक विधायक पर किसानों के शोषण के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। बैरसिया से विधायक विष्णु खत्री पर आरोप है कि उन्होंने गरीब और कमजोर किसानों से सस्ते दामों पर बड़ी मात्रा में गेहूं खरीदकर उसे अपने निजी वेयरहाउस में संग्रहित किया और बाद में सरकारी खरीद में ऊंचे दामों पर बेचकर लाभ कमाया। यह मामला केवल एक व्यक्ति के आचरण का नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की पारदर्शिता, जवाबदेही और किसान हितैषी दावों पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। *किसानों से सस्ते में खरीद, मुनाफे का खेल?* आरोपों के अनुसार विधायक विष्णु खत्री ने लगभग 500 टन गेहूं किसानों से बाजार भाव से कम कीमत पर खरीदा। ये किसान मुख्यतः छोटे और सीमांत वर्ग के बताए जा रहे हैं, जो आर्थिक दबाव, ऋण या तात्कालिक जरूरतों के चलते अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर होते हैं। यदि ये आरोप सही हैं, तो यह सीधे-सीधे किसानों की मजबूरी का फायदा उठाने का मामला बनता है। यह भी कहा जा रहा है कि खरीदा गया गेहूं बैरसिया स्थित उनके निजी वेयरहाउस में जमा किया गया, जिसे बाद में सरकारी खरीद प्रणाली में ऊंचे दामों पर बेचा गया। यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह केवल एक व्यापारिक गतिविधि है या सत्ता और प्रभाव का दुरुपयोग कर सुनियोजित तरीके से लाभ कमाने का प्रयास? *सरकार के दावों और जमीनी हकीकत में अंतर* मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार यह दावा करते रहे हैं कि राज्य सरकार किसानों के हित में कार्य कर रही है। गेहूं पर बोनस, एमएसपी में वृद्धि, सिंचाई सुविधाएं और बिजली आपूर्ति जैसे कदमों को किसान हितैषी बताया जाता है। लेकिन यदि उन्हीं की सरकार के विधायक पर किसानों से सस्ते में खरीद और महंगे में बेचने के आरोप लगते हैं, तो यह सरकार की नीतियों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। क्या यह संभव है कि एक विधायक इतने बड़े स्तर पर खरीद-फरोख्त करे और प्रशासन को इसकी जानकारी न हो? क्या यह स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की मिलीभगत का संकेत है? या फिर यह पूरे सिस्टम में व्याप्त खामियों का परिणाम है? *वेयरहाउस में जमा किया अनाज* बैरसिया स्थित निजी वेयरहाउस में सैकड़ों टन गेहूं जमा होने की बात सामने आई है। यह स्थिति कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती है। क्या इस भंडारण की जानकारी संबंधित विभागों को थी? क्या इस गेहूं की खरीद और भंडारण वैधानिक प्रक्रिया के तहत हुई? क्या इस अनाज को बाद में सरकारी खरीद केंद्रों के माध्यम से बेचा गया? यदि इन सवालों के जवाब स्पष्ट नहीं हैं, तो यह मामला केवल नैतिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक और कानूनी जांच का भी विषय बन जाता है। *किसानों के साथ अन्याय या संगठित शोषण?* मध्यप्रदेश को देश का “फूड बास्केट” कहा जाता है। यहां के किसान देश की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसे में यदि वही किसान शोषण का शिकार होते हैं, तो यह अत्यंत गंभीर स्थिति है। छोटे किसान अक्सर बाजार की अस्थिरता, भंडारण की कमी और नकदी संकट के कारण अपनी उपज कम दामों पर बेचने को मजबूर होते हैं। यदि इस स्थिति का फायदा कोई जनप्रतिनिधि उठाता है, तो यह न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ भी है। *राजनीतिक जिम्मेदारी और जवाबदेही* यह मामला अब केवल स्थानीय स्तर का नहीं रह गया है। यह सीधे तौर पर राज्य सरकार और सत्ताधारी दल की जवाबदेही से जुड़ता है। क्या मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस मामले में निष्पक्ष जांच के आदेश देंगे? क्या भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल इस मुद्दे पर कोई कार्रवाई करेंगे? यदि कार्रवाई नहीं होती है, तो यह संदेश जाएगा कि सत्ता में बैठे लोगों के लिए अलग नियम हैं और आम किसानों के लिए अलग। *सत्ता का दुरुपयोग या सिस्टम की विफलता?* यह भी जरूरी है कि इस मामले को व्यापक संदर्भ में देखा जाए। क्या यह केवल एक विधायक का व्यक्तिगत मामला है, या यह उस बड़े सिस्टम का हिस्सा है जहां बिचौलियों की भूमिका अभी भी मजबूत है। किसानों को सीधे बाजार तक पहुंच नहीं मिल पा रही। सरकारी खरीद प्रणाली में पारदर्शिता की कमी है। यदि ऐसा है, तो यह केवल एक व्यक्ति की गलती नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की विफलता है। *विपक्ष के आरोप और जनता की नजर* विपक्ष लगातार इस मुद्दे को उठा रहा है और इसे किसानों के साथ “आर्थिक अन्याय” बता रहा है। यह आरोप लगाया जा रहा है कि भाजपा सरकार किसान हितैषी होने का दावा करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर उसके ही विधायक किसानों का शोषण कर रहे हैं। जनता भी अब इस मामले को गंभीरता से देख रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह चर्चा का विषय बन चुका है कि यदि जनप्रतिनिधि ही इस तरह के कार्यों में शामिल होंगे, तो किसानों को न्याय कैसे मिलेगा? अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच होगी? क्या दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी? *किसान हित या राजनीतिक संरक्षण?* बैरसिया विधायक विष्णु खत्री पर लगे आरोपों ने मध्यप्रदेश की राजनीति और कृषि व्यवस्था दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतीक बन सकता है, जहां सत्ता का उपयोग सेवा के बजाय लाभ के लिए किया जाता है। यदि सरकार वास्तव में किसानों की हितैषी है, तो उसे इस मामले में पारदर्शी और कठोर कार्रवाई करनी होगी। अन्यथा “किसान कल्याण” केवल एक नारा बनकर रह जाएगा। *क्रमश:*

17 hrs ago
user_महेश कुमार
महेश कुमार
Artist बैरसिया, भोपाल, मध्य प्रदेश•
17 hrs ago
39fc0deb-1cbc-4ba3-94b2-6880f834b789

बेरसिया की बड़ी खबर क्या किसानों के हक पर डाका डाल रहे हैं विधायक *किसानों के नाम पर खुली लूट के संरक्षक हैं बैरसिया विधायक विष्णु खत्री* *क्या किसानों के हक पर डाका डाल रहे हैं विधायक?* *किसान हितैषी दावों के बीच सवालों में भाजपा विधायक* *किसानों के हक पर प्रहार? विष्णु खत्री पर उठते गंभीर सवाल* *क्‍या विधायक जैसे पद पर रहना चाहिए खत्री को?* *विजया पाठक, एडिटर, जगत विजन* मध्यप्रदेश में एक ओर जहां राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बोनस देने और कृषि को लाभकारी बनाने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर सत्ताधारी दल के ही एक विधायक पर किसानों के शोषण के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। बैरसिया से विधायक विष्णु खत्री पर आरोप है कि उन्होंने गरीब और कमजोर किसानों से सस्ते दामों पर बड़ी मात्रा में गेहूं खरीदकर उसे अपने निजी वेयरहाउस में संग्रहित किया और बाद में सरकारी खरीद में ऊंचे दामों पर बेचकर लाभ कमाया। यह मामला केवल एक व्यक्ति के आचरण का नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की पारदर्शिता, जवाबदेही और किसान हितैषी दावों पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। *किसानों से सस्ते में खरीद, मुनाफे का खेल?* आरोपों के अनुसार विधायक विष्णु खत्री ने लगभग 500 टन गेहूं किसानों से बाजार भाव से कम कीमत पर खरीदा। ये किसान मुख्यतः छोटे और सीमांत वर्ग के बताए जा रहे हैं, जो आर्थिक दबाव, ऋण या तात्कालिक जरूरतों के चलते अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर होते हैं। यदि ये आरोप सही हैं, तो यह सीधे-सीधे किसानों की मजबूरी का फायदा उठाने का मामला बनता है। यह भी कहा जा रहा है कि खरीदा गया गेहूं बैरसिया स्थित उनके निजी वेयरहाउस में जमा किया गया, जिसे बाद में सरकारी खरीद प्रणाली में ऊंचे दामों पर बेचा गया। यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह केवल एक व्यापारिक गतिविधि है या सत्ता और प्रभाव का दुरुपयोग कर सुनियोजित तरीके से लाभ कमाने का प्रयास? *सरकार के दावों और जमीनी हकीकत में अंतर* मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार यह दावा करते रहे हैं कि राज्य सरकार किसानों के हित में कार्य कर रही है। गेहूं पर बोनस, एमएसपी में वृद्धि, सिंचाई सुविधाएं और बिजली आपूर्ति जैसे कदमों को किसान हितैषी बताया जाता है। लेकिन यदि उन्हीं की सरकार के विधायक पर किसानों से सस्ते में खरीद और महंगे में बेचने के आरोप लगते हैं, तो यह सरकार की नीतियों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। क्या यह संभव है कि एक विधायक इतने बड़े स्तर पर खरीद-फरोख्त करे और प्रशासन को इसकी जानकारी न हो? क्या यह स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की मिलीभगत का संकेत है? या फिर यह पूरे सिस्टम में व्याप्त खामियों का परिणाम है? *वेयरहाउस में जमा किया अनाज* बैरसिया स्थित निजी वेयरहाउस में सैकड़ों टन गेहूं जमा होने की बात सामने आई है। यह स्थिति कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती है। क्या इस भंडारण की जानकारी संबंधित विभागों को थी? क्या इस गेहूं की खरीद और भंडारण वैधानिक प्रक्रिया के तहत हुई? क्या इस अनाज को बाद में सरकारी खरीद केंद्रों के माध्यम से बेचा गया? यदि इन सवालों के जवाब स्पष्ट नहीं हैं, तो यह मामला केवल नैतिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक और कानूनी जांच का भी विषय बन जाता है। *किसानों के साथ अन्याय या संगठित शोषण?* मध्यप्रदेश को देश का “फूड बास्केट” कहा जाता है। यहां के किसान देश की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसे में यदि वही किसान शोषण का शिकार होते हैं, तो यह अत्यंत गंभीर स्थिति है। छोटे किसान अक्सर बाजार की अस्थिरता, भंडारण की कमी और नकदी संकट के कारण अपनी उपज कम दामों पर बेचने को मजबूर होते हैं। यदि इस स्थिति का फायदा कोई जनप्रतिनिधि उठाता है, तो यह न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ भी है। *राजनीतिक जिम्मेदारी और जवाबदेही* यह मामला अब केवल स्थानीय स्तर का नहीं रह गया है। यह सीधे तौर पर राज्य सरकार और सत्ताधारी दल की जवाबदेही से जुड़ता है। क्या मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस मामले में निष्पक्ष जांच के आदेश देंगे? क्या भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल इस मुद्दे पर कोई कार्रवाई करेंगे? यदि कार्रवाई नहीं होती है, तो यह संदेश जाएगा कि सत्ता में बैठे लोगों के लिए अलग नियम हैं और आम किसानों के लिए अलग। *सत्ता का दुरुपयोग या सिस्टम की विफलता?* यह भी जरूरी है कि इस मामले को व्यापक संदर्भ में देखा जाए। क्या यह केवल एक विधायक का व्यक्तिगत मामला है, या यह उस बड़े सिस्टम का हिस्सा है जहां बिचौलियों की भूमिका अभी भी मजबूत है। किसानों को सीधे बाजार तक पहुंच नहीं मिल पा रही। सरकारी खरीद प्रणाली में पारदर्शिता की कमी है। यदि ऐसा है, तो यह केवल एक व्यक्ति की गलती नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की विफलता है। *विपक्ष के आरोप और जनता की नजर* विपक्ष लगातार इस मुद्दे को उठा रहा है और इसे किसानों के साथ “आर्थिक अन्याय” बता रहा है। यह आरोप लगाया जा रहा है कि भाजपा सरकार किसान हितैषी होने का दावा करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर उसके ही विधायक किसानों का शोषण कर रहे हैं। जनता भी अब इस मामले को गंभीरता से देख रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह चर्चा का विषय बन चुका है कि यदि जनप्रतिनिधि ही इस तरह के कार्यों में शामिल होंगे, तो किसानों को न्याय कैसे मिलेगा? अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच होगी? क्या दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी? *किसान हित या राजनीतिक संरक्षण?* बैरसिया विधायक विष्णु खत्री पर लगे आरोपों ने मध्यप्रदेश की राजनीति और कृषि व्यवस्था दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतीक बन सकता है, जहां सत्ता का उपयोग सेवा के बजाय लाभ के लिए किया जाता है। यदि सरकार वास्तव में किसानों की हितैषी है, तो उसे इस मामले में पारदर्शी और कठोर कार्रवाई करनी होगी। अन्यथा “किसान कल्याण” केवल एक नारा बनकर रह जाएगा। *क्रमश:*

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  • ईरान युद्ध के कारण भारत में इंटरनेट पर मंडराया खतरा, जानें बचाव के क्या उपाय विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट के पूरी तरह ठप होने की संभावना कम है। इंटरनेट का ढांचा सड़कों के जाल की तरह होता है। अगर एक रास्ता (केबल) बंद होता है, तो डाटा को दूसरे रास्ते (रूट) पर मोड़ दिया जाता है। मिडिल ईस्ट में जारी संकट की वजह से समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट की तारों को खतरा पैदा हो गया है। भारत का ज्यादातर इंटरनेट डाटा इन्हीं तारों के जरिए आता-जाता है। यदि ये तारें टूटती हैं तो इंटरनेट पूरी तरह बंद तो नहीं होगा, पर कंपनियों को डाटा भेजने के लिए दूसरे लंबे रास्तों का सहारा लेना पड़ेगा। भारत का लगभग 60% इंटरनेट ट्रैफिक मुंबई के रास्ते यूरोप जाता है। यह रास्ता लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे तनावपूर्ण क्षेत्रों से होकर गुजरता है। शेष 40% ट्रैफिक चेन्नई के रास्ते सिंगापुर और प्रशांत महासागर की ओर जाता है। फिलहाल लैंडिंग स्टेशनों पर भारत में अभी 17 अंतरराष्ट्रीय केबल काम कर रहीं। क्या इंटरनेट पूरी तरह बंद होगा? विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट के पूरी तरह ठप होने की संभावना कम है। इंटरनेट का ढांचा सड़कों के जाल की तरह होता है। अगर एक रास्ता (केबल) बंद होता है, तो डाटा को दूसरे रास्ते (रूट) पर मोड़ दिया जाता है। युद्ध के कारण समुद्र के नीचे केबल ठीक करना लगभग नामुमकिन हो जाता है। बचाव का रास्ता भारत में अभी 14 लैंडिंग स्टेशनों पर 17 अंतरराष्ट्रीय केबल काम कर रहीं। भारत को नए समुद्री रास्तों की तलाश करनी होगी, जो पश्चिम एशिया के इलाकों से न गुजरें। समुद्र के नीचे केबल ठीक करने के लिए भारत को अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ानी होगी। एयरटेल जैसी कंपनियां जोखिम भरे क्षेत्रों से बचकर वैकल्पिक रूट तैयार करने पर ध्यान दे रहीं।
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    ईरान युद्ध के कारण भारत में इंटरनेट पर मंडराया खतरा, जानें बचाव के क्या उपाय
विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट के पूरी तरह ठप होने की संभावना कम है। इंटरनेट का ढांचा सड़कों के जाल की तरह होता है। अगर एक रास्ता (केबल) बंद होता है, तो डाटा को दूसरे रास्ते (रूट) पर मोड़ दिया जाता है।
मिडिल ईस्ट में जारी संकट की वजह से समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट की तारों को खतरा पैदा हो गया है। भारत का ज्यादातर इंटरनेट डाटा इन्हीं तारों के जरिए आता-जाता है। यदि ये तारें टूटती हैं तो इंटरनेट पूरी तरह बंद तो नहीं होगा, पर कंपनियों को डाटा भेजने के लिए दूसरे लंबे रास्तों का सहारा लेना पड़ेगा।
भारत का लगभग 60% इंटरनेट ट्रैफिक मुंबई के रास्ते यूरोप जाता है। यह रास्ता लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे तनावपूर्ण क्षेत्रों से होकर गुजरता है। शेष 40% ट्रैफिक चेन्नई के रास्ते सिंगापुर और प्रशांत महासागर की ओर जाता है। फिलहाल लैंडिंग स्टेशनों पर भारत में अभी 17 अंतरराष्ट्रीय केबल काम कर रहीं।
क्या इंटरनेट पूरी तरह बंद होगा?
विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट के पूरी तरह ठप होने की संभावना कम है। इंटरनेट का ढांचा सड़कों के जाल की तरह होता है। अगर एक रास्ता (केबल) बंद होता है, तो डाटा को दूसरे रास्ते (रूट) पर मोड़ दिया जाता है। युद्ध के कारण समुद्र के नीचे केबल ठीक करना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
बचाव का रास्ता
भारत में अभी 14 लैंडिंग स्टेशनों पर 17 अंतरराष्ट्रीय केबल काम कर रहीं। भारत को नए समुद्री रास्तों की तलाश करनी होगी, जो पश्चिम एशिया के इलाकों से न गुजरें। समुद्र के नीचे केबल ठीक करने के लिए भारत को अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ानी होगी। एयरटेल जैसी कंपनियां जोखिम भरे क्षेत्रों से बचकर वैकल्पिक रूट तैयार करने पर ध्यान दे रहीं।
    user_Jyoti kumari
    Jyoti kumari
    Berasia, Bhopal•
    5 hrs ago
  • Post by Shafiq Khan
    1
    Post by Shafiq Khan
    user_Shafiq Khan
    Shafiq Khan
    Huzur, Bhopal•
    22 min ago
  • भोपाल ब्रेकिंग *भोपाल स्टेशन का वीडियो हुआ वायरल* *5 सेकंड में 4-5 बार ट्रेन-प्लेटफॉर्म के बीच घिसटा युवक* भोपाल रेलवे स्टेशन पर चलती गाड़ी में चढ़ने की कोशिश में बड़ा हादसा घटना में युवक गंभीर रूप से घायल, युवक का हमीदिया अस्पताल में चल रहा इलाज घटना 31 मार्च की रात का है, युवक भोपाल इंदौर एक्सप्रेस ट्रेन खुलने के बाद चढ़ने की कोशिश में नीचे गिर गया सामने आया दिल दहला देने वाला CCTV फुटेज
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    भोपाल ब्रेकिंग 
*भोपाल स्टेशन का वीडियो हुआ वायरल*
*5 सेकंड में 4-5 बार ट्रेन-प्लेटफॉर्म के बीच घिसटा युवक*
भोपाल रेलवे स्टेशन पर चलती गाड़ी में चढ़ने की कोशिश में बड़ा हादसा
घटना में युवक गंभीर रूप से घायल, युवक का हमीदिया अस्पताल में चल रहा इलाज
घटना 31 मार्च की रात का है, युवक भोपाल इंदौर एक्सप्रेस ट्रेन खुलने के बाद चढ़ने की कोशिश में नीचे गिर गया
सामने आया दिल दहला देने वाला CCTV फुटेज
    user_Aamir Khan
    Aamir Khan
    Local News Reporter हुजूर, भोपाल, मध्य प्रदेश•
    43 min ago
  • Post by Asif Khan
    1
    Post by Asif Khan
    user_Asif Khan
    Asif Khan
    पत्रकार हुजूर, भोपाल, मध्य प्रदेश•
    44 min ago
  • भोपाल रातीबड़आ इंदौर हाईवे का यह नजारा
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    भोपाल रातीबड़आ इंदौर हाईवे का यह नजारा
    user_Mohammad faisal
    Mohammad faisal
    हुजूर, भोपाल, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • *मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं निकाह योजना को पलीता लगते अधिकारी मुस्लिम समुदाय के साथ भेद भाव के आरोप...* मध्यप्रदेश की मोहन सरकार गरीब बेटियों की शादी को लेकर मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं निकाह योजना को बड़ी सामाजिक पहल बताती है… लेकिन सीहोर जिले की भैरूंदा तहसील से सामने आई तस्वीरें सरकार के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। 19 अप्रैल को सीहोर जिले की भेरुन्दा तहसील में आयोजित होने वाले सामूहिक विवाह सम्मेलन के लिए भैरूंदा जनपद पंचायत कार्यालय में आवेदन जमा किए जा रहे हैं। आरोप है कि अलग-अलग तहसीलों से आए मुस्लिम समुदाय के कई लोग सुबह 6 बजे से लाइन में लगे रहे… लेकिन जिम्मेदार कर्मचारियों ने उन्हें लाइन से हटा दिया। लोगों का कहना है कि एक तरफ दूसरे समुदाय के आवेदकों के फार्म जमा कर तत्काल रिसीविंग दी जा रही थी… वहीं मुस्लिम पक्ष के आवेदकों के साथ अलग व्यवहार किया गया। विरोध होने के बाद अधिकारियों ने फार्म तो ले लिए… लेकिन किसी प्रकार की रिसीविंग नहीं दी गई। अब सवाल यह है कि बिना रसीद के इन आवेदनों का रिकॉर्ड क्या रहेगा… और क्या ये जोड़े योजना के लाभ से वंचित हो सकते हैं? सरकार की जिस योजना का उद्देश्य सामाजिक समानता और सभी वर्गों को सम्मान देना है… उसी योजना को जमीनी स्तर पर अधिकारी ही पलीता लगाते नजर आ रहे हैं। क्या अधिकारियों की लापरवाही से बीजेपी सरकार की योजनाओं की साख पर असर पड़ रहा है? मीडिया द्वारा जब जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल पूछे गए… तो अधिकारी जवाब देने से बचते नजर आए। अब बड़े सवाल— क्या सरकारी योजनाओं में सभी समुदायों को समान अधिकार मिल रहा है? क्या प्रशासनिक स्तर पर भेदभाव की जांच होगी? और क्या मोहन सरकार अपने अधिकारियों की जवाबदेही तय करेगी? फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है… लेकिन भैरूंदा से उठे ये सवाल अब सीधे शासन व्यवस्था की पारदर्शिता पर खड़े हो रहे हैं।
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    *मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं निकाह योजना को पलीता लगते अधिकारी मुस्लिम समुदाय के साथ भेद भाव के आरोप...*
मध्यप्रदेश की मोहन सरकार गरीब बेटियों की शादी को लेकर मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं निकाह योजना को बड़ी सामाजिक पहल बताती है… लेकिन सीहोर जिले की भैरूंदा तहसील से सामने आई तस्वीरें सरकार के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
19 अप्रैल को सीहोर जिले की भेरुन्दा तहसील में आयोजित होने वाले सामूहिक विवाह सम्मेलन के लिए भैरूंदा जनपद पंचायत कार्यालय में आवेदन जमा किए जा रहे हैं। आरोप है कि अलग-अलग तहसीलों से आए मुस्लिम समुदाय के कई लोग सुबह 6 बजे से लाइन में लगे रहे… लेकिन जिम्मेदार कर्मचारियों ने उन्हें लाइन से हटा दिया।
लोगों का कहना है कि एक तरफ दूसरे समुदाय के आवेदकों के फार्म जमा कर तत्काल रिसीविंग दी जा रही थी… वहीं मुस्लिम पक्ष के आवेदकों के साथ अलग व्यवहार किया गया।
विरोध होने के बाद अधिकारियों ने फार्म तो ले लिए… लेकिन किसी प्रकार की रिसीविंग नहीं दी गई। अब सवाल यह है कि बिना रसीद के इन आवेदनों का रिकॉर्ड क्या रहेगा… और क्या ये जोड़े योजना के लाभ से वंचित हो सकते हैं?
सरकार की जिस योजना का उद्देश्य सामाजिक समानता और सभी वर्गों को सम्मान देना है… उसी योजना को जमीनी स्तर पर अधिकारी ही पलीता लगाते नजर आ रहे हैं।
क्या अधिकारियों की लापरवाही से बीजेपी सरकार की योजनाओं की साख पर असर पड़ रहा है?
मीडिया द्वारा जब जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल पूछे गए… तो अधिकारी जवाब देने से बचते नजर आए।
अब बड़े सवाल—
क्या सरकारी योजनाओं में सभी समुदायों को समान अधिकार मिल रहा है?
क्या प्रशासनिक स्तर पर भेदभाव की जांच होगी?
और क्या मोहन सरकार अपने अधिकारियों की जवाबदेही तय करेगी?
फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है… लेकिन भैरूंदा से उठे ये सवाल अब सीधे शासन व्यवस्था की पारदर्शिता पर खड़े हो रहे हैं।
    user_K K D NEWS MP/CG
    K K D NEWS MP/CG
    TV News Anchor हुजूर, भोपाल, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • Bhopal putly ghar ward no 14-17- dono sit ke daroga ji ek dosre pr taltay hoy or 4 din ho gay awgat kary hoy pr nagr nigam ke nind nahi khuli
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    Bhopal putly ghar ward no 14-17- dono sit ke daroga ji ek dosre pr taltay hoy or 4 din ho gay awgat kary hoy pr nagr nigam ke nind nahi khuli
    user_Nawab ali
    Nawab ali
    खबरों की रोशनी दैनिक अखबार हुजूर, भोपाल, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • Bhopal ratibad Indore Highway per truck Dhasaa
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    Bhopal ratibad Indore Highway per truck Dhasaa
    user_Aamir Khan
    Aamir Khan
    Local News Reporter हुजूर, भोपाल, मध्य प्रदेश•
    54 min ago
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