जमानत पर छूटे सरगना समेत उसके साथियों के बढ़ते खौफ से दहशतज़दा व्यापारी ने एक्स पर लगाई प्रभावी कार्यवाही की गुहार - काबिलेगौर "कुछ हो गया तो जिम्मेदार होगा कौन?" सुबह घर के पास संदिग्ध पहुंचने से हड़कंप 'नशा सिंडिकेट' पर कार्रवाई में देरी पर सवाल शाहाबाद के मोहल्ला पठकाना में मचा बबाल, शाहाबाद (हरदोई) उत्तरप्रदेश से उड़ीसा तक सक्रिय शाहाबाद के अंतर्राज्यीय 'नशा सिंडिकेट' का साया मोहल्ला पठकाना के व्यापारी सोमेन्द्र मिश्रा का खाया पिया हराम किए है, हालांकि यह मामला पुलिस की लापरवाही के चलते लगातार गहराता बताया जा रहा है। सीसीटीवी तोड़ने और धमकी देने के मामले में पहले से डरे सहमे व्यापारी ने अब खुलकर अपनी जान का खतरा एक्स पर जताया है। पीड़ित ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। व्यापारी का आरोप है कि आज सुबह करीब 7:45 बजे एक आरोपी महिला अपने बेटे के साथ उसके घर (रामलीला मैदान क्षेत्र) के पास पहुंची, जिससे उसे किसी अप्रिय घटना की आशंका सताने लगी। व्यापारी ने साफ कहा कि “कोई घटना होने से पहले आरोपियों की गिरफ्तारी की जाए।” पहले भी हो चुका है हमला, CCTV तोड़कर दी थी धमकी गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही पीड़ित व्यापारी के गोदाम और कार्यालय पर हमला किया गया था। आरोप है कि बदमाशों ने सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए, ताला तोड़ा और विरोध करने पर गाली-गलौज के साथ जान से मारने की धमकी दी। इस मामले में सरगना विनय शुक्ला समेत कई लोग नामजद हैं। जमानत पर बाहर है नशा सिंडीकेट का इलाकाई सरगना सूत्रों के मुताबिक, मुख्य आरोपी विनय शुक्ला वही है जिसे 27 अप्रैल 2025 को मिर्जापुर में 51 किलो गांजा के साथ गिरफ्तार किया गया था। अंतर्राज्यीय नशा तस्करी नेटवर्क से जुड़े इस आरोपी के जमानत पर बाहर आने के बाद से इलाके में फिर से सक्रियता बढ़ी है। 2000 के दशक से सक्रिय है गिरोह बताया जा रहा है कि यह कोई नया गैंग नहीं, बल्कि 2000 के दशक से सक्रिय संगठित गिरोह है, जिसके मृतक और जीवित सदस्यों के खिलाफ कुल मिलाकर दर्जनों संज्ञेय अपराध रिकॉर्ड पर दर्ज रहे हैं। अब भी जीवित एवं सक्रिय गिरोह के हिस्ट्रीशीटरों के खिलाफ हत्या, लूट, हत्या के प्रयास, लूट में हत्या जैसे मुकदमों के अतिरिक्त एनडीपीएस एक्ट जैसे गंभीर मुकदमे दर्ज रहे हैं। हरदोई, शाहजहांपुर, फर्रुखाबाद समेत कई जिलों में इस गैंग का खौफ रहा है। कई बदमाश मुठभेड़ और गैंगवार में मारे जा चुके हैं, लेकिन गिरोह का नेटवर्क लगातार फैलता गया जो कि अब नहीं फैलता जा रहा है और उत्तरप्रदेश के बाहर तक अपने पँख फैलाने के लिए फड़फड़ा रहा है जिसमें कई पुलिस अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। हरदोई पुलिस पर फिर उठे सवाल पीड़ित व्यापारी का आरोप है कि कई बार शिकायत और सबूत देने के बावजूद पुलिस ने पहले कार्रवाई नहीं की। बाद में मामले को उसे कानून की काफी जानकारी न होने के कारण हल्की धाराओं में दर्ज किया गया, जिससे आरोपियों को तत्काल गिरफ्तारी के बाद जेल के झंझट से राहत मिलती दिख रही है। अब ताजा घटनाक्रम—सुबह घर के पास संदिग्धों की मौजूदगी—ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। पुलिस का पक्ष पुलिस का कहना है कि मामले में मुकदमा दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। दो आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। बड़ा सवाल 👉 क्या कार्रवाई से पहले किसी बड़ी घटना का इंतजार किया जा रहा है? 👉 या फिर ‘नशा सिंडिकेट’ का नेटवर्क अब भी सिस्टम पर भारी है? शाहाबाद में बढ़ती दहशत के बीच अब सबकी नजर पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी है। हालांकि इस अभ्यस्त संगठित गिरोह का सबसे शातिर सर्कस असरदार सरगना अपने कई प्रभावशाली साथियो हरदोई में रहता है और वहीं से इस मामले के आरोपी विनय शुक्ला आदि के जरिए उत्तरप्रदेश के विभिन्न जनपदों से लेकर उड़ीसा तक के नशा तस्करी सफर पर पैनी नजर रखता है जिसके ऊपर स्थानीय स्तर से लेकर जनपद स्तर तक के कई पुलिस अफसर बड़े मेहरबान रहे हैं जो कि इस जनपद से स्थानांतरण के बाद अब भी अपनी सरकारी सर्विस दांव पर लगाकर इस संगठित गिरोह की मदद कर रहे हैं, जिनमें से कई अफसरों को एक शिकायत के आधार पर बर्ष 2016-2017 के एक मामले में दिल्ली के पीसीआई न्यायालय द्वारा तलब किया गया था, जिनमें प्रमुख रूप से तत्कालीन क्षेत्राधिकारी अरविन्द कुमार बर्मा, तत्कालीन उपनिरीक्षक अशोक यादव आदि हाजिर भी हुए थे। इसके बाबजूद ऐसे अफसरों ने इस नशा सिंडीकेट गिरोह से वास्ता एवं सरोकार बिल्कुल खत्म नहीं किया और वक्त जरुरत इस गैंग के हरदोई में रहने बाले हिस्ट्रीशीटर सरगना समेत गिरोह की मास्टर माइंड स्टॉफ नर्स के साथ खड़े हैं जैसे कि सूत्र अब भी मिल रहे हैं। यह अलग बात कि इस गिरोह के लोग अचानक कहीं न कहीं गैर जनपदों की पुलिस की गिरफ्त में फँस जाते हैं और गिरोह से खैरख्वाह अफसर सूचना के बाद देर से मदद कर पाते हैं जैसे कि मिर्ज़ापुर जनपद के थाना अहिरौरा में फँसने के बाद जब तक सिफारिशें शुरू हुईं और उधर गैंग के कथित सरगना निखिल भाटी के नेटवर्क ने भी जब तक अपना असर दबाव बनाया तब तक गिरफ्तारी और बरामदगी फर्द तैयार हो गई हालांकि उसके बाद मिर्जापुर पुलिस ने गैंगस्टर लगाया कि दबाव बनने के बाद नहीं लगाया आखिर यह जानकारी आज तक नहीं मिली जबकि वहाँ की पुलिस से संपर्क भी किया गया लेकिन गैंगस्टर के सवाल पर पुलिस टॉल मटोल कर गई।
जमानत पर छूटे सरगना समेत उसके साथियों के बढ़ते खौफ से दहशतज़दा व्यापारी ने एक्स पर लगाई प्रभावी कार्यवाही की गुहार - काबिलेगौर "कुछ हो गया तो जिम्मेदार होगा कौन?" सुबह घर के पास संदिग्ध पहुंचने से हड़कंप 'नशा सिंडिकेट' पर कार्रवाई में देरी पर सवाल शाहाबाद के मोहल्ला पठकाना में मचा बबाल, शाहाबाद (हरदोई) उत्तरप्रदेश से उड़ीसा तक सक्रिय शाहाबाद के अंतर्राज्यीय 'नशा सिंडिकेट' का साया मोहल्ला पठकाना के व्यापारी सोमेन्द्र मिश्रा का खाया पिया हराम किए है, हालांकि यह मामला पुलिस की लापरवाही के चलते लगातार गहराता बताया जा रहा है। सीसीटीवी तोड़ने और धमकी देने के मामले में पहले से डरे सहमे व्यापारी ने अब खुलकर अपनी जान का खतरा एक्स पर जताया है। पीड़ित ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। व्यापारी का आरोप है कि आज सुबह करीब 7:45 बजे एक आरोपी महिला अपने बेटे के साथ उसके घर (रामलीला मैदान क्षेत्र) के पास पहुंची, जिससे उसे किसी अप्रिय घटना की आशंका सताने लगी। व्यापारी ने साफ कहा कि “कोई घटना होने से पहले आरोपियों की गिरफ्तारी की जाए।” पहले भी हो चुका है हमला, CCTV तोड़कर दी थी धमकी गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही पीड़ित व्यापारी के गोदाम और कार्यालय पर हमला किया गया था। आरोप है कि बदमाशों ने सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए, ताला तोड़ा और विरोध करने
पर गाली-गलौज के साथ जान से मारने की धमकी दी। इस मामले में सरगना विनय शुक्ला समेत कई लोग नामजद हैं। जमानत पर बाहर है नशा सिंडीकेट का इलाकाई सरगना सूत्रों के मुताबिक, मुख्य आरोपी विनय शुक्ला वही है जिसे 27 अप्रैल 2025 को मिर्जापुर में 51 किलो गांजा के साथ गिरफ्तार किया गया था। अंतर्राज्यीय नशा तस्करी नेटवर्क से जुड़े इस आरोपी के जमानत पर बाहर आने के बाद से इलाके में फिर से सक्रियता बढ़ी है। 2000 के दशक से सक्रिय है गिरोह बताया जा रहा है कि यह कोई नया गैंग नहीं, बल्कि 2000 के दशक से सक्रिय संगठित गिरोह है, जिसके मृतक और जीवित सदस्यों के खिलाफ कुल मिलाकर दर्जनों संज्ञेय अपराध रिकॉर्ड पर दर्ज रहे हैं। अब भी जीवित एवं सक्रिय गिरोह के हिस्ट्रीशीटरों के खिलाफ हत्या, लूट, हत्या के प्रयास, लूट में हत्या जैसे मुकदमों के अतिरिक्त एनडीपीएस एक्ट जैसे गंभीर मुकदमे दर्ज रहे हैं। हरदोई, शाहजहांपुर, फर्रुखाबाद समेत कई जिलों में इस गैंग का खौफ रहा है। कई बदमाश मुठभेड़ और गैंगवार में मारे जा चुके हैं, लेकिन गिरोह का नेटवर्क लगातार फैलता गया जो कि अब नहीं फैलता जा रहा है और उत्तरप्रदेश के बाहर तक अपने पँख फैलाने के लिए फड़फड़ा रहा है जिसमें कई पुलिस अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। हरदोई पुलिस पर फिर उठे सवाल पीड़ित व्यापारी का आरोप है कि कई बार शिकायत
और सबूत देने के बावजूद पुलिस ने पहले कार्रवाई नहीं की। बाद में मामले को उसे कानून की काफी जानकारी न होने के कारण हल्की धाराओं में दर्ज किया गया, जिससे आरोपियों को तत्काल गिरफ्तारी के बाद जेल के झंझट से राहत मिलती दिख रही है। अब ताजा घटनाक्रम—सुबह घर के पास संदिग्धों की मौजूदगी—ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। पुलिस का पक्ष पुलिस का कहना है कि मामले में मुकदमा दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। दो आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। बड़ा सवाल 👉 क्या कार्रवाई से पहले किसी बड़ी घटना का इंतजार किया जा रहा है? 👉 या फिर ‘नशा सिंडिकेट’ का नेटवर्क अब भी सिस्टम पर भारी है? शाहाबाद में बढ़ती दहशत के बीच अब सबकी नजर पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी है। हालांकि इस अभ्यस्त संगठित गिरोह का सबसे शातिर सर्कस असरदार सरगना अपने कई प्रभावशाली साथियो हरदोई में रहता है और वहीं से इस मामले के आरोपी विनय शुक्ला आदि के जरिए उत्तरप्रदेश के विभिन्न जनपदों से लेकर उड़ीसा तक के नशा तस्करी सफर पर पैनी नजर रखता है जिसके ऊपर स्थानीय स्तर से लेकर जनपद स्तर तक के कई पुलिस अफसर बड़े मेहरबान रहे हैं जो कि इस जनपद से स्थानांतरण के बाद अब भी अपनी सरकारी सर्विस दांव पर लगाकर इस
संगठित गिरोह की मदद कर रहे हैं, जिनमें से कई अफसरों को एक शिकायत के आधार पर बर्ष 2016-2017 के एक मामले में दिल्ली के पीसीआई न्यायालय द्वारा तलब किया गया था, जिनमें प्रमुख रूप से तत्कालीन क्षेत्राधिकारी अरविन्द कुमार बर्मा, तत्कालीन उपनिरीक्षक अशोक यादव आदि हाजिर भी हुए थे। इसके बाबजूद ऐसे अफसरों ने इस नशा सिंडीकेट गिरोह से वास्ता एवं सरोकार बिल्कुल खत्म नहीं किया और वक्त जरुरत इस गैंग के हरदोई में रहने बाले हिस्ट्रीशीटर सरगना समेत गिरोह की मास्टर माइंड स्टॉफ नर्स के साथ खड़े हैं जैसे कि सूत्र अब भी मिल रहे हैं। यह अलग बात कि इस गिरोह के लोग अचानक कहीं न कहीं गैर जनपदों की पुलिस की गिरफ्त में फँस जाते हैं और गिरोह से खैरख्वाह अफसर सूचना के बाद देर से मदद कर पाते हैं जैसे कि मिर्ज़ापुर जनपद के थाना अहिरौरा में फँसने के बाद जब तक सिफारिशें शुरू हुईं और उधर गैंग के कथित सरगना निखिल भाटी के नेटवर्क ने भी जब तक अपना असर दबाव बनाया तब तक गिरफ्तारी और बरामदगी फर्द तैयार हो गई हालांकि उसके बाद मिर्जापुर पुलिस ने गैंगस्टर लगाया कि दबाव बनने के बाद नहीं लगाया आखिर यह जानकारी आज तक नहीं मिली जबकि वहाँ की पुलिस से संपर्क भी किया गया लेकिन गैंगस्टर के सवाल पर पुलिस टॉल मटोल कर गई।
- वर्दी में दरोगा और महिला सिपाही की वायरल रील अब नए मोड़ पर है—जिसे भाजपा नेता बताया जा रहा था, अब पार्टी ने उससे पल्ला झाड़ लिया है!” हरदोई के मझिला थाने के दरोगा और महिला सिपाही की वायरल रील ने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें दोनों वर्दी में ‘भौकाल’ दिखाते नजर आए। शुरुआत में दावा किया गया कि रील भाजपा नेता इलियास गाजी के साथ बनाई गई है। उसके इंस्टाग्राम पर भाजपा से जुड़े कई फोटो और बड़े नेताओं के साथ मंच साझा करने के वीडियो भी मौजूद हैं। लेकिन रील के वायरल होते ही सियासी पारा भी चढ़ गया। शाहाबाद से लेकर पिहानी तक भाजपा नेताओं ने साफ कहा—इलियास गाजी का पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है। भाजपा जिला मीडिया प्रभारी अतुल सिंह ने भी दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि उक्त व्यक्ति का भाजपा से कोई संबंध नहीं है। अब सवाल ये है कि वर्दी में रील बनाने वाले कथित भाजपा नेता पर कार्यवाही हो न हो परन्तु पुलिसकर्मियों पर क्या कार्रवाई होगी…इस पर सभी की निगाहेँ इसलिए और भी अधिक तन्मयता से टिकी हैं क्योंकि हार्दिक पुलिस द्वारा एक्स पर दिए गए जबाब के मुताबिक संदर्भित प्रकरण में अपर पुलिस अधीक्षक शाहाबाद को जाँच एवं आवश्यक कार्यवाही के लिए निर्देशित किया गया है जबकि अपर पुलिस अधीक्षक की कार्यशैली से इधर के लगभग प्रत्येक न्यायप्रिय, निष्पक्ष, निर्भीक नागरिकों के असंतुष्ट होने के सूत्र मिल रहे हैं अंततः यही कारण है कि जैसे ही लोगों ने सुना कि ASP शाहाबाद को जाँच सौंपी गई है कि कार्यवाही की उम्मीद कम हो गई हालांकि ASP शाहाबाद ने पत्रकारों को बताया कि मामला संज्ञान में आया है जिसकी उनके द्वारा जाँच की जा रही है। अब देखना यह है क्या कुछ खुलाशा होगा और क्या कार्यवाही होगी, फिलहाल जांच और कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।4
- रियल न्यूज हरदोई सुरसा थाना क्षेत्र के अंतर्गत मिशन शक्ति फैज 5.0 के द्वितीय चरण के तहत जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में उपस्थित महिला उप निरीक्षक सुरेखा शर्मा ने महिलाओं को आत्मरक्षा के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए और समझाया आप लोगों को कुछ भी दिक्कत हो तो महत्वपूर्ण इन नंबरों पर आप लोग कॉल कर सकती है आपको तुरंत सहायता मिलेगी, जैसे 1076 मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 112 पुलिस हेल्पलाइन 102 गर्भवती महिलाओं एवं शिशुओं के लिए एंबुलेंस 1930 साइबर अपराध संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी। और थाने पर बने मिशन शक्ति केंद्र के भी बारे में जानकारी दी।1
- उत्तर प्रदेश में सीएम हेल्पलाइन 1076 में काम करने वाली महिला कर्मचारियों को पुलिस ने रोका.वह मार्च करते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर बढ़ रहे थे. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सीएम हेल्पलाइन कर्मचारियों का जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला, जहां 200 से ज्यादा कर्मचारी ‘1076 हाय-हाय’ के नारे लगाते हुए अचानक मुख्यमंत्री दफ्तर की ओर कूच कर गए. सुबह करीब 9:30 बजे लोहिया पथ से शुरू हुआ यह मार्च तेजी से आगे बढ़ा, जिसे रोकने के लिए पुलिस ने चार बार कोशिश की लेकिन कर्मचारी नहीं रुके. लोहिया पार्क तक पुलिस उन्हें रोकने में नाकाम रही, जिसके बाद अतिरिक्त बल तैनात किया गया. संगीत नाटक अकादमी के सामने पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रास्ता रोकने की कोशिश की, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारी आगे बढ़ते रहे. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने बाद में बलपूर्वक हटाने की कार्रवाई शुरू की. प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का आरोप है कि हेल्पलाइन में उनका शोषण किया जा रहा है और उन्हें मात्र 7000 रुपये वेतन दिया जा रहा है, जिससे उनमें भारी नाराजगी है1
- हरदोई जनपद के देहात क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत गुरूगुज्जा में आज एक सराहनीय पहल देखने को मिली, जहां सदस्य दुर्वेश कुशवाहा आजाद, अध्यक्ष दिव्यांग युवा शक्ति संगठन के नेतृत्व में एक नि:शुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना और आंखों से संबंधित समस्याओं का समय रहते निदान करना था। शिविर में राम भरोसे आर्य स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नेत्र चिकित्सालय की अनुभवी टीम ने भाग लिया, जिसका नेतृत्व एमबीबीएस, एमएस सर्जन डॉ. अनुज सिंह कुशवाहा ने किया। टीम द्वारा ग्रामीणों की निःशुल्क आंखों की जांच की गई और उन्हें आवश्यक परामर्श भी प्रदान किया गया। इस दौरान सैकड़ों लोगों ने शिविर में पहुंचकर अपनी आंखों की जांच कराई। कई मरीजों में दृष्टि दोष, मोतियाबिंद और अन्य नेत्र संबंधी समस्याएं पाई गईं, जिनके उपचार के लिए उन्हें आगे की चिकित्सा सलाह दी गई। जरूरतमंद मरीजों को नि:शुल्क दवाइयां भी वितरित की गईं। ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, कि इस प्रकार के शिविर उनके लिए अत्यंत लाभकारी हैं, क्योंकि गांव में इस तरह की स्वास्थ्य सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हो पातीं। आयोजकों ने बताया कि भविष्य में भी ऐसे स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाता रहेगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाभ मिल सके और समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़े। नेत्र शिविर में डॉक्टर अनुज सिंह कुशवाहा जी की प्रशिक्षित टीम के डॉक्टर आकिल इदरीशी, डॉ० हरिपाल मौर्य,डॉ० कपिल मौर्य ने तमाम मरीजों की आंखों का परीक्षण कर निःशुल्क उपचार सलाह व आंखों के ड्रॉप वितरण किए।1
- ✨ वातावरण भक्तिमय- दिव्य दर्शन ✨ ✍️ सुधीर अवस्थी ‘परदेशी’ …………………………………..........… हरदोई जनपद के बघौली थाना क्षेत्र के सुन्नी गांव में स्थित प्राचीन माँ महिषासुर मर्दिनी मंदिर में प्रातःकालीन भोले बाबा श्रृंगार दर्शन ! भोर की पहली किरणों के साथ जब मंदिर में आरती और श्रृंगार हुआ, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। यह दृश्य श्रद्धालुओं के मन को शांति और आस्था से भर देने वाला रहा।1
- Post by SV भारत न्यूज़ संवाददाता रामबाबू1
- बेहटागोकुल थानाक्षेत्र के बबनापुर में अवैध मिट्टी खनन बहुत जोरों के साथ किया जा रहा है पूरे दिन ट्रैक्टर ट्रॉली मिट्टी सप्लाई करती है इस ओर न पुलिस विभाग और न ही कोई राजस्व विभाग का अधिकारी ध्यान दे रहा है ग्रामीणों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि यह सब पुलिस और प्रशासन की मिली भगत से चल रहा है। #hardoipolice #Dmhardoi #Uppolice2
- शाहाबाद(हरदोई) दो हजार के दशक का खूंखार गैंग—हत्या, हत्या के प्रयास और लूट, लूट में हत्या तक का काला इतिहास, गैंग के कई बदमाश पुलिस मुठभेड़ में मार गिराए जाने और कई बदमाश गैंगवार में मारे जाने और कई बदमाश अपनी मौत मर जाने के बाद जीवित बचे बदमाशों ने अब अंतर्राज्यीय नशा तस्कर नेटवर्क के सहारे सक्रिय होकर समाज में भय व आतंक व संत्रास; का माहौल बनाकर आर्थिक लाभ उठाने का सिलसिला फिर तेज कर दिया है जिसमें स्थानीय पुलिस और क्षेत्रीय पुलिस से लेकर जनपद की पुलिस की भूमिका पर बर्षों से सवाल पर सवाल उठ रहे हैं लेकिन हर बार पुलिस इस चर्चित गिरोह के बचाव में कोई न कोई कदम उठाकर कूकर कहर बरपाए और बानर टांगे जाएं जैसी कहावतें चरितार्थ कर रही है परिणाम स्वरूप मनबढ़े अभ्यस्त गिरोह के शातिर सरगना ने अपने साथियों के साथ एक राय होकर मोहल्ला पठकाना के एक व्यापारी द्वारा लगाए गए सीसीटीवी कैमरे तोड़कर चुराने के बाद गोडाउन का ताला तोड़ा और उसके बाद व्यापारी के विरोध करने पर गाली गलौज करते हुए आमादा फ़ौजदारी होकर जान से मारने की धमकी दी जिसकी एफआईआर स्थानीय पुलिस ने पीड़ित व्यापारी की बार - बार गुहार के बाद दूसरी तहरीर पर दर्ज पर दर्ज कर मुकदमे को इतना मिनीमाइज़ कर दिया ताकि आरोपियों को तत्काल जेल जाने से बचाया जा सके। दरअसल हरदोई के शाहाबाद कस्बे में एक बार फिर संगठित अपराधी गिरोह की सक्रियता ने सनसनी फैला दी है। पीड़ित व्यापारी सोमेन्द्र मिश्रा के कार्यालय पर हमला कर सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए गए और विरोध करने पर मारपीट व जान से मारने की धमकी दी। मामले में सरगना विनय शुक्ला समेत कई आरोपियों को नामजद किया गया है, लेकिन पुलिस की कार्रवाई अब भी सवालों के घेरे में है। बताया जा रहा है कि आरोपी विनय शुक्ला वही शख्स है, जिसे 27 अप्रैल 2025 को मिर्जापुर जिले के अहरौरा क्षेत्र में वाहन चेकिंग के दौरान 51 किलो गांजा के साथ होंडा सिटी कार समेत पकड़ा गया था। ओडिशा से गाजियाबाद तक नशे की खेप ले जाने वाले इस नेटवर्क का खुलासा तब हुआ था। फिलहाल आरोपी जमानत पर बाहर है। सूत्रों के मुताबिक, यह गिरोह कोई नया नहीं, बल्कि 2000 के दशक से सक्रिय एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट है, जिसके सदस्यों पर हत्या, लूट, डकैती, एनडीपीएस जैसे गंभीर मुकदमे दर्ज रहे हैं। हरदोई, शाहजहांपुर, फर्रुखाबाद समेत कई जिलों में इस गैंग के बदमाशों का खौफ रहा। कई बदमाश पुलिस मुठभेड़ और गैंगवार में मारे गए, लेकिन गिरोह की संख्या और नेटवर्क लगातार बढ़ता गया। इतना ही नहीं, इस गिरोह का दुस्साहस इस हद तक पहुंचा कि कस्बे में हथगोले फेंकने से लेकर वर्ष 2001 में जेल गेट के अंदर घुसकर हेडवार्डर वृजनंदन की गोली मारकर हत्या और मोहल्ला पठकाना में ही उधरनपुर के तत्कालीन सैनिक रामवीर पर फायरिंग कर हत्या के प्रयास और दिनदहाड़े बीच बाजार में व्यापारी की हत्याकर लूट तक की वारदातें सामने आती रहीं। गुंडा टैक्स वसूली, नशा तस्करी और अन्य अवैध धंधों के जरिए इस गिरोह ने अपना दबदबा लगातार कायम रखा जबकि बीच-बीच में इस गिरोह के लिए स्थानीय स्तर से लेकर जनपद स्तर तक के पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी नौकरी तक दांव पर लगाकर इस अभ्यस्त गैंग की भरपूर मददकर इसका मनोबल बढ़ाने में कोई कोर कसर नहीं छोडी. पुलिस - प्रशासन ने बिल्कुल नहीं टूटने दी कमर शाहाबाद(हरदोई) चौंकाने वाली बात यह भी है कि समय-समय पर पुलिस और प्रशासनिक संरक्षण के आरोपों के चलते इस गिरोह की कमर कभी पूरी तरह नहीं टूटी। आरोप है कि कई मामलों में रिपोर्ट तक दर्ज नहीं हुई, और जहां मुकदमे चले भी, वहां प्रभावी पैरवी नहीं होने से आरोपी बचते रहे। नतीजा—गैंग का नेटवर्क हरदोई से निकलकर नोएडा, गाजियाबाद, मिर्जापुर होते हुए उड़ीसा तक फैल गया और इस गिरोह के उक्त विनय शुक्ला को गाजियाबाद के बड़े नशा तस्कर अखिल भाटी का कथित तौर पर संरक्षण मिल गया जो कि जनपद मिर्जापुर के थाना अहिरौरा में दर्ज मु0अ0सँ0 88/25 में इसके साथ अभियुक्त है। स्थानीय अभिसूचना इकाई की निष्क्रियता भी चर्चित शाहाबाद (हरदोई) सूत्र बताते हैं कि बर्षों से स्थानीय अभिसूचना इकाई भी शायद इस आपराधिक सिंडीकेट के प्रति जानबूझकर शिथिल है, सूत्र यह भी बताते हैं कि यदि LIU चाहती तो इस संगठित गिरोह की अब तक कई गैरकानूनी गतिविधियाँ सामने आतीं और कई घटनाएं वास्तव में असली वर्क आउट हो जातीं और कूकर खाएं लेकिन वानर टांगे जाएं जैसी कहावतें चरितार्थ नहीं हो पातीं परन्तु LIU भी इनकी ओर से ऑंखें बंद रखती है, हालांकि इनके गैंग की गतिविधियों के आसपास ही चहलकदमी करती रहती है लेकिन यह पूरा नेटवर्क स्वछंद विचरण करता हुआ अपनी मनमानी करता रहता है। विवशतावश लिखी शाहाबाद पुलिस ने रिपोर्ट, बदलवाई तहरीर और कम कर दीं धाराएं, व्यापारी की बाइट बताती है अपराध की गंभीरता और पुलिस की शिथिलता शाहाबाद(हरदोई) वर्तमान मामले में भी पीड़ित व्यापारी ने कई बार तहरीर और सीसीटीवी फुटेज देने के बावजूद कार्रवाई न होने का आरोप लगाया है। अंततः तीसरी बार तहरीर बदलवाकर मामूली धाराओं में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की, जिससे आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने से बचाने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय पुलिस के साथ-साथ क्षेत्राधिकारी की भूमिका पर भी इसलिए और भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि उनकी सीओ पेशी कार्यालय के पीछे बसी कालोनी नशा बिक्री का गढ़ माना जा रहा है जहाँ कभी अखबारी सुर्खियों में रहने के बाबजूद बिक्री बंद नहीं हुई। इतना ही नहीं उच्च अधिकारियों तक इस गैंग को लेकर उठती उंगलियां पूरे मामले को और गंभीर बना रही हैं। अब देखना होगा कि इस ‘नशा सिंडिकेट’ पर सख्त कार्रवाई होती है या फिर यह गिरोह यूं ही कानून को चुनौती देता रहेगा। इस सम्बन्ध में हरदोई पुलिस ने एक्स पर लिखा कि संदर्भित प्रकरण में स्थानीय पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया है। वैधानिक कार्यवाही प्रचलित है। प्रभारी निरीक्षक अरविन्द कुमार राय और अपर पुलिस अधीक्षक आलोक राज नारायण ने भी यही बताते हुए कहा कि दो आरोपियों को हिरासत में लेकर पूँछताछ की जा रही है, शेष अभियुक्तों की तलाश जारी है। FIR लिखे जाने से पूर्व पीड़ित व्यापारी सोमेन्द्र मिश्र द्वारा दी गई बाइट 👇और नशा सिंडीकेट के इलाकाई सरगना समेत उसके खासमखास साथियों के CCTV कैमरे तोड़ते, तथा तोड़कर ले जाते तथा व्यापारी के गो डाउन का टूटे ताले बाले गेट का विजुअल की झलकियाँ मात्र 👇4