सोनभद्र के चोपन थाना पुलिस को मादक पदार्थ तस्करी और पुलिस मुठभेड़ के एक मामले में बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान फरार हुए मुख्य अभियुक्त सहित तीन वांछित तस्करों को गिरफ्तार कर लिया है। इनके पास से एक अवैध तमंचा, कारतूस और मोबाइल फोन बरामद किया गया है। यह मामला 1 जून 2026 का है, जब चोपन, रॉबर्ट्सगंज पुलिस और एसओजी की संयुक्त कार्रवाई के दौरान तस्करों से मुठभेड़ हुई थी। उस समय प्रिंस सिंह को पकड़ा गया था, लेकिन रोहित सिंह फरार होने में कामयाब रहा था। ताजा कार्रवाई में, 3 जून 2026 को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने मारकुण्डी बस स्टैण्ड के पास घेराबंदी कर फरार रोहित सिंह को धर दबोचा। रोहित से पूछताछ के बाद इस नेटवर्क से जुड़े दो अफीम सप्लायरों, पिंटू यादव और सत्यपाल सिंह खरवार को भी गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार अभियुक्त रोहित सिंह ने कुबूल किया कि वह प्रिंस के साथ डालटेनगंज (झारखंड) से अफीम व डोडा लेकर पंजाब बेचने जा रहा था। पुलिस द्वारा घेरे जाने पर उन्होंने फायरिंग भी की थी। सत्यपाल और पिंटू ने बताया कि वे झारखंड के पलामू के रहने वाले हैं और स्थानीय किसानों से 200 रुपये प्रति किलो डोडा व 3000 रुपये प्रति किलो अफीम खरीदते थे। उन्होंने ही रोहित और प्रिंस को 2 कुन्तल 25 किलोग्राम डोडा और 3 किलोग्राम अफीम की सप्लाई की थी, जिसे वे एक सफेद रंग की गाड़ी से पंजाब ले जा रहे थे। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में पंजाब के लुधियाना निवासी 24 वर्षीय रोहित सिंह, झारखंड के पलामू निवासी 31 वर्षीय पिंटू यादव और पलामू के ही निवासी 26 वर्षीय सत्यपाल सिंह खरवार शामिल हैं। पुलिस ने इनके पास से एक अवैध देसी तमंचा (.315 बोर), एक जिंदा कारतूस और एक ओप्पो मोबाइल फोन बरामद किया है। इस गिरफ्तारी अभियान को सफल बनाने वाली पुलिस टीम में चोपन थाना प्रभारी निरीक्षक गोपाल जी गुप्ता, उपनिरीक्षक रामज्ञान यादव, अभय यादव और हेड कांस्टेबल अजय यादव सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे।
सोनभद्र के चोपन थाना पुलिस को मादक पदार्थ तस्करी और पुलिस मुठभेड़ के एक मामले में बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान फरार हुए मुख्य अभियुक्त सहित तीन वांछित तस्करों को गिरफ्तार कर लिया है। इनके पास से एक अवैध तमंचा, कारतूस और मोबाइल फोन बरामद किया गया है। यह मामला 1 जून 2026 का है, जब चोपन, रॉबर्ट्सगंज पुलिस और एसओजी की संयुक्त कार्रवाई के दौरान तस्करों से मुठभेड़ हुई थी। उस समय प्रिंस सिंह को पकड़ा गया था, लेकिन रोहित सिंह फरार होने में कामयाब रहा था। ताजा कार्रवाई में, 3 जून 2026 को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने मारकुण्डी बस स्टैण्ड के पास घेराबंदी कर फरार रोहित सिंह को धर दबोचा। रोहित से पूछताछ के बाद इस नेटवर्क से जुड़े दो अफीम सप्लायरों, पिंटू यादव और सत्यपाल सिंह खरवार को भी गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार अभियुक्त रोहित सिंह ने कुबूल किया कि वह प्रिंस के साथ डालटेनगंज (झारखंड) से अफीम व डोडा लेकर पंजाब बेचने जा रहा था। पुलिस द्वारा घेरे जाने पर उन्होंने फायरिंग भी की थी। सत्यपाल और पिंटू ने बताया कि वे झारखंड के पलामू के रहने वाले हैं और स्थानीय किसानों से 200 रुपये प्रति किलो डोडा व 3000 रुपये प्रति किलो अफीम खरीदते थे। उन्होंने ही रोहित और प्रिंस को 2 कुन्तल 25 किलोग्राम डोडा और 3 किलोग्राम अफीम की सप्लाई की थी, जिसे वे एक सफेद रंग की गाड़ी से पंजाब ले जा रहे थे। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में पंजाब के लुधियाना निवासी 24 वर्षीय रोहित सिंह, झारखंड के पलामू निवासी 31 वर्षीय पिंटू यादव और पलामू के ही निवासी 26 वर्षीय सत्यपाल सिंह खरवार शामिल हैं। पुलिस ने इनके पास से एक अवैध देसी तमंचा (.315 बोर), एक जिंदा कारतूस और एक ओप्पो मोबाइल फोन बरामद किया है। इस गिरफ्तारी अभियान को सफल बनाने वाली पुलिस टीम में चोपन थाना प्रभारी निरीक्षक गोपाल जी गुप्ता, उपनिरीक्षक रामज्ञान यादव, अभय यादव और हेड कांस्टेबल अजय यादव सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे।
- सोनभद्र में मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ चलाए गए हाईवोल्टेज ऑपरेशन के तहत पुलिस ने तीन और वांछित अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही इस पूरे मामले में गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या चार हो गई है, जिसमें मुठभेड़ के दौरान पुलिस की गोली से घायल होकर पकड़ा गया पंजाब के लुधियाना निवासी प्रिंस सिंह भी शामिल है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई उसी हाईवोल्टेज ऑपरेशन का हिस्सा है जो देर रात 2 बजे से 4 बजे तक चला था, जिसमें तस्करों और पुलिस के बीच फिल्मी अंदाज में पीछा, टक्कर और मुठभेड़ देखने को मिली थी। उस ऑपरेशन में पुलिस ने प्रिंस सिंह को मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार किया था, जिसके कब्जे से भारी मात्रा में करीब 58 लाख 75 हजार रुपये की अफीम और डोडा बरामद हुई थी। उस समय तीन अन्य आरोपी मौके से फरार हो गए थे, जिनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही थी। हाल ही में मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर पुलिस ने मारकुंडी बस स्टैंड क्षेत्र में घेराबंदी कर फरार चल रहे रोहित सिंह, पिंटू यादव और सतपाल सिंह खरवार को धर दबोचा। इनके कब्जे से एक 315 बोर का देशी तमंचा, एक जिंदा कारतूस और एक मोबाइल फोन बरामद किया गया है, जिसे पुलिस जांच में अहम साक्ष्य के तौर पर देख रही है। एएसपी अनिल कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि पूछताछ में यह स्पष्ट हुआ है कि यह गिरोह संगठित रूप से झारखंड समेत कई राज्यों में मादक पदार्थों की तस्करी में सक्रिय था और पहले से ही एनडीपीएस व आर्म्स एक्ट के गंभीर मामलों में वांछित चल रहा था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल इस मामले में वांछित सभी आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए हैं, जिससे इस पूरे अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क का बड़ा हिस्सा पुलिस की गिरफ्त में आ चुका है। एएसपी के अनुसार, अब इस मामले में आगे की कार्रवाई और सख्त की जाएगी, जिसमें गिरफ्तार आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करने के साथ-साथ उनकी अवैध संपत्ति को चिन्हित कर कुर्क करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। पुलिस अब बरामद मोबाइल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और यह भी देखा जा रहा है कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हो सकते हैं।4
- सोनभद्र जिले में थाना चोपन पुलिस ने एक पुलिस मुठभेड़ और मादक पदार्थ बरामदगी से संबंधित प्रकरण में कार्रवाई करते हुए तीन वांछित अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में एक फरार अभियुक्त भी शामिल है। इस संबंध में जानकारी सोनभद्र के अपर पुलिस अधीक्षक मुख्यालय अनिल कुमार द्वारा दी गई।1
- जनपद में आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक जागरूकता अभियान चलाया गया है। यह अभियान मुख्य रूप से नदी, बाँध और जलाशयों के आसपास डूबने की घटनाओं की रोकथाम पर केंद्रित है। अपर पुलिस अधीक्षक मुख्यालय, श्री अनिल कुमार ने इस सुरक्षा पहल के संबंध में जानकारी दी।1
- उत्तर प्रदेश के ग्राम बिजौली में कृषि एसडीओ विभाग से संबंधित कुछ पोस्टर के फोटो, वीडियो और ऑडियो मौजूद हैं।1
- उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हालिया फेरबदल के बाद, सोनभद्र जिले की कमान नवनियुक्त राज्य मंत्री/MLC हंसराज विश्वकर्मा को सौंपी गई है, जिन्होंने 5 जून, 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर जिले का अपना पहला आधिकारिक दौरा किया। पूर्व प्रभारी मंत्री रविंद्र जायसवाल के स्थान पर आए विश्वकर्मा जी की कलेक्ट्रेट सभागार में हुई स्वागत सह समीक्षा बैठक में जिला अधिकारी, पुलिस अधीक्षक और ओबरा के विधायक व राज्य मंत्री संजीव सिंह गौड़ सहित पूरा प्रशासनिक व राजनीतिक अमला उपस्थित था। हालांकि, इस प्रथम प्रवास के दौरान सत्ता पक्ष के ही मंच से खनिज संपदा को लेकर दिए गए वक्तव्यों ने जिले की प्रशासनिक व्यवस्था और विभागीय रिपोर्टिंग पर कई स्वाभाविक एवं गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। काशी क्षेत्र के वरिष्ठ सांगठनिक चेहरे और मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले हंसराज विश्वकर्मा के इस पहले दौरे पर, स्वागत मंच से ही व्यवस्था के व्यावहारिक पहलुओं पर तीखा विमर्श सामने आया। पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार कुशवाहा ने खनिज संपदा से जुड़ी समस्याओं को प्रखरता से उठाया। बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर 2004 में मिर्जापुर से सांसद रहे और फिर 2023 में भारतीय जानी पार्टी में शामिल हुए कुशवाहा ने, जिला अधिकारी और पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में बिना किसी विशिष्ट पट्टा धारक या खदान का नाम लिए "बाहरी तत्वों के हस्तक्षेप" और "सुरक्षा के गंभीर संकट" का जिक्र किया। यह वक्तव्य तत्कालीन 'भूमिधरि नियमावली' के तहत स्थानीय किसानों को मिलने वाले छोटे पट्टों की आसान व्यवस्था से हटकर, वर्तमान ई-टेंडरिंग प्रणाली की वैश्विक प्रतिस्पर्धा के चलते स्थानीय काश्तकारों को आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को रेखांकित करता है, जिसमें कानूनी रॉयल्टी दर ₹160 प्रति घन मीटर से शुरू होती है। इस पूरी प्रशासनिक बैठक का सबसे गंभीर पहलू यह है कि प्रदेश में भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग सीधे मुख्यमंत्री के अधीन आता है। एक ओर जहां मुख्यमंत्री राज्य से "माफिया राज" और "गुंडागर्दी" के खात्मे की बात करते हैं, वहीं उनके जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले, उनके करीबी प्रभारी मंत्री के सामने सार्वजनिक रूप से व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए, और इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होना कई विधिक और प्रशासनिक यक्ष प्रश्न खड़े करता है। पहला प्रश्न यह है कि यदि खनन राजस्व का महत्वपूर्ण स्तंभ है और सरकार की ई-टेंडरिंग नीति पारदर्शी है, तो बिना प्रामाणिक साक्ष्य के सार्वजनिक आरोप वैध व्यवसायियों की सुरक्षा और साख को क्यों प्रभावित कर रहे हैं? दूसरा, 15 नवंबर 2025 के उस भीषण खदान हादसे में, जिसमें एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और जिला प्रशासन के ऑन-रिकॉर्ड आंकड़ों के अनुसार 7 मौतें दर्ज थीं, शिकायतों में मृतकों की संख्या 10-12 बताई गई, जिससे जिला प्रशासन की राहत कार्यवाहियों और विभागीय रिपोर्टिंग की विश्वसनीयता पर सवाल उठे; इसी कारण जिम्मेदार आला अधिकारी (DM-SP) मौन रहे। तीसरा और सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेता स्वयं सुरक्षा खतरों का जिक्र करते हैं, तो वे विशिष्ट खदानों या विसंगतियों का नाम स्पष्ट रूप से सामने क्यों नहीं रखते? निष्कर्षतः, सोनभद्र जैसे आदिवासी बहुल जिले की खनिज संपदा पूरे प्रदेश को आर्थिक मजबूती देती है, लेकिन यहां का स्थानीय समाज आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित रोजगार जैसी प्राथमिक आवश्यकताओं के लिए संघर्षरत है, जिसके कारण कभी-कभी स्थानीय सामाजिक परिवेश में आक्रामकता देखने को मिलती है। प्रभारी मंत्री हंसराज विश्वकर्मा के प्रथम प्रवास में सामने आए इन सांगठनिक अंतर्विरोधों और बयानों को शासन को "जमीनी फीडबैक" के रूप में देखना चाहिए। यह आवश्यक है कि खनन से प्राप्त राजस्व का एक निश्चित हिस्सा जिला खनिज कोष (DMF) के माध्यम से सोनभद्र के मूल आदिवासियों के विकास पर पारदर्शी तरीके से खर्च किया जाए, ताकि यह समृद्ध जिला आर्थिक मजबूती के साथ-साथ सामाजिक शांति भी बनाए रख सके।1
- सोनभद्र के पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने बताया है कि कई जिलों में विभिन्न पुलिस थानों के प्रभारी अधिकारियों को बदला गया है।1
- उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में एक दुखद घटना सामने आई है। रॉबर्ट्सगंज इलाके में सोन नदी के पास स्थित एक तालाब में नहाने के दौरान पांच लोगों की डूबने से मौत हो गई।1