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बैकुंठपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत लालगांव रोड ग्राम सौर के पास हुआ भीषण एक्सीडेंट *🛑 रीवा : बैकुंठपुर से बड़ी खबर* *_बैकुंठपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत लालगांव रोड ग्राम सौर के पास हुआ भीषण एक्सीडेंट_,* *_बाइक में सवार एक व्यक्ति की हुई मौक़े पर मौत, वही एक महिला हुई घायल,_* ग्रामीणों के मुताबिक.. बाइक सवार व्यक्ति जो एक महिला को लेकर बैकुंठपुर से लालगांव तरफ जा रहा था, जो सौर गांव के पास किसी पिकप वाहन से टकराकर दुर्घटना का शिकार हो गया, वही महिला गंभीर रूप से घायल हो गई है, पिकप वाहन जो लालगांव साइड से बैकुंठपुर तरफ आ रहा था, घटना की सूचना मिलते ही बैकुंठपुर थाना की पुलिस मौक़े पर पहुंच गई है व आगे की कार्यवाही कर रही है।

1 hr ago
user_शेखर तिवारी
शेखर तिवारी
Journalist गुढ़, रीवा, मध्य प्रदेश•
1 hr ago

बैकुंठपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत लालगांव रोड ग्राम सौर के पास हुआ भीषण एक्सीडेंट *🛑 रीवा : बैकुंठपुर से बड़ी खबर* *_बैकुंठपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत लालगांव रोड ग्राम सौर के पास हुआ भीषण एक्सीडेंट_,* *_बाइक में सवार एक व्यक्ति की हुई मौक़े पर मौत, वही एक महिला हुई घायल,_* ग्रामीणों के मुताबिक.. बाइक सवार व्यक्ति जो एक महिला को लेकर बैकुंठपुर से लालगांव तरफ जा रहा था, जो सौर गांव के पास किसी पिकप वाहन से टकराकर दुर्घटना का शिकार हो गया, वही महिला गंभीर रूप से घायल हो गई है, पिकप वाहन जो लालगांव साइड से बैकुंठपुर तरफ आ रहा था, घटना की सूचना मिलते ही बैकुंठपुर थाना की पुलिस मौक़े पर पहुंच गई है व आगे की कार्यवाही कर रही है।

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  • 💥 *बड़ी खबर*💥 गुरुग्राम में ₹70 लाख के नकली "Mounjaro" डायबिटीज इंजेक्शन बरामद, दो गिरफ्तार गुरुग्राम पुलिस और ड्रग कंट्रोल विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए नकली एंटी-डायबिटीज इंजेक्शन 'मुंजेरो' बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। टीम ने मास्टरमाइंड और उसके साथी को गिरफ्तार कर ₹70 लाख मूल्य के नकली मुंजेरो 'Mounjaro' इंजेक्शन जब्त किए हैं। यह इंजेक्शन मूल रूप से इटली से आयात किया जाता है और मधुमेह रोगियों द्वारा शुगर कंट्रोल करने के लिए उपयोग किया जाता है। पकड़े गए आरोपी नकली दवाओं के माध्यम से मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे थे। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य नेटवर्क और संपर्कों का पता लगाने के लिए मामले की गहन जांच कर रही है।
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    💥 *बड़ी खबर*💥
गुरुग्राम में ₹70 लाख के नकली  "Mounjaro" डायबिटीज इंजेक्शन बरामद, दो गिरफ्तार
गुरुग्राम पुलिस और ड्रग कंट्रोल विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए नकली एंटी-डायबिटीज इंजेक्शन  'मुंजेरो' बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। टीम ने मास्टरमाइंड और उसके साथी को गिरफ्तार कर ₹70 लाख मूल्य के नकली मुंजेरो 'Mounjaro' इंजेक्शन जब्त किए हैं। यह इंजेक्शन मूल रूप से इटली से आयात किया जाता है और मधुमेह रोगियों द्वारा शुगर कंट्रोल करने के लिए उपयोग किया जाता है। पकड़े गए आरोपी नकली दवाओं के माध्यम से मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे थे। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य नेटवर्क और संपर्कों का पता लगाने के लिए मामले की गहन जांच कर रही है।
    user_शेखर तिवारी
    शेखर तिवारी
    Journalist गुढ़, रीवा, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • Post by Manish Krishna Mishra Sidhi ji
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    Post by Manish Krishna Mishra Sidhi ji
    user_Manish Krishna Mishra Sidhi ji
    Manish Krishna Mishra Sidhi ji
    Artist रामपुर नैकिन, सीधी, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • Post by Prime 24 News
    1
    Post by Prime 24 News
    user_Prime 24 News
    Prime 24 News
    हुजूर, रीवा, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • Post by JOURNALIST RIPPU PANDEY
    4
    Post by JOURNALIST RIPPU PANDEY
    user_JOURNALIST RIPPU PANDEY
    JOURNALIST RIPPU PANDEY
    Court reporter हुजूर, रीवा, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • प्रशासन का इस पर कोई ध्यान नहीं, गौशाला के प्रभारी गौशाला पर आना जरूरी नहीं समझते हैं
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    प्रशासन का इस पर कोई ध्यान नहीं, गौशाला के प्रभारी गौशाला पर आना जरूरी नहीं समझते हैं
    user_Abhishek Pandey
    Abhishek Pandey
    Huzur, Rewa•
    6 hrs ago
  • Post by बुद्धसेन चौरसिया
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    Post by बुद्धसेन चौरसिया
    user_बुद्धसेन चौरसिया
    बुद्धसेन चौरसिया
    Photographer रायपुर - करचुलियां, रीवा, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • Post by Deepesh Pandey Dist Chief Director ACFI Rewa
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    Post by Deepesh Pandey Dist Chief Director ACFI Rewa
    user_Deepesh Pandey Dist Chief Director ACFI Rewa
    Deepesh Pandey Dist Chief Director ACFI Rewa
    NGO Worker हुजूर नगर, रीवा, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • थाने में वीडियो-फोटो बनाना अपराध नहीं, नागरिक का अधिकार है: गुजरात हाईकोर्ट गुजरात हाईकोर्ट में एक सुनवाई के दौरान न्याय की वह तस्वीर उभरी, जो पूरे देश में पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों की मिसाल बन गई है। माननीय जस्टिस निरजर एस. देसाई की अदालत में जब पुलिस पक्ष की महिला अधिवक्ता ने तर्क दिया कि थाने के अंदर आम नागरिक वीडियो रिकॉर्डिंग या फोटोग्राफी नहीं कर सकते, तो न्यायाधीश ने सख्त स्वर में पूछा – “बताइए, किस कानून की धारा के तहत वीडियोग्राफी प्रतिबंधित है?” यह सवाल केवल एक वकील से नहीं, बल्कि पूरे पुलिस तंत्र से था। मामला हिरासत में यातना से जुड़ा था। पुलिस ने अपने बचाव में कहा कि शिकायतकर्ता लोग घटना की वीडियो बना रहे थे। जस्टिस देसाई ने इस दलील को पूरी तरह खारिज करते हुए तीखे सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि अगर पुलिस अपना कानूनी काम कर रही है तो वीडियो से उसे क्या आपत्ति हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के 80 प्रतिशत CCTV कैमरे काम नहीं कर रहे हैं, फिर नागरिकों को रिकॉर्डिंग करने से कैसे रोका जा सकता है। जब सरकारी वकील ने बार-बार CCTV का हवाला दिया, तो कोर्ट ने साफ कहा कि यह तर्क तभी दिया जा सकता है जब 100 प्रतिशत CCTV कार्यरत हों। लेकिन हकीकत यह है कि 80 प्रतिशत कैमरे खराब पड़े हैं। भरी अदालत में न्यायाधीश ने स्पष्ट घोषणा की कि थाने में वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी करना कोई अपराध नहीं है। कोई भी पुलिसकर्मी या सरकारी कर्मचारी आम नागरिक को सबूत के रूप में वीडियो बनाने या फोटो खींचने से नहीं रोक सकता। थाना सार्वजनिक स्थान है। यह बयान न केवल उस मामले में निर्णायक साबित हुआ, बल्कि पूरे देश के लिए एक मजबूत संदेश बन गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस क्लिप को देखकर लाखों नागरिकों ने न्यायाधीश की तार्किक और साहसिक बहस की सराहना की। यह फैसला इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पुलिस जवाबदेही मजबूत होगी और हिरासत में मारपीट या दुरुपयोग के खिलाफ ठोस सबूत आसानी से तैयार किए जा सकेंगे। साथ ही नागरिकों के अधिकारों को भी मजबूती मिली है। थाना किसी प्रतिबंधित स्थान की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए Official Secrets Act भी यहां लागू नहीं होता। थाने या किसी सरकारी कार्यालय में शांतिपूर्वक, बिना ड्यूटी में बाधा डाले रिकॉर्डिंग करना कानूनी है। लेकिन हमेशा सावधानी बरतें – शांत रहें, आक्रामक न हों और यदि जरूरी हो तो दूसरे व्यक्ति की मदद लें। यह सुनवाई सिर्फ एक मुकदमे की नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक सशक्तिकरण की बड़ी जीत है। जस्टिस निरजर एस. देसाई ने एक बार फिर साबित किया कि अदालत आम आदमी की आवाज और संवैधानिक मूल्यों की रक्षक है। जागरूक रहिए। सजग रहिए। जब हर नागरिक अपने अधिकारों को जानता और इस्तेमाल करता है, तभी लोकतंत्र सही मायने में मजबूत होता है। ~ साभार: @NCIBHQ
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    थाने में वीडियो-फोटो बनाना अपराध नहीं, नागरिक का अधिकार है: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट में एक सुनवाई के दौरान न्याय की वह तस्वीर उभरी, जो पूरे देश में पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों की मिसाल बन गई है।
माननीय जस्टिस निरजर एस. देसाई की अदालत में जब पुलिस पक्ष की महिला अधिवक्ता ने तर्क दिया कि थाने के अंदर आम नागरिक वीडियो रिकॉर्डिंग या फोटोग्राफी नहीं कर सकते, तो न्यायाधीश ने सख्त स्वर में पूछा – “बताइए, किस कानून की धारा के तहत वीडियोग्राफी प्रतिबंधित है?”
यह सवाल केवल एक वकील से नहीं, बल्कि पूरे पुलिस तंत्र से था। मामला हिरासत में यातना से जुड़ा था। पुलिस ने अपने बचाव में कहा कि शिकायतकर्ता लोग घटना की वीडियो बना रहे थे। जस्टिस देसाई ने इस दलील को पूरी तरह खारिज करते हुए तीखे सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि अगर पुलिस अपना कानूनी काम कर रही है तो वीडियो से उसे क्या आपत्ति हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के 80 प्रतिशत CCTV कैमरे काम नहीं कर रहे हैं, फिर नागरिकों को रिकॉर्डिंग करने से कैसे रोका जा सकता है।
जब सरकारी वकील ने बार-बार CCTV का हवाला दिया, तो कोर्ट ने साफ कहा कि यह तर्क तभी दिया जा सकता है जब 100 प्रतिशत CCTV कार्यरत हों। लेकिन हकीकत यह है कि 80 प्रतिशत कैमरे खराब पड़े हैं।
भरी अदालत में न्यायाधीश ने स्पष्ट घोषणा की कि थाने में वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी करना कोई अपराध नहीं है। कोई भी पुलिसकर्मी या सरकारी कर्मचारी आम नागरिक को सबूत के रूप में वीडियो बनाने या फोटो खींचने से नहीं रोक सकता। थाना सार्वजनिक स्थान है।
यह बयान न केवल उस मामले में निर्णायक साबित हुआ, बल्कि पूरे देश के लिए एक मजबूत संदेश बन गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस क्लिप को देखकर लाखों नागरिकों ने न्यायाधीश की तार्किक और साहसिक बहस की सराहना की।
यह फैसला इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पुलिस जवाबदेही मजबूत होगी और हिरासत में मारपीट या दुरुपयोग के खिलाफ ठोस सबूत आसानी से तैयार किए जा सकेंगे। साथ ही नागरिकों के अधिकारों को भी मजबूती मिली है। थाना किसी प्रतिबंधित स्थान की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए Official Secrets Act भी यहां लागू नहीं होता।
थाने या किसी सरकारी कार्यालय में शांतिपूर्वक, बिना ड्यूटी में बाधा डाले रिकॉर्डिंग करना कानूनी है। लेकिन हमेशा सावधानी बरतें – शांत रहें, आक्रामक न हों और यदि जरूरी हो तो दूसरे व्यक्ति की मदद लें।
यह सुनवाई सिर्फ एक मुकदमे की नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक सशक्तिकरण की बड़ी जीत है। जस्टिस निरजर एस. देसाई ने एक बार फिर साबित किया कि अदालत आम आदमी की आवाज और संवैधानिक मूल्यों की रक्षक है।
जागरूक रहिए। सजग रहिए। जब हर नागरिक अपने अधिकारों को जानता और इस्तेमाल करता है, तभी लोकतंत्र सही मायने में मजबूत होता है।
~ साभार: @NCIBHQ
    user_शेखर तिवारी
    शेखर तिवारी
    Journalist गुढ़, रीवा, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
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