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मौदहा में नेशनल हाईवे-34 पर एक भीषण सड़क हादसा सामने आया है, जहाँ तेज रफ्तार एक बोलेरो अनियंत्रित होकर ट्रक में जा घुसी। यह घटना पालीवाल पेट्रोल पंप और मौदहा कोतवाली नगर के पास गुप्ता पेट्रोल पंप के नजदीक हुई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बोलेरो का अगला हिस्सा पूरी तरह से चकनाचूर हो गया। बोलेरो में सवार सभी लोग जसपुर रामपुर से छिरका गाँव में एक शादी समारोह में जा रहे थे। इस हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिसके चलते कुछ देर तक हाईवे पर यातायात भी प्रभावित रहा। गनीमत यह रही कि बोलेरो में सवार सभी यात्री सुरक्षित बच गए और कोई जनहानि नहीं हुई, जिससे समय रहते एक बड़ा हादसा टल गया और कई जिंदगियां बाल-बाल बच गईं।
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मौदहा में नेशनल हाईवे-34 पर एक भीषण सड़क हादसा सामने आया है, जहाँ तेज रफ्तार एक बोलेरो अनियंत्रित होकर ट्रक में जा घुसी। यह घटना पालीवाल पेट्रोल पंप और मौदहा कोतवाली नगर के पास गुप्ता पेट्रोल पंप के नजदीक हुई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बोलेरो का अगला हिस्सा पूरी तरह से चकनाचूर हो गया। बोलेरो में सवार सभी लोग जसपुर रामपुर से छिरका गाँव में एक शादी समारोह में जा रहे थे। इस हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिसके चलते कुछ देर तक हाईवे पर यातायात भी प्रभावित रहा। गनीमत यह रही कि बोलेरो में सवार सभी यात्री सुरक्षित बच गए और कोई जनहानि नहीं हुई, जिससे समय रहते एक बड़ा हादसा टल गया और कई जिंदगियां बाल-बाल बच गईं।
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- बांदा पुलिस लाइन में अपराध शाखा में तैनात निरीक्षक संजय कुमार शर्मा का बीमारी के चलते इलाज के दौरान निधन हो गया, जिसके बाद सोमवार को पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने उन्हें शोक परेड आयोजित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी और नम आँखों से अंतिम विदाई दी। पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र एवं पुष्पांजलि अर्पित कर शोक सलामी दी। निरीक्षक संजय कुमार शर्मा की तबीयत 28 जून को अचानक बिगड़ी थी, जिसके बाद उन्हें मेडिकल कॉलेज बांदा में भर्ती कराया गया। उपचार के दौरान 29 जून को उनका निधन हो गया। वह मूल रूप से गौतमबुद्ध नगर के निवासी थे और वर्ष 2005 में उत्तर प्रदेश पुलिस में भर्ती हुए थे। वर्ष 2018 में पदोन्नति के बाद वह निरीक्षक के पद पर कार्यरत थे। शोक परेड में पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल, अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज, सहायक पुलिस अधीक्षक/क्षेत्राधिकारी लाइंस मेविस टॉक, क्षेत्राधिकारी सदर सौरभ सिंह, प्रतिसार निरीक्षक बेलास यादव सहित पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने शोकाकुल परिजनों को सांत्वना देते हुए हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि दुख की इस घड़ी में पूरा बांदा पुलिस परिवार उनके साथ खड़ा है।3
- हमीरपुर के सुमेरपुर कस्बे की गीता वाटिका में आगामी विधानसभा चुनाव के दृष्टिगत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बूथ अध्यक्ष सम्मेलन का आयोजन किया। यह कार्यक्रम जिलाध्यक्ष शकुंतला निषाद की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। सम्मेलन के मुख्य अतिथि सदर विधायक डॉ. मनोज प्रजापति ने कार्यकर्ताओं से अपने-अपने बूथों को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासरत रहने का आह्वान किया। पूर्व जिलाध्यक्ष ब्रजकिशोर गुप्ता ने बताया कि आगामी चुनाव से पहले बूथ की कमेटी को कैसे सुचारु रखा जाए। जिलाध्यक्ष शकुंतला निषाद ने सभी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए हर समय उनके बीच रहने का वादा किया। इस आयोजन में बूथ अध्यक्ष, सेक्टर संयोजक, सेक्टर प्रभारी और मंडल प्रभारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मंडल अध्यक्ष रणवीर सिंह, जिला मीडिया प्रभारी अरविंद श्रीवास्तव, भार्गव मिश्रा, सत्तीदीन प्रजापति, शिवेंद्र सिंह, साधना सिंह, उत्तम सिंह, श्याम धुरिया, करन साहू, लक्ष्य गुप्ता, राजकुमार अवस्थी, राजेंद्र श्रीवास, योगेंद्र दीक्षित, अंकित गुप्ता, मोहन कुशवाहा, मनोज धुरिया, जितेंद्र पाल, उमा दीक्षित, सुनील और दुर्गेश सिंह सहित कई अन्य कार्यकर्ता भी मौजूद थे।1
- पुलिस ने एक बुजुर्ग पुजारी की हत्या का खुलासा कर दिया है, जिसमें अवैध संबंधों को वारदात का मुख्य कारण बताया गया है। यह घटना थाना कोतवाली नगर इलाके के तिंदवारा गांव की है। पुलिस जांच में सामने आया कि मृतक पुजारी के आश्रम की एक साध्वी के साथ गहरे अवैध संबंध थे। इन्हीं संबंधों के चलते साध्वी के मामा ने पुजारी को डंडे से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया था। वारदात के बाद साध्वी ने अपने मामा को बचाने के लिए पुलिस को गुमराह करने का भी प्रयास किया। मामले की गहनता से जांच के बाद पुलिस ने आरोपी साध्वी और उसके मामा को गिरफ्तार कर लिया है, और दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।4
- बांदा पुलिस ने एक बुजुर्ग व्यक्ति की हत्या के मामले का सफल अनावरण करते हुए दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। यह घटना कोतवाली नगर थाना क्षेत्र के ग्राम तिंदवारा में 20/21 जून 2026 की रात को हुई थी, जहाँ सच्चिदानंद नामक बुजुर्ग व्यक्ति को छत पर सोते समय डंडे से पीटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया था। उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी। पुलिस अधीक्षक बांदा पलाश बंसल के कुशल निर्देशन में, अपर पुलिस अधीक्षक बांदा श्री शिवराज के पर्यवेक्षण तथा सहायक पुलिस अधीक्षक/क्षेत्राधिकारी नगर मेविस टॉक के नेतृत्व में इस मामले की जांच की गई। मृतक के भाई चिंतामणि की तहरीर पर कोतवाली नगर थाने में अभियोग पंजीकृत किया गया और अभियुक्तों की पहचान व गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित की गईं। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का गहन निरीक्षण किया, मौके से प्राप्त साक्ष्यों का वैज्ञानिक परीक्षण कराया, और संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की। जांच के आधार पर मृतक के साथ रह रही महिला रोशनी के मामा रामविशाल को और रोशनी को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ और विवेचना में पाया गया कि अजगढ़, पन्ना, मध्य प्रदेश की रहने वाली रोशनी कुछ माह से बुजुर्ग व्यक्ति के साथ रह रही थी। 20/21 जून 2026 की रात को आपसी विवाद के चलते महिला के मामा रामविशाल ने छत पर सोए बुजुर्ग व्यक्ति पर डंडे से प्रहार कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया, जिससे उनकी इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। रोशनी ने पूरी घटना देखने और अपने मामा को पहचानने के बावजूद पुलिस को मनगढ़ंत कहानी बताकर गुमराह करने और मामा का सहयोग करने का प्रयास किया। पुलिस व फॉरेंसिक टीम द्वारा घटना में प्रयुक्त डंडे को पहले ही बरामद कर लिया गया था। दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय भेज दिया गया है।1
- बांदा के तिंदवारा गांव में हुए बहुचर्चित बुजुर्ग पुजारी हत्याकांड को आखिरकार पुलिस की वैज्ञानिक जांच और फॉरेंसिक पड़ताल के बाद सुलझा लिया गया है। पुलिस का दावा है कि यह हत्या किसी पुरानी रंजिश, लूट या सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र का परिणाम नहीं थी, बल्कि सामाजिक चर्चाओं, संदेह और क्षणिक आवेश से उपजी एक त्रासदी थी। इस मामले में बुजुर्ग पुजारी सच्चिदानंद की हत्या के आरोपी रामविशाल (पुत्र रामआसरे, निवासी जमुनी पुरवा तिंदवारा) तथा उसे बचाने के लिए पुलिस को गुमराह करने के आरोप में साध्वी रोशनी (पुत्री महादेव, निवासी चंदौरा, थाना अजयगढ़, जनपद पन्ना, मध्य प्रदेश) को गिरफ्तार कर न्यायालय भेज दिया गया है। पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज के पर्यवेक्षण तथा सहायक पुलिस अधीक्षक (नगर) मेविस टॉक के नेतृत्व में गठित टीम ने घटनास्थल से जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्यों, फॉरेंसिक विश्लेषण और गहन पूछताछ के आधार पर पूरे घटनाक्रम की परतें खोलीं। जांच ने उस कहानी को झुठला दिया, जो शुरुआती दौर में पुलिस के सामने प्रस्तुत की गई थी। यह घटना 20-21 जून 2026 की रात की है, जब ग्राम तिंदवारा स्थित आश्रम की छत पर सो रहे बुजुर्ग पुजारी सच्चिदानंद पर डंडे से जानलेवा हमला किया गया था। गंभीर रूप से घायल पुजारी की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद मृतक के भाई चिंतामणि की तहरीर पर कोतवाली नगर थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई। विवेचना के दौरान सामने आया कि साध्वी रोशनी पिछले लगभग नौ माह से आश्रम में रह रही थी और इसी दौरान गांव में पुजारी व साध्वी के कथित संबंधों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। पुलिस के अनुसार, इन चर्चाओं की जानकारी रोशनी के मामा रामविशाल को भी थी। घटना वाली रात रामविशाल सच्चाई जानने के उद्देश्य से आश्रम पहुंचा और दोनों को छत पर सोता देख अपना आपा खो बैठा। आवेश में आकर उसने डंडे से कई वार किए, जिससे पुजारी गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। जांच का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि साध्वी रोशनी ने पूरी घटना अपनी आंखों से देखने और आरोपी रामविशाल को पहचानने के बावजूद उसे बचाने के लिए पुलिस के समक्ष एक मनगढ़ंत कहानी प्रस्तुत की। हालांकि, अपराध चाहे जितना छिपाया जाए, वैज्ञानिक साक्ष्य और परिस्थितिजन्य प्रमाण अंततः सच की ओर ही इशारा करते हैं। फॉरेंसिक जांच, घटनास्थल से बरामद हत्या में प्रयुक्त डंडा और पूछताछ के दौरान मिले तथ्यों ने पुलिस को वास्तविक आरोपी तक पहुंचा दिया। इस मामले के सफल अनावरण में कोतवाली नगर प्रभारी निरीक्षक बलराम सिंह, निरीक्षक अपराध प्रभुनाथ यादव, चौकी प्रभारी मेडिकल कॉलेज वीरेन्द्र त्रिपाठी, महिला उपनिरीक्षक आकांक्षा सिंह, महिला कांस्टेबल रंजना कुशवाहा, कांस्टेबल दिनेश कुमार शर्मा, कांस्टेबल विवेक कुमार यादव तथा रिजर्व कांस्टेबल साकेत की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह घटना केवल एक हत्या का मामला नहीं, बल्कि समाज के लिए भी एक गंभीर संदेश छोड़ती है कि जब अफवाहें और सामाजिक चर्चाएं विवेक पर हावी हो जाती हैं, तब कानून का स्थान हिंसा लेने लगती है और उसका परिणाम केवल विनाश होता है। किसी भी संदेह का समाधान कानून और न्याय की प्रक्रिया से होना चाहिए, न कि आवेश में उठाए गए ऐसे कदमों से, जिनकी कीमत एक जीवन और कई परिवारों को चुकानी पड़ती है। फिलहाल, पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर दिया है। मामले की अंतिम सच्चाई अब न्यायालय की कसौटी पर परखी जाएगी, जबकि पुलिस अपनी विवेचना को विधिक प्रक्रिया के अनुरूप आगे बढ़ा रही है।1
- कानपुर देहात जनपद के माती कोर्ट में, माननीय न्यायालय एडीजे 3 ने घर में घुसकर मारपीट और लूटपाट के एक मामले में अभियुक्त इरफान को दोषी ठहराया है। इरफान, जो उस्मान का पुत्र और उदईपुर थाना भोगनीपुर का निवासी है, को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अतिरिक्त, दोषी को 25,000 रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया गया है।1
- उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में पुलिस ने बुजुर्ग सच्चिदानंद हत्याकांड का खुलासा कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने एक महिला, रोशनी, और उसके मामा रामविशाल को गिरफ्तार किया है।1
- हमीरपुर के सुमेरपुर थाने की हालत मॉनसून की पहली ही बारिश में बद से बदतर हो गई है। मंगलवार को हुई तेज बारिश के बाद पूरा थाना परिसर तालाब में तब्दील हो गया, जहाँ घुटनों तक पानी भर गया। नालों की सफाई न होने के कारण पानी की निकासी नहीं हो पाई, जिसके चलते फरियादियों को शिकायत दर्ज कराने के लिए गंदे पानी से होकर थाने के अंदर जाना पड़ा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पंचायत ने बारिश से पहले नालों की सफाई के बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन पहली ही बारिश में ये सभी दावे झूठे साबित हुए। थाने के आगे की मुख्य नाली चोक होने से पूरा पानी थाना परिसर में जमा हो गया। वहीं, अधिशाषी अधिकारी दिनेश चंद्र आर्य ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि बरसात से पहले सभी प्रमुख नालियों और नालों की सफाई कराई गई थी। उन्होंने जलभराव का कारण लोगों द्वारा नालियों में कचरा डालना बताया और कहा कि कर्मियों को भेजकर नाली साफ कराई जा रही है।4
- कानपुर देहात जनपद में कानून व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक श्रद्धा नरेंद्र पांडेय ने बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों के तबादले किए हैं। इस प्रशासनिक कार्यवाही के तहत, पांच निरीक्षकों और अठारह उपनिरीक्षकों का स्थानांतरण किया गया है। जारी सूची के अनुसार, जिन पांच निरीक्षकों के तबादले हुए हैं उनमें अनिल कुमार, राजपाल सिंह, संजेश कुमार, हरिओम त्रिपाठी और इंद्रजीत सिंह शामिल हैं। इसी तरह, अठारह उपनिरीक्षकों में सुधाकर सिंह, सोमवीर सिंह, रामकृष्ण मिश्रा, संजय सिंह, खेमचंद्र, उदय सिंह, अजय कुमार, उपेंद्र कुमार, अरुण कुमार, संजय यादव, मोहित मिश्रा, ऋषिकेश मिश्रा, आशीष यादव, जितेंद्र कुमार, विजय कुमार, संजीव कुमार, स्वदेश कुमार सिंह और जादों सिंह का नाम है।1