बालिका देखभाल संस्थान सुन्दरनगर में लोहड़ी पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया मंडी।बालिका देखभाल संस्थान सुन्दरनगर में लोहड़ी पर्व के अवसर पर हर्षोल्लास के साथ एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) सुन्दरनगर पूनम चौहान ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर संस्थान की बालिकाओं ने लोक नृत्य, लोकगीत एवं रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ देकर उपस्थित अतिथियों का मन मोह लिया। लोहड़ी पर्व की परंपरा के अनुसार बालिकाओं को रेवड़ी व मूंगफली वितरित की गई तथा सभी को खिचड़ी भी परोसी गई। मुख्यातिथि पूनम चौहान ने लोहड़ी पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व मुख्य रूप से फसल बोने और काटने से जुड़ा हुआ है। इस दिन सूर्य देव उत्तरायण होते हैं, जो शीत ऋतु के समापन एवं बसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है। लोहड़ी पर्व नई ऊर्जा, नई शुरुआत और सकारात्मक सोच का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह पर्व सूर्य देव और अग्नि देव के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ-साथ नई फसल के स्वागत का उत्सव भी है। उन्होंने कहा कि लोहड़ी पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों, लोकगीतों, नृत्यों तथा तिल, गुड़, रेवड़ी और मूंगफली जैसे पारंपरिक पकवानों के माध्यम से सामाजिक एकता, आपसी भाईचारे और सहयोग का संदेश देता है। मुख्यातिथि ने बालिकाओं को संदेश देते हुए कहा कि उन्हें आपसी प्रेम और सौहार्द के साथ रहना चाहिए तथा शिक्षा को अपने जीवन का मुख्य उद्देश्य बनाकर देश व समाज की सेवा करनी चाहिए। कार्यक्रम में नगर परिषद सुन्दरनगर से आए बलवीर सोनी, ऋषि जरियाल, संस्थान का समस्त स्टाफ तथा आश्रम की छात्राएँ उपस्थित रहीं।
बालिका देखभाल संस्थान सुन्दरनगर में लोहड़ी पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया मंडी।बालिका देखभाल संस्थान सुन्दरनगर में लोहड़ी पर्व के अवसर पर हर्षोल्लास के साथ एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) सुन्दरनगर पूनम चौहान ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर संस्थान की बालिकाओं ने लोक नृत्य, लोकगीत एवं रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ देकर उपस्थित अतिथियों का मन मोह लिया। लोहड़ी पर्व की परंपरा के अनुसार बालिकाओं को रेवड़ी व मूंगफली वितरित की गई तथा सभी को खिचड़ी भी परोसी गई। मुख्यातिथि पूनम चौहान ने लोहड़ी पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व मुख्य रूप से फसल बोने और काटने से जुड़ा हुआ है। इस दिन सूर्य देव उत्तरायण होते हैं, जो शीत ऋतु
के समापन एवं बसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है। लोहड़ी पर्व नई ऊर्जा, नई शुरुआत और सकारात्मक सोच का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह पर्व सूर्य देव और अग्नि देव के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ-साथ नई फसल के स्वागत का उत्सव भी है। उन्होंने कहा कि लोहड़ी पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों, लोकगीतों, नृत्यों तथा तिल, गुड़, रेवड़ी और मूंगफली जैसे पारंपरिक पकवानों के माध्यम से सामाजिक एकता, आपसी भाईचारे और सहयोग का संदेश देता है। मुख्यातिथि ने बालिकाओं को संदेश देते हुए कहा कि उन्हें आपसी प्रेम और सौहार्द के साथ रहना चाहिए तथा शिक्षा को अपने जीवन का मुख्य उद्देश्य बनाकर देश व समाज की सेवा करनी चाहिए। कार्यक्रम में नगर परिषद सुन्दरनगर से आए बलवीर सोनी, ऋषि जरियाल, संस्थान का समस्त स्टाफ तथा आश्रम की छात्राएँ उपस्थित रहीं।
- मंडी।उपमंडल पद्धर के चमाह गांव में बुधवार सुबह 9 बजे दिनदहाड़े तेंदुआ दिखने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। रिहायशी इलाके के बेहद करीब तेंदुए की चहलकदमी ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। चमाह गांव में एक तेंदुए को खुलेआम घूमते हुए देखा गया। स्थानीय लोगों ने इसका वीडियो भी बनाया है, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में तेंदुआ बेखौफ होकर रिहायशी इलाके के पास घूमता नजर आ रहा है। दिन के उजाले में इस तरह तेंदुए की मौजूदगी ने लोगों को घरों में कैद होने पर मजबूर कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए की दस्तक से वे अपने मवेशियों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं। शाम होते ही लोग अपने घरों के दरवाजे बंद करने को मजबूर हैं, और दिन में भी खेतों में अकेले जाने से कतरा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, यदि समय रहते वन विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह तेंदुआ किसी बड़े जान-माल के नुकसान का कारण बन सकता है। चमाह गांव के निवासियों ने वन विभाग और प्रशासन से गुहार लगाई है कि जल्द से जल्द गांव में पिंजरा लगाया जाए और तेंदुए को पकड़कर रिहायशी इलाके से दूर छोड़ा जाए।1
- सड़क किनारे का यह अनोखा नज़ारा सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ कुत्ते एक कुत्ते के सामने बैठकर ऐसे दिखाई दे रहे हैं जैसे आशीर्वाद ले रहे हों। लोग इसे मज़ाक में “बाबा डॉगेश्वर जी” कह रहे हैं। मासूमियत और भावनाओं से भरा यह दृश्य लोगों को खूब पसंद आ रहा है और इंटरनेट पर हंसी के साथ पॉजिटिव वाइब्स फैला रहा है। #ViralVideo #DogLovers #InternetSensation #FunnyReels #CuteAnimals #WholesomeContent1
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- जोगिंदर नगर के सारली गांव में चोरी की वारदात, चोरों ने बच्चों के स्कूल बैग तक खंगाले।1
- मंडी जिले के तत्तापानी में मकर संक्रांति मेला 2026 का हुआ शुभारंभ , जिसमें राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने की शिरकत #kullutodaynews #himachalupdate #ATM #himachalkiawaaz #himachalpradesh #KTN #rampur #BreakingNews #shimla #kullu1
- बंगाणा, अखिल भारतीय बॉलीबॉल फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कुटलैहड़ क्षेत्र की प्रसिद्ध गौशाला धमांर्न्द्री में कार्य कर्ताओं और सैकंडों गणमान्य लोगों के साथ पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ लोहड़ी पर्व मनाया। इस अवसर पर उन्होंने विधिवत पूजा-पाठ कर अग्नि प्रज्वलित की और कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र की समस्त जनता के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, समाजसेवी और ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने लोहड़ी की अग्नि के चारों ओर परिक्रमा कर तिल, गुड़, मूंगफली और रेवड़ी अर्पित की। पारंपरिक लोकगीतों और ढोल-नगाड़ों की थाप पर वातावरण उल्लासमय हो गया। गौशाला परिसर में पर्व की रौनक देखते ही बनती थी। इस मौके पर पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि लोहड़ी पर्व केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भाईचारे, आपसी सौहार्द और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह पर्व समाज को आपसी मेल-मिलाप, सहयोग और सकारात्मक सोच का संदेश देता है। लोहड़ी हमें बुराइयों को त्यागकर अच्छाइयों को अपनाने और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।उन्होंने कहा कि ग्रामीण संस्कृति और परंपराओं से जुड़े ऐसे पर्व हमारी सामाजिक जड़ों को मजबूत करते हैं। गौशालाओं और धार्मिक स्थलों पर सामूहिक रूप से पर्व मनाने से समाज में सेवा,करुणा और सहयोग की भावना का विस्तार होता है। वीरेंद्र कंवर ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं। पूर्व मंत्री ने गौशाला में किए जा रहे सेवा कार्यों की भी सराहना की और कहा कि गौसेवा भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है। उन्होंने गौशाला प्रबंधन और सेवाभावी कार्यकर्ताओं को इस पुनीत कार्य के लिए बधाई दी। कार्यक्रम में सभी उपस्थित लोगों को लोहड़ी की शुभकामनाएं दी गईं और प्रसाद वितरित किया गया। पूरे आयोजन में उत्साह, श्रद्धा और भाईचारे का संदेश स्पष्ट रूप से देखने को मिला। लोहड़ी पर्व के इस आयोजन ने क्षेत्र में सामाजिक समरसता और सकारात्मकता का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया। इस मौके पर भाजपा नेता चरणजीत शर्मा,राजेंद्र रिंकू, मास्टर रमेश शर्मा भाजयुमो नेता अजय ठाकुर मदन राणा,सुनील शारदा सुरेन्द्र हटली के साथ सेकंडों भाजपा कार्यकर्ता एवं गणमान्य मौजूद रहे।1
- सात दिवसीय घृत पर्व का भव्य आगाज मंडी।लडभड़ोल तहसील क्षेत्र के ऐतिहासिक और प्राचीन शिव मंदिर नागेश्वर महादेव कुडड में मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आस्था और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। बुधवार को यहाँ सात दिवसीय पारंपरिक घृत पर्व का विधिवत शुभारंभ हुआ। इस विशेष अवसर पर मंदिर परिसर भगवान शिव के जयकारों से गूंज उठा। इस वर्ष घृत पर्व को और भी भव्य बनाने के लिए शिव भक्तों और मंदिर समिति ने विशेष तैयारियां की थीं। बुधवार दोपहर बाद विधि-विधान और मंत्रोच्चारण के साथ शिवलिंग का श्रृंगार शुरू किया गया। भक्तों ने 51 किलो शुद्ध मक्खन और विभिन्न प्रकार के सूखे मेवों का उपयोग कर भोलेनाथ का जय कुडड महादेव का भव्य भव्य रूप दिया। मक्खन से सजी भगवान शिव की पिंडी के दर्शन कर श्रद्धालु निहाल हो गए। श्रृंगार से पूर्व मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और हवन का आयोजन भी किया गया। जिसमें क्षेत्र की खुशहाली की कामना की गई। नागेश्वर महादेव कुड मंदिर में घृत पर्व का यह लगातार तीसरा आयोजन है। मकर संक्रांति के दिन मंदिर में दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं ने दर्शन किये। मंदिर के प्रबंधक एवं थानापति महंत विमल गिरी ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है। उन्होंने कहा कि इस बार भोलेनाथ की प्रतिमा का निर्माण और श्रृंगार 51 किलो मक्खन व मेवे से किया गया है, जो बेहद मनमोहक है। यह पर्व स्थानीय लोगों और भक्तों के अटूट सहयोग का परिणाम है। उन्होंने बताया कि यह घृत मंडल 21 जनवरी तक शिवलिंग पर ऐसे ही सुसज्जित रहेगा। 21 जनवरी को विधिवत पूजा के बाद इस मक्खन को हटाया जाएगा और इसे प्रसाद के रूप में सभी भक्तों में वितरित किया जाएगा। उन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए लडभड़ोल क्षेत्र की जनता का धन्यवाद किया।1