बिहार के मुंगेर जिले में पुल-पुलियों के टूटने का सिलसिला जारी है, जहाँ धरहरा प्रखंड में चार साल पहले बनी दो पुलिया एक सप्ताह के भीतर क्षतिग्रस्त हो गईं। इन पुलियों के टूटने से छह गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है, जिससे स्कूली बच्चों, मरीजों और किसानों समेत स्थानीय निवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इस घटना के लिए सड़क निर्माण कार्य में लगे संवेदक पर ओवरलोड वाहनों के परिचालन का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है। गुरुवार को दरियापुर-विक्रमपुर ग्रामीण सड़क पर ठाकुरबाड़ी के पास स्थित एक पुलिया भारी वाहनों के दबाव में टूट गई थी, जबकि इससे पहले मंगलवार को बरमनी गांव के पास बनी दूसरी पुलिया भी धंस गई थी। ग्रामीण बताते हैं कि ये दोनों पुलिया ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा करीब चार वर्ष पूर्व ही बनाई गई थीं। इन पुलियों के क्षतिग्रस्त होने के कारण धरहरा प्रखंड के बरमनी, विलोखर, बरमसिया, लकड़ी आहार सहित कुल छह गांवों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है, और लोगों को अब लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कमलदह गांव में चल रहे सड़क निर्माण कार्य के लिए निर्माण सामग्री ढोने वाले ओवरलोड हाइवा और 14-चक्का ट्रकों के लगातार परिचालन से ही इन पुलियों पर अत्यधिक दबाव पड़ा। उन्होंने बताया कि पुलियों की भार क्षमता सीमित थी, लेकिन उससे अधिक वजन वाले वाहनों के गुजरने से वे कमजोर होकर टूट गईं। स्थानीय ग्रामीण और 20 सूत्री सदस्य चंद्रचूड़ साक्षी ने बताया कि ग्रामीणों ने पहले ही संवेदक को ओवरलोड वाहनों से पुलिया को होने वाले संभावित नुकसान की जानकारी दी थी और छोटी गाड़ियों से सामग्री ढुलाई का सुझाव भी दिया था, लेकिन उनकी चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया गया। इस घटना के बाद ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है और वे जल्द वैकल्पिक व्यवस्था न होने पर बरसात के मौसम में कई गांवों के पूरी तरह बाधित होने की आशंका जता रहे हैं। वहीं, ग्रामीण कार्य विभाग के एसडीओ शैलेंद्र कुमार ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि ग्रामीण सड़कों पर भारी वाहनों का परिचालन नियमानुकूल नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और यदि प्रथम दृष्टया नियमों की अनदेखी सामने आती है, तो संबंधित संवेदक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, क्षतिग्रस्त पुलियों के पुनर्निर्माण की जिम्मेदारी भी दोषी पक्ष पर तय की जाएगी। प्रशासन फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए है और क्षतिग्रस्त मार्ग का आकलन किया जा रहा है।
बिहार के मुंगेर जिले में पुल-पुलियों के टूटने का सिलसिला जारी है, जहाँ धरहरा प्रखंड में चार साल पहले बनी दो पुलिया एक सप्ताह के भीतर क्षतिग्रस्त हो गईं। इन पुलियों के टूटने से छह गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है, जिससे स्कूली बच्चों, मरीजों और किसानों समेत स्थानीय निवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इस घटना के लिए सड़क निर्माण कार्य में लगे संवेदक पर ओवरलोड वाहनों के परिचालन का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है। गुरुवार को दरियापुर-विक्रमपुर ग्रामीण सड़क पर ठाकुरबाड़ी के पास स्थित एक पुलिया भारी वाहनों के दबाव में टूट गई थी, जबकि इससे पहले मंगलवार को बरमनी गांव के पास बनी दूसरी पुलिया भी धंस गई थी। ग्रामीण बताते हैं कि ये दोनों पुलिया ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा करीब चार वर्ष पूर्व ही बनाई गई थीं। इन पुलियों के क्षतिग्रस्त होने के कारण धरहरा प्रखंड के बरमनी, विलोखर, बरमसिया, लकड़ी आहार सहित कुल छह गांवों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है, और लोगों को अब लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कमलदह गांव में चल रहे सड़क निर्माण कार्य के लिए निर्माण सामग्री ढोने वाले ओवरलोड हाइवा और 14-चक्का ट्रकों के लगातार परिचालन से ही इन पुलियों पर अत्यधिक दबाव पड़ा। उन्होंने बताया कि पुलियों की भार क्षमता सीमित थी, लेकिन उससे अधिक वजन वाले वाहनों के गुजरने से वे कमजोर होकर टूट गईं। स्थानीय ग्रामीण और 20 सूत्री सदस्य चंद्रचूड़ साक्षी ने बताया कि ग्रामीणों ने पहले ही संवेदक को ओवरलोड वाहनों से पुलिया को होने वाले संभावित नुकसान की जानकारी दी थी और छोटी गाड़ियों से सामग्री ढुलाई का सुझाव भी दिया था, लेकिन उनकी चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया गया। इस घटना के बाद ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है और वे जल्द वैकल्पिक व्यवस्था न होने पर बरसात के मौसम में कई गांवों के पूरी तरह बाधित होने की आशंका जता रहे हैं। वहीं, ग्रामीण कार्य विभाग के एसडीओ शैलेंद्र कुमार ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि ग्रामीण सड़कों पर भारी वाहनों का परिचालन नियमानुकूल नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और यदि प्रथम दृष्टया नियमों की अनदेखी सामने आती है, तो संबंधित संवेदक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, क्षतिग्रस्त पुलियों के पुनर्निर्माण की जिम्मेदारी भी दोषी पक्ष पर तय की जाएगी। प्रशासन फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए है और क्षतिग्रस्त मार्ग का आकलन किया जा रहा है।
- CJP ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि पेपर लीक मामले में नीचे से ऊपर तक मिलीभगत है। CJP के अनुसार, केंद्र सरकार युवा छात्रों के लगातार हो रहे आंदोलन से भयभीत होकर शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं ले रही है। CJP ने आगे कहा कि सरकार को शिक्षा विभाग सहित अन्य विभागों में हो रही कथित 'खुलेआम लूटपाट' के लिए अपनी जवाबदेही तय करनी पड़ सकती है।1
- गोगरी अनुमंडल अस्पताल में गुरुवार को मातृ सुरक्षा योजना के तहत एक एएनसी (ANC) जांच शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर सुबह 11:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक चला, जिसमें कुल 135 गर्भवती महिलाओं की विस्तृत जांच की गई। शिविर का आयोजन प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर चंद्र प्रकाश के नेतृत्व में तथा डॉक्टर विजय कुमार, डॉक्टर निगवेल कुमार और महिला डॉक्टर शोभा रानी की देखरेख में हुआ। इस दौरान महिलाओं का ब्लड प्रेशर, ब्लड ग्रुप, हीमोग्लोबिन, ब्लड शुगर, एचआईवी, अल्ट्रासाउंड और सीबीसी टेस्ट किए गए। इसके अतिरिक्त, उनका वजन और लंबाई भी मापी गई। जांच के बाद डॉक्टरों ने गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण सलाह दी, जिसमें गर्भावस्था के दौरान हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया। उन्हें फल, चुकंदर, हरी सब्जी, पत्तेदार हरी साग और ओआरएस घोल के सेवन की सलाह भी दी गई। जांच कार्यों में डॉक्टर विजय कुमार, महिला डॉक्टर शोभा रानी, टेक्नीशियन सुधीर पाठक, मोहम्मद साबिर और आशीष रंजन ने सहयोग किया। शिविर में एएनएम संगीता कुमारी, रीता कुमारी, रजनी कुमारी, रंजू कुमारी, रिंकू कुमारी सहित कई आशा कार्यकर्ता और ममता भी उपस्थित रहीं।1
- बलिया के चोटी बलिया सैदान चक स्थित वार्ड-7 में वर्षों से नाले की सफाई न होने के कारण स्थिति गंभीर हो गई है। नालों के जाम होने से गंदा पानी सड़कों पर फैल गया है, जिससे गलियों में सड़ता मल-जल जमा हो गया है। सालों की इस उपेक्षा के कारण अब नाले फट गए हैं, जिससे बस्ती में चारों ओर बदबू और कीचड़ फैल गई है और स्वास्थ्य जोखिम भी काफी बढ़ गया है। इस विकट समस्या के चलते वार्ड-7 के निवासियों में गहरा रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि जाम नालों से निकला गंदा पानी उनके घरों तक पहुंच रहा है, जिससे उनका जीवन दूभर हो गया है। निवासियों ने प्रशासन और निगम का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए तत्काल प्रभाव से नालों की सफाई की मांग की है ताकि इस गंभीर समस्या का समाधान हो सके।1
- बृहस्पतिवार को बलिया अनुमंडलीय अस्पताल परिसर में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत बलिया अनुमंडल क्षेत्र के विभिन्न इलाकों से आईं करीब 100 गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है। यह जांच बलिया अनुमंडलीय अस्पताल परिसर में ही संचालित की गई।1
- शादी की शुभकामनाएं हेलो गाइस हम लोग गुजारिश है लाल दुपट्टा उड़ गया हवा के झोंके से दूसरे घर में कैसे लड़ाई करें 😃😃😃😃1
- मुंगेर में आगामी श्रावणी मेला की तैयारियां अब तेज हो गई हैं। ज़िलाधिकारी निखिल धनराज व्यक्तिगत रूप से हर व्यवस्था पर पैनी नज़र बनाए हुए हैं, ताकि कांवर यात्रा और बाबा बैद्यनाथ धाम की देवघर यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए सभी ज़रूरी इंतज़ाम सुनिश्चित किए जा सकें।1
- नीट पेपर लीक मामले को लेकर जारी भूख हड़ताल आज अपने 12वें दिन में पहुँच गई है। इस दौरान सरकार की कार्यप्रणाली पर असंवेदनशील होने का आरोप लगाया गया है, वहीं शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया है।1
- गोगरी एसडीओ संजय कुमार ने गुरुवार को दोपहर करीब एक बजे गोगरी एवं बेलदौर प्रखंड स्थित एसएफसी गोदामों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने गोदाम में खाद्यान्न के भंडारण, रखरखाव, उठाव और वितरण व्यवस्था का गहनता से जायजा लिया। निरीक्षण के पश्चात, एसडीओ ने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मियों को खाद्यान्न के सुरक्षित भंडारण, समय पर उठाव और जन वितरण प्रणाली के तहत निर्धारित मानकों के अनुरूप वितरण सुनिश्चित करने का कड़ा निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एसडीओ ने गोगरी एवं बेलदौर प्रखंड से जुड़े अधिकारियों को भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करते हुए व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और सुचारु बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। साथ ही, उन्होंने अभिलेखों के नियमित संधारण और खाद्यान्न वितरण से संबंधित सभी प्रक्रियाओं का ईमानदारी से पालन सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया।3
- लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा थाना क्षेत्र के अलीनगर गांव में एक हृदय विदारक घटना सामने आई है, जहाँ पति नाको बिंद ने अपनी 35 वर्षीय पत्नी सहोदरी देवी की धारदार हथियार से निर्मम हत्या कर दी। अपराध को छिपाने की नीयत से आरोपी पति ने अपनी पत्नी के शव को घर के अंदर ही मिट्टी में दफन कर दिया था। इस जघन्य वारदात का खुलासा लगभग 10 घंटे बाद तब हुआ, जब रात करीब 10 बजे मृतका की पालतू बकरियों के लगातार मिमियाने और ग्रामीणों के बढ़ते संदेह के कारण घर की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान ग्रामीणों ने घर के भीतर मिट्टी में दबे शव को देखा, जिसके बाद उन्होंने तत्काल आरोपी पति को पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है। पुलिस अब इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है।1