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पश्चिम बंगाल जीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी का बीजेपी दिल्ली कार्यालय में भव्य स्वागत
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पश्चिम बंगाल जीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी का बीजेपी दिल्ली कार्यालय में भव्य स्वागत
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- *विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर नेशनल मीडिया प्रेस क्लब द्वारा किया गया शरबत वितरण कार्यक्रम* *प्रेस की स्वतंत्रता पत्रकारों का विशेष अधिकार व लोकतंत्र की जीवन-शक्ति है - एम डी शर्मा राष्ट्रीय अध्यक्ष नेशनल मीडिया प्रेस क्लब* नमस्कार आप देख रहे हैं वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ एवं समृद्ध भारत समाचार पत्र संवाददाता दिनकर जी की रिपोर्ट जैसा कि कल दिनांक 3 मई दिन रविवार समय अपराहन दो और पांच के बीच के लगभग नेशनल मीडिया प्रेस क्लब के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अधिकांश पत्रकारों के सहयोग से आपके कानपुर नगर काकादेव कार्यालय कानपुर / भारत का सबसे लोकप्रिय राष्ट्रीय संगठन नेशनल मीडिया प्रेस क्लब द्वारा "विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस" के शुभ अवसर पर प्रेस की स्वतंत्रता, पत्रकारों को पत्रकारिता करते समय आ रही चुनौतियों व समाधान हेतु एवं आगामी कार्यकारिणी शपथ ग्रहण कार्यक्रम को लेकर प्रादेशिक कार्यालय काकादेव कानपुर में एक विशेष बैठक आयोजित की गई। साथ में कार्यालय के बाहर रोड पर शरबत वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष एम डी शर्मा द्वारा अवगत कराया गया कि *विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस* 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा घोषित किया गया था, जो 1991 में यूनेस्को के 26वें महासभा सम्मेलन में विंडहोक घोषणा में पहली बार वैश्विक स्तर पर स्वतंत्र, बहुलवादी और निर्बाध प्रेस की आवश्यकता को मजबूती से रेखांकित किया गया, जिससे पत्रकारिता की स्वतंत्रता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर केंद्रित हुई। इसे औपचारिक मान्यता प्रदान करते हुए प्रत्येक वर्ष 3 मई को "विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस" के रूप में मनाने की घोषणा हुई । यह आंदोलन औपचारिक नहीं था, बल्कि उन साहसी पत्रकारों के संघर्ष और संकल्प की गाथा थी, जिन्होंने अत्याचार, राजनीतिक दबाव के बावजूद भी सत्य को निर्भीकता से दिखाने का साहस रखा। यही स्वतंत्र प्रेस लोकतांत्रिक समाज की रीढ़ होती है और इसके बिना पारदर्शी, न्यायपूर्ण एवं जागरूक समाज की कल्पना असंभव है। प्रेस की स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं कि पत्रकार बिना किसी रोक-टोक के समाचार प्रकाशित कर सकें, बल्कि वह निर्भीक होकर निष्पक्ष तरीके से बिना किसी दबाव के सत्य को प्रकाशित कर सके। ऐसी स्वतंत्रता ही पत्रकारिता की उस नैतिक जिम्मेदारी को दर्शाती है। जिसमें तथ्य, निष्पक्षता और जनहित सर्वोपरि होता हैं। लोकतंत्र में प्रेस को “चौथा स्तंभ” इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के साथ संतुलन स्थापित करते हुए सत्ता पर नैतिक एवं सामाजिक नियंत्रण का कार्य करता है। प्रेस जनता और सरकार के बीच एक मजबूत कड़ी है, जो दोनों को पारस्परिक रूप से उत्तरदायी बनाता है और संवाद की प्रक्रिया को निरंतर बनाए रखता है। स्वतंत्र प्रेस के बिना लोकतंत्र केवल एक औपचारिक ढांचा है, जिसमें पारदर्शिता और जनसरोकार की वास्तविक आत्मा का अभाव दिखाई देता है। विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत है। यहां प्रेस की स्वतंत्रता को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है, जिसके अंतर्गत प्रेस की स्वतंत्रता भी अंतर्निहित मानी जाती है। यह अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था में विचारों के निर्बाध प्रवाह और सूचनाओं की पारदर्शिता को सुनिश्चित करता है। भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने अनेक ऐतिहासिक निर्णयों में यह स्पष्ट किया है कि प्रेस की स्वतंत्रता लोकतंत्र की आत्मा है और किसी भी लोकतांत्रिक समाज के सुचारु संचालन के लिए प्रेस का संरक्षण अनिवार्य है। न्यायालय ने यह भी माना है कि इस स्वतंत्रता पर लगाए जाने वाले प्रतिबंध केवल अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही उचित ठहराए जा सकते हैं। भारत में प्रेस ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आधुनिक काल तक बढ़ चढ़कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। स्वतंत्र भारत में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों को उजागर करने हेतु प्रेस सदैव जनहित के प्रश्नों पर सक्रिय और सजग रहा है। वर्तमान समय में पत्रकारिता का स्वरूप अधिक जटिल व चुनौतीपूर्ण हो गया है, जिससे संतुलित, निष्पक्ष और तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग की आवश्यकता और अधिक बढ़ गई है। विश्व के विभिन्न हिस्सों में पत्रकार अपने कार्य के दौरान गंभीर जोखिमों का सामना करते हैं। धमकियां, हमले और कुछ मामलों में हत्या जैसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि सत्य की रिपोर्टिंग आज भी कई जगहों पर असुरक्षित है। जिसके लिए नेशनल मीडिया प्रेस क्लब जैसे राष्ट्रीय संगठन पत्रकार सुरक्षा विधेयक कानून लागू कराने हेतु सरकार से बराबर मांग कर रहे हैं। जिसे लागू किया जाना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। बैठक में जहां आगामी कार्यक्रम की रूपरेखा बनाई गई वहीं जिलाध्यक्ष अमित कुमार व महामंत्री सुरेश सविता ने सभी पत्रकारों को कड़ाई से निर्देशित किया कि सभी पत्रकार निष्पक्ष, निडर होकर पत्रकारिता करें संगठन आपके साथ है वहीं यदि पत्रकार अनैतिक व असंवैधानिक एवं गलत कार्य करता पाया जाता है तो उसे तत्काल संगठन से निष्काशित कर दिया जाएगा और उस पर विधिक कार्यवाही भी की जाएगी। नेशनल मीडिया प्रेस क्लब द्वारा आयोजित की गई बैठक में प्रमुख रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष एम डी शर्मा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह, प्रदेश कोषाध्यक्ष डॉक्टर बालवीर कपाड़िया, मंडल अध्यक्ष एडवोकेट अवधेश सिंह तोमर, मंडल महामंत्री वीरेंद्र शर्मा, मंडल सलाहकार गोपाल गुप्ता, कानपूर जिला अध्यक्ष अमित कुमार, वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष विजय कुमार श्रीवास्तव, जिला महामंत्री सुरेश सविता, वरिष्ठ पत्रकार राज शर्मा व प्रदीप कुमार, जिला मंत्री सौरव वर्मा, जिला संगठन मंत्री सुहैल मंसूरी, जिला सूचना मंत्री अनिल सिंह चौहान, कानपुर देहात जिला महामंत्री अनिल कुमार, जिला उपाध्यक्ष अर्पित सिंह, मनोज कुमार, जितेन्द्र, अनिल मिश्रा, अभिलाष शुक्ला, सूरज, वीरेन्द्र, तकरून अली सहित दर्जनों सदस्य व पदाधिकारी रहे उपस्थित।1
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