कुदाली में गहराया जल संकट: पंचायत के प्रस्ताव के बाद भी मौन बैठा जल विभाग नरसिंहगढ़/कुदाली: मध्यप्रदेश के नरसिंहगढ़ ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत कुदाली में पीने के पानी की किल्लत अब विकराल रूप ले चुकी है। गांव में पेयजल की भारी कमी को देखते हुए ग्राम पंचायत द्वारा बाकायदा प्रस्ताव पारित कर जल विभाग (PHE) को सूचित किया गया है, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। बार-बार मांग, फिर भी अनदेखी ग्राम पंचायत कुदाली की बैठक (प्रस्ताव क्रमांक 29) में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया था कि गांव में पानी की समस्या के समाधान हेतु PHE विभाग द्वारा नया बोर खनन करवाकर हैंडपंप लगवाना अति आवश्यक है। पंचायत का कहना है कि वे इस संबंध में विभाग को पहले भी अवगत करा चुके हैं, लेकिन अधिकारियों की कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। ग्रामीणों में बढ़ता रोष गांव के लोगों का कहना है कि पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है। पंचायत द्वारा 02/10/2025 को ही इस प्रस्ताव को पारित कर दिया गया था, मगर महीनों बीत जाने के बाद भी विभाग की ओर से न तो सर्वे हुआ और न ही हैंडपंप लगाने की कोई प्रक्रिया शुरू की गई। मुख्य मांगें: जल विभाग (PHE) तुरंत गांव में बोर खनन का कार्य शुरू करे। चिन्हित स्थानों पर नए हैंडपंप लगाए जाएं ताकि ग्रामीणों को पेयजल मिल सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया जल विभाग कब जागता है।
कुदाली में गहराया जल संकट: पंचायत के प्रस्ताव के बाद भी मौन बैठा जल विभाग नरसिंहगढ़/कुदाली: मध्यप्रदेश के नरसिंहगढ़ ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत कुदाली में पीने के पानी की किल्लत अब विकराल रूप ले चुकी है। गांव में पेयजल की भारी कमी को देखते हुए ग्राम पंचायत द्वारा बाकायदा प्रस्ताव पारित कर जल विभाग (PHE) को सूचित किया गया है, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। बार-बार मांग, फिर भी अनदेखी ग्राम पंचायत कुदाली की बैठक (प्रस्ताव क्रमांक 29) में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया था कि गांव में पानी की समस्या के समाधान हेतु PHE विभाग द्वारा नया बोर खनन करवाकर हैंडपंप लगवाना अति आवश्यक है। पंचायत का कहना है कि वे इस संबंध में विभाग को पहले भी अवगत करा चुके हैं, लेकिन अधिकारियों की कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। ग्रामीणों में बढ़ता रोष गांव के लोगों का कहना है कि पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है। पंचायत द्वारा 02/10/2025 को ही इस प्रस्ताव को पारित कर दिया गया था, मगर महीनों बीत जाने के बाद भी विभाग की ओर से न तो सर्वे हुआ और न ही हैंडपंप लगाने की कोई प्रक्रिया शुरू की गई। मुख्य मांगें: जल विभाग (PHE) तुरंत गांव में बोर खनन का कार्य शुरू करे। चिन्हित स्थानों पर नए हैंडपंप लगाए जाएं ताकि ग्रामीणों को पेयजल मिल सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया जल विभाग कब जागता है।
- Post by Saif Ali journalist Journalist1
- ईरान युद्ध के कारण भारत में इंटरनेट पर मंडराया खतरा, जानें बचाव के क्या उपाय विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट के पूरी तरह ठप होने की संभावना कम है। इंटरनेट का ढांचा सड़कों के जाल की तरह होता है। अगर एक रास्ता (केबल) बंद होता है, तो डाटा को दूसरे रास्ते (रूट) पर मोड़ दिया जाता है। मिडिल ईस्ट में जारी संकट की वजह से समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट की तारों को खतरा पैदा हो गया है। भारत का ज्यादातर इंटरनेट डाटा इन्हीं तारों के जरिए आता-जाता है। यदि ये तारें टूटती हैं तो इंटरनेट पूरी तरह बंद तो नहीं होगा, पर कंपनियों को डाटा भेजने के लिए दूसरे लंबे रास्तों का सहारा लेना पड़ेगा। भारत का लगभग 60% इंटरनेट ट्रैफिक मुंबई के रास्ते यूरोप जाता है। यह रास्ता लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे तनावपूर्ण क्षेत्रों से होकर गुजरता है। शेष 40% ट्रैफिक चेन्नई के रास्ते सिंगापुर और प्रशांत महासागर की ओर जाता है। फिलहाल लैंडिंग स्टेशनों पर भारत में अभी 17 अंतरराष्ट्रीय केबल काम कर रहीं। क्या इंटरनेट पूरी तरह बंद होगा? विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट के पूरी तरह ठप होने की संभावना कम है। इंटरनेट का ढांचा सड़कों के जाल की तरह होता है। अगर एक रास्ता (केबल) बंद होता है, तो डाटा को दूसरे रास्ते (रूट) पर मोड़ दिया जाता है। युद्ध के कारण समुद्र के नीचे केबल ठीक करना लगभग नामुमकिन हो जाता है। बचाव का रास्ता भारत में अभी 14 लैंडिंग स्टेशनों पर 17 अंतरराष्ट्रीय केबल काम कर रहीं। भारत को नए समुद्री रास्तों की तलाश करनी होगी, जो पश्चिम एशिया के इलाकों से न गुजरें। समुद्र के नीचे केबल ठीक करने के लिए भारत को अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ानी होगी। एयरटेल जैसी कंपनियां जोखिम भरे क्षेत्रों से बचकर वैकल्पिक रूट तैयार करने पर ध्यान दे रहीं।1
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- Post by Shafiq Khan1
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- संवाददाता टोनी शाह #viralreelschallenge2025viralreelschallengejaiviralreelschallengeviralreelschallenge #viralreelschallenge2024viralreelschallenge #madhusudangarh #fbreelsfypシ゚viralvideo #fbreelsfypシ゚ #fblifestylechallenge #maksudangarh #gunamp #fyp #MP1