शासन द्वारा लगे फ्रीजर वाटर बने शोपीस, बिगड़े पड़े फ्रीजर वाटर से प्यासे ही लौट रहे लोग फतेहपुर जनपद के असोथर कस्बे में पेयजल व्यवस्था लापरवाहियों के चलते चरमरा रही है। नगर पंचायत असोथर द्वारा आम नागरिकों को शुद्ध पेयजल सुविधा के लिए लगाए गए फ्रीजर वाटर अवस्थाओं के कारण केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। जानकारी अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र असोथर, प्राथमिक विद्यालयों सहित अन्य सार्वजनिक स्थलों पर पेयजल की व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए शासन द्वारा निर्गत धन से फ्रीजर वाटर लगवाए गए थे। बताया जा रहा है कि कुछ को छोड़कर अधिकतर वाटर कूलर खराब पड़े हैं, जिससे आम लोगों के साथ- साथ मरीजों, तीमारदारों, स्कूली बच्चों, अभिभावकों और राहगीरों को पानी पीने से संबंधित परेशानियो का सामना करना पड़ रहा है। अधिक गंभीर स्थिति सरकारी अस्पताल असोथर की है, जहां रोजाना सैकड़ों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। जहां मरीजों और उनके तीमारदारों को शुद्ध पेयजल की दुरुस्त व्यवस्था नहीं है। वहीं, प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को भी पानी के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर होना पड़ता हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पंचायत ने मोटी धनराशि खर्च कर फ्रीजर वाटर तो लगवा दिए, लेकिन उनके रखरखाव की कोई व्यवस्था नहीं की गई। नतीजतन, एक-एक कर फ्रीजर वाटर टंकियो में लगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खराब होते जा रहे हैं और लोगों को पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में लोगों का सवाल उठ रहा है कि अस्पताल और विद्यालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों में भी स्वच्छ पेयजल की दुरुस्त व्यवस्था नहीं है, तो आम जनता बेहतर सुविधाओं की उम्मीद कैसे कर सकती है, क्षेत्रवासियों का आरोप है कि कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। नागरिकों ने जिला प्रशासन, नगर पंचायत और संबंधित विभागों से मांग किया है कि सभी खराब पड़े फ्रीजर वाटर की मरम्मत कराए जिससे शुद्ध पेयजल की अवस्था खत्म हो जाए।
शासन द्वारा लगे फ्रीजर वाटर बने शोपीस, बिगड़े पड़े फ्रीजर वाटर से प्यासे ही लौट रहे लोग फतेहपुर जनपद के असोथर कस्बे में पेयजल व्यवस्था लापरवाहियों के चलते चरमरा रही है। नगर पंचायत असोथर द्वारा आम नागरिकों को शुद्ध पेयजल सुविधा के लिए लगाए गए फ्रीजर वाटर अवस्थाओं के कारण केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। जानकारी अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र असोथर, प्राथमिक विद्यालयों सहित अन्य सार्वजनिक स्थलों पर पेयजल की व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए शासन द्वारा निर्गत धन से फ्रीजर वाटर लगवाए गए थे। बताया जा रहा है कि कुछ को छोड़कर अधिकतर वाटर कूलर खराब पड़े हैं, जिससे आम लोगों के साथ- साथ मरीजों, तीमारदारों, स्कूली बच्चों, अभिभावकों और राहगीरों को पानी पीने से संबंधित परेशानियो का सामना करना पड़ रहा है। अधिक गंभीर स्थिति सरकारी अस्पताल असोथर की है, जहां रोजाना सैकड़ों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। जहां मरीजों और उनके तीमारदारों को शुद्ध पेयजल की दुरुस्त व्यवस्था नहीं है। वहीं, प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को भी पानी के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर होना पड़ता हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पंचायत ने मोटी धनराशि खर्च कर फ्रीजर वाटर तो लगवा दिए, लेकिन उनके रखरखाव की कोई व्यवस्था नहीं की गई। नतीजतन, एक-एक कर फ्रीजर वाटर टंकियो में लगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खराब होते जा रहे हैं और लोगों को पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में लोगों का सवाल उठ रहा है कि अस्पताल और विद्यालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों में भी स्वच्छ पेयजल की दुरुस्त व्यवस्था नहीं है, तो आम जनता बेहतर सुविधाओं की उम्मीद कैसे कर सकती है, क्षेत्रवासियों का आरोप है कि कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। नागरिकों ने जिला प्रशासन, नगर पंचायत और संबंधित विभागों से मांग किया है कि सभी खराब पड़े फ्रीजर वाटर की मरम्मत कराए जिससे शुद्ध पेयजल की अवस्था खत्म हो जाए।
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- 📚 डिग्रियां बहुत हैं, पर संस्कार कहां हैं? — एक पिता और समाज सेवक का कड़वा सच 🌟 📚 डिग्रियां बहुत हैं, पर संस्कार कहां हैं? — एक पिता और समाज सेवक का कड़वा सच 🌟 आज के समय में केवल बड़ी डिग्रियां होना और पैसे का घमंड दिखाना ही सब कुछ नहीं होता। इंसानियत और रिश्ते तब तार-तार हो जाते हैं जब अपनों के पास शिक्षा तो हो, लेकिन तमीज, आदर और संस्कार बिल्कुल न हों। 📖 आज की जमीनी हकीकत: हमने समाज के बच्चों को पढ़ाने और उन्हें सही रास्ते पर लाने के लिए 'अनाया सिंह पाठशाला 1' (निःशुल्क शिक्षा) की शुरुआत की थी। पिछले 5 महीनों से यह पाठशाला बहुत अच्छे से चल रही थी और दर्जनों बच्चे यहाँ पढ़ रहे थे। लेकिन आज स्थिति यह है कि ससुराल पक्ष के लोगों (विशेषकर शिवानी जी के पिता और बहन) के अनावश्यक हस्तक्षेप, धमकियों और पारिवारिक कलह के कारण मेरी यह निशुल्क पाठशाला और बच्चों की पढ़ाई बीच में ही प्रभावित हो गई है। 👧 एक मासूम बेटी का दर्द: मेरी अढ़ाई साल की छोटी बिटिया की तबियत इन दिनों खराब है। ऐसे में उसे सही इलाज और प्यार देने के बजाय, ससुराल वाले जबरदस्ती का माहौल बनाकर उसे ले गए। वह मासूम बच्ची बस सबका सहमा हुआ चेहरा देखती रही। जब घर में कोई कमाने वाला नहीं है, नौकरी छूट चुकी है और मैं अपने बुजुर्ग माता-पिता की सेवा कर रहा हूँ—ऐसे संघर्ष के समय में—साथ देने के बजाय केवल पैसे, बंगले और रुतबे का ताना देना कहाँ की इंसानियत है? सच्चाई यह है कि सिर्फ पैसे या बड़ी डिग्रियों से किसी का चरित्र तय नहीं होता। ऐसे लोगों से संबंध जोड़ने से पहले समाज को यह सोचना चाहिए कि जहाँ बड़ों का सम्मान और संस्कारों की कीमत न हो, वहाँ रिश्ते कभी टिक नहीं सकते। 📍 स्थान: पनई बुजुर्ग, जिला - उन्नाव (उत्तर प्रदेश) 🎙️ प्रस्तुतकर्ता: अनुज सिंह चौहान (पत्रकार / समाज सेवक / मानवाधिकार प्रतिनिधि) 📺 अनाया सिंह पाठशाला 1 (निःशुल्क शिक्षा)2
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- घटना का वीडियो लगातार वायरल हो रहा है लेकिन अभी तक किसी भी पक्ष का बयान नहीं आया ब्रेकिंग फतेहपुर *फतेहपुर में बाइक हटाने को लेकर बवाल *कहासुनी के बाद बाजार में जमकर चले लात घूंसे *मारपीट के दौरान मचा अफरा- तफरी *घटना का वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से हो रहा वायरल *पुलिस मामले की जांच पड़ताल में जुटी *धाता थाना क्षेत्र के सूर्यकुंड पक्का तालाब बाजार का मामला1