*तिरंगा हमारी आन, बान और शान—विधायक डॉ. वाचस्पति* *देशभक्ति गीतों में रंगा बारा, निकाली गई भव्य तिरंगा यात्रा* प्रयागराज। (मनोज केसरवानी वरिष्ठ पत्रकार) बुधवार को विधायक डॉ. वाचस्पति के सहयोग एवं विधानसभा बारा के भाजपा के पांचों मंडल अध्यक्षों के नेतृत्व में भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। राष्ट्रभक्ति गीतों और देशभक्ति के नारों से पूरा बारा क्षेत्र गूंज उठा। यात्रा में सैकड़ों की संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों एवं स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। तिरंगा यात्रा के दौरान विधायक डॉ. वाचस्पति ने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि देश की आन, बान और शान है। यह भारत की एकता, अखंडता, गौरव, स्वाभिमान और वीर जवानों के बलिदान का प्रतीक है। तिरंगे के सम्मान के लिए देश का प्रत्येक नागरिक सदैव समर्पित है। उन्होंने कहा कि आज पूरा देश राष्ट्रभक्ति की भावना से ओत-प्रोत है। हमें अपने राष्ट्र की एकता और अखंडता को और मजबूत करने का संकल्प लेना चाहिए। देश हम सभी का है और देश की प्रगति में हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। आइए, हम सब मिलकर भारत को और अधिक सशक्त, समृद्ध एवं दुनिया का महान राष्ट्र बनाने के लिए अपना योगदान दें। भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश शुक्ला ने कहा कि तिरंगा हमें उन महान स्वतंत्रता सेनानियों और वीर शहीदों की याद दिलाता है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। आजादी के अमृत भाव को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और युवाओं में राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत करना हम सभी का दायित्व है। तिरंगा यात्रा में प्रमुख रूप से ब्लॉक प्रमुख जसरा अजीत सिंह पप्पू, कौंधियारा इन्द्रनाथ मिश्रा, शंकरगढ़ निर्मला देवी, पूर्व जिलाध्यक्ष विभव नाथ भारती, अनूप केसरवानी, दिलीप चतुर्वेदी, संतरा देवी, वरिष्ठ भाजपा नेता सुबोध सिंह, मंडल अध्यक्ष अखिलेश पटेल, वंदना सिंह, जगत नारायण शुक्ला, दिनेश प्रजापति, आशीष पाल, सतीश विश्वकर्मा, शिवराम सिंह, डॉ विनोद त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। यात्रा के दौरान भारत माता की जय और वंदे मातरम् के नारों से पूरा क्षेत्र देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया।
*तिरंगा हमारी आन, बान और शान—विधायक डॉ. वाचस्पति* *देशभक्ति गीतों में रंगा बारा, निकाली गई भव्य तिरंगा यात्रा* प्रयागराज। (मनोज केसरवानी वरिष्ठ पत्रकार) बुधवार को विधायक डॉ. वाचस्पति के सहयोग एवं विधानसभा बारा के भाजपा के पांचों मंडल अध्यक्षों के नेतृत्व में भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। राष्ट्रभक्ति गीतों और देशभक्ति के नारों से पूरा बारा क्षेत्र गूंज उठा। यात्रा में सैकड़ों की संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों एवं स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। तिरंगा यात्रा के दौरान विधायक डॉ. वाचस्पति ने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि देश की आन, बान और शान है। यह भारत की एकता, अखंडता, गौरव, स्वाभिमान और वीर जवानों के बलिदान का प्रतीक है। तिरंगे के सम्मान के लिए देश का प्रत्येक नागरिक सदैव समर्पित है। उन्होंने कहा कि आज पूरा देश राष्ट्रभक्ति की भावना से ओत-प्रोत है। हमें अपने राष्ट्र की एकता और अखंडता को और मजबूत करने का संकल्प लेना चाहिए। देश हम सभी का है और देश की प्रगति में हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। आइए, हम सब मिलकर भारत को और अधिक सशक्त, समृद्ध एवं दुनिया का महान राष्ट्र बनाने के लिए अपना योगदान दें। भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश शुक्ला ने कहा कि तिरंगा हमें उन महान स्वतंत्रता सेनानियों और वीर शहीदों की याद दिलाता है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। आजादी के अमृत भाव को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और युवाओं में राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत करना हम सभी का दायित्व है। तिरंगा यात्रा में प्रमुख रूप से ब्लॉक प्रमुख जसरा अजीत सिंह पप्पू, कौंधियारा इन्द्रनाथ मिश्रा, शंकरगढ़ निर्मला देवी, पूर्व जिलाध्यक्ष विभव नाथ भारती, अनूप केसरवानी, दिलीप चतुर्वेदी, संतरा देवी, वरिष्ठ भाजपा नेता सुबोध सिंह, मंडल अध्यक्ष अखिलेश पटेल, वंदना सिंह, जगत नारायण शुक्ला, दिनेश प्रजापति, आशीष पाल, सतीश विश्वकर्मा, शिवराम सिंह, डॉ विनोद त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। यात्रा के दौरान भारत माता की जय और वंदे मातरम् के नारों से पूरा क्षेत्र देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया।
- आद्या जगतगुरु शंकराचार्य त्रिकाल भवन्ता सरस्वती जी राम मंदिर चंदा चोरी पर बोली1
- पत्नी की मौत के बाद मासूम बच्ची को सीने से लगाए इंसाफ की लड़ाई लड़ रहा दीनानाथ नाज हॉस्पिटल की चिकित्सकीय व्यवस्था और डॉक्टर की डिग्री की जांच की मांग पत्नी की मौत के बाद मासूम बच्ची को सीने से लगाए इंसाफ की लड़ाई लड़ रहा दीनानाथ नाज हॉस्पिटल की चिकित्सकीय व्यवस्था और डॉक्टर की डिग्री की जांच की मांग प्रयागराज। करेली के 60 फीट रोड स्थित नाज हॉस्पिटल में प्रसव के बाद पत्नी की मौत से टूटे जौनपुर निवासी दीनानाथ मौर्य अब अपनी मासूम बेटी को गोद में लेकर इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं। बुधवार को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब के नारद सभागार में पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने नाज हॉस्पिटल की चिकित्सकीय व्यवस्था, अस्पताल के मानकों और वहां इलाज करने वाली चिकित्सक की शैक्षिक योग्यता एवं डिग्री की जांच कराने की मांग की। दीनानाथ मौर्य ने बताया कि उनकी पत्नी गर्भवती थीं। सामान्य प्रसव की उम्मीद में वह 25 अक्टूबर 2025 को पहली बार नाज हॉस्पिटल पहुंचे थे। इसके बाद जुलाई 2026 तक उनकी पत्नी का इलाज वहीं चलता रहा। उनका आरोप है कि 17 जुलाई को वह पत्नी को लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां सामान्य प्रसव से बच्ची का जन्म हुआ। लेकिन प्रसव के बाद पत्नी की हालत बिगड़ने लगी। उनका आरोप है कि उस समय अस्पताल में कोई विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद नहीं था। पत्नी दर्द से कराहती रहीं और चिकित्सक को बुलाने के बावजूद तत्काल उपचार नहीं मिल सका। बाद में सुबह करीब छह बजे चिकित्सक के पहुंचने और मरीज को आईसीयू में ले जाने की बात कही गई, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें एंबुलेंस से दूसरे अस्पताल ले जाने को कहा गया। दीनानाथ का दावा है कि जब वह पत्नी को लेकर दूसरे अस्पताल पहुंचे तो वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया और बताया कि उनकी मृत्यु कई घंटे पहले ही हो चुकी थी। इसके बाद वह पत्नी का शव लेकर वापस नाज हॉस्पिटल पहुंचे, जहां हंगामा हुआ और पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। दीनानाथ मौर्य की आवाज में पत्नी को खोने का दर्द साफ झलकता है। उन्होंने कहा कि जिस बच्ची को दुनिया में लाने के लिए वह और उनकी पत्नी महीनों से इंतजार कर रहे थे, उसी बच्ची के जन्म के बाद उसकी मां हमेशा के लिए उससे दूर हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सामान्य प्रसव के नाम पर उनसे करीब 51 हजार रुपये लिए गए। उनका कहना है कि उन्हें पैसे का नहीं, अपनी पत्नी और अपनी मासूम बच्ची की मां के चले जाने का गम है। दीनानाथ ने भावुक होकर कहा कि आज उनकी गोद में बच्ची तो है, लेकिन उसे मां का प्यार देने वाली उसकी मां नहीं है। बच्ची बड़ी होगी तो वह उससे उसकी मां के बारे में क्या कहेंगे—यह सवाल उन्हें भीतर से तोड़ रहा है। उनका कहना है कि एक महिला की मौत केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं होती, उसके साथ पूरा परिवार बिखर जाता है और बच्चों का जीवन भी बदल जाता है। दीनानाथ के मुताबिक घटना के बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की, लेकिन उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। उन्हें मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में शिकायत करने और जांच के बाद कार्रवाई की बात कही गई। इसके बाद उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से सीएमओ से शिकायत की। उन्होंने बताया कि शिकायत के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से मामले की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया गया है। अब उनकी निगाह जांच रिपोर्ट पर टिकी है। दीनानाथ मौर्य ने मांग की कि नाज हॉस्पिटल की मान्यता, चिकित्सकीय सुविधाओं, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, प्रसव के दौरान मौजूद स्टाफ और इलाज की पूरी प्रक्रिया की जांच कराई जाए। साथ ही जिस चिकित्सक पर वह इलाज में लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं, उनकी शैक्षिक योग्यता और चिकित्सकीय डिग्री की भी संबंधित विभाग से जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े। दीनानाथ ने यह भी कहा कि अस्पताल और वहां की चिकित्सक से जुड़े सामान्य प्रसव के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होते रहे हैं। उनका आरोप है कि ऐसे प्रचार से प्रभावित होकर ही उन्होंने अपनी पत्नी के इलाज के लिए अस्पताल पर भरोसा किया था। उन्होंने मांग की कि इन दावों और अस्पताल में उपलब्ध वास्तविक चिकित्सकीय सुविधाओं की भी जांच की जाए। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई केवल अपनी पत्नी के लिए नहीं, बल्कि उन तमाम परिवारों के लिए है जो इलाज के नाम पर निजी अस्पतालों पर भरोसा करते हैं। “मेरी पत्नी वापस नहीं आ सकती, लेकिन अगर मेरी लड़ाई से किसी दूसरी बच्ची को अपनी मां से और किसी पति को अपनी पत्नी से न बिछड़ना पड़े तो यही मेरे लिए सबसे बड़ी बात होगी।” फिलहाल मामले में सीएमओ द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब देखना होगा कि जांच में चिकित्सकीय लापरवाही, अस्पताल के मानकों और लगाए गए अन्य आरोपों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं और उसके आधार पर स्वास्थ्य विभाग क्या कार्रवाई करता है।4
- पत्नी की मौत के बाद मासूम बच्ची को सीने से लगाए इंसाफ की लड़ाई लड़ रहा दीनानाथ नाज हॉस्पिटल की चिकित्सकीय व्यवस्था और डॉक्टर की डिग्री की जांच की मांग प्रयागराज। करेली के 60 फीट रोड स्थित नाज हॉस्पिटल में प्रसव के बाद पत्नी की मौत से टूटे जौनपुर निवासी दीनानाथ मौर्य अब अपनी मासूम बेटी को गोद में लेकर इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं। बुधवार को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब के नारद सभागार में पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने नाज हॉस्पिटल की चिकित्सकीय व्यवस्था, अस्पताल के मानकों और वहां इलाज करने वाली चिकित्सक की शैक्षिक योग्यता एवं डिग्री की जांच कराने की मांग की। दीनानाथ मौर्य ने बताया कि उनकी पत्नी गर्भवती थीं। सामान्य प्रसव की उम्मीद में वह 25 अक्टूबर 2025 को पहली बार नाज हॉस्पिटल पहुंचे थे। इसके बाद जुलाई 2026 तक उनकी पत्नी का इलाज वहीं चलता रहा। उनका आरोप है कि 17 जुलाई को वह पत्नी को लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां सामान्य प्रसव से बच्ची का जन्म हुआ। लेकिन प्रसव के बाद पत्नी की हालत बिगड़ने लगी। उनका आरोप है कि उस समय अस्पताल में कोई विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद नहीं था। पत्नी दर्द से कराहती रहीं और चिकित्सक को बुलाने के बावजूद तत्काल उपचार नहीं मिल सका। बाद में सुबह करीब छह बजे चिकित्सक के पहुंचने और मरीज को आईसीयू में ले जाने की बात कही गई, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें एंबुलेंस से दूसरे अस्पताल ले जाने को कहा गया। दीनानाथ का दावा है कि जब वह पत्नी को लेकर दूसरे अस्पताल पहुंचे तो वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया और बताया कि उनकी मृत्यु कई घंटे पहले ही हो चुकी थी। इसके बाद वह पत्नी का शव लेकर वापस नाज हॉस्पिटल पहुंचे, जहां हंगामा हुआ और पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। दीनानाथ मौर्य की आवाज में पत्नी को खोने का दर्द साफ झलकता है। उन्होंने कहा कि जिस बच्ची को दुनिया में लाने के लिए वह और उनकी पत्नी महीनों से इंतजार कर रहे थे, उसी बच्ची के जन्म के बाद उसकी मां हमेशा के लिए उससे दूर हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सामान्य प्रसव के नाम पर उनसे करीब 51 हजार रुपये लिए गए। उनका कहना है कि उन्हें पैसे का नहीं, अपनी पत्नी और अपनी मासूम बच्ची की मां के चले जाने का गम है। दीनानाथ ने भावुक होकर कहा कि आज उनकी गोद में बच्ची तो है, लेकिन उसे मां का प्यार देने वाली उसकी मां नहीं है। बच्ची बड़ी होगी तो वह उससे उसकी मां के बारे में क्या कहेंगे—यह सवाल उन्हें भीतर से तोड़ रहा है। उनका कहना है कि एक महिला की मौत केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं होती, उसके साथ पूरा परिवार बिखर जाता है और बच्चों का जीवन भी बदल जाता है। दीनानाथ के मुताबिक घटना के बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की, लेकिन उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। उन्हें मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में शिकायत करने और जांच के बाद कार्रवाई की बात कही गई। इसके बाद उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से सीएमओ से शिकायत की। उन्होंने बताया कि शिकायत के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से मामले की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया गया है। अब उनकी निगाह जांच रिपोर्ट पर टिकी है। दीनानाथ मौर्य ने मांग की कि नाज हॉस्पिटल की मान्यता, चिकित्सकीय सुविधाओं, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, प्रसव के दौरान मौजूद स्टाफ और इलाज की पूरी प्रक्रिया की जांच कराई जाए। साथ ही जिस चिकित्सक पर वह इलाज में लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं, उनकी शैक्षिक योग्यता और चिकित्सकीय डिग्री की भी संबंधित विभाग से जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े। दीनानाथ ने यह भी कहा कि अस्पताल और वहां की चिकित्सक से जुड़े सामान्य प्रसव के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होते रहे हैं। उनका आरोप है कि ऐसे प्रचार से प्रभावित होकर ही उन्होंने अपनी पत्नी के इलाज के लिए अस्पताल पर भरोसा किया था। उन्होंने मांग की कि इन दावों और अस्पताल में उपलब्ध वास्तविक चिकित्सकीय सुविधाओं की भी जांच की जाए। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई केवल अपनी पत्नी के लिए नहीं, बल्कि उन तमाम परिवारों के लिए है जो इलाज के नाम पर निजी अस्पतालों पर भरोसा करते हैं। “मेरी पत्नी वापस नहीं आ सकती, लेकिन अगर मेरी लड़ाई से किसी दूसरी बच्ची को अपनी मां से और किसी पति को अपनी पत्नी से न बिछड़ना पड़े तो यही मेरे लिए सबसे बड़ी बात होगी।” फिलहाल मामले में सीएमओ द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब देखना होगा कि जांच में चिकित्सकीय लापरवाही, अस्पताल के मानकों और लगाए गए अन्य आरोपों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं और उसके आधार पर स्वास्थ्य विभाग क्या कार्रवाई करता है।2
- यमुनापार पंजाबी सभा के मीडिया प्रभारी सरदार पतविंदर सिंह बने। समाज हित एवं जनकल्याण के कार्यों को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाएगी। नैनी प्रयागराज/ यमुनापार पंजाबी सभा की महत्वपूर्ण बैठक नैनी गुरुद्वारा प्रांगण हाल में संपन्न हुई। सर्वप्रथम बैठक में उपस्थित सभी सम्मानित सदस्यों एवं अतिथियों का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। सभी एक-दूसरे का परिचय प्राप्त करने तथा सभा के गठन एवं उसके उद्देश्यों की जानकारी साझा करने के लिए एकत्रित हुए हैं। यमुनापार पंजाबी सभा की कार्यकारिणी समिति इस प्रकार है:- प्रधान तरुण चावला (काके भइया),उपप्रधान कमल गुलाटी, कोषाध्यक्ष तरुण खुराना,महिला प्रभारी शरिता खुराना, मीडिया प्रभारी सरदार पतविंदर सिंह। प्रभारी सुशील सुनेजा,अविनाश कुमार,काके,राजू चड्ढा,मनीष खेड़ा, नीतू सेठी। हम सभी को विश्वास है कि मार्गदर्शन एव सभी के सहयोग से यमुनापार पंजाबी सभा समाज हित एवं जनकल्याण के कार्यों को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाएगी। सहयोग,सुझाव एवं सहभागिता के लिए धन्यवाद किया।2
- शहीद वाल पर शहीदो के सम्मान में पुलिस बैंड द्वारा कार्यक्रम प्रयागराज: आजादी के लिए शहादत देने वाले रमेश दत्त मालवीय,बैजनाथ गुप्त,लाल पद्मधर ननका के लिए के लिए सम्मान कार्यक्रम शहीदवॉल पर। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अपराजिता सिंह मौजूद रही!1
- नाज हॉस्पिटल की व्यवस्था,मानकों और डॉक्टर की डिग्री की जांच की मांग प्रयागराज: करेली के 60 फीट रोड स्थित नाज हॉस्पिटल में प्रसव के बाद पत्नी की मौत से आहत जौनपुर निवासी दीनानाथ मौर्य अपनी मासूम बेटी को गोद में लेकर इंसाफ की मांग कर रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब के नारद सभागार में पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने नाज हॉस्पिटल की चिकित्सकीय व्यवस्था, उपलब्ध सुविधाओं, प्रसव के दौरान तैनात स्टाफ तथा उपचार करने वाली चिकित्सक की शैक्षिक योग्यता और मेडिकल डिग्री की जांच कराने की मांग की। दीनानाथ के मुताबिक, उनकी पत्नी गर्भवती थीं और सामान्य प्रसव की उम्मीद में 25 अक्टूबर 2025 को पहली बार नाज हॉस्पिटल में इलाज के लिए पहुंचे थे। जुलाई 2026 तक उनकी पत्नी का उपचार इसी अस्पताल में चलता रहा। उनका आरोप है कि 17 जुलाई को प्रसव के लिए पत्नी को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां सामान्य प्रसव से बच्ची का जन्म हुआ। इसके बाद अचानक उनकी पत्नी की तबीयत बिगड़ गई। दीनानाथ का आरोप है कि उस समय अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद नहीं था। उन्होंने बताया कि पत्नी की हालत बिगड़ने पर चिकित्सक को बुलाने की मांग की गई, लेकिन तत्काल उपचार नहीं मिल सका। उनके अनुसार, सुबह करीब छह बजे चिकित्सक के पहुंचने के बाद मरीज को आईसीयू में ले जाने की बात कही गई। हालत में सुधार न होने पर उन्हें दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए कहा गया। दीनानाथ का दावा है कि दूसरे अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने जांच के बाद उनकी पत्नी को मृत घोषित कर दिया। उनका कहना है कि चिकित्सकों ने महिला की मृत्यु कई घंटे पहले होने की बात बताई। इसके बाद वह पत्नी का शव लेकर नाज हॉस्पिटल वापस पहुंचे, जहां हंगामा हुआ और पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।1