*बिल्डर नहीं डायरेक्टर, अधिकारियों की रील बनाने वाला माफिया,* *यहियागंज का डिजिटल माफिया, ईंट-गारे से नहीं, ब्लैकमेलिंग के वीडियो से खड़ी होती हैं यहाँ इमारतें!* *संवाददाता मोहम्मद सैफ (साबरी)* लखनऊ। नवाबों के शहर लखनऊ के ऐतिहासिक क्षेत्र यहियागंज की तंग गलियों में इन दिनों वास्तुशिल्प का नहीं, बल्कि ब्लैकमेलिंग के नए युग का उदय हुआ है। यहाँ एक ऐसा फनकार बिल्डर अवतरित हुआ है, जिसकी निर्माण सामग्री ईंट और सीमेंट नहीं, बल्कि हिडन कैमरे और जासूसी वीडियो हैं। *लेबर से बिल्डर बने इस शख्स का नया फंडा, जेब में जासूसी कैमरा और हाथ में अधिकारियों की इज्जत!* अतीत में कच्छा गैंग के नाम से कुख्यात रहा यह व्यक्ति, जो कभी मजदूरी की दहलीज पर खड़ा था, आज अपनी दबंगई के चरम पर है। लेकिन इसकी इस तरक्की का राज उसकी मेहनत नहीं, बल्कि उसका स्पाई-नेटवर्क है। चर्चा है कि यह साहब किसी भी अधिकारी या कर्मचारी से मिलने से पहले अपने कपड़ों और मोबाइल में गुप्त कैमरों का जाल बुन लेते हैं। बातचीत के दौरान विभिन्न प्रकार की गोपनीय वीडियो बनाना इनका शौक भी है और इनका सबसे घातक हथियार भी है। इस कथित बिल्डर ने प्रशासन को पंगु बनाने का एक नायाब फंडा ईजाद किया है। नियम यह है कि यदि विभाग इनके अवैध निर्माण पर कार्रवाई की फाइल खोलता है, तो इनके पास मौजूद गोपनीय वीडियो की लाइब्रेरी खुल जाती है। अधिकारियों और कर्मचारियों को सीधे शब्दों में चेतावनी दी जाती है, कार्रवाई हुई तो तुम्हारी साख का वीडियो सार्वजनिक कर दिया जाएगा। यही हश्र पत्रकारों का भी होता है। यदि किसी ने इनके काले कारोबार की खबर समाज के सामने लाने का साहस किया, तो उसे बदनाम करने के लिए वीडियो की एडिटिंग का खेल शुरू हो जाता है। यह विडंबना ही है कि जो हाथ कभी लेबर के तौर पर ईंटें उठाते थे, आज वही हाथ लोकतंत्र के स्तंभों को डिजिटल बेड़ियों में जकड़ने का प्रयास कर रहे हैं। चौक और यहियागंज का वह क्षेत्र जहाँ परिंदा भी पर मारे तो सुरक्षा का खतरा पैदा हो जाए, वहाँ बेसमेंट से लेकर बहुमंजिला इमारतों का खड़ा होना प्रशासन की मौन स्वीकृति पर बड़े सवाल खड़ा करता है। यह आधुनिक निर्माण यहियागंज के मोर वाली बिल्डिंग के सामने धड़ल्ले से चल रहा है, क्या जिम्मेदार अधिकारी इस वीडियो गैंग के खौफ से अपनी वर्दी का मान भूल गए हैं? क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के आदेशों से ऊपर इस बिल्डर का कैमरा गैगं हो गया है? सड़कें बंद हैं, लोगों का आवागमन बाधित है और सुरक्षा मानक ताक पर हैं। संकरी गलियों में खड़ी ये इमारतें किसी बड़े हादसे को दावत दे रही हैं, लेकिन प्रशासन शायद उस दिन का इंतजार कर रहा है जब आग लगने पर पछताने के अलावा कुछ शेष न रहे। यह संघर्ष अब केवल एक अवैध बिल्डिंग का नहीं रह गया है, बल्कि यह कानून के इकबाल बनाम माफिया की चाल के बीच का युद्ध है। जनता टकटकी लगाए मुख्यमंत्री कार्यालय और मंडलायुक्त की ओर देख रही है। देखना यह है कि बाबा का बुलडोजर इस जासूसी कैमरे के तिलिस्म को ध्वस्त कर पाता है या सिस्टम यूँ ही इस वीडियो सम्राट के आगे नतमस्तक रहेगा। फिलहाल स्थानीय संगठन जल्दी मंडल आयुक्त से मिलकर इस भ्रष्टाचार और नित्य नए करना में की शिकायत दर्ज कराएंगे इसके अवैध कारोबार की शिकायत दर्ज करा कर और कई बिल्डिंगों की भी शिकायत दर्ज कराएंगे जल्दी बिल्डिंगों पर कार्रवाई होगी ताकि इनका इकबाल डाउन हो सके और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इकबाल बुलंद हो सके उनके आदेशों का पालन किया जा सके फिलहाल, स्थानीय संगठनों ने कमर कस ली है। वे जल्द ही मंडलायुक्त से मिलकर बिल्डर के भ्रष्टाचार और इन सनसनीखेज कारनामों की आधिकारिक शिकायत दर्ज कराएंगे। अवैध कारोबार और चिन्हित इमारतों की सूची सौंपकर सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी। संगठनों का साफ कहना है कि इन माफियाओं पर अंकुश लगाना अनिवार्य है ताकि इनका 'झूठा इकबाल' खत्म हो सके और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेशों का पालन सुनिश्चित कर शासन का इकबाल बुलंद किया जा सके। *बिल्डर नहीं डायरेक्टर, अधिकारियों की रील बनाने वाला माफिया,* *यहियागंज का डिजिटल माफिया, ईंट-गारे से नहीं, ब्लैकमेलिंग के वीडियो से खड़ी होती हैं यहाँ इमारतें!* *संवाददाता मोहम्मद सैफ (साबरी)* लखनऊ। नवाबों के शहर लखनऊ के ऐतिहासिक क्षेत्र यहियागंज की तंग गलियों में इन दिनों वास्तुशिल्प का नहीं, बल्कि ब्लैकमेलिंग के नए युग का उदय हुआ है। यहाँ एक ऐसा फनकार बिल्डर अवतरित हुआ है, जिसकी निर्माण सामग्री ईंट और सीमेंट नहीं, बल्कि हिडन कैमरे और जासूसी वीडियो हैं। *लेबर से बिल्डर बने इस शख्स का नया फंडा, जेब में जासूसी कैमरा और हाथ में अधिकारियों की इज्जत!* अतीत में कच्छा गैंग के नाम से कुख्यात रहा यह व्यक्ति, जो कभी मजदूरी की दहलीज पर खड़ा था, आज अपनी दबंगई के चरम पर है। लेकिन इसकी इस तरक्की का राज उसकी मेहनत नहीं, बल्कि उसका स्पाई-नेटवर्क है। चर्चा है कि यह साहब किसी भी अधिकारी या कर्मचारी से मिलने से पहले अपने कपड़ों और मोबाइल में गुप्त कैमरों का जाल बुन लेते हैं। बातचीत के दौरान विभिन्न प्रकार की गोपनीय वीडियो बनाना इनका शौक भी है और इनका सबसे घातक हथियार भी है। इस कथित बिल्डर ने प्रशासन को पंगु बनाने का एक नायाब फंडा ईजाद किया है। नियम यह है कि यदि विभाग इनके अवैध निर्माण पर कार्रवाई की फाइल खोलता है, तो इनके पास मौजूद गोपनीय वीडियो की लाइब्रेरी खुल जाती है। अधिकारियों और कर्मचारियों को सीधे शब्दों में चेतावनी दी जाती है, कार्रवाई हुई तो तुम्हारी साख का वीडियो सार्वजनिक कर दिया जाएगा। यही हश्र पत्रकारों का भी होता है। यदि किसी ने इनके काले कारोबार की खबर समाज के सामने लाने का साहस किया, तो उसे बदनाम करने के लिए वीडियो की एडिटिंग का खेल शुरू हो जाता है। यह विडंबना ही है कि जो हाथ कभी लेबर के तौर पर ईंटें उठाते थे, आज वही हाथ लोकतंत्र के स्तंभों को डिजिटल बेड़ियों में जकड़ने का प्रयास कर रहे हैं। चौक और यहियागंज का वह क्षेत्र जहाँ परिंदा भी पर मारे तो सुरक्षा का खतरा पैदा हो जाए, वहाँ बेसमेंट से लेकर बहुमंजिला इमारतों का खड़ा होना प्रशासन की मौन स्वीकृति पर बड़े सवाल खड़ा करता है। यह आधुनिक निर्माण यहियागंज के मोर वाली बिल्डिंग के सामने धड़ल्ले से चल रहा है, क्या जिम्मेदार अधिकारी इस वीडियो गैंग के खौफ से अपनी वर्दी का मान भूल गए हैं? क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के आदेशों से ऊपर इस बिल्डर का कैमरा गैगं हो गया है? सड़कें बंद हैं, लोगों का आवागमन बाधित है और सुरक्षा मानक ताक पर हैं। संकरी गलियों में खड़ी ये इमारतें किसी बड़े हादसे को दावत दे रही हैं, लेकिन प्रशासन शायद उस दिन का इंतजार कर रहा है जब आग लगने पर पछताने के अलावा कुछ शेष न रहे। यह संघर्ष अब केवल एक अवैध बिल्डिंग का नहीं रह गया है, बल्कि यह कानून के इकबाल बनाम माफिया की चाल के बीच का युद्ध है। जनता टकटकी लगाए मुख्यमंत्री कार्यालय और मंडलायुक्त की ओर देख रही है। देखना यह है कि बाबा का बुलडोजर इस जासूसी कैमरे के तिलिस्म को ध्वस्त कर पाता है या सिस्टम यूँ ही इस वीडियो सम्राट के आगे नतमस्तक रहेगा। फिलहाल स्थानीय संगठन जल्दी मंडल आयुक्त से मिलकर इस भ्रष्टाचार और नित्य नए करना में की शिकायत दर्ज कराएंगे इसके अवैध कारोबार की शिकायत दर्ज करा कर और कई बिल्डिंगों की भी शिकायत दर्ज कराएंगे जल्दी बिल्डिंगों पर कार्रवाई होगी ताकि इनका इकबाल डाउन हो सके और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इकबाल बुलंद हो सके उनके आदेशों का पालन किया जा सके फिलहाल, स्थानीय संगठनों ने कमर कस ली है। वे जल्द ही मंडलायुक्त से मिलकर बिल्डर के भ्रष्टाचार और इन सनसनीखेज कारनामों की आधिकारिक शिकायत दर्ज कराएंगे। अवैध कारोबार और चिन्हित इमारतों की सूची सौंपकर सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी। संगठनों का साफ कहना है कि इन माफियाओं पर अंकुश लगाना अनिवार्य है ताकि इनका 'झूठा इकबाल' खत्म हो सके और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेशों का पालन सुनिश्चित कर शासन का इकबाल बुलंद किया जा सके।
*बिल्डर नहीं डायरेक्टर, अधिकारियों की रील बनाने वाला माफिया,* *यहियागंज का डिजिटल माफिया, ईंट-गारे से नहीं, ब्लैकमेलिंग के वीडियो से खड़ी होती हैं यहाँ इमारतें!* *संवाददाता मोहम्मद सैफ (साबरी)* लखनऊ। नवाबों के शहर लखनऊ के ऐतिहासिक क्षेत्र यहियागंज की तंग गलियों में इन दिनों वास्तुशिल्प का नहीं, बल्कि ब्लैकमेलिंग के नए युग का उदय हुआ है। यहाँ एक ऐसा फनकार बिल्डर अवतरित हुआ है, जिसकी निर्माण सामग्री ईंट और सीमेंट नहीं, बल्कि हिडन कैमरे और जासूसी वीडियो हैं। *लेबर से बिल्डर बने इस शख्स का नया फंडा, जेब में जासूसी कैमरा और हाथ में अधिकारियों की इज्जत!* अतीत में कच्छा गैंग के नाम से कुख्यात रहा यह व्यक्ति, जो कभी मजदूरी की दहलीज पर खड़ा था, आज अपनी दबंगई के चरम पर है। लेकिन इसकी इस तरक्की का राज उसकी मेहनत नहीं, बल्कि उसका स्पाई-नेटवर्क है। चर्चा है कि यह साहब किसी भी अधिकारी या कर्मचारी से मिलने से पहले अपने कपड़ों और मोबाइल में गुप्त कैमरों का जाल बुन लेते हैं। बातचीत के दौरान विभिन्न प्रकार की गोपनीय वीडियो बनाना इनका शौक भी है और इनका सबसे घातक हथियार भी है। इस कथित बिल्डर ने प्रशासन को पंगु बनाने का एक नायाब फंडा ईजाद किया है। नियम यह है कि यदि विभाग इनके अवैध निर्माण पर कार्रवाई की फाइल खोलता है, तो इनके पास मौजूद गोपनीय वीडियो की लाइब्रेरी खुल जाती है। अधिकारियों और कर्मचारियों को सीधे शब्दों में चेतावनी दी जाती है, कार्रवाई हुई तो तुम्हारी साख का वीडियो सार्वजनिक कर दिया जाएगा। यही हश्र पत्रकारों का भी होता है। यदि किसी ने इनके काले कारोबार की खबर समाज के सामने लाने का साहस किया, तो उसे बदनाम करने के लिए वीडियो की एडिटिंग का खेल शुरू हो जाता है। यह विडंबना ही है कि जो हाथ कभी लेबर के तौर पर ईंटें उठाते थे, आज वही हाथ लोकतंत्र के स्तंभों को डिजिटल बेड़ियों में जकड़ने का प्रयास कर रहे हैं। चौक और यहियागंज का वह क्षेत्र जहाँ परिंदा भी पर मारे तो सुरक्षा का खतरा पैदा हो जाए, वहाँ बेसमेंट से लेकर बहुमंजिला इमारतों का खड़ा होना प्रशासन की मौन स्वीकृति पर बड़े सवाल खड़ा करता है। यह आधुनिक निर्माण यहियागंज के मोर वाली बिल्डिंग के सामने धड़ल्ले से चल रहा है, क्या जिम्मेदार अधिकारी इस वीडियो गैंग के खौफ से अपनी वर्दी का मान भूल गए हैं? क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के आदेशों से ऊपर इस बिल्डर का कैमरा गैगं हो गया है? सड़कें बंद हैं, लोगों का आवागमन बाधित है और सुरक्षा मानक ताक पर हैं। संकरी गलियों में खड़ी ये इमारतें किसी बड़े हादसे को दावत दे रही हैं, लेकिन प्रशासन शायद उस दिन का इंतजार कर रहा है जब आग लगने पर पछताने के अलावा कुछ शेष न रहे। यह संघर्ष अब केवल एक अवैध बिल्डिंग का नहीं रह गया है, बल्कि यह कानून के इकबाल बनाम माफिया की चाल के बीच का युद्ध है। जनता टकटकी लगाए मुख्यमंत्री कार्यालय और मंडलायुक्त की ओर देख रही है। देखना यह है कि बाबा का बुलडोजर इस जासूसी कैमरे के तिलिस्म को ध्वस्त कर पाता है या सिस्टम यूँ ही इस वीडियो सम्राट के आगे नतमस्तक रहेगा। फिलहाल स्थानीय संगठन जल्दी मंडल आयुक्त से मिलकर इस भ्रष्टाचार और नित्य नए करना में की शिकायत दर्ज कराएंगे इसके अवैध कारोबार की शिकायत दर्ज करा कर और कई बिल्डिंगों की भी शिकायत दर्ज कराएंगे जल्दी बिल्डिंगों पर कार्रवाई होगी ताकि इनका इकबाल डाउन हो सके और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इकबाल बुलंद हो सके उनके आदेशों का पालन किया जा सके फिलहाल, स्थानीय संगठनों ने कमर कस ली है। वे जल्द ही मंडलायुक्त से मिलकर बिल्डर के भ्रष्टाचार और इन सनसनीखेज कारनामों की आधिकारिक शिकायत दर्ज कराएंगे। अवैध कारोबार और चिन्हित इमारतों की सूची सौंपकर सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी। संगठनों का साफ कहना है कि इन माफियाओं पर अंकुश लगाना अनिवार्य है ताकि इनका 'झूठा इकबाल' खत्म हो सके और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेशों का पालन सुनिश्चित कर शासन का इकबाल बुलंद किया जा सके। *बिल्डर नहीं डायरेक्टर, अधिकारियों की रील बनाने वाला माफिया,* *यहियागंज का डिजिटल माफिया, ईंट-गारे से नहीं, ब्लैकमेलिंग के वीडियो से खड़ी होती हैं यहाँ इमारतें!* *संवाददाता मोहम्मद सैफ (साबरी)* लखनऊ। नवाबों के शहर लखनऊ के ऐतिहासिक क्षेत्र यहियागंज की तंग गलियों में इन दिनों वास्तुशिल्प का नहीं, बल्कि ब्लैकमेलिंग के नए युग का उदय हुआ है। यहाँ एक ऐसा फनकार बिल्डर अवतरित हुआ है, जिसकी निर्माण सामग्री ईंट और सीमेंट नहीं, बल्कि हिडन कैमरे और जासूसी वीडियो हैं। *लेबर से बिल्डर बने इस शख्स का नया फंडा, जेब में जासूसी कैमरा और हाथ में अधिकारियों की इज्जत!* अतीत में कच्छा गैंग के नाम से कुख्यात रहा यह व्यक्ति, जो कभी मजदूरी की दहलीज पर खड़ा था, आज अपनी दबंगई के चरम पर है। लेकिन इसकी इस तरक्की का राज उसकी मेहनत नहीं, बल्कि उसका स्पाई-नेटवर्क है। चर्चा है कि यह साहब किसी भी अधिकारी या कर्मचारी से मिलने से पहले अपने कपड़ों और मोबाइल में गुप्त कैमरों का जाल बुन लेते हैं। बातचीत के दौरान विभिन्न प्रकार की गोपनीय वीडियो बनाना इनका शौक भी है और इनका सबसे घातक हथियार भी है। इस कथित बिल्डर ने प्रशासन को पंगु बनाने का एक नायाब फंडा ईजाद किया है। नियम यह है कि यदि विभाग इनके अवैध निर्माण पर कार्रवाई की फाइल खोलता है, तो इनके पास मौजूद गोपनीय वीडियो की लाइब्रेरी खुल जाती है। अधिकारियों और कर्मचारियों को सीधे शब्दों में चेतावनी दी जाती है, कार्रवाई हुई तो तुम्हारी साख का वीडियो सार्वजनिक कर दिया जाएगा। यही हश्र पत्रकारों का भी होता है। यदि किसी ने इनके काले कारोबार की खबर समाज के सामने लाने का साहस किया, तो उसे बदनाम करने के लिए वीडियो की एडिटिंग का खेल शुरू हो जाता है। यह विडंबना ही है कि जो हाथ कभी लेबर के तौर पर ईंटें उठाते थे, आज वही हाथ लोकतंत्र के स्तंभों को डिजिटल बेड़ियों में जकड़ने का प्रयास कर रहे हैं। चौक और यहियागंज का वह क्षेत्र जहाँ परिंदा भी पर मारे तो सुरक्षा का खतरा पैदा हो जाए, वहाँ बेसमेंट से लेकर बहुमंजिला इमारतों का खड़ा होना प्रशासन की मौन स्वीकृति पर बड़े सवाल खड़ा करता है। यह आधुनिक निर्माण यहियागंज के मोर वाली बिल्डिंग के सामने धड़ल्ले से चल रहा है, क्या जिम्मेदार अधिकारी इस वीडियो गैंग के खौफ से अपनी वर्दी का मान भूल गए हैं? क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के आदेशों से ऊपर इस बिल्डर का कैमरा गैगं हो गया है? सड़कें बंद हैं, लोगों का आवागमन बाधित है और सुरक्षा मानक ताक पर हैं। संकरी गलियों में खड़ी ये इमारतें किसी बड़े हादसे को दावत दे रही हैं, लेकिन प्रशासन शायद उस दिन का इंतजार कर रहा है जब आग लगने पर पछताने के अलावा कुछ शेष न रहे। यह संघर्ष अब केवल एक अवैध बिल्डिंग का नहीं रह गया है, बल्कि यह कानून के इकबाल बनाम माफिया की चाल के बीच का युद्ध है। जनता टकटकी लगाए मुख्यमंत्री कार्यालय और मंडलायुक्त की ओर देख रही है। देखना यह है कि बाबा का बुलडोजर इस जासूसी कैमरे के तिलिस्म को ध्वस्त कर पाता है या सिस्टम यूँ ही इस वीडियो सम्राट के आगे नतमस्तक रहेगा। फिलहाल स्थानीय संगठन जल्दी मंडल आयुक्त से मिलकर इस भ्रष्टाचार और नित्य नए करना में की शिकायत दर्ज कराएंगे इसके अवैध कारोबार की शिकायत दर्ज करा कर और कई बिल्डिंगों की भी शिकायत दर्ज कराएंगे जल्दी बिल्डिंगों पर कार्रवाई होगी ताकि इनका इकबाल डाउन हो सके और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इकबाल बुलंद हो सके उनके आदेशों का पालन किया जा सके फिलहाल, स्थानीय संगठनों ने कमर कस ली है। वे जल्द ही मंडलायुक्त से मिलकर बिल्डर के भ्रष्टाचार और इन सनसनीखेज कारनामों की आधिकारिक शिकायत दर्ज कराएंगे। अवैध कारोबार और चिन्हित इमारतों की सूची सौंपकर सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी। संगठनों का साफ कहना है कि इन माफियाओं पर अंकुश लगाना अनिवार्य है ताकि इनका 'झूठा इकबाल' खत्म हो सके और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेशों का पालन सुनिश्चित कर शासन का इकबाल बुलंद किया जा सके।
- Post by पत्रकार धीरेंद्र त्रिपाठी3
- गाज़ियाबाद की आग: हादसा या सुनियोजित साज़िश,आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हालिया गिरफ्तारियों के साथ किसी संभावित कनेक्शन को भी परखा जा रहा है। कबाड़ियों के गोदाम एवं झुग्गी-झोपड़ियों में विशेष रिपोर्ट: इंडिया न्यूज़ 7 पवन सूर्यवंशी ब्यूरो चीफ ऑल एनसीआर गाज़ियाबाद के इंदिरापुरम थाना क्षेत्र के अंतर्गत कनावनी गांव के पास स्थित कबाड़े के गोदाम झुग्गी-झोपड़ियों में लगी हालिया भीषण आग ने एक बार फिर OGW नेटवर्क और झुग्गी क्लस्टर पर उठते गंभीर सवाल,उन सवालों को जिंदा कर दिया है, जो पिछले कई वर्षों से दबे हुए थे, लेकिन हर नई घटना के साथ फिर सतह पर आ जाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि एक ऐसा सिलसिला है जो समय-समय पर दोहराया जाता रहा है और हर बार कारण अलग-अलग बताकर मामला ठंडा कर दिया जाता है। कभी इसे शॉर्ट सर्किट कहा जाता है, कभी सिलेंडर ब्लास्ट, तो कभी गर्मी का असर, लेकिन लगातार दोहराती घटनाएं अब संयोग से ज्यादा कुछ प्रतीत होने लगी हैं। जिलाधिकारी महोदय श्री रविन्द्र कुमार मॉंदड़ द्वारा 150 लगभग झुकी झोपड़िया में समान लग जा रहा है। डीसीपी श्री धवल जायसवाल एवं समस्त पुलिस प्रशासन द्वारा जलकल पुलिस द्वारा आंख पर काबू करने की मस्कट जारी है। कनावनी, इंदिरापुरम, कौशांबी से लेकर गाजीपुर मंडी और आसपास के डेरी क्षेत्रों तक फैले झुग्गी क्लस्टर्स को अगर एक साथ जोड़कर देखा जाए, तो एक ऐसा भूगोल सामने आता है जहां आबादी घनी है, निगरानी सीमित है और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया कमजोर मानी जाती है। ऐसे क्षेत्रों में किसी भी बाहरी व्यक्ति के लिए लंबे समय तक बिना ध्यान आकर्षित किए रहना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है। यही वह बिंदु है जहां से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता शुरू होती है, खासकर तब जब हाल के दिनों में कौशांबी क्षेत्र से कुछ संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों की गिरफ्तारी की खबरें सामने आई हों और “ओवर ग्राउंड वर्कर” यानी OGW नेटवर्क की चर्चा तेज हुई हो।OGW शब्द आमतौर पर उन लोगों के लिए इस्तेमाल होता है जो किसी बड़े नेटवर्क के लिए जमीन पर रहकर सहायता प्रदान करते हैं—चाहे वह लॉजिस्टिक सपोर्ट हो, सूचना जुटाना हो या अस्थायी ठिकाने उपलब्ध कराना। हालांकि गाज़ियाबाद की इन घटनाओं को सीधे किसी ऐसे नेटवर्क से जोड़ना अभी जांच का विषय है, लेकिन स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। खासतौर पर तब, जब इन कबाड़ा के गोदाम एवं झुग्गी क्लस्टर्स के आसपास CRPF और PAC जैसे सुरक्षा बलों के कैंप मौजूद हों, जो इन इलाकों को रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील बनाते हैं।स्थानीय चर्चाओं में एक और पहलू सामने आता है—तकनीक का उपयोग। कुछ लोगों का दावा है कि संदिग्ध तत्व छोटे सोलर उपकरणों या कैमरों का इस्तेमाल कर सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी, आधुनिक दौर में निगरानी के साधनों के छोटे और सस्ते हो जाने के कारण इस संभावना को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा सकता। यदि इस दिशा में कोई ठोस तथ्य सामने आते हैं, तो यह मामला केवल स्थानीय अपराध की सीमा से बाहर निकलकर एक बड़े सुरक्षा आयाम में प्रवेश कर सकता है।इन सभी सवालों के बीच सबसे महत्वपूर्ण और चिंताजनक पहलू बार-बार लगने वाली आग है। हर घटना के बाद झुग्गियां पूरी तरह जलकर खाक हो जाती हैं, जिससे वहां रहने वाले लोगों के दस्तावेज, पहचान पत्र और अन्य साक्ष्य भी नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह केवल दुर्घटना है, या फिर अनजाने में या जानबूझकर ऐसी स्थिति बन रही है जहां हर बार सब कुछ “रीसेट” हो जाता है। यह केवल एक संदेह है, लेकिन जांच के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा जरूर हो सकती है।हाल ही में लखनऊ में सामने आए एक जासूसी से जुड़े मामले के बाद वहां भी झुग्गी क्षेत्र में आग लगने की घटना ने कई लोगों को चौंकाया था। अब गाज़ियाबाद में इसी तरह की घटना के बाद कुछ लोग इन दोनों को जोड़कर देखने लगे हैं, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले ठोस साक्ष्य जरूरी हैं और केवल समानता के आधार पर पैटर्न तय करना जल्दबाजी होगी।इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी चुनौती प्रशासन के सामने है, जिसे एक साथ दो मोर्चों पर काम करना होता है—एक ओर मानवीय संकट है, जहां झुग्गियों में रहने वाले लोग हर बार आग में अपना सब कुछ खो देते हैं और पुनर्वास की मांग करते हैं, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा का प्रश्न है, जहां इन अनियंत्रित बस्तियों के कारण संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। स्थानीय निवासी भी इसी द्वंद्व में हैं—वे न तो किसी निर्दोष को नुकसान पहुंचते देखना चाहते हैं और न ही अपने आसपास किसी संभावित खतरे को अनदेखा करना चाहते हैं। प्रशासन ने इस बार घटना के बाद जांच तेज करने की बात कही है। फॉरेंसिक टीमों को लगाया गया है, आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हालिया गिरफ्तारियों के साथ किसी संभावित कनेक्शन को भी परखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि हर एंगल से जांच की जाएगी और बिना साक्ष्य के किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाएगा।फिलहाल, गाज़िया बाद की यह आग एक बार फिर कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गई है। क्या यह केवल एक और दुर्घटना है, जिसे समय के साथ भुला दिया जाएगा, या फिर यह किसी गहरे और लंबे समय से चल रहे तंत्र की एक झलक है? सच्चाई जो भी हो, वह जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन इतना तय है कि इस तरह की लगातार घटनाएं अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गई हैं, बल्कि शहरी सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्था और सामाजिक संतुलन—तीनों पर एक साथ सवाल खड़े कर रही हैं।4
- गाजियाबाद के लोनी बॉर्डर थाना पुलिस ने चोरी की वारदात को अंजाम देने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से चोरी की एक मोटरसाइकिल भी बरामद की है। यह कार्रवाई 15 अप्रैल 2026 को दर्ज मुकदमे के बाद की गई। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने चंदन वाटिका के पास पार्किंग से ट्रॉली के पीछे खड़ी बाइक चोरी की थी और उसे बेचने की फिराक में थे। पकड़े गए आरोपियों की पहचान नदीम, सोहबे और साहिब के रूप में हुई है। पुलिस ने साक्ष्य के आधार पर धाराएं बढ़ाते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।1
- Post by द कहर न्यूज़ एजेंसी1
- *जनगणना हुई शुरू, कलेक्टर ने लिया व्यवस्थाओं का जायजा* गुना मध्यप्रदेश जिला कलेक्टरकिशोरकुमार कन्याल ने जनगणना के लिए आयोजित परिशिक्षण शिविर का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए आवश्यक निर्देश दिए।कलेक्टर महोदय ने जनगणना कार्य मे लगाए गए कर्मचारियों से सहज व आत्मीय भाव से भेंट की। उन्होंने बताया कि 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक पोर्टल पर सभी अपनी जानकारी स्वयं ऑनलाइन भर पाएंगे।एक मई से कर्मचारी घर घर जा कर जानकारी इकट्ठा करेगे। *गुना मध्यप्रदेश से डायरेक्टर आर के शर्मा की रिपोर्ट*1
- दिल्ली के शाहदरा जिले से बड़ी और राहत देने वाली खबर सामने आई है, जहां थाना एमएस पार्क पुलिस ने महज़ 4 घंटे के भीतर एक सीरियल हाउस ब्रेकर को गिरफ्तार कर बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से सोना, चांदी, घड़ियां और कई कीमती सामान बरामद किए हैं। इतना ही नहीं, गिरफ्तार आरोपी पहले से 21 चोरी और घर में सेंधमारी के मामलों में शामिल पाया गया है। आइए दिखाते हैं यह पूरी शाहदरा जिले की थाना एमएस पार्क पुलिस ने एक बार फिर अपनी तेज़ और प्रभावी कार्यशैली का परिचय दिया है। दिनांक 12 अप्रैल 2026 को थाना एमएस पार्क में दिनदहाड़े घर में चोरी की PCR कॉल प्राप्त हुई, जिसके तुरंत बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। SHO इंस्पेक्टर राजेश कुमार मिश्रा के नेतृत्व में SI संदीप, ASI सुनील कुमार, HC अनुज, HC प्रदीप और HC जितेंद्र की टीम का गठन किया गया। टीम ने बिना समय गंवाए घटनास्थल और आसपास के CCTV फुटेज खंगाले और लोकल मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया। तकनीकी निगरानी और मानव सूचना तंत्र के आधार पर पुलिस ने आरोपी शकील इरफान उर्फ इरफान उर्फ नाटा को सीमापुरी इलाके से दबोच लिया। पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि वह नशे का आदी है और अपनी लत को पूरा करने के लिए घरों में चोरी की वारदातों को अंजाम देता था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से चांदी के कंगन, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, सोने की नथ, मंगलसूत्र, चांदी की चेन, घड़ियां, पायल और अन्य कीमती सामान बरामद किया है। सबसे बड़ी बात यह है कि एमएस पार्क पुलिस ने इस कार्रवाई से तीन मामलों का खुलासा करते हुए सिर्फ 4 घंटे में केस सुलझा दिया। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पहले से 21 चोरी और हाउस ब्रेकिंग के मामलों में शामिल रहा है। शाहदरा पुलिस की इस तेज1
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- Post by पत्रकार धीरेंद्र त्रिपाठी1