बीना नगर के शिव वार्ड, शास्त्री वार्ड और अन्य क्षेत्रों में रेलवे द्वारा किए गए ध्वस्तीकरण से प्रभावित परिवारों के समर्थन में सोमवार को कांग्रेस नेताओं और स्थानीय नागरिकों ने कलेक्टर सागर, एसडीएम बीना और रेलवे अधिकारियों को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल राहत, पुनर्वास, मुआवजा और भविष्य में बेदखली की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई है। एडवोकेट महेंद्र कुमार नवैया ने आरोप लगाया कि रेलवे प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बेदखली और अतिक्रमण हटाने के लिए निर्धारित स्पष्ट दिशा-निर्देशों की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि इन निर्देशों में पर्याप्त नोटिस, सुनवाई का अवसर, पुनर्वास और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने का प्रावधान है, जिसका पालन नहीं किया गया, जिससे गरीब परिवार खुले आसमान के नीचे जीवनयापन को मजबूर हैं। ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष इंदर यादव ने भाजपा सरकार पर लोगों को आवास उपलब्ध कराने के बजाय बेघर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह कार्रवाई नियम-कानूनों और न्यायिक प्रक्रियाओं की अनदेखी कर की गई है, जहाँ गरीबों के मकान तोड़े गए, जबकि प्रभावशाली लोगों के निर्माणों को छोड़ दिया गया, जिससे कार्रवाई भेदभावपूर्ण प्रतीत होती है। नगर पालिका प्रतिपक्ष नेता प्रशांत राय ने चेतावनी दी कि यदि प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक पुनर्वास नहीं दिया गया, तो कांग्रेस पार्टी और स्थानीय जनता एक व्यापक जनआंदोलन के लिए बाध्य होगी। विनोद पोरिया ने भी कहा कि यदि रेलवे प्रशासन ने कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया और पीड़ित परिवारों को राहत नहीं दी तो उग्र जनसंघर्ष खड़ा होगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन और रेलवे अधिकारियों की होगी। ओमप्रकाश पंजाबी ने यह भी दोहराया कि कांग्रेस पार्टी गरीबों, दलितों, मजदूरों और वंचित वर्गों पर होने वाले अत्याचार को बर्दाश्त नहीं करेगी और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा। जिला अध्यक्ष महिला कांग्रेस कमेटी सागर ग्रामीण एडवोकेट उमा महेंद्र नवैया ने क्षेत्रीय विधायक पर पीड़ितों की पीड़ा न सुनने का आरोप लगाते हुए कहा कि लाखों रुपये के मकान, घरेलू सामान और गृहस्थी नष्ट हो गई, और सरकार की ओर से केवल नगण्य सहायता की बात की जा रही है, जबकि कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यदि सात दिनों के भीतर प्रभावित परिवारों को अंतरिम राहत, पुनर्वास, मुआवजा, यथास्थिति संरक्षण और पुनः बसाने की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई, तो कांग्रेस पार्टी, प्रभावित परिवार और स्थानीय नागरिक लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे। इस आंदोलन की संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन एवं रेलवे प्रशासन की होगी। ज्ञापन में प्रमुख मांगों के तौर पर प्रत्येक प्रभावित परिवार को ₹2 लाख की अंतरिम आर्थिक सहायता, आवास निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री, संपत्ति क्षति का सर्वे कर पूर्ण क्षतिपूर्ति, प्रत्येक परिवार को ₹20 लाख का मुआवजा, अंतिम निर्णय तक यथास्थिति बनाए रखना, रेलवे के भूमि अभिलेख सार्वजनिक करना, और सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी तत्काल उपलब्ध कराना शामिल है। इस दौरान ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष इंदर यादव, नगर पालिका प्रतिपक्ष नेता प्रशांत राय, विनोद पोरिया, ओमप्रकाश पंजाबी, एडवोकेट महेंद्र कुमार नवैया, एडवोकेट उमा महेंद्र नवैया सहित बड़ी संख्या में प्रभावित परिवार और कांग्रेसजन उपस्थित रहे।
बीना नगर के शिव वार्ड, शास्त्री वार्ड और अन्य क्षेत्रों में रेलवे द्वारा किए गए ध्वस्तीकरण से प्रभावित परिवारों के समर्थन में सोमवार को कांग्रेस नेताओं और स्थानीय नागरिकों ने कलेक्टर सागर, एसडीएम बीना और रेलवे अधिकारियों को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल राहत, पुनर्वास, मुआवजा और भविष्य में बेदखली की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई है। एडवोकेट महेंद्र कुमार नवैया ने आरोप लगाया कि रेलवे प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बेदखली और अतिक्रमण हटाने के लिए निर्धारित स्पष्ट दिशा-निर्देशों की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि इन निर्देशों में पर्याप्त नोटिस, सुनवाई का अवसर, पुनर्वास और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने का प्रावधान है, जिसका पालन नहीं किया गया, जिससे गरीब परिवार
खुले आसमान के नीचे जीवनयापन को मजबूर हैं। ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष इंदर यादव ने भाजपा सरकार पर लोगों को आवास उपलब्ध कराने के बजाय बेघर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह कार्रवाई नियम-कानूनों और न्यायिक प्रक्रियाओं की अनदेखी कर की गई है, जहाँ गरीबों के मकान तोड़े गए, जबकि प्रभावशाली लोगों के निर्माणों को छोड़ दिया गया, जिससे कार्रवाई भेदभावपूर्ण प्रतीत होती है। नगर पालिका प्रतिपक्ष नेता प्रशांत राय ने चेतावनी दी कि यदि प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक पुनर्वास नहीं दिया गया, तो कांग्रेस पार्टी और स्थानीय जनता एक व्यापक जनआंदोलन के लिए बाध्य होगी। विनोद पोरिया ने भी कहा कि यदि रेलवे प्रशासन ने कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया और पीड़ित परिवारों को राहत नहीं दी तो उग्र जनसंघर्ष खड़ा होगा, जिसकी जिम्मेदारी
प्रशासन और रेलवे अधिकारियों की होगी। ओमप्रकाश पंजाबी ने यह भी दोहराया कि कांग्रेस पार्टी गरीबों, दलितों, मजदूरों और वंचित वर्गों पर होने वाले अत्याचार को बर्दाश्त नहीं करेगी और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा। जिला अध्यक्ष महिला कांग्रेस कमेटी सागर ग्रामीण एडवोकेट उमा महेंद्र नवैया ने क्षेत्रीय विधायक पर पीड़ितों की पीड़ा न सुनने का आरोप लगाते हुए कहा कि लाखों रुपये के मकान, घरेलू सामान और गृहस्थी नष्ट हो गई, और सरकार की ओर से केवल नगण्य सहायता की बात की जा रही है, जबकि कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यदि सात दिनों के भीतर प्रभावित परिवारों को अंतरिम राहत, पुनर्वास, मुआवजा, यथास्थिति संरक्षण और पुनः बसाने की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई,
तो कांग्रेस पार्टी, प्रभावित परिवार और स्थानीय नागरिक लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे। इस आंदोलन की संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन एवं रेलवे प्रशासन की होगी। ज्ञापन में प्रमुख मांगों के तौर पर प्रत्येक प्रभावित परिवार को ₹2 लाख की अंतरिम आर्थिक सहायता, आवास निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री, संपत्ति क्षति का सर्वे कर पूर्ण क्षतिपूर्ति, प्रत्येक परिवार को ₹20 लाख का मुआवजा, अंतिम निर्णय तक यथास्थिति बनाए रखना, रेलवे के भूमि अभिलेख सार्वजनिक करना, और सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी तत्काल उपलब्ध कराना शामिल है। इस दौरान ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष इंदर यादव, नगर पालिका प्रतिपक्ष नेता प्रशांत राय, विनोद पोरिया, ओमप्रकाश पंजाबी, एडवोकेट महेंद्र कुमार नवैया, एडवोकेट उमा महेंद्र नवैया सहित बड़ी संख्या में प्रभावित परिवार और कांग्रेसजन उपस्थित रहे।
- राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग ओबीसी मोर्चा ने जनगणना 2027 के पहले चरण में ओबीसी वर्ग के आंकड़े अलग से दर्ज न किए जाने के विरोध में तहसील कार्यालय पहुंचकर एक ज्ञापन सौंपा है। मोर्चा के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि वर्तमान में चल रही हाउस लिस्टिंग प्रक्रिया में परिवार की श्रेणी दर्ज करने के लिए केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और 'अन्य' के विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में ओबीसी वर्ग के लिए अलग से कोई विकल्प नहीं रखा गया है, जिसके कारण उनके आंकड़े अलग से दर्ज नहीं हो पाएंगे। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने इस पर कड़ा विरोध व्यक्त किया है, जिससे ओबीसी जातिगत गणना को लेकर विरोध और बढ़ गया है।1
- ललितपुर जिले के थाना मदनपुर क्षेत्र के ग्राम उल्दना खुर्द में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा संचालित मिशन शक्ति 5.0 अभियान के तहत एक बहु-बेटी सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को बढ़ावा देना था, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं, युवतियों और बालिकाओं ने भाग लेकर महिला सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। सम्मेलन को संबोधित करते हुए, महिला आरक्षी रूबी बघेल ने पुलिस विभाग की प्राथमिकता के रूप में महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने उपस्थित महिलाओं को महिला सुरक्षा संबंधी कानूनों, उनके संवैधानिक अधिकारों और शासन द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में महिलाओं का जागरूक होना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यही जागरूकता उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा करने और विपरीत परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम बनाती है। कार्यक्रम के दौरान, महिला हेल्पलाइन 1090, आपातकालीन सेवा 112, महिला सहायता हेल्पलाइन 181 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं के बारे में विस्तार से बताया गया। महिलाओं को यह भी जानकारी दी गई कि छेड़छाड़, उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, बाल विवाह, दहेज प्रताड़ना या किसी अन्य अपराध की स्थिति में वे तत्काल इन सेवाओं का उपयोग करके सहायता प्राप्त कर सकती हैं। पुलिस टीम ने शिकायतकर्ताओं की गोपनीयता का पूरा ध्यान रखने और उनकी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। साइबर अपराधों और ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक विशेष अभियान भी चलाया गया। महिलाओं और बालिकाओं को सोशल मीडिया का सुरक्षित उपयोग करने, अज्ञात कॉल और संदेशों से सावधान रहने, बैंक खाते और ओटीपी संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा न करने तथा डिजिटल माध्यमों पर सतर्क रहने के लिए प्रेरित किया गया। पुलिस कर्मियों ने चेतावनी दी कि थोड़ी सी लापरवाही भी आर्थिक और सामाजिक नुकसान का कारण बन सकती है। इसके अतिरिक्त, महिला आरक्षी ने बालिकाओं को शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया, यह कहते हुए कि शिक्षित और जागरूक बेटियां ही समाज और राष्ट्र के विकास की आधारशिला हैं। कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं और बालिकाओं ने महिला सुरक्षा, साइबर अपराध और हेल्पलाइन सेवाओं से जुड़े कई प्रश्न पूछे, जिनके उत्तर पुलिस टीम द्वारा विस्तार से दिए गए। सम्मेलन में थाना मदनपुर पुलिस के अन्य कर्मियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चियां मौजूद रहीं। अंत में, पुलिस टीम ने सभी महिलाओं और बालिकाओं से अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने, किसी भी घटना को छिपाने के बजाय तुरंत पुलिस को सूचित करने और समाज में महिला सुरक्षा तथा सम्मान के प्रति जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। मिशन शक्ति अभियान के तहत आयोजित यह कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण और जनजागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।4
- झाँसी में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान मंच पर हुई कुर्सी फेंकने की घटना अब चर्चा का मुख्य विषय बन गई है। इस घटना के बाद लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों उत्पन्न हुई और इसके पीछे क्या कारण थे। जनता के बीच यह चर्चा व्यापक रूप से चल रही है कि यदि किसी जनप्रतिनिधि को मंच पर उचित स्थान नहीं मिला, तो क्या इस तरह की प्रतिक्रिया उचित मानी जा सकती है। इसके साथ ही, कई लोग यह भी पूछ रहे हैं कि संबंधित जनप्रतिनिधि ने अपने कार्यकाल के दौरान क्षेत्र और जनता के लिए कौन-कौन से उल्लेखनीय कार्य किए हैं। प्रयागराज से लेकर ललितपुर तक के क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले इस जनप्रतिनिधि की आम जनता के बीच कितनी पहचान है और उन्होंने जनहित के मुद्दों पर कितनी सक्रियता दिखाई है, यह प्रश्न भी अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह माँग उठ रही है कि जनप्रतिनिधि या उनके समर्थक जनता के सामने उनके कार्यों, उपलब्धियों और क्षेत्र में उनके योगदान की जानकारी प्रस्तुत करें। इससे लोगों को उनके राजनीतिक और सामाजिक योगदान का सही आकलन करने का अवसर मिल सकेगा। वहीं, कुछ लोगों ने संगठन और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि किसी स्तर पर पद और प्रभाव का गलत इस्तेमाल हो रहा है, तो इसकी गंभीरता से समीक्षा की जानी चाहिए। फिलहाल, इस घटना को लेकर राजनीतिक चर्चाओं का दौर जारी है और लोग पूरे मामले पर स्पष्ट जानकारी सामने आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।2
- Post by Malkhan daas Tirpaliya1
- आज शहर के चार परीक्षा केंद्रों पर री-नीट परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें गर्ल्स कॉलेज स्थित एक केंद्र पर तीन छात्र परीक्षा देने से वंचित रह गईं। इनमें से दो छात्र निर्धारित समय पर कॉलेज में प्रवेश नहीं कर सकीं, जबकि तीसरी छात्र के अभिभावक पिछली परीक्षा का ही प्रवेश फॉर्म लेकर पहुंचे थे। समय पर प्रवेश न पा सकने वाली दो छात्राओं की पहचान स्नेहा दुबे (निवासी आरएमपी नगर विदिशा) और रागनी विश्वकर्मा (ग्राम कुला, तहसील कुरवाई) के रूप में हुई है। प्रवेश सुबह 11 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक ही अनुमत था, लेकिन ये दोनों छात्र 1:30 बजे के 2 मिनट बाद पहुंची थीं, जिसके चलते उन्हें प्रवेश से रोक दिया गया। इस जानकारी के बाद परीक्षा की नोडल अधिकारी और केंद्रीय विद्यालय की प्राचार्य गीता भदौरिया मौके पर पहुंचीं। उन्होंने दोनों छात्रों को केंद्र के अंदर ले जाने का प्रयास किया, लेकिन उनका बायोमेट्रिक सफल नहीं हो सका, जिसके कारण उन्हें परीक्षा दिए बिना ही बाहर आना पड़ा।1
- दमोह जिले के बटियागढ़ थाना क्षेत्र में शनिवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में 10 वर्षीय बालक की मौत हो गई। यह घटना बकायन के पास हुई, जहाँ बालक सड़क पार कर रहा था तभी एक तेज रफ्तार ट्रक ने उसे टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल बालक को तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। बटियागढ़ थाना प्रभारी रजनी शुक्ला ने बताया कि मृतक की पहचान बांधा निवासी कृष्णा (10) पिता पूरन सिंह के रूप में हुई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कृष्णा के सड़क पार करते समय तेज गति से आ रहे ट्रक ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और स्थानीय नागरिकों की मदद से घायल बालक को तुरंत जिला अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ उसके शव को शव गृह में सुरक्षित रखवा दिया गया था। आज रविवार को बटियागढ़ पुलिस जिला अस्पताल पहुंची। पुलिस ने शव को शव गृह से निकलवाकर पंचनामा बनाया, पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी की और बाद में शव परिजनों को सौंप दिया। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात ट्रक चालक की तलाश शुरू कर दी है।1
- दमोह में रविवार को नीट यूजी री-एग्जाम कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और शांतिपूर्ण माहौल के बीच संपन्न हुआ। शहर के तीन परीक्षा केंद्रों - शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय, पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय और पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस पीजी कॉलेज - पर कुल 1147 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। इनमें से 1038 परीक्षार्थियों ने यह परीक्षा दी, जबकि 109 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। परीक्षा केंद्रों पर थ्री-लेयर सुरक्षा जांच, सीसीटीवी निगरानी और भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी। अभ्यर्थियों को दोपहर 1:30 बजे तक ही प्रवेश दिया गया। व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए कलेक्टर प्रताप नारायण यादव और पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी ने भी सुरक्षा इंतजामों का निरीक्षण किया। परीक्षा समाप्त होने के बाद शाम 5:30 बजे केंद्रों से बाहर निकले अधिकांश अभ्यर्थियों ने फिजिक्स के प्रश्नपत्र को अपेक्षाकृत कठिन बताया। उनका कहना था कि बायोलॉजी और केमिस्ट्री के प्रश्न मॉडरेट स्तर के थे, लेकिन फिजिक्स के सवालों को हल करने में अधिक समय लगा, जिससे उनका समय प्रबंधन प्रभावित हुआ। कई छात्रों ने कठिन फिजिक्स पेपर के कारण कटऑफ कम रहने की संभावना भी जताई। छात्र-छात्राओं ने सरकार से पुनः पेपर लीक न होने की मांग उठाते हुए कहा कि उन्होंने बड़ी मेहनत से पढ़ाई कर दोबारा यह परीक्षा दी है। वहीं, जिले में परीक्षा बिना किसी व्यवधान के संपन्न तो हुई, लेकिन केंद्रों के बाहर अभिभावकों के लिए बैठने और पेयजल जैसी व्यवस्थाएं सीमित पाई गईं। कई अभिभावकों को बारिश और गर्मी के बीच लंबे समय तक बाहर इंतजार करना पड़ा, जबकि सुरक्षा की दृष्टि से एग्जाम सेंटरों के बाहर भारी पुलिस एवं प्रशासनिक बल मौजूद रहा।1
- Post by Jagtapal Yadav g1
- एक परीक्षा छूटने का दर्द वही समझ सकता है जिसने अपने सपनों के लिए वर्षों तक संघर्ष किया हो, और बेटियों की आँखों में आए आँसू इस व्यवस्था की सबसे बड़ी नाकामी को दर्शाते हैं। हाल ही में, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, हैदराबाद, राजस्थान, तेलंगाना और विदिशा में Re-NEET परीक्षा देने पहुँचीं तीन बेटियों के साथ ऐसा ही हुआ, जहाँ 'चन्द्र मिनट लेट' की लापरवाही ने उनके सपनों के दरवाज़े बंद कर दिए। इस घटना ने कई स्थानों पर सिस्टम की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पोस्ट में साफ तौर पर यह भी पूछा गया है कि क्या राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और हैदराबाद यूनिवर्सिटी में परीक्षा के नाम पर महज़ मज़ाक चल रहा है।1