लिखित आश्वासन के 15 दिन बाद भी नहीं मिली राशि, बारिश में भी तीसरे दिन डटे हजारों किसान। फसल बीमा की बकाया राशि और आपदा राहत मुआवजे की मांग को लेकर बकानी, पिड़ावा व सुनेल में अनिश्चितकालीन धरना जारी झालावाड़, 1 अगस्त। झालावाड़ जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बावजूद भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में बकानी, पिड़ावा एवं सुनेल तहसील मुख्यालयों पर किसानों का अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शनिवार को तीसरे दिन भी पूरे उत्साह, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ जारी रहा। विपरीत मौसम के चलते धरना स्थल पर पूर्व में लगाए गए टेंट की व्यवस्था बदलकर बरसाती पंडाल तैयार करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद हजारों किसान अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए डटे रहे। लगातार बारिश के कारण किसानों को भोजन, रात्रि विश्राम एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद किसान स्वयं ही धरना स्थल पर भोजन बनाकर दिन-रात आंदोलन को जारी रखे हुए हैं। भारतीय किसान संघ के अनुसार, इससे पूर्व 13 जुलाई से 16 जुलाई तक बकानी तहसील परिसर में किसानों द्वारा अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया गया था। उस दौरान जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद किसानों को लिखित आश्वासन दिया गया था कि चार दिनों के भीतर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की बकाया राशि किसानों के खातों में जमा कर दी जाएगी। प्रशासन के इस आश्वासन पर किसानों ने अपना धरना स्थगित कर दिया था। हालांकि, लिखित आश्वासन के लगभग 15 दिन बीत जाने के बाद भी किसानों के खातों में बकाया राशि जमा नहीं हो सकी। प्रशासन द्वारा वादा पूरा नहीं होने से किसानों में भारी रोष व्याप्त है, जिसके चलते पुनः बकानी, पिड़ावा एवं सुनेल में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया गया है। किसानों की प्रमुख मांग है कि खरीफ-2025 में सोयाबीन फसल खराब होने पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत झालावाड़ जिले के लिए स्वीकृत लगभग 260 करोड़ रुपये की बीमा दावा राशि में से शेष करीब 160 करोड़ रुपये का भुगतान शीघ्र किया जाए। इसके साथ ही किसानों ने वर्ष 2025 में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को राज्य सरकार द्वारा घोषित आपदा अनुदान राहत कोष (एसडीआरएफ) के तहत मुआवजा राशि भी तत्काल खातों में जमा करने की मांग की है। दोनों प्रकार की सहायता लंबित रहने से किसान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से ज्ञापन, प्रशासनिक अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अपनी समस्याएं सरकार तक पहुंचाते रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं हुआ। सरकार की उदासीनता के चलते अन्नदाता को बरसात के मौसम में खेतों के बजाय तहसील मुख्यालयों पर धरना देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। धरना स्थल पर किसानों के जोशीले नारों से वातावरण गूंजता रहा। “जब तक दुखी किसान रहेगा, धरती पर तूफान रहेगा।” “हम अपना अधिकार मांगते, नहीं किसी से भीख मांगते।” भारतीय किसान संघ ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूरी तरह गैर-राजनीतिक एवं राष्ट्रवादी संगठन के नेतृत्व में किसानों के संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई है। संगठन ने चेतावनी दी है कि जब तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शेष राशि एवं आपदा राहत मुआवजा किसानों के खातों में जमा नहीं होता, तब तक यह अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। संघ ने सरकार, जिला प्रशासन एवं फसल बीमा कंपनी से मांग की है कि बार-बार आश्वासन देने के बजाय स्वीकृत राशि का तत्काल भुगतान किया जाए। अब पूरे जिले की निगाहें सरकार और प्रशासन पर टिकी हैं कि वे अन्नदाता किसानों को उनका न्यायोचित अधिकार कब तक दिलाते हैं।
लिखित आश्वासन के 15 दिन बाद भी नहीं मिली राशि, बारिश में भी तीसरे दिन डटे हजारों किसान। फसल बीमा की बकाया राशि और आपदा राहत मुआवजे की मांग को लेकर बकानी, पिड़ावा व सुनेल में अनिश्चितकालीन धरना जारी झालावाड़, 1 अगस्त। झालावाड़ जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बावजूद भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में बकानी, पिड़ावा एवं सुनेल तहसील मुख्यालयों पर किसानों का अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शनिवार को तीसरे दिन भी पूरे उत्साह, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ जारी रहा। विपरीत मौसम के चलते धरना स्थल पर पूर्व में लगाए गए टेंट की व्यवस्था बदलकर बरसाती पंडाल तैयार करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद हजारों किसान अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए डटे रहे। लगातार बारिश के कारण किसानों को भोजन, रात्रि विश्राम एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद किसान स्वयं ही धरना स्थल पर भोजन बनाकर दिन-रात आंदोलन को जारी रखे हुए हैं। भारतीय किसान संघ के अनुसार, इससे पूर्व 13 जुलाई से 16 जुलाई तक बकानी तहसील परिसर में किसानों द्वारा अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया गया था। उस दौरान जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद किसानों को लिखित आश्वासन दिया गया था कि चार दिनों के भीतर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की बकाया राशि किसानों के खातों में जमा कर दी जाएगी। प्रशासन के इस आश्वासन पर किसानों ने अपना धरना स्थगित कर दिया था। हालांकि, लिखित आश्वासन के लगभग 15 दिन बीत जाने के बाद भी किसानों के खातों में बकाया राशि जमा नहीं हो सकी। प्रशासन द्वारा वादा पूरा नहीं होने से किसानों में भारी रोष व्याप्त है, जिसके चलते पुनः बकानी, पिड़ावा एवं सुनेल में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया गया है। किसानों की प्रमुख मांग है कि खरीफ-2025 में सोयाबीन फसल खराब होने पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत झालावाड़ जिले के लिए स्वीकृत लगभग 260 करोड़ रुपये की बीमा दावा राशि में से शेष करीब 160 करोड़ रुपये का भुगतान शीघ्र किया जाए। इसके साथ ही किसानों ने वर्ष 2025 में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को राज्य सरकार द्वारा घोषित आपदा अनुदान राहत कोष (एसडीआरएफ) के तहत मुआवजा राशि भी तत्काल खातों में जमा करने की मांग की है। दोनों प्रकार की सहायता लंबित रहने से किसान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से ज्ञापन, प्रशासनिक अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अपनी समस्याएं सरकार तक पहुंचाते रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं हुआ। सरकार की उदासीनता के चलते अन्नदाता को बरसात के मौसम में खेतों के बजाय तहसील मुख्यालयों पर धरना देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। धरना स्थल पर किसानों के जोशीले नारों से वातावरण गूंजता रहा। “जब तक दुखी किसान रहेगा, धरती पर तूफान रहेगा।” “हम अपना अधिकार मांगते, नहीं किसी से भीख मांगते।” भारतीय किसान संघ ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूरी तरह गैर-राजनीतिक एवं राष्ट्रवादी संगठन के नेतृत्व में किसानों के संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई है। संगठन ने चेतावनी दी है कि जब तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शेष राशि एवं आपदा राहत मुआवजा किसानों के खातों में जमा नहीं होता, तब तक यह अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। संघ ने सरकार, जिला प्रशासन एवं फसल बीमा कंपनी से मांग की है कि बार-बार आश्वासन देने के बजाय स्वीकृत राशि का तत्काल भुगतान किया जाए। अब पूरे जिले की निगाहें सरकार और प्रशासन पर टिकी हैं कि वे अन्नदाता किसानों को उनका न्यायोचित अधिकार कब तक दिलाते हैं।
- खानपुर में कांग्रेस की संगठनात्मक बैठक आयोजित पंचायत-निकाय चुनावों की रणनीति पर मंथन खानपुर में कांग्रेस की संगठनात्मक बैठक आयोजित,पंचायत-निकाय चुनावों की रणनीति पर मंथन1
- गगचाना विद्यालय में रामस्वरूप साहू की भावभीनी विदाई,34 वर्ष की सेवा के बाद सेवानिवृत्ति, विद्यालय विकास के लिए किया ₹26,100 का आर्थिक सहयोग गगचाना विद्यालय में रामस्वरूप साहू की भावभीनी विदाई,34 वर्ष की सेवा के बाद सेवानिवृत्ति, विद्यालय विकास के लिए किया ₹26,100 का आर्थिक सहयोग छीपाबड़ौद /गगचाना राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गगचाना के शिक्षक रामस्वरूप साहू के राजकीय सेवा में 34 वर्ष की गौरवपूर्ण एवं समर्पित सेवाएं पूर्ण करने पर शुक्रवार को विद्यालय परिसर में भावभीनी विदाई एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। प्रधानाचार्य भीमराज मीणा ने बताया कि समारोह में मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार भार्गव, विद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्य जगदीश प्रसाद नागर, सरपंच प्रतिनिधि महावीर प्रसाद नागर, ग्राम विकास अधिकारी ललित शर्मा, डॉ. गणेशलाल मालव, CHO सत्यप्रकाश मीणा सहित पीईओ क्षेत्र के शिक्षक, उनके परिवारजन, गणमान्य अतिथि, ग्रामवासी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी ने साहू का पुष्पमालाओं, साफा पहनाकर एवं अभिनंदन पत्र भेंट कर सम्मान किया। उपस्थितजनों ने उनके अनुशासित व्यक्तित्व, कर्तव्यनिष्ठा, सरल व्यवहार एवं विद्यार्थियों के प्रति समर्पित सेवाओं की भूरि-भूरि प्रशंसा की। कार्यक्रम का प्रभावी मंच संचालन व्याख्याता महावीर प्रसाद नागर ने किया। *सेवानिवृत्ति पर प्रेरणादायक पहल* सेवानिवृत्ति के अवसर पर रामस्वरूप साहू ने विद्यालय के प्रति आत्मीयता का परिचय देते हुए 21,000 रुपये व्यय कर एक कक्षा-कक्ष की मरम्मत करवाई। साथ ही विद्यालय में विकसित किए जा रहे गार्डन के लिए 5,100 रुपये की सहयोग राशि भी भेंट की। उनके इस अनुकरणीय योगदान की सभी ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की और इसे विद्यालय विकास की दिशा में प्रेरणादायक पहल बताया। समारोह के अंत में सभी अतिथियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं ग्रामवासियों ने रामस्वरूप साहू को भावभीनी विदाई देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य, सुखमय एवं दीर्घायु जीवन की मंगलकामनाएँ व्यक्त कीं।2
- शंकर तपशिला व खाटूश्याम प्रकट स्थल पर चला सघन वृक्षारोपण अभियान, धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश।* छबड़ा:शनिवार को छबड़ा क्षेत्र के भुवाखेड़ी ग्राम स्थित खाटूश्याम गोशाला मंदिर पहाड़ी पर अवस्थित शंकर तपशिला एवं खाटूश्याम परिक्रमा मार्ग पर सघन वृक्षारोपण अभियान आयोजित किया गया। अभियान का उद्देश्य धार्मिक स्थलों को हराभरा, छायादार एवं फल-फूलों से समृद्ध बनाते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना रहा।कार्यक्रम वर्तमान में अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग एवं ओशो आशीष ध्यान केंद्र, भुवाखेड़ी के संस्थापक एवं संचालक शंकरलाल नागर (पूर्व आरपी, सीबीईओ कार्यालय छबड़ा एवं वर्तमान धर्मगुरु) के पावन सानिध्य में सम्पन्न हुआ। अभियान का नेतृत्व अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) छबड़ा के खंड प्रमुख मुरारीलाल मीणा तथा जिला उपाध्यक्ष बद्रीलाल मेहता ने किया। अभियान के दौरान विभिन्न प्रजातियों के छायादार एवं फलदार पौधों का रोपण किया गया, ताकि भविष्य में खाटूश्याम प्रकट स्थल और परिक्रमा मार्ग श्रद्धालुओं के लिए अधिक आकर्षक, हरित एवं पर्यावरण अनुकूल बन सकें। इस अवसर पर मुरारीलाल मीणा, बद्रीलाल मेहता, बाबूलाल यादव, बृजेश विजय, मनोज नागर, शंकरलाल नागर, चेतन मालव, घनश्याम शर्मा, पवन कुमार मीणा, राजेश बंसल सहित अनेक कार्यकर्ताओं एवं श्रद्धालुओं ने श्रमदान कर अभियान को सफल बनाया।कार्यक्रम के अंत में खंड प्रमुख मुरारीलाल मीणा ने सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी तन, मन और धन से पौधारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में सहभागी बनने का आह्वान किया।3
- लिखित आश्वासन के 15 दिन बाद भी नहीं मिली राशि, बारिश के बीच तीसरे दिन भी डटे हजारों किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की बकाया राशि एवं आपदा राहत मुआवजे की मांग को लेकर भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में बकानी, पिड़ावा एवं सुनेल में अनिश्चितकालीन धरना जारी रायपुर 1 अगस्त। झालावाड़ जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बावजूद भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में बकानी, पिड़ावा एवं सुनेल तहसील मुख्यालयों पर किसानों का अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शनिवार को तीसरे दिन भी पूरे उत्साह, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ जारी रहा। लगातार वर्षा के कारण धरना स्थल पर पहले लगाए गए टेंट की व्यवस्था बदलकर बरसाती पंडाल तैयार करना पड़ा, लेकिन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हजारों किसान अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए डटे रहे। बारिश के कारण किसानों को भोजन, रात्रि विश्राम एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद किसान स्वयं धरना स्थल पर भोजन बनाकर दिन-रात आंदोलन को जारी रखे हुए हैं। भारतीय किसान संघ ने बताया कि इससे पूर्व 13 जुलाई से 16 जुलाई तक बकानी तहसील परिसर में किसानों द्वारा अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया गया था। उस दौरान जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद किसानों को लिखित आश्वासन दिया गया कि आगामी चार दिनों के भीतर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की बकाया राशि किसानों के खातों में जमा कर दी जाएगी। प्रशासन के इस लिखित आश्वासन पर किसानों ने अपना धरना स्थगित कर दिया था। लेकिन लिखित आश्वासन दिए जाने के लगभग 15 दिन बाद भी किसानों के खातों में बकाया राशि जमा नहीं हुई। प्रशासन द्वारा किए गए वादे के पूरा नहीं होने से किसानों में भारी रोष व्याप्त है। इसी कारण भारतीय किसान संघ ने पुनः किसानों के साथ बकानी, पिड़ावा एवं सुनेल तहसील मुख्यालयों पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया है। किसानों की प्रमुख मांग है कि खरीफ-2025 में सोयाबीन की फसल खराब होने पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत झालावाड़ जिले के लिए लगभग 260 करोड़ रुपये की बीमा दावा राशि स्वीकृत की गई थी, जिसमें से अभी भी लगभग 160 करोड़ रुपये से अधिक की राशि किसानों को मिलना शेष है। इसके साथ ही किसानों ने यह भी मांग उठाई कि वर्ष 2025 में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को राज्य सरकार द्वारा आपदा अनुदान राहत कोष (एसडीआरएफ) से मुआवजा देने की घोषणा की गई थी, लेकिन आज तक बड़ी संख्या में किसानों के खातों में यह मुआवजा राशि भी जमा नहीं हुई है। बीमा दावा राशि और आपदा राहत—दोनों लंबित होने से किसान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि वे कई महीनों से लगातार ज्ञापन, प्रशासनिक अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अपनी मांग सरकार तक पहुंचाते रहे, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। सरकार की उदासीनता के कारण आज अन्नदाता को बरसात के मौसम में खेतों में रहने के बजाय तहसील मुख्यालयों पर धरना देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। धरना स्थल पर किसानों ने कहा कि वे देश के प्रत्येक नागरिक का पेट भरने के लिए दिन-रात कठिन परिश्रम करते हैं। भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसान है, लेकिन आज वही किसान अपने ही अधिकार के लिए संघर्ष कर रहा है। यह स्थिति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। धरना स्थल पर किसानों के जोशीले नारों से पूरा वातावरण गूंजता रहा— "जब तक दुखी किसान रहेगा, धरती पर तूफान रहेगा।" "हम अपना अधिकार मांगते, नहीं किसी से भीख मांगते।" भारतीय किसान संघ ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूरी तरह गैर-राजनीतिक एवं राष्ट्रवादी संगठन के नेतृत्व में किसानों के संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई है। संगठन ने चेतावनी दी कि जब तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शेष बकाया राशि तथा राज्य सरकार द्वारा घोषित आपदा अनुदान राहत कोष का मुआवजा किसानों के खातों में जमा नहीं हो जाता, तब तक बकानी, पिड़ावा एवं सुनेल तहसील मुख्यालयों पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन निरंतर जारी रहेगा। भारतीय किसान संघ ने सरकार, जिला प्रशासन एवं फसल बीमा कंपनी से आग्रह किया है कि किसानों को बार-बार आश्वासन देने के बजाय तत्काल स्वीकृत राशि उनके खातों में जमा कराई जाए। भारत गांवों का देश है और गांवों की आत्मा किसान है। यदि किसान आर्थिक रूप से मजबूत होगा तभी देश की अर्थव्यवस्था भी सशक्त होगी। अब पूरे जिले की निगाहें सरकार और प्रशासन पर टिकी हैं कि वे अन्नदाता किसानों के हित में कब तक ठोस निर्णय लेकर उन्हें उनका न्यायोचित अधिकार दिलाते हैं।2
- लिखित आश्वासन के 15 दिन बाद भी नहीं मिली राशि, बारिश के बीच तीसरे दिन भी डटे हजारों किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की बकाया राशि एवं आपदा राहत मुआवजे की मांग को लेकर भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में बकानी, पिड़ावा एवं सुनेल में अनिश्चितकालीन धरना जारी लिखित आश्वासन के 15 दिन बाद भी नहीं मिली राशि, बारिश के बीच तीसरे दिन भी डटे हजारों किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की बकाया राशि एवं आपदा राहत मुआवजे की मांग को लेकर भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में बकानी, पिड़ावा एवं सुनेल में अनिश्चितकालीन धरना जारी झालावाड़, 1 अगस्त। झालावाड़ जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बावजूद भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में बकानी, पिड़ावा एवं सुनेल तहसील मुख्यालयों पर किसानों का अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शनिवार को तीसरे दिन भी पूरे उत्साह, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ जारी रहा। लगातार वर्षा के कारण धरना स्थल पर पहले लगाए गए टेंट की व्यवस्था बदलकर बरसाती पंडाल तैयार करना पड़ा, लेकिन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हजारों किसान अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए डटे रहे। बारिश के कारण किसानों को भोजन, रात्रि विश्राम एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद किसान स्वयं धरना स्थल पर भोजन बनाकर दिन-रात आंदोलन को जारी रखे हुए हैं। भारतीय किसान संघ ने बताया कि इससे पूर्व 13 जुलाई से 16 जुलाई तक बकानी तहसील परिसर में किसानों द्वारा अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया गया था। उस दौरान जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद किसानों को लिखित आश्वासन दिया गया कि आगामी चार दिनों के भीतर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की बकाया राशि किसानों के खातों में जमा कर दी जाएगी। प्रशासन के इस लिखित आश्वासन पर किसानों ने अपना धरना स्थगित कर दिया था। लेकिन लिखित आश्वासन दिए जाने के लगभग 15 दिन बाद भी किसानों के खातों में बकाया राशि जमा नहीं हुई। प्रशासन द्वारा किए गए वादे के पूरा नहीं होने से किसानों में भारी रोष व्याप्त है। इसी कारण भारतीय किसान संघ ने पुनः किसानों के साथ बकानी, पिड़ावा एवं सुनेल तहसील मुख्यालयों पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया है। किसानों की प्रमुख मांग है कि खरीफ-2025 में सोयाबीन की फसल खराब होने पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत झालावाड़ जिले के लिए लगभग 260 करोड़ रुपये की बीमा दावा राशि स्वीकृत की गई थी, जिसमें से अभी भी लगभग 160 करोड़ रुपये से अधिक की राशि किसानों को मिलना शेष है। इसके साथ ही किसानों ने यह भी मांग उठाई कि वर्ष 2025 में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को राज्य सरकार द्वारा आपदा अनुदान राहत कोष (एसडीआरएफ) से मुआवजा देने की घोषणा की गई थी, लेकिन आज तक बड़ी संख्या में किसानों के खातों में यह मुआवजा राशि भी जमा नहीं हुई है। बीमा दावा राशि और आपदा राहत—दोनों लंबित होने से किसान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि वे कई महीनों से लगातार ज्ञापन, प्रशासनिक अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अपनी मांग सरकार तक पहुंचाते रहे, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। सरकार की उदासीनता के कारण आज अन्नदाता को बरसात के मौसम में खेतों में रहने के बजाय तहसील मुख्यालयों पर धरना देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। धरना स्थल पर किसानों ने कहा कि वे देश के प्रत्येक नागरिक का पेट भरने के लिए दिन-रात कठिन परिश्रम करते हैं। भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसान है, लेकिन आज वही किसान अपने ही अधिकार के लिए संघर्ष कर रहा है। यह स्थिति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। धरना स्थल पर किसानों के जोशीले नारों से पूरा वातावरण गूंजता रहा— "जब तक दुखी किसान रहेगा, धरती पर तूफान रहेगा।" "हम अपना अधिकार मांगते, नहीं किसी से भीख मांगते।" भारतीय किसान संघ ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूरी तरह गैर-राजनीतिक एवं राष्ट्रवादी संगठन के नेतृत्व में किसानों के संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई है। संगठन ने चेतावनी दी कि जब तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शेष बकाया राशि तथा राज्य सरकार द्वारा घोषित आपदा अनुदान राहत कोष का मुआवजा किसानों के खातों में जमा नहीं हो जाता, तब तक बकानी, पिड़ावा एवं सुनेल तहसील मुख्यालयों पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन निरंतर जारी रहेगा। भारतीय किसान संघ ने सरकार, जिला प्रशासन एवं फसल बीमा कंपनी से आग्रह किया है कि किसानों को बार-बार आश्वासन देने के बजाय तत्काल स्वीकृत राशि उनके खातों में जमा कराई जाए। भारत गांवों का देश है और गांवों की आत्मा किसान है। यदि किसान आर्थिक रूप से मजबूत होगा तभी देश की अर्थव्यवस्था भी सशक्त होगी। अब पूरे जिले की निगाहें सरकार और प्रशासन पर टिकी हैं कि वे अन्नदाता किसानों के हित में कब तक ठोस निर्णय लेकर उन्हें उनका न्यायोचित अधिकार दिलाते हैं।3
- हरियाणा-राजस्थान बॉर्डर पर पुलिसकर्मी और कार चालक के बीच विवाद का वीडियो वायरल ! सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि एक कार चालक ने कथित रूप से रिश्वत लेते हुए एक पुलिसकर्मी का वीडियो बना लिया। आरोप है कि वीडियो बनाते देख पुलिसकर्मी नाराज हो गया और कार चालक के साथ मारपीट तथा मोबाइल छीनने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि यह वीडियो हरियाणा-राजस्थान बॉर्डर क्षेत्र का है। पीड़ित के अनुसार, घटना के बाद संबंधित पुलिस अधिकारियों को शिकायत भी दी गई है। हालांकि, वायरल वीडियो में किए जा रहे दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। अब सभी की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है। वायरल वीडियो के आधार पर यह जानकारी साझा की जा रही है। हरियाणा-राजस्थान बॉर्डर पर पुलिसकर्मी और कार चालक के बीच विवाद का वीडियो वायरल ! सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि एक कार चालक ने कथित रूप से रिश्वत लेते हुए एक पुलिसकर्मी का वीडियो बना लिया। आरोप है कि वीडियो बनाते देख पुलिसकर्मी नाराज हो गया और कार चालक के साथ मारपीट तथा मोबाइल छीनने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि यह वीडियो हरियाणा-राजस्थान बॉर्डर क्षेत्र का है। पीड़ित के अनुसार, घटना के बाद संबंधित पुलिस अधिकारियों को शिकायत भी दी गई है। हालांकि, वायरल वीडियो में किए जा रहे दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। अब सभी की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है। वायरल वीडियो के आधार पर यह जानकारी साझा की जा रही है।1