रचनात्मक व पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती राखियों ने मोहा मन भितरवार। मंगलवार को स्थानीय एडीएम हाई स्कूल भितरवार में रक्षाबंधन का पावन पर्व बड़े उत्साह, हर्षोल्लास और सांस्कृतिक वातावरण के बीच मनाया गया। कार्यक्रम में विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती उर्मिला वर्मा एवं समस्त स्टाफ की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस दौरान बच्चों ने भारतीय संस्कृति, परंपराओं और भाई-बहन के अटूट प्रेम के प्रतीक रक्षाबंधन के महत्व को जाना। कार्यक्रम के अंतर्गत कक्षा 3 से 10 तक के विद्यार्थियों के लिए राखी मेकिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई। छात्र-छात्राओं ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए एक से बढ़कर एक आकर्षक राखियां तैयार कीं। विशेष रूप से बच्चों के द्वारा कागज, कपड़े, ऊन, बीज, सूखे फूल, पत्तियों और अन्य प्राकृतिक व पुनर्चक्रण योग्य सामग्री से बनाई गई पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती ईको-फ्रेंडली राखियां सभी के आकर्षण का केंद्र रहीं। कई विद्यार्थियों ने राखियों के साथ हाथ से तैयार किए गए छोटे-छोटे उपहार भी बनाए। आयोजित प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभावान विद्यार्थियों को प्राचार्या एवं शिक्षकों द्वारा पुरस्कार और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। रंग-बिरंगी पोशाकों में सजे बच्चों के उत्साह और उमंग ने पूरे विद्यालय परिसर को आनंदमय बना दिया। इस अवसर पर प्राचार्या श्रीमती उर्मिला वर्मा ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देने वाला त्योहार है। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई पर्यावरण अनुकूल राखियों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे रचनात्मक प्रयास बच्चों में कलात्मक प्रतिभा के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूकता भी पैदा करते हैं। वहीं कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़े पर्वों को आपसी प्रेम, सद्भाव और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ मनाने के लिए प्रेरित किया।
रचनात्मक व पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती राखियों ने मोहा मन भितरवार। मंगलवार को स्थानीय एडीएम हाई स्कूल भितरवार में रक्षाबंधन का पावन पर्व बड़े उत्साह, हर्षोल्लास और सांस्कृतिक वातावरण के बीच मनाया गया। कार्यक्रम में विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती उर्मिला वर्मा एवं समस्त स्टाफ की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस दौरान बच्चों ने भारतीय संस्कृति, परंपराओं और भाई-बहन के अटूट प्रेम के प्रतीक रक्षाबंधन के महत्व को जाना। कार्यक्रम के अंतर्गत कक्षा 3 से 10 तक के विद्यार्थियों के लिए राखी मेकिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई। छात्र-छात्राओं ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए एक से बढ़कर एक आकर्षक राखियां तैयार कीं। विशेष रूप से बच्चों के द्वारा कागज, कपड़े, ऊन, बीज, सूखे फूल, पत्तियों और अन्य प्राकृतिक व पुनर्चक्रण योग्य सामग्री से बनाई गई पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती ईको-फ्रेंडली राखियां सभी के आकर्षण का केंद्र रहीं। कई विद्यार्थियों ने राखियों के साथ हाथ से तैयार किए गए छोटे-छोटे उपहार भी बनाए। आयोजित प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभावान विद्यार्थियों को प्राचार्या एवं शिक्षकों द्वारा पुरस्कार और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। रंग-बिरंगी पोशाकों में सजे बच्चों के उत्साह और उमंग ने पूरे विद्यालय परिसर को आनंदमय बना दिया। इस अवसर पर प्राचार्या श्रीमती उर्मिला वर्मा ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देने वाला त्योहार है। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई पर्यावरण अनुकूल राखियों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे रचनात्मक प्रयास बच्चों में कलात्मक प्रतिभा के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूकता भी पैदा करते हैं। वहीं कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़े पर्वों को आपसी प्रेम, सद्भाव और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ मनाने के लिए प्रेरित किया।
- ईद मिलादुन्नबी पर दतिया में निकला भव्य शान-ए-जुलूस, बड़ी संख्या में समाजजनों ने लिया हिस्सा दतिया। ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर बुधवार को दतिया शहर में शान-ए-जुलूस निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग शामिल हुए। बच्चे, युवा और बुजुर्ग पूरे उत्साह के साथ जुलूस में शामिल नजर आए। जुलूस की शुरुआत दतिया के किला चौक से हुई, जो दारूगर की पुलिया, तिगेलिया और टाउनहॉल होते हुए निकला। जुलूस के दौरान जगह-जगह लोगों ने स्वागत किया। डीजे की धुनों के साथ समाजजन उत्साहपूर्वक आगे बढ़ते नजर आए, वहीं कई स्थानों पर आतिशबाजी भी की गई। शान-ए-जुलूस में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के चलते शहर में उत्सव जैसा माहौल दिखाई दिया। जुलूस के दौरान बच्चे और युवा विशेष उत्साह में नजर आए, जबकि बुजुर्ग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। ईद मिलादुन्नबी के इस जुलूस के माध्यम से समाजजनों ने आपसी भाईचारे और सौहार्द का संदेश दिया। जुलूस के दौरान सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को लेकर पुलिस बल भी तैनात रहा।1
- ईद मिलादुन्नबी पर दतिया में निकला भव्य शान-ए-जुलूस, बड़ी संख्या में समाजजनों ने लिया हिस्साईद मिलादुन्नबी के अवसर पर बुधवार को दतिया शहर में शान-ए-जुलूस निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग शामिल हुए। बच्चे, युवा और बुजुर्ग पूरे उत्साह के साथ जुलूस में शामिल नजर आए। जुलूस की शुरुआत दतिया के किला चौक से हुई, जो दारूगर की पुलिया, तिगेलिया और टाउनहॉल होते हुए निकला। जुलूस के दौरान जगह-जगह लोगों ने स्वागत किया। डीजे की धुनों के साथ समाजजन ईद मिलादुन्नबी पर दतिया में निकला भव्य शान-ए-जुलूस, बड़ी संख्या में समाजजनों ने लिया हिस्साईद मिलादुन्नबी के अवसर पर बुधवार को दतिया शहर में शान-ए-जुलूस निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग शामिल हुए। बच्चे, युवा और बुजुर्ग पूरे उत्साह के साथ जुलूस में शामिल नजर आए। जुलूस की शुरुआत दतिया के किला चौक से हुई, जो दारूगर की पुलिया, तिगेलिया और टाउनहॉल होते हुए निकला। जुलूस के दौरान जगह-जगह लोगों ने स्वागत किया। डीजे की धुनों के साथ समाजजन उत्साहपूर्वक आगे बढ़ते नजर आए, वहीं कई स्थानों पर आतिशबाजी भी की गई। शान-ए-जुलूस में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के चलते शहर में उत्सव जैसा माहौल दिखाई दिया। जुलूस के दौरान बच्चे और युवा विशेष उत्साह में नजर आए, जबकि बुजुर्ग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। ईद मिलादुन्नबी के इस जुलूस के माध्यम से समाजजनों ने आपसी भाईचारे और सौहार्द का संदेश दिया। जुलूस के दौरान सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को लेकर पुलिस बल भी तैनात रहा।4
- रतनगढ़ माता धाम पर श्रद्धालुओं से पार्किंग के नाम पर ₹10 लिए जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें बसई मलिक क्षेत्र में श्रद्धालुओं से पार्किंग शुल्क के नाम पर राशि लेते हुए दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। वायरल वीडियो सामने आने के बाद श्रद्धालुओं के बीच इस वसूली को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि पार्किंग शुल्क निर्धारित है तो इसकी स्पष्ट जानकारी मौके पर प्रदर्शित की जानी चाहिए और प्रत्येक वाहन चालक को विधिवत रसीद उपलब्ध कराई जानी चाहिए। वहीं, यदि बिना किसी अधिकृत आदेश, ठेके या निर्धारित शुल्क के राशि ली जा रही है तो यह गंभीर जांच का विषय है।1
- डबरा में 5 गोवंशों की मौत के बाद बवाल, विहिप और बजरंग दल ने लगाया जाम1
- चौंकाने वाला मामला चिरगांव में पति ने पत्नी को कथित तौर पर प्रेमी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ा, विवाद के बाद ससुर-दामाद की बातचीत का ऑडियो वायरल #चिरगांव #झांसी #वायरलऑडियो #ब्रेकिंगन्यूज #झांसीन्यूज #उत्तरप्रदेश #वायरलवीडियो #स्थानीयसमाचार #LakshyaNews चौंकाने वाला मामला चिरगांव में पति ने पत्नी को कथित तौर पर प्रेमी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ा, विवाद के बाद ससुर-दामाद की बातचीत का ऑडियो वायरल1
- नगर पालिका परिषद पर धरने पर बैठे पार्षदों का आज तीसरा दिन , पार्षद बैठे भूख हड़ताल पर डबरा (ग्वालियर) मध्य प्रदेश डबरा के नगर पालिका परिषद के गेट पर चल रहे पार्षदों के धरना प्रदर्शन के आज तीसरे दिन दो पार्षद महाराज सिंह राजोरिया और सुमित साहू बैठे भूख हड़ताल पर , पार्षदों का कहना है कि आज तीसरा दिन है कोई भी अधिकारी अभी तक नहीं आया है , और हम यहां से जब तक नहीं उठाएंगे जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं हो जाती , और जो विकास कार्य रुके हुए हैं उनकी फाइलों पर साइन नहीं हो जाते ।3
- भांडेर में धूमधाम से मनाया ईद मिलादुन्नबी, विभिन्न मार्गों से निकला चल समारोह; पुलिस सुरक्षा रही कड़ी भांडेर नगर में ईद मिलादुन्नबी का त्योहार बुधवार को उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर नगर के विभिन्न मार्गों से चल समारोह निकाला गया, जिसमें मुस्लिम समुदाय के बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। चल समारोह की शुरुआत बुधवार दोपहर करीब 03 बजे से नगर के पठानी मोहल्ले स्थित मदीना मस्जिद से हुई। डीजे और बैंड के साथ निकले समारोह में लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। चल समारोह नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए निर्धारित स्थानों तक पहुंचा। त्योहार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए भांडेर सहित आसपास के कई थानों से पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस अधिकारियों और जवानों ने पूरे मार्ग पर निगरानी रखी। शांतिपूर्ण माहौल में समारोह संपन्न होने पर प्रशासन ने राहत की सांस ली।1
- *ईद-ए-मिलादुन्नबी पर इंसानियत की मिसाल: जिला अस्पताल में मरीजों को बांटे फल, दिया भाईचारे का पैगाम* दतिया। पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की योमे पैदाइश यानी ईद-ए-मिलादुन्नबी के मुबारक मौके पर दतिया में मुस्लिम समाज की ओर से सेवा, सद्भाव और इंसानियत की मिसाल पेश की गई। मुस्लिम समाज के वरिष्ठजनों ने जिला चिकित्सालय पहुंचकर मरीजों को फल वितरित किए और उनकी कुशलक्षेम जानी। इस दौरान मरीजों और उनके परिजनों को ईद-ए-मिलादुन्नबी की मुबारकबाद देते हुए पैगंबर साहब की शिक्षाओं और इंसानियत के संदेश को साझा किया गया। समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि ईद-ए-मिलादुन्नबी केवल खुशी मनाने का पर्व नहीं, बल्कि पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारने का अवसर भी है। पैगंबर साहब ने इंसानियत, प्रेम, भाईचारे, जरूरतमंदों की मदद और पड़ोसियों के हक को विशेष महत्व दिया। *पड़ोसी भूखा हो तो अपनी खुशी अधूरी* कार्यक्रम के दौरान समाजजनों ने पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की उस शिक्षा को भी याद किया, जिसमें पड़ोसी के अधिकार और उसकी जरूरत का ध्यान रखने पर जोर दिया गया है। समाजजनों ने बताया कि पैगंबर साहब की शिक्षाओं का भाव यही है कि जब आपके पड़ोस में कोई व्यक्ति भूखा हो और आप स्वयं पेट भरकर खाना खा लें, तो यह इंसानियत और पड़ोसी के हक की भावना के विपरीत है। समाजजनों ने कहा कि इस संदेश की सबसे खूबसूरत बात यह है कि पड़ोसी की मदद को धर्म की सीमा में नहीं बांधा गया। पड़ोसी चाहे हिंदू हो, मुस्लिम हो, सिख हो या ईसाई—पड़ोसी तो पड़ोसी होता है। उसके सुख-दुख में साथ खड़ा होना, उसकी जरूरत में मदद करना और उसके भूखे होने पर भोजन उपलब्ध कराना ही सच्ची इंसानियत है। उन्होंने कहा कि आज के समय में पैगंबर साहब की यह शिक्षा समाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि आसपास रहने वाला व्यक्ति परेशान है, भूखा है या किसी मुसीबत में है तो उसकी मदद करना हर इंसान की जिम्मेदारी होनी चाहिए। यही सोच समाज में आपसी प्रेम, विश्वास और भाईचारे को मजबूत करती है। *मरीजों के बीच पहुंचकर बांटीं खुशियां* ईद-ए-मिलादुन्नबी के अवसर पर मुस्लिम समाज के वरिष्ठजन जिला चिकित्सालय पहुंचे और विभिन्न वार्डों में भर्ती मरीजों के बीच फल वितरित किए। इस दौरान मरीजों से स्वास्थ्य की जानकारी लेते हुए उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआ की गई। समाजजनों ने कहा कि बीमारी के समय व्यक्ति शारीरिक और मानसिक परेशानी से गुजरता है। ऐसे समय में उसके पास पहुंचकर हालचाल पूछना, फल देना और उसके साथ कुछ समय बिताना भी सेवा और इंसानियत का हिस्सा है। इसी भावना के साथ मिलाद उन नबी की खुशियां मरीजों के साथ साझा की गईं। *गरीब, यतीम और जरूरतमंदों की मदद का संदेश* समाजजनों ने कहा कि पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने गरीबों, यतीमों, बेसहारा और जरूरतमंदों की मदद करने की शिक्षा दी। उन्होंने इंसान को केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज और आसपास के लोगों के लिए भी जिम्मेदार बनने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी के चेहरे पर मुस्कान लाना, किसी भूखे को खाना खिलाना, किसी जरूरतमंद की मदद करना और किसी दुखी व्यक्ति के साथ खड़ा होना भी इबादत और इंसानियत की भावना से जुड़ा कार्य है। *हिंदू-मुस्लिम एकता और गंगा-जमुनी तहजीब का संदेश* कार्यक्रम में समाजजनों ने कहा कि भारत की पहचान उसकी गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे से है। सभी धर्मों और समुदायों के लोग एक-दूसरे का सम्मान करें और सुख-दुख में साथ खड़े हों। उन्होंने कहा कि मोहब्बत की कोई जाति और इंसानियत का कोई धर्म नहीं होता। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सहित सभी समुदायों के लोग मिल-जुलकर रहें, एक-दूसरे के त्योहारों और खुशियों में शामिल हों तथा जरूरत के समय एक-दूसरे की मदद करें—यही समाज को मजबूत बनाने का रास्ता है। सेवा के साथ दिया इंसानियत का संदेश जिला अस्पताल में फल वितरण कार्यक्रम के माध्यम से मुस्लिम समाज ने ईद-ए-मिलादुन्नबी की खुशियों को जरूरतमंद और बीमार लोगों के साथ साझा किया। कार्यक्रम का उद्देश्य सिर्फ फल वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से पैगंबर साहब के प्रेम, सद्भाव, पड़ोसी के हक और इंसानियत के संदेश को भी लोगों तक पहुंचाया गया। कार्यक्रम में हाफिज कासिम साहब, मौलाना खलील साहब, कारी फरीद साहब, हाफिज अंजर साहब, हाफिज शमीम साहब, हाफिज नईमउल्ला साहब, अनीस खान (पपोली), राहत अली जैदी, जाहिद भाई (बल्ले), शानू भाई, फैसल भाई, कल्लू भाई टेलर, मुईन कुरैशी साहब, अशफाक खान, राजू खान और आरिफ खान सहित समाज के कई वरिष्ठजन मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में समाजजनों ने लोगों से अपील की कि ईद-ए-मिलादुन्नबी के मौके पर पैगंबर साहब की शिक्षाओं को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं और अपने आसपास रहने वाले हर जरूरतमंद व्यक्ति की मदद के लिए आगे आएं। क्योंकि पड़ोसी की पहचान उसका धर्म नहीं, बल्कि उसका पड़ोसी होना है और इंसानियत की पहचान यही है कि किसी के भूखे रहते हम अपनी खुशी को अधूरा समझें। *ईद-ए-मिलादुन्नबी पर इंसानियत की मिसाल: जिला अस्पताल में मरीजों को बांटे फल, दिया भाईचारे का पैगाम* दतिया। पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की योमे पैदाइश यानी ईद-ए-मिलादुन्नबी के मुबारक मौके पर दतिया में मुस्लिम समाज की ओर से सेवा, सद्भाव और इंसानियत की मिसाल पेश की गई। मुस्लिम समाज के वरिष्ठजनों ने जिला चिकित्सालय पहुंचकर मरीजों को फल वितरित किए और उनकी कुशलक्षेम जानी। इस दौरान मरीजों और उनके परिजनों को ईद-ए-मिलादुन्नबी की मुबारकबाद देते हुए पैगंबर साहब की शिक्षाओं और इंसानियत के संदेश को साझा किया गया। समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि ईद-ए-मिलादुन्नबी केवल खुशी मनाने का पर्व नहीं, बल्कि पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारने का अवसर भी है। पैगंबर साहब ने इंसानियत, प्रेम, भाईचारे, जरूरतमंदों की मदद और पड़ोसियों के हक को विशेष महत्व दिया। *पड़ोसी भूखा हो तो अपनी खुशी अधूरी* कार्यक्रम के दौरान समाजजनों ने पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की उस शिक्षा को भी याद किया, जिसमें पड़ोसी के अधिकार और उसकी जरूरत का ध्यान रखने पर जोर दिया गया है। समाजजनों ने बताया कि पैगंबर साहब की शिक्षाओं का भाव यही है कि जब आपके पड़ोस में कोई व्यक्ति भूखा हो और आप स्वयं पेट भरकर खाना खा लें, तो यह इंसानियत और पड़ोसी के हक की भावना के विपरीत है। समाजजनों ने कहा कि इस संदेश की सबसे खूबसूरत बात यह है कि पड़ोसी की मदद को धर्म की सीमा में नहीं बांधा गया। पड़ोसी चाहे हिंदू हो, मुस्लिम हो, सिख हो या ईसाई—पड़ोसी तो पड़ोसी होता है। उसके सुख-दुख में साथ खड़ा होना, उसकी जरूरत में मदद करना और उसके भूखे होने पर भोजन उपलब्ध कराना ही सच्ची इंसानियत है। उन्होंने कहा कि आज के समय में पैगंबर साहब की यह शिक्षा समाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि आसपास रहने वाला व्यक्ति परेशान है, भूखा है या किसी मुसीबत में है तो उसकी मदद करना हर इंसान की जिम्मेदारी होनी चाहिए। यही सोच समाज में आपसी प्रेम, विश्वास और भाईचारे को मजबूत करती है। *मरीजों के बीच पहुंचकर बांटीं खुशियां* ईद-ए-मिलादुन्नबी के अवसर पर मुस्लिम समाज के वरिष्ठजन जिला चिकित्सालय पहुंचे और विभिन्न वार्डों में भर्ती मरीजों के बीच फल वितरित किए। इस दौरान मरीजों से स्वास्थ्य की जानकारी लेते हुए उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआ की गई। समाजजनों ने कहा कि बीमारी के समय व्यक्ति शारीरिक और मानसिक परेशानी से गुजरता है। ऐसे समय में उसके पास पहुंचकर हालचाल पूछना, फल देना और उसके साथ कुछ समय बिताना भी सेवा और इंसानियत का हिस्सा है। इसी भावना के साथ मिलाद उन नबी की खुशियां मरीजों के साथ साझा की गईं। *गरीब, यतीम और जरूरतमंदों की मदद का संदेश* समाजजनों ने कहा कि पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने गरीबों, यतीमों, बेसहारा और जरूरतमंदों की मदद करने की शिक्षा दी। उन्होंने इंसान को केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज और आसपास के लोगों के लिए भी जिम्मेदार बनने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी के चेहरे पर मुस्कान लाना, किसी भूखे को खाना खिलाना, किसी जरूरतमंद की मदद करना और किसी दुखी व्यक्ति के साथ खड़ा होना भी इबादत और इंसानियत की भावना से जुड़ा कार्य है। *हिंदू-मुस्लिम एकता और गंगा-जमुनी तहजीब का संदेश* कार्यक्रम में समाजजनों ने कहा कि भारत की पहचान उसकी गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे से है। सभी धर्मों और समुदायों के लोग एक-दूसरे का सम्मान करें और सुख-दुख में साथ खड़े हों। उन्होंने कहा कि मोहब्बत की कोई जाति और इंसानियत का कोई धर्म नहीं होता। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सहित सभी समुदायों के लोग मिल-जुलकर रहें, एक-दूसरे के त्योहारों और खुशियों में शामिल हों तथा जरूरत के समय एक-दूसरे की मदद करें—यही समाज को मजबूत बनाने का रास्ता है। सेवा के साथ दिया इंसानियत का संदेश जिला अस्पताल में फल वितरण कार्यक्रम के माध्यम से मुस्लिम समाज ने ईद-ए-मिलादुन्नबी की खुशियों को जरूरतमंद और बीमार लोगों के साथ साझा किया। कार्यक्रम का उद्देश्य सिर्फ फल वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से पैगंबर साहब के प्रेम, सद्भाव, पड़ोसी के हक और इंसानियत के संदेश को भी लोगों तक पहुंचाया गया। कार्यक्रम में हाफिज कासिम साहब, मौलाना खलील साहब, कारी फरीद साहब, हाफिज अंजर साहब, हाफिज शमीम साहब, हाफिज नईमउल्ला साहब, अनीस खान (पपोली), राहत अली जैदी, जाहिद भाई (बल्ले), शानू भाई, फैसल भाई, कल्लू भाई टेलर, मुईन कुरैशी साहब, अशफाक खान, राजू खान और आरिफ खान सहित समाज के कई वरिष्ठजन मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में समाजजनों ने लोगों से अपील की कि ईद-ए-मिलादुन्नबी के मौके पर पैगंबर साहब की शिक्षाओं को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं और अपने आसपास रहने वाले हर जरूरतमंद व्यक्ति की मदद के लिए आगे आएं। क्योंकि पड़ोसी की पहचान उसका धर्म नहीं, बल्कि उसका पड़ोसी होना है और इंसानियत की पहचान यही है कि किसी के भूखे रहते हम अपनी खुशी को अधूरा समझें।1
- भूख हड़ताल हुई शुरू, पार्षद श्री राजोरिया एवं श्री साहू जी बैठे सोमबार से नगर पालिका भवन पर है धरना जारी, आज तीसरा दिन हुआ कोई भी प्रशासनिक अधिकारी नहीं आया1