हिमाचल प्रदेश कैडर की वर्ष 2018 बैच की भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी इल्मा अफरोज अपनी ईमानदार कार्यशैली, सख्त प्रशासनिक रवैये और कानून व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता के कारण पूरे देश में चर्चा का विषय रही हैं। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव से ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय तक का सफर तय करने और फिर देश सेवा के लिए भारत लौटकर आईपीएस अधिकारी बनने की उनकी प्रेरणादायक कहानी लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल मानी जाती है। इल्मा अफरोज ने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं और उच्च शिक्षा के लिए ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में अध्ययन किया। इसके बाद भारत लौटकर उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा उत्तीर्ण की और भारतीय पुलिस सेवा में स्थान प्राप्त किया। वर्ष 2024 में, जब वे हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी (जिला सोलन) में पुलिस अधीक्षक (SP) के पद पर तैनात थीं, तब उन्होंने नशा तस्करी, संगठित अपराध और अवैध खनन के खिलाफ एक व्यापक अभियान चलाया। उनकी अगुवाई में पुलिस ने कई बड़े मामलों में कार्रवाई की, जिससे अपराधियों और माफिया नेटवर्क पर प्रभावी ढंग से नकेल कसी गई। इसी अवैध खनन विरोधी अभियान के दौरान, पुलिस ने स्थानीय कांग्रेस विधायक रामकुमार चौधरी की पत्नी से जुड़े बताए जा रहे वाहनों का चालान किया। इस घटना के बाद विधायक और पुलिस प्रशासन के बीच विवाद गहरा गया, जो राजनीतिक स्तर तक पहुँच गया। यह मामला इतना बढ़ा कि इल्मा अफरोज के खिलाफ विधानसभा में विशेषाधिकार हनन (प्रिविलेज मोशन) का मुद्दा भी उठाया गया। बढ़ते विवाद के बाद नवंबर 2024 में इल्मा अफरोज अपने गृह जनपद मुरादाबाद चली गईं और लंबी छुट्टी पर रहीं। बाद में यह मामला हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट पहुँचा, जहाँ अदालत ने इसमें यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए। इस घटनाक्रम ने केवल प्रदेश में ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी पुलिस की कार्यप्रणाली, राजनीतिक हस्तक्षेप और प्रशासनिक स्वतंत्रता को लेकर एक व्यापक बहस छेड़ दी। इल्मा अफरोज का जीवन संघर्ष, शिक्षा और सेवा भावना का एक उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने वैश्विक स्तर पर शिक्षा प्राप्त की और फिर देश लौटकर प्रशासनिक सेवा को चुना। आज उनकी कहानी विशेष रूप से उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का संकल्प रखते हैं।
हिमाचल प्रदेश कैडर की वर्ष 2018 बैच की भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी इल्मा अफरोज अपनी ईमानदार कार्यशैली, सख्त प्रशासनिक रवैये और कानून व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता के कारण पूरे देश में चर्चा का विषय रही हैं। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव से ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय तक का सफर तय करने और फिर देश सेवा के लिए भारत लौटकर आईपीएस अधिकारी बनने की उनकी प्रेरणादायक कहानी लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल मानी जाती है। इल्मा अफरोज ने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं और उच्च शिक्षा के लिए ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में अध्ययन किया। इसके बाद भारत लौटकर उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा उत्तीर्ण की और भारतीय पुलिस सेवा में स्थान प्राप्त किया। वर्ष 2024 में, जब वे हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी (जिला सोलन) में पुलिस अधीक्षक (SP) के पद पर तैनात थीं, तब उन्होंने नशा तस्करी, संगठित अपराध और अवैध खनन के खिलाफ एक व्यापक अभियान चलाया। उनकी अगुवाई में पुलिस ने कई बड़े मामलों में कार्रवाई की, जिससे अपराधियों और माफिया नेटवर्क पर प्रभावी ढंग से नकेल कसी गई। इसी अवैध खनन विरोधी अभियान के दौरान, पुलिस ने स्थानीय कांग्रेस विधायक रामकुमार चौधरी की पत्नी से जुड़े बताए जा रहे वाहनों का चालान किया। इस घटना के बाद विधायक और पुलिस प्रशासन के बीच विवाद गहरा गया, जो राजनीतिक स्तर तक पहुँच गया। यह मामला इतना बढ़ा कि इल्मा अफरोज के खिलाफ विधानसभा में विशेषाधिकार हनन (प्रिविलेज मोशन) का मुद्दा भी उठाया गया। बढ़ते विवाद के बाद नवंबर 2024 में इल्मा अफरोज अपने गृह जनपद मुरादाबाद चली गईं और लंबी छुट्टी पर रहीं। बाद में यह मामला हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट पहुँचा, जहाँ अदालत ने इसमें यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए। इस घटनाक्रम ने केवल प्रदेश में ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी पुलिस की कार्यप्रणाली, राजनीतिक हस्तक्षेप और प्रशासनिक स्वतंत्रता को लेकर एक व्यापक बहस छेड़ दी। इल्मा अफरोज का जीवन संघर्ष, शिक्षा और सेवा भावना का एक उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने वैश्विक स्तर पर शिक्षा प्राप्त की और फिर देश लौटकर प्रशासनिक सेवा को चुना। आज उनकी कहानी विशेष रूप से उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का संकल्प रखते हैं।
- नूरपुर ब्लॉक समिति की नवनिर्वाचित अध्यक्ष रक्षा देवी ने मीडिया से बात करते हुए नूरपुर विधानसभा क्षेत्र की 52 पंचायतों के विकास के लिए अपनी प्राथमिकताएं और भविष्य की कार्ययोजना विस्तार से बताई। उन्होंने कहा कि ब्लॉक समिति का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र की सभी पंचायतों का संतुलित, समग्र और योजनाबद्ध विकास सुनिश्चित करना है, ताकि विकास का लाभ प्रत्येक पंचायत तक समान रूप से पहुंचे और लोगों को मूलभूत सुविधाएं उनके घरों के नजदीक मिल सकें। रक्षा देवी ने बताया कि पंचायतों में सड़क, पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, ग्रामीण संपर्क मार्ग, स्ट्रीट लाइट, सामुदायिक भवन, खेल मैदान और अन्य जनहित से जुड़े विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जिन पंचायतों में वर्षों से विकास कार्य लंबित हैं, उन्हें चिन्हित कर संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए जल्द से जल्द पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने अपनी कार्यनीति समझाते हुए कहा कि प्रत्येक पंचायत की अलग-अलग आवश्यकताएं होती हैं, इसलिए विकास योजनाएं भी स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर ही तैयार की जाएंगी। इन विकास कार्यों की निगरानी के लिए पंचायत प्रतिनिधियों, विभागीय अधिकारियों और स्थानीय लोगों के साथ नियमित संवाद स्थापित किया जाएगा, ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। रक्षा देवी ने कहा कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना उनकी प्रमुख प्राथमिकता होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं, महिलाओं, किसानों और जरूरतमंद वर्ग के हितों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि ब्लॉक समिति पूरी गंभीरता से यह सुनिश्चित करेगी कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुंचे। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से भी विकास कार्यों में सक्रिय सहयोग की अपील की। अध्यक्ष रक्षा देवी ने विश्वास जताया कि नूरपुर ब्लॉक की सभी 52 पंचायतों का समान रूप से विकास करना उनकी जिम्मेदारी है और इस दिशा में किसी भी पंचायत के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और क्षेत्र की जनता के सहयोग से नूरपुर विधानसभा क्षेत्र की सभी पंचायतों में विकास को नई गति मिलेगी और लोगों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान किया जाएगा।1
- चम्बा जिले की विधानसभा के गारम पंचायत चमबी के अकेरा और अच्छेड गांवों में स्थापित पानी की पाइपलाइन की हालत बेहद खराब हो चुकी है।1
- जवाली के ढसोली क्षेत्र में चोरों ने एक दुकान को निशाना बनाते हुए काफ़ी सामान चुरा लिया। चोरों ने दुकान पर मनोरंजन के लिए लगाई गई एलसीडी को भी नहीं बख्शा और उसे भी अपने साथ ले गए। इस घटना के बाद पुलिस जांच में जुट गई है। यह वारदात जवाली में चोरों के बुलंद हौसलों को दर्शाती है, क्योंकि वे अब मंदिरों के बाद दुकानों को भी अपना निशाना बना रहे हैं।1
- सुजानपुर नगर परिषद में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चयन के लिए रखी गई बैठक पार्षदों की गैर-हाजिरी के कारण एक बार फिर स्थगित कर दी गई है। यह बैठक उपमंडल एवं निर्वाचन अधिकारी विकास शुक्ला द्वारा सोमवार 22 जून को सुबह 11:00 बजे नगर परिषद बैठक हॉल में आयोजित की गई थी। इस बैठक का उद्देश्य नगर परिषद सुजानपुर को नया अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दिलाना था, जिसके लिए नौ वार्डों के सभी नौ पार्षदों की उपस्थिति अनिवार्य थी। निर्धारित समय पर उपमंडल अधिकारी विकास शुक्ला, तहसीलदार प्रवीण ठाकुर और नगर परिषद कार्यालय अधीक्षक सीनत शर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। हालांकि, जिन पार्षदों के लिए यह बैठक बुलाई गई थी, उनमें से केवल वार्ड नंबर 4 के पार्षद विनय सियाल ही उपस्थित हुए। विनय सियाल ने अपनी हाजिरी लगाई और तुरंत वहां से चले गए। अधिकारियों ने करीब 12:00 बजे, लगभग एक घंटे तक इंतजार करने के बाद, पार्षदों की अनुपस्थिति के कारण बैठक को स्थगित कर दिया। अनुपस्थित रहने वाले आठ पार्षदों में बलविंदर सिंह, मनीष गुप्ता, ज्योतिका ठाकुर, शिवानी, प्रमिला मेहरा, नीलम धीमान, बीना धीमान और मीनाक्षी महाजन शामिल हैं। अधिकारियों ने यह भी बताया कि आगामी बैठक की तिथि जल्द ही घोषित की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगली बैठक में पार्षदों की मौजूदगी की संख्या मायने नहीं रखेगी, बल्कि जो भी पार्षद मौके पर मौजूद होंगे, उन्हीं के बीच से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन कर लिया जाएगा। अधिकारी ने आगे कहा कि यदि पार्षदों में आपसी सहमति बनती है, तो चुनाव नहीं करवाया जाएगा, लेकिन अगर उम्मीदवार मैदान में आते हैं तो चुनाव प्रक्रिया अपनाई जाएगी।2
- ऊना में स्थित 'चावला दिल्लीवाला' रेस्टोरेंट, जहाँ ग्राहक स्वास्थ्यवर्धक और स्वादिष्ट भोजन का आनंद ले सकते हैं, बेहतरीन स्वाद और सुंदर माहौल प्रदान करता है। यह रेस्टोरेंट डीसी कार्यालय ऊना के सामने, कांगड़ा बैंक रामपुर रोड ऊना के पास स्थित है।1
- फतेहपुर के तहसील कल्याण अधिकारी अनूप सिंह सहारा योजना के लिए पात्र व्यक्तियों के संबंध में जानकारी प्रदान कर रहे हैं।1
- उपमंडल बंगाणा में रविवार देर शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे में 65 वर्षीय एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गए। यह हादसा उस समय हुआ जब एक परिवार हमीरपुर से धार्मिक कथा सुनकर अपने घर लौट रहा था। घर से महज ढाई किलोमीटर पहले सड़क पर अचानक एक पशु आ जाने के कारण चालक ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन वाहन का संतुलन बिगड़ गया। इसके फलस्वरूप कार पैराफिट से टकराकर लगभग 50 फीट गहरी खाई में जा गिरी। इस हादसे में 65 वर्षीय महिला के सिर पर गंभीर चोट लगने से उनकी घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई। सिविल अस्पताल बंगाणा के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अशोक दडोच ने बाद में बताया कि अस्पताल लाने पर पुष्पा देवी नाम की इस महिला को मृत घोषित किया गया। हादसे में घायल हुए अन्य तीन लोगों की पहचान धर्म चंद पुत्र बंसी लाल, विजय कुमार पुत्र प्रेम दास और जीवना कुमारी पत्नी विजय कुमार के रूप में हुई है। स्थानीय लोगों ने तुरंत दुर्घटना की सूचना पुलिस और एंबुलेंस को दी, जिसके बाद सभी घायलों को तत्काल सिविल अस्पताल बंगाणा पहुंचाया गया। डॉ. अशोक दडोच ने यह भी जानकारी दी कि मृत महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए क्षेत्रीय अस्पताल ऊना भेज दिया गया है। वहीं, अस्पताल में भर्ती अन्य तीनों घायलों का उपचार जारी है और चिकित्सकों की टीम उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।1