गौरझामर में पीडब्ल्यूडी के निर्माण कार्यों पर उठे सवाल, सीसी रोड और नाली निर्माण में अनियमितताओं के गंभीर आरोप गौरझामर। ग्राम पंचायत गौरझामर में लोक निर्माण विभाग द्वारा इन दिनों कराए जा रहे सीसी रोड और नाली निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्यों में निर्धारित मानकों की अनदेखी और घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उप स्वास्थ्य केंद्र से सेंट्रल बैंक बस स्टैंड तक बनाई जा रही सीसी सड़क को लेकर ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण में मिट्टी युक्त डस्ट एवं अन्य घटिया सामग्री का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि कुछ दिन पहले विभागीय अधिकारियों ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया था। इस दौरान मौके पर मिली मिट्टी युक्त डस्ट पर चिह्न लगाकर उसके उपयोग पर रोक लगाने के सख्त निर्देश दिए गए थे। हालांकि, ग्रामीणों का दावा है कि अधिकारियों के जाने के कुछ ही समय बाद कथित तौर पर उसी डस्ट का दोबारा उपयोग शुरू कर दिया गया। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि सड़क निर्माण में सीमेंट की मात्रा बेहद कम रखी जा रही है, जबकि इसकी जगह रेत और क्रेशर डस्ट का अत्यधिक उपयोग किया जा रहा है। आरोप है कि सड़क की केवल ऊपरी सतह पर सीमेंट का हल्का लेप कर इसे मजबूत और बेहतर दिखाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे इसकी ड्यूरेबिलिटी पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है। केवल सीसी सड़क ही नहीं, बल्कि गौरझामर में पीडब्ल्यूडी द्वारा बनाए जा रहे नाली निर्माण कार्य पर भी ग्रामीणों ने सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, नालियों के निर्माण में भी घटिया और मिट्टी युक्त डस्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्माण कार्यों में ऐसे ही मानकों की अनदेखी जारी रही, तो आगामी बारिश के मौसम में न केवल नालियां क्षतिग्रस्त हो जाएंगी, बल्कि पूरे क्षेत्र में गंभीर जलभराव की समस्या भी पैदा हो सकती है। ग्राम के नरेंद्र रजक, श्रीराम प्रजापति, मनोज पटेल और गोलू कोरी वीरेंद्र पटेल सहित अन्य नागरिकों ने जिला प्रशासन और विभागीय उच्च अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि यदि जांच में अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो संबंधित ठेकेदार और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और गुणवत्तापूर्ण सामग्री से ही निर्माण पूरा कराया जाए। इनका कहना - मैं स्वयं मौके पर जाकर निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच करूंगा। यदि किसी प्रकार की कमी या अनियमितता पाई जाती है, तो ठेकेदार के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशांत पटेल (सब इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी) नाली निर्माण में मिट्टी युक्त डस्ट के उपयोग की जानकारी संज्ञान में आई है। संबंधित सामग्री का उपयोग तत्काल प्रभाव से बंद करवाया जाएगा और सभी विकास कार्यों की जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उमाशंकर तिवारी (एसडीओ, पीडब्ल्यूडी)
गौरझामर में पीडब्ल्यूडी के निर्माण कार्यों पर उठे सवाल, सीसी रोड और नाली निर्माण में अनियमितताओं के गंभीर आरोप गौरझामर। ग्राम पंचायत गौरझामर में लोक निर्माण विभाग द्वारा इन दिनों कराए जा रहे सीसी रोड और नाली निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्यों में निर्धारित मानकों की अनदेखी और घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उप स्वास्थ्य केंद्र से सेंट्रल बैंक बस स्टैंड तक बनाई जा रही सीसी सड़क को लेकर ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण में मिट्टी युक्त डस्ट एवं अन्य घटिया सामग्री का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि कुछ दिन पहले
विभागीय अधिकारियों ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया था। इस दौरान मौके पर मिली मिट्टी युक्त डस्ट पर चिह्न लगाकर उसके उपयोग पर रोक लगाने के सख्त निर्देश दिए गए थे। हालांकि, ग्रामीणों का दावा है कि अधिकारियों के जाने के कुछ ही समय बाद कथित तौर पर उसी डस्ट का दोबारा उपयोग शुरू कर दिया गया। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि सड़क निर्माण में सीमेंट की मात्रा बेहद कम रखी जा रही है, जबकि इसकी जगह रेत और क्रेशर डस्ट का अत्यधिक उपयोग किया जा रहा है। आरोप है कि सड़क की केवल ऊपरी सतह पर सीमेंट का हल्का लेप कर इसे मजबूत और बेहतर दिखाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे
इसकी ड्यूरेबिलिटी पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है। केवल सीसी सड़क ही नहीं, बल्कि गौरझामर में पीडब्ल्यूडी द्वारा बनाए जा रहे नाली निर्माण कार्य पर भी ग्रामीणों ने सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, नालियों के निर्माण में भी घटिया और मिट्टी युक्त डस्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्माण कार्यों में ऐसे ही मानकों की अनदेखी जारी रही, तो आगामी बारिश के मौसम में न केवल नालियां क्षतिग्रस्त हो जाएंगी, बल्कि पूरे क्षेत्र में गंभीर जलभराव की समस्या भी पैदा हो सकती है। ग्राम के नरेंद्र रजक, श्रीराम प्रजापति, मनोज पटेल और गोलू कोरी वीरेंद्र पटेल सहित अन्य नागरिकों ने जिला प्रशासन और विभागीय उच्च अधिकारियों से
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि यदि जांच में अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो संबंधित ठेकेदार और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और गुणवत्तापूर्ण सामग्री से ही निर्माण पूरा कराया जाए। इनका कहना - मैं स्वयं मौके पर जाकर निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच करूंगा। यदि किसी प्रकार की कमी या अनियमितता पाई जाती है, तो ठेकेदार के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशांत पटेल (सब इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी) नाली निर्माण में मिट्टी युक्त डस्ट के उपयोग की जानकारी संज्ञान में आई है। संबंधित सामग्री का उपयोग तत्काल प्रभाव से बंद करवाया जाएगा और सभी विकास कार्यों की जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उमाशंकर तिवारी (एसडीओ, पीडब्ल्यूडी)
- प्रदीप शर्मा करेली एसीएन भारत नरसिंहपुर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) नरसिंहपुर द्वारा उच्च शिक्षा मंत्री को ज्ञापन: शासकीय महाविद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं की मांग सुविधाओं के अभाव को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री (मध्य प्रदेश शासन) को कलेक्टर के माध्यम से एक ज्ञापन सौंपा गया है।1
- EXPRESS MP CG NEWS1
- महंगाई के खिलाफ करेली में कांग्रेस का हल्लाबोल, रैली निकालकर सरकार के खिलाफ की नारेबाजी1
- *SBI मंडी रोड शाखा पर मनमानी के आरोप, खाता खुलवाने 8-10 दिन से चक्कर काट रहा छात्र!* नरसिंहपुर ! 27 अगस्त 2026 नरसिंहपुर भारतीय स्टेट बैंक की मंडी रोड शाखा में खाता खुलवाने में कथित देरी और बार-बार नई औपचारिकताएं बताए जाने का मामला सामने आया है। छात्र प्रिंस लोधी ने इस संबंध में कलेक्टर नरसिंहपुर को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में छात्र ने आरोप लगाया कि वह पिछले 8-10 दिनों से बैंक में अपना खाता खुलवाने के लिए चक्कर लगा रहा है। स्कूल में खाता नंबर जमा करना आवश्यक होने के बावजूद अब तक उसका खाता नहीं खुल पाया है। छात्र के अनुसार, उसने बैंक द्वारा मांगी गई आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर दस्तावेज और फॉर्म जमा किए थे तथा बैंक अधिकारी द्वारा फॉर्म का सत्यापन भी किया गया था। छात्र का कहना है कि इसके बाद भी अलग-अलग समय पर नई प्रक्रियाएं और नियम बताए जा रहे हैं, जिससे उसे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शिकायत में कहा गया है कि इस प्रकार की प्रक्रिया से छात्र के साथ-साथ अन्य अभिभावकों को भी परेशानी हो रही है। प्रिंस लोधी ने कलेक्टर से मामले को संज्ञान में लेकर उचित जांच एवं कार्रवाई की मांग की है। शिकायत की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, एसबीआई के रीजनल मैनेजर जबलपुर तथा चीफ जनरल मैनेजर भोपाल को भी भेजी गई है।1
- 25 करोड़ की सीवरेज परियोजना पर संकट: भुगतान के अभाव में स्टाफ ने छोड़ा काम, चोकिंग-ओवरफ्लो से साईंखेड़ा परेशान 25 करोड़ की सीवरेज परियोजना पर संकट: भुगतान के अभाव में स्टाफ ने छोड़ा काम, चोकिंग-ओवरफ्लो से साईंखेड़ा परेशान साईंखेड़ा। नगर की स्वच्छता व्यवस्था को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से एशियन डेवलपमेंट बैंक से वित्त पोषित एवं मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (MPUDC), भोपाल के माध्यम से लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित साईंखेड़ा सीवरेज परियोजना अब अपने उद्देश्य से भटकती नजर आ रही है। जिस परियोजना को नगर के लिए बड़ी सौगात माना गया था, वही आज उपेक्षा, भुगतान संबंधी विवाद और कमजोर संचालन व्यवस्था के चलते गंभीर संकट में पहुंचती दिखाई दे रही है। जानकारी के अनुसार नवंबर 2024 में परियोजना के ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस का कार्य प्रारंभ हुआ था। आरोप है कि इसके बाद लंबे समय से संबंधित ठेकेदार को भुगतान नहीं किया गया। भुगतान लंबित होने के कारण ठेकेदार कर्मचारियों को वेतन देने में असमर्थ हुआ और परियोजना के संचालन तथा रखरखाव में लगे कर्मचारियों के काम छोड़ने से पूरी व्यवस्था प्रभावित हो गई। स्टाफ हटते ही चरमराई व्यवस्था तकनीकी एवं मेंटेनेंस स्टाफ की कमी का सीधा असर अब जमीन पर दिखाई दे रहा है। नगर के विभिन्न हिस्सों में सीवरेज पाइपलाइन चोक होने, मैनहोल ओवरफ्लो होने, नालियां भरने और गंदा पानी फैलने जैसी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर शिकायतों के बावजूद इनके स्थायी समाधान को लेकर प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि यदि परियोजना की नियमित मेंटेनेंस व्यवस्था इसी प्रकार प्रभावित रही तो करोड़ों रुपये से तैयार किया गया सीवरेज नेटवर्क धीरे-धीरे तकनीकी रूप से खराब होने की स्थिति में पहुंच सकता है। इसका सीधा असर नगरवासियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण पर पड़ेगा। ठेकेदार ने भी ऑपरेशन-मेंटेनेंस से अलग होने का दिया संकेत सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भुगतान नहीं होने की स्थिति में संबंधित ठेकेदार द्वारा विभाग को अपनी कठिनाइयों से अवगत कराते हुए ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस कार्य से अलग किए जाने का अनुरोध भी किया गया है। यदि यह स्थिति सही है तो यह केवल भुगतान का मामला नहीं, बल्कि इतनी बड़ी सार्वजनिक परियोजना के भविष्य के संचालन पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। परियोजना का भविष्य कौन तय करेगा? नगरवासियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद परियोजना को सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी किसकी है? नगर परिषद, MPUDC और संबंधित PIU के बीच समन्वय की स्थिति क्या है? लंबित भुगतान का समाधान कब होगा? मेंटेनेंस के लिए पर्याप्त तकनीकी स्टाफ कब उपलब्ध होगा? और यदि वर्तमान एजेंसी ऑपरेशन-मेंटेनेंस से अलग होती है तो आगे परियोजना किस व्यवस्था से संचालित होगी? इन सवालों का स्पष्ट जवाब नगरवासियों को अब तक नहीं मिल पा रहा है। नए क्षेत्रों को सीवरेज नेटवर्क से जोड़ने की योजना भी अस्पष्ट परियोजना का उद्देश्य केवल वर्तमान नेटवर्क को संचालित करना ही नहीं, बल्कि नगर के अधिकाधिक घरों एवं नए क्षेत्रों को सीवरेज सुविधा से जोड़ना भी है। लेकिन किस चरण में कितने नए घर जोड़े जाएंगे, नए क्षेत्रों को कब लाभ मिलेगा और इसके लिए क्या कार्ययोजना तैयार की गई है, इस संबंध में भी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ रही है। करोड़ों की परियोजना पर अब जवाबदेही जरूरी यह मामला महज नाली चोक होने या मैनहोल ओवरफ्लो होने तक सीमित नहीं है। यह करोड़ों रुपये की सार्वजनिक निधि से निर्मित एक महत्वपूर्ण अधोसंरचना की कार्यक्षमता और उसके भविष्य से जुड़ा विषय है। यदि समय रहते परियोजना के संचालन, रखरखाव, भुगतान और विस्तार को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आशंका है कि करोड़ों रुपये से निर्मित यह व्यवस्था धीरे-धीरे अनुपयोगी होती चली जाएगी और अंततः इसका आर्थिक एवं सामाजिक भार नगरवासियों को उठाना पड़ेगा। अब आवश्यकता है कि जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग पूरे मामले की गंभीरता से समीक्षा करें, परियोजना की वर्तमान तकनीकी स्थिति की जांच कराएं, लंबित भुगतान की स्थिति स्पष्ट करें, जिम्मेदार एजेंसियों के बीच समन्वय सुनिश्चित करें और भविष्य के संचालन की ठोस कार्ययोजना सार्वजनिक करें। सवाल सीधा है—25 करोड़ रुपये की परियोजना यदि आज ही रखरखाव और संचालन के संकट में फंस गई है, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है और जवाबदेही तय कब होगी?1
- नरसिंहपुर - गांव में बिक रही अवैध शराब बिक्री पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर sp को सौपा ज्ञापन सागौनी खुर्द में अवैध तरीके से बिक रही शराब पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है आज ग्रामीण युवा एसपी ऑफिस पहुंचे और एसपी को आवेदन दिया जिसमें उन्होंने गांव में बिक रही अवैध शराब पर प्रतिबंध लगाने की मांग की उनका कहना है कि गांव में कुछ लोगों के द्वारा अवैध शराब का विक्रय किया जा रहा है जिससे ग्रामीणों के साथ युवा पीढ़ी भी बर्बाद हो रही है वहीं गांव में पूर्णता शराब विक्रय पर रोक लगवाई जाए जिसको लेकर ग्रामीणों ने एसपी को ज्ञापन सोपा और शराब पूर्णता बंद करवाने की मांग1
- प्रदीप शर्मा करेली एसीएन भारत महंगाई के खिलाफ में कांग्रेस का हल्लाबोल, रैली निकालकर सरकार के खिलाफ की नारेबाजी*1
- बड़वानी - मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान की तिथि में हुआ संसोधन सेंधवा तहसील की 13 ग्राम पंचायतो में आयोजित होगें जध विश्वास शिविर1
- पखांजूर-अतिसंवेदनशील मुझिकटनी में पहुची परलकोट जनकल्याण संस्था1