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मंदसौर जिले में शासकीय मशीनरी पूरी तरह निष्क्रिय हो चुकी है, मानो उसे जंग लग गया हो। साल 2026 में भी जंगल से हरी लकड़ियों के ट्रैक्टर सरेआम गुजरते देखे जा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में हैं। यह स्थिति सोचने पर विवश करती है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। वन मंडल आँखें मूंदे बैठा है, जबकि लकड़ी माफिया गिरोह पूरी सक्रियता से काम कर रहा है। दिन-दहाड़े वनों की लकड़ी की कटाई कर मुख्य सड़क मार्ग से इसे आरा मशीनों तक पहुँचाया जा रहा है। इन सब के बावजूद, जिम्मेदार अधिकारियों का मौन कई सवाल खड़े कर रहा है।
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मंदसौर जिले में शासकीय मशीनरी पूरी तरह निष्क्रिय हो चुकी है, मानो उसे जंग लग गया हो। साल 2026 में भी जंगल से हरी लकड़ियों के ट्रैक्टर सरेआम गुजरते देखे जा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में हैं। यह स्थिति सोचने पर विवश करती है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। वन मंडल आँखें मूंदे बैठा है, जबकि लकड़ी माफिया गिरोह पूरी सक्रियता से काम कर रहा है। दिन-दहाड़े वनों की लकड़ी की कटाई कर मुख्य सड़क मार्ग से इसे आरा मशीनों तक पहुँचाया जा रहा है। इन सब के बावजूद, जिम्मेदार अधिकारियों का मौन कई सवाल खड़े कर रहा है।
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- मध्य प्रदेश के सीतामऊ उपखंड के ग्राम बड़ी बेटीखेड़ी में राष्ट्रीय पक्षी मोर के शिकार का मामला सामने आया है। ग्रामीणों के अनुसार, एक युवक को मोर का शिकार करते हुए पाया गया, जिसका एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें मृत मोर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। ग्रामीणों ने बताया कि आरोपी की पहचान छोटी बेटीखेड़ी निवासी करण पिता कैलाश के रूप में की गई है। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्रित हो गए और उन्होंने तुरंत इस युवक को पकड़ लिया। इसके बाद, ग्रामीणों ने पकड़े गए युवक के संबंध में पुलिस को सूचना दी।3
- नीमच जिले के कुकड़ेश्वर में कुशवाह समाज द्वारा एक संयुक्त सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में उन सभी विद्यार्थियों को शील्ड और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया, जिन्होंने कक्षा 5वीं, 8वीं, 10वीं और 12वीं में 60 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए थे। विद्यार्थियों के साथ-साथ, प्रगतिशील किसानों, विभिन्न खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों और समाज के सेवानिवृत्त कर्मचारियों का भी विशेष सम्मान किया गया, जिससे कुकड़ेश्वर में कुशवाह समाज का यह प्रतिभा सम्मान समारोह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।1
- नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने झंझारवाड़ा उद्योग क्षेत्र का दौरा कर निरीक्षण किया।1
- दतिया में बुधवार, 29 मई 2026 को मांझी समाज के सैकड़ों लोगों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। समाज ने विंध्य क्षेत्र के धीमर, केवट, मल्लाह और भोई समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की सूची क्रमांक-12 से हटाने और उन्हें मूल मांझी जनजाति के रूप में मान्यता देने की मांग की। उनका कहना है कि ऐतिहासिक दस्तावेजों और सरकारी अभिलेखों में इन जातियों को मांझी जनजाति का अभिन्न हिस्सा माना गया है। ज्ञापन में बताया गया कि तत्कालीन विंध्यप्रदेश के राजप्रमुख द्वारा 7 जनवरी 1950 को जारी परिपत्र क्रमांक 97/XIII/F/CENSUS-49 में धीमर, केवट, मल्लाह एवं भोई समुदाय को मांझी जाति के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति में समाहित करने की अनुशंसा की गई थी। इसके अतिरिक्त, जनजाति कार्य विभाग मध्यप्रदेश के आयुक्त द्वारा जारी पत्र क्रमांक जा.प्रा.समिति/23/12/2023 में भी इन समुदायों को मूल रूप से मांझी जनजाति में समाहित माना गया है। समाज ने यह भी दावा किया कि 13 मार्च 2023 को मध्यप्रदेश विधानसभा में पूछे गए अतारांकित प्रश्न क्रमांक-1121 के उत्तर में तत्कालीन जनजाति कार्य मंत्री सुश्री मीना सिंह माण्डवे ने भी स्वीकार किया था कि विंध्यप्रदेश क्षेत्र के केवट, धीमर, मल्लाह एवं भोई समुदाय मांझी जनजाति के ही अंग हैं। मांझी समाज के जिला अध्यक्ष पूरन केवट ने स्पष्ट किया कि विंध्यप्रदेश के रीवा, सीधी, शहडोल, सतना, छतरपुर, दतिया एवं टीकमगढ़ जिलों में "मांझी" नाम से कोई पृथक जाति मौजूद नहीं है। इन क्षेत्रों में धीमर, केवट, मल्लाह एवं भोई समुदाय को ही मूल मांझी जनजाति के रूप में जाना और पहचाना जाता है। समाजजनों ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि उपलब्ध ऐतिहासिक एवं शासकीय दस्तावेजों का गहन परीक्षण कर इन समुदायों को ओबीसी सूची से हटाकर उन्हें मूल मांझी जनजाति के समस्त अधिकार प्रदान किए जाएं। ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला अध्यक्ष पूरन केवट सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। जिला कलेक्टर ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए उसे शासन स्तर तक उचित कार्रवाई हेतु भेजने का आश्वासन दिया।2
- मध्य प्रदेश हेड ब्यूरो मंगल देव राठौर की एक खास रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें एक व्यक्ति के अनोखे नवाचार को उजागर किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, जहां लोग एयर कंडीशनर (AC) पर 30 से 50 हजार रुपये तक खर्च करते हैं, वहीं इन भाईसाहब ने अपनी छत पर कुछ ऐसा किया है, जिससे उन्हें मुफ्त में 15 डिग्री तक की अतिरिक्त ठंडक मिल रही है। यह पहल बिना किसी खर्च के घर को ठंडा रखने का एक प्रभावी और सराहनीय तरीका प्रस्तुत करती है।1
- मध्य प्रदेश के बड़ी बेटीखेड़ी गांव में राष्ट्रीय पक्षी मोर के शिकार का एक मामला सामने आया है। ग्रामीणों के अनुसार, एक युवक को मोर का शिकार करते हुए पाया गया। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें मृत मोर दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों ने आरोपी की पहचान करण पिता कैलाश, निवासी छोटी बेटीखेड़ी के रूप में की है। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्रित हो गए और उन्होंने युवक को पकड़ लिया। इसके बाद, ग्रामीणों ने पुलिस को इस घटना की सूचना दी।1