छबड़ा के भुवाखेड़ी ग्राम स्थित सादली की प्राचीन पहाड़ी पर नव निर्मित बाबा खाटूश्याम मंदिर और भैरव महाराज खाटूश्याम गोशाला की परिक्रमा का आयोजन 10 जुलाई को आषाढ़ कृष्ण पक्ष ग्यारस, यानी योगिनी ग्यारस तिथि पर 'जय बाबा खाटूश्याम' के जयकारों के साथ किया जाएगा। यह एक पवित्र और महत्वपूर्ण आयोजन है जिसका उद्देश्य भक्तों को आध्यात्मिक लाभ पहुंचाना है। अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र, श्री हनुमान सिद्ध साधना आश्रम अमीरपुर खेड़ी और ओशो आशीष ध्यान केंद्र भुवाखेड़ी के संस्थापक एस. एल. नागर, जिन्हें स्वामी ध्यान गगन के नाम से भी जाना जाता है, ने क्षेत्र के सभी श्याम भक्तों, श्रद्धालु भक्तों और धार्मिक व्यक्तियों से इस परिक्रमा में भाग लेने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि सभी लोग घर, परिवार, समाज और राष्ट्र के चहुंमुखी विकास की कामना के साथ, पवित्र भावना से जग कल्याणार्थ अपने पारिवारिक बंधुओं, बांधवों और इष्ट मित्रों सहित सत्यता और पवित्रता के साथ बाबा का निशान लेकर, पैदल यात्रा करते हुए इस परिक्रमा में शामिल हों। प्राचीन ऋषियों के अनुसार, प्रदक्षिणा और परिक्रमा का विशेष महत्व है। वे कहते हैं कि पृथ्वी पर जीवों और आत्माओं के आगमन के बाद से हम 84 लाख योनियों में जन्म लेते रहे हैं और उन योनियों में काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद के वशीभूत होकर अच्छे-बुरे कर्म करते आए हैं, जिनके फल स्वरूप ही हमारा जन्म होता आया है। अब मनुष्य योनि में हम अच्छे कर्म कर नर से नारायण और नारी से नारायणी (श्री लक्ष्मी) बन सकते हैं। परिक्रमा मार्ग अभी कच्चा है, और इस दौरान कंकर-पत्थर बीनने से जीवन की कठिनाइयां हल्की हो सकती हैं। पैदल यात्रा और परिक्रमा करने से शारीरिक और मानसिक रोगों में कमी आ सकती है, और बाबा के दर्शन से अब तक के हारे हुए जीवन को सहारा भी मिल सकता है। साधु-संतों और ऋषियों का कहना है कि बाबा श्याम के मंदिर सहित हर ग्यारस को गोशाला के दर्शन कर गोमाता को चारा-पानी का दान करने और प्रदक्षिणा-परिक्रमा करने से जीव को धर्म, अर्थ, लाभ और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस पहली परिक्रमा को यादगार बनाने के लिए, भक्त परिक्रमा मार्ग में स्वयं के नाम पर और धरती माता के नाम पर एक-एक पौधा लगाकर उसे जाली से सुरक्षित कर सकते हैं। परिक्रमा विषम संख्या में, जैसे एक, तीन, पांच, सात या ग्यारह बार करनी चाहिए। यदि कोई गुरुमुखी है, तो गुरु मंत्र का जप करते हुए परिक्रमा करे, अन्यथा 'ॐ श्री श्याम देवाय नमः' का जप करते हुए सकारात्मक भाव और निष्काम होकर परिक्रमा करे।
छबड़ा के भुवाखेड़ी ग्राम स्थित सादली की प्राचीन पहाड़ी पर नव निर्मित बाबा खाटूश्याम मंदिर और भैरव महाराज खाटूश्याम गोशाला की परिक्रमा का आयोजन 10 जुलाई को आषाढ़ कृष्ण पक्ष ग्यारस, यानी योगिनी ग्यारस तिथि पर 'जय बाबा खाटूश्याम' के जयकारों के साथ किया जाएगा। यह एक पवित्र और महत्वपूर्ण आयोजन है जिसका उद्देश्य भक्तों को आध्यात्मिक लाभ पहुंचाना है। अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र, श्री हनुमान सिद्ध साधना आश्रम अमीरपुर खेड़ी और ओशो आशीष ध्यान केंद्र भुवाखेड़ी के संस्थापक एस. एल. नागर, जिन्हें स्वामी ध्यान गगन के नाम से भी जाना जाता है, ने क्षेत्र के सभी श्याम भक्तों, श्रद्धालु भक्तों
और धार्मिक व्यक्तियों से इस परिक्रमा में भाग लेने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि सभी लोग घर, परिवार, समाज और राष्ट्र के चहुंमुखी विकास की कामना के साथ, पवित्र भावना से जग कल्याणार्थ अपने पारिवारिक बंधुओं, बांधवों और इष्ट मित्रों सहित सत्यता और पवित्रता के साथ बाबा का निशान लेकर, पैदल यात्रा करते हुए इस परिक्रमा में शामिल हों। प्राचीन ऋषियों के अनुसार, प्रदक्षिणा और परिक्रमा का विशेष महत्व है। वे कहते हैं कि पृथ्वी पर जीवों और आत्माओं के आगमन के बाद से हम 84 लाख योनियों में जन्म लेते रहे हैं और उन योनियों में काम, क्रोध, लोभ,
मोह, मद के वशीभूत होकर अच्छे-बुरे कर्म करते आए हैं, जिनके फल स्वरूप ही हमारा जन्म होता आया है। अब मनुष्य योनि में हम अच्छे कर्म कर नर से नारायण और नारी से नारायणी (श्री लक्ष्मी) बन सकते हैं। परिक्रमा मार्ग अभी कच्चा है, और इस दौरान कंकर-पत्थर बीनने से जीवन की कठिनाइयां हल्की हो सकती हैं। पैदल यात्रा और परिक्रमा करने से शारीरिक और मानसिक रोगों में कमी आ सकती है, और बाबा के दर्शन से अब तक के हारे हुए जीवन को सहारा भी मिल सकता है। साधु-संतों और ऋषियों का कहना है कि बाबा श्याम के मंदिर सहित हर
ग्यारस को गोशाला के दर्शन कर गोमाता को चारा-पानी का दान करने और प्रदक्षिणा-परिक्रमा करने से जीव को धर्म, अर्थ, लाभ और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस पहली परिक्रमा को यादगार बनाने के लिए, भक्त परिक्रमा मार्ग में स्वयं के नाम पर और धरती माता के नाम पर एक-एक पौधा लगाकर उसे जाली से सुरक्षित कर सकते हैं। परिक्रमा विषम संख्या में, जैसे एक, तीन, पांच, सात या ग्यारह बार करनी चाहिए। यदि कोई गुरुमुखी है, तो गुरु मंत्र का जप करते हुए परिक्रमा करे, अन्यथा 'ॐ श्री श्याम देवाय नमः' का जप करते हुए सकारात्मक भाव और निष्काम होकर परिक्रमा करे।
- वन विभाग ने उप वन संरक्षक बारां, बड़े विवेकानंद माणिकराव के दिशा-निर्देशन और सहायक वन संरक्षक अनिल मीणा के मार्गदर्शन में छीपाबड़ौद में वनभूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की है। क्षेत्रीय वन अधिकारी हेमेंद्र शाक्यवाल के नेतृत्व में यह अभियान चलाया गया। ग्रामीणों से मिली शिकायत के आधार पर नाका सेतकोलू के अंतर्गत आने वाले ग्राम बरसत और पातलापानी में वन भूमि पर अतिक्रमण कर बोई गई फसल को जेसीबी की मदद से नष्ट किया गया। इस दौरान अतिक्रमण हटाने के लिए तार फेंसिंग और झाड़ बाड़ को हटाया गया, साथ ही ट्रेंच भी खुदवाई गई। इसी क्रम में राजपुरा खालसा गांव के पास वन भूमि पर अवैध रूप से डाले गए पत्थरों को भी जेसीबी से हटाया गया। इस कार्रवाई के परिणामस्वरूप लगभग 46 बीघा वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। इस अभियान में नाका प्रभारी जितेंद्र भार्गव, रिकू मीणा, भगवान सिंह, राजू मीणा, प्रवीण शर्मा, मालम सिंह, संजय मीणा सहित अन्य वनकर्मी शामिल रहे। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वनभूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी इस तरह की कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।3
- राजस्थान के छीपाबड़ौद स्थित स्टेडियम में 'समुद्र मंथन प्राणायाम' का आयोजन किया गया है।1
- झालावाड़ जिले में दिनांक 07/07/2026 को जोरदार बारिश दर्ज की गई।1
- मध्य प्रदेश के गुना शहर में बुधवार सुबह दिनदहाड़े 17 लाख रुपये की लूट की वारदात से सनसनी फैल गई। शहर के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के फॉयगा रोड स्थित शिव मंदिर के पास तीन बदमाशों ने एक कलेक्शन एजेंट को निशाना बनाते हुए उसकी आँखों में मिर्च स्प्रे झोंक दिया और नकदी से भरा बैग छीनकर फरार हो गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, राजस्थान के बीकानेर निवासी वासुदेव शर्मा वर्तमान में गुना के बड़ा जैन मंदिर गली में रहते हैं और कुंभराज के एक धनिया व्यापारी के यहां कलेक्शन का काम करते हैं। मंगलवार को वे पचौर से व्यापारियों से भुगतान लेकर लौटे थे, और बुधवार सुबह यह रकम व्यापारी तक पहुंचाने के लिए निकले थे। रास्ते में पहले से घात लगाए बैठे तीन बदमाशों ने उन्हें रोका और आँखों में मिर्च स्प्रे डालकर नकदी से भरा बैग छीन लिया। घटना की सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पूरे शहर में नाकाबंदी कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और शहर के प्रमुख मार्गों व निकास बिंदुओं पर संदिग्धों की तलाश कर रही है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि बदमाशों को इतनी बड़ी रकम ले जाए जाने की पहले से सूचना थी या उन्होंने रेकी कर वारदात को अंजाम दिया, साथ ही कलेक्शन की जानकारी किन-किन लोगों को थी और कहीं किसी अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका तो नहीं है। दिनदहाड़े हुई इस बड़ी लूट के बाद शहर के व्यापारियों में दहशत का माहौल है। व्यापारिक संगठनों ने पुलिस से जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी और व्यापारियों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों तथा पीड़ित के बयान के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।1
- ग्राम पंचायत कोलुआ के समस्त ग्रामीण रास्ते की खराब हालत से परेशान हैं। ग्रामीणों ने सरपंच साहब से निवेदन किया है कि रास्ते पर मुरम डाल दी जाए, ताकि उन्हें आने-जाने में हो रही परेशानी से राहत मिल सके।1
- वन विभाग ने झालावाड़ जिले में वन्यजीवों के संरक्षण और अवैध शिकार पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से एक बड़ी कार्रवाई की है। इस दौरान विभाग ने जीवित तीतर और तोते, शिकार में प्रयुक्त फंदे, पिंजरे, तथा एक मोटरसाइकिल जब्त की। संबंधित आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। उप वन संरक्षक सागर पवार के निर्देशानुसार, बुधवार सुबह सहायक वन संरक्षक मुकेश सहजवानी के नेतृत्व में क्षेत्रीय वन अधिकारी दीपक सिंह चारण की टीम, असनावर रेंज के वनकर्मियों और पुलिस बल ने संयुक्त रूप से यह कार्रवाई की। टीम ने झालावाड़ स्थित कालीसिंध नदी की पुलिया के समीप वनखण्ड फील्ड ट्रायल क्षेत्र में बनी कच्ची झोपड़ियों पर दबिश दी। इस दौरान, मौके से जीवित तीतर एवं तोते बरामद किए गए, साथ ही वन्यजीवों के अवैध शिकार और उन्हें पकड़ने में उपयोग होने वाले फंदे, पिंजरे और एक मोटरसाइकिल भी जब्त की गई। प्रारंभिक जांच में वन्यजीवों के अवैध शिकार, उन पर कब्जा करने और उनके व्यापार से संबंधित गतिविधियों के प्रमाण मिलने पर संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की गई। इसके उपरांत, आरोपियों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। वन विभाग ने आमजन से अपील की है कि वन्यजीवों का शिकार करना, उन पर कब्जा करना, उन्हें संग्रहित करना, उनका परिवहन करना अथवा उनका व्यापार करना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है, जिसमें दोषी पाए जाने पर कठोर दंड और जुर्माने का प्रावधान है। विभाग ने नागरिकों से यह भी आग्रह किया है कि यदि उन्हें वन्यजीवों के अवैध शिकार, कब्जे, परिवहन या व्यापार से संबंधित कोई भी जानकारी मिलती है, तो वे तत्काल इसकी सूचना निकटतम वन अधिकारी या वन विभाग को दें। विभाग ने यह आश्वासन भी दिया है कि सूचना देने वाले व्यक्तियों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी, ताकि समय पर प्रभावी कार्रवाई कर वन्यजीवों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।1
- बारुईपुर पीड़िता के लिए न्याय की माँग को लेकर तृणमूल कांग्रेस द्वारा बलीगंज से हावड़ा तक बुलाई गई रैली में, कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही बलीगंज में तनाव बढ़ गया। कोलकाता उच्च न्यायालय की सशर्त अनुमति के बाद जब कार्यकर्ता और समर्थक जमा होना शुरू हुए, तो कथित तौर पर विपक्षी समर्थकों ने 'चोर-चोर' के नारे लगाए। इसके जवाब में, 'जय बांग्ला' के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। इस घटना के बाद, तृणमूल ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दावा है कि यह विरोध प्रदर्शन लोगों के गुस्से का परिणाम है। गौरतलब है कि उच्च न्यायालय ने इस रैली के लिए प्रतिभागियों की संख्या और यातायात प्रबंधन को लेकर कई शर्तें लगाई थीं।1