*जमीन खरीदी बिरजी की कब्जा लिया रामासरे की जमीन पर,अब जबरन मीरा के घर से निकाल रहे रास्ता लेखपाल ने पीड़ित पर ही दर्ज किया 15 डी का मुकदमा*:- पलिया कलां खीरी......... *विपक्षी ओमप्रकाश को अपने खेत में भेजने की बजाय लेखपाल ने बताया कि बिरजी के लड़के अपनी जमीन से रास्ता देने को तैयार हैं रामासरे भी अपने घर से रास्ता दें तभी हम 15डी का मुकदमा हटवा पाएंगे* *लेखपाल ने बिरजी जिसने खेत बेचा और चकरोड भी बेच दी उस पर कार्यवाही करने के बजाय विपक्षी से सांठ गांठ करके पीड़ित पर ही कर दिया 15 डी का मुकदमा और रुकवा दिया उसके घर का निर्माण कार्य, "टूटी झोपड़ी में रहने को मजबूर पीड़ित"* पलिया कलां खीरी:- मामला पलिया कला खीरी के ग्राम पंचायत बसंतापुर खुर्द गांव बुद्धापूर्वा का बताया जा रहा है ।जहां पर ओमप्रकाश ने बिरजी जमीन खरीदी बाकायदा रजिस्ट्री कराई उसके बाद उसे खेत में फसल होने के कारण वीरजी के देवर को समझा बुझाकर कि आपके खेत में फसल खड़ी है खड़ी फसल का नुकसान ना करें हमको खाली वाला खेत दे दीजिए।आपकी फसल क्यों खराब करेंगे उक्त की मीठी-मीठी बातों मैं आकर बिर्जी के देवर ने एक बार के लिए उसको खेत जोतने दिया।उसके बाद प्रार्थीनी ने कई बार उक्त विपक्षी से कहा की हमारी जमीन खाली कर दो उसने मीठी-मीठी बातें करके कहा अरे जमीन आपकी है जब आप कहेंगे तब खाली हो जाएगी कौन सा हम कब्जा किये ले रहे हैं।ऐसे कहते कहते एक अरसा बीत गया और प्रार्थी उनके मीठे व्यवहार और अच्छे स्वभाव के चलते ज्यादा दबाव नहीं डाला की एक ही गांव में रहना है लड़ने झगड़ने का क्या फायदा किंतु उक्त विपक्षी अब उसके जमीन पर कब्जा भी कर लिया है और अब उसके घर के बीच से रास्ता चाहता है। जबकि उक्त विपक्षी की जमीन बिरजी के खेत में है जहां पर उसकी रजिस्ट्री है वहां पर उसके रजिस्ट्री में पूर्व में रास्ता भी दर्ज है जबकि ओमप्रकाश ने जिस भूमि को खरीदा था उसे भूमि के सामने की चकरोड को भी भेज दिया जिसकी पूरी जानकारी स्थानीय लेखपाल अजय को भी है किंतु अजय ने बिरजी और ओमप्रकाश पर कार्यवाही करने की बजाय पीड़ित रामासरे पर ही 15 डी का मुकदमा दर्ज कर दिया। वीरता का आरोप है कि जब घर में कोई नहीं होता है तब विपक्षीगढ़ आए दिन घर में घुसकर हमारे साथ गाली गलौज करते हैं जान से मारने की धमकी देते हैं। जब इस मामले में स्थानीय लेखपाल अजय से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वीर जी का पुत्र अपनी जमीन से रास्ता देने को तैयार है यह भी अपनी जमीन में रास्ता दे दें मसाला निपट जाएगा किंतु जब उनसे कहा गया कि जहां पर विपक्षी ओमप्रकाश की जमीन है वहां पर उनको स्थापित करवा दीजिए और जो उनके सामने अखरोट है उसको खाली करवा दीजिए उसे पर भी 15 डी का मुकदमा दर्ज करिए रामाश्रय जिसने ना तो आपसे जमीन खरीदी ना जिसने आपको जमीन बेची उसके बाद भी आपने उसे पर 15 डीजे से मुकदमे दर्ज कर दिए तो इस मामले को लेकर लेखपाल ने बताया कि जमीन विवादित हो चुकी है वहां पर किसी भी तरीके का निर्माण नहीं हो सकता उनके पास एक ही रास्ता है कि आप अपनी जमीन से इनको रास्ता दिन उनकी इस भाषा शैली से ऐसा प्रतीत होता है कि कहीं ना कहीं उक्त भी पश्चिगढ़ से लेखपाल की सांठ गांठ हो चुकी है। रागिनी का आरोप है कि उक्त विपक्षी मीरा देवी पत्नी रामासरे की जमीन पर कब्जा करना चाहता है कब्जा करने के लिए उसने शासन प्रशासन को गुमराह कर प्रार्थी के घर का निर्माण कर भी रुकवा दिया।प्रार्थीनी ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है कि उक्त विपक्षी का जहां पर चेक है वहां पर वह स्थापित हो जाए हमारी जमीन छोड़ दें हमें इसे किसी प्रकार की कोई दुश्मनी मोल नहीं लेनी है।प्रार्थनि ने आरोप लगाते हुए बताया कि आए दिन यह हमारे साथ झगड़ा और मारपीट करते हैं जब कोई नहीं होता तो घर में धमकाने और मारने के लिए घर में घुस आते हैं, शासन प्रशासन और थाने को गलत सूचना देकर हमारे ऊपर फर्जी मुकदमा भी लिखवा रहे हैं। प्रार्थीनी का आरोप है कि जहां पर उसका मकान है वहां पर उक्त विपक्षी ओमप्रकाश का उससे कोई लेना-देना नहीं उसके बाद भी वह हमारे जमीन में बेवजह के दखल डाल रहे हैं। इस मामले को लेकर मीरा देवी ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर अपनी सुरक्षा के लिए पुलिस महानिदेशक और संबंधित अधिकारियों को आईजीआरएस के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज कराई है।
*जमीन खरीदी बिरजी की कब्जा लिया रामासरे की जमीन पर,अब जबरन मीरा के घर से निकाल रहे रास्ता लेखपाल ने पीड़ित पर ही दर्ज किया 15 डी का मुकदमा*:- पलिया कलां खीरी......... *विपक्षी ओमप्रकाश को अपने खेत में भेजने की बजाय लेखपाल ने बताया कि बिरजी के लड़के अपनी जमीन से रास्ता देने को तैयार हैं रामासरे भी अपने घर से रास्ता दें तभी हम 15डी का मुकदमा हटवा पाएंगे* *लेखपाल ने बिरजी जिसने खेत बेचा और चकरोड भी बेच दी उस पर कार्यवाही करने के बजाय विपक्षी से सांठ गांठ करके पीड़ित पर ही कर दिया 15 डी का मुकदमा और रुकवा दिया उसके घर का निर्माण कार्य, "टूटी झोपड़ी में रहने को मजबूर पीड़ित"* पलिया कलां खीरी:- मामला पलिया कला खीरी के ग्राम पंचायत बसंतापुर खुर्द गांव बुद्धापूर्वा का बताया जा रहा है ।जहां पर ओमप्रकाश ने बिरजी जमीन खरीदी बाकायदा रजिस्ट्री कराई उसके बाद उसे खेत में फसल होने के कारण वीरजी के देवर को समझा बुझाकर कि आपके खेत में फसल खड़ी है खड़ी फसल का नुकसान ना करें हमको खाली वाला खेत दे दीजिए।आपकी फसल क्यों खराब करेंगे उक्त की मीठी-मीठी बातों मैं आकर बिर्जी के देवर ने एक बार के लिए उसको खेत जोतने दिया।उसके बाद प्रार्थीनी ने कई बार उक्त विपक्षी से कहा की हमारी जमीन खाली कर दो उसने मीठी-मीठी बातें करके कहा अरे जमीन आपकी है जब आप कहेंगे तब खाली हो जाएगी कौन सा हम कब्जा किये ले रहे हैं।ऐसे कहते कहते एक अरसा बीत गया और प्रार्थी उनके मीठे व्यवहार
और अच्छे स्वभाव के चलते ज्यादा दबाव नहीं डाला की एक ही गांव में रहना है लड़ने झगड़ने का क्या फायदा किंतु उक्त विपक्षी अब उसके जमीन पर कब्जा भी कर लिया है और अब उसके घर के बीच से रास्ता चाहता है। जबकि उक्त विपक्षी की जमीन बिरजी के खेत में है जहां पर उसकी रजिस्ट्री है वहां पर उसके रजिस्ट्री में पूर्व में रास्ता भी दर्ज है जबकि ओमप्रकाश ने जिस भूमि को खरीदा था उसे भूमि के सामने की चकरोड को भी भेज दिया जिसकी पूरी जानकारी स्थानीय लेखपाल अजय को भी है किंतु अजय ने बिरजी और ओमप्रकाश पर कार्यवाही करने की बजाय पीड़ित रामासरे पर ही 15 डी का मुकदमा दर्ज कर दिया। वीरता का आरोप है कि जब घर में कोई नहीं होता है तब विपक्षीगढ़ आए दिन घर में घुसकर हमारे साथ गाली गलौज करते हैं जान से मारने की धमकी देते हैं। जब इस मामले में स्थानीय लेखपाल अजय से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वीर जी का पुत्र अपनी जमीन से रास्ता देने को तैयार है यह भी अपनी जमीन में रास्ता दे दें मसाला निपट जाएगा किंतु जब उनसे कहा गया कि जहां पर विपक्षी ओमप्रकाश की जमीन है वहां पर उनको स्थापित करवा दीजिए और जो उनके सामने अखरोट है उसको खाली करवा दीजिए उसे पर भी 15 डी का मुकदमा दर्ज करिए रामाश्रय जिसने ना तो आपसे जमीन खरीदी ना जिसने आपको जमीन बेची उसके बाद भी आपने उसे पर 15 डीजे से मुकदमे दर्ज
कर दिए तो इस मामले को लेकर लेखपाल ने बताया कि जमीन विवादित हो चुकी है वहां पर किसी भी तरीके का निर्माण नहीं हो सकता उनके पास एक ही रास्ता है कि आप अपनी जमीन से इनको रास्ता दिन उनकी इस भाषा शैली से ऐसा प्रतीत होता है कि कहीं ना कहीं उक्त भी पश्चिगढ़ से लेखपाल की सांठ गांठ हो चुकी है। रागिनी का आरोप है कि उक्त विपक्षी मीरा देवी पत्नी रामासरे की जमीन पर कब्जा करना चाहता है कब्जा करने के लिए उसने शासन प्रशासन को गुमराह कर प्रार्थी के घर का निर्माण कर भी रुकवा दिया।प्रार्थीनी ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है कि उक्त विपक्षी का जहां पर चेक है वहां पर वह स्थापित हो जाए हमारी जमीन छोड़ दें हमें इसे किसी प्रकार की कोई दुश्मनी मोल नहीं लेनी है।प्रार्थनि ने आरोप लगाते हुए बताया कि आए दिन यह हमारे साथ झगड़ा और मारपीट करते हैं जब कोई नहीं होता तो घर में धमकाने और मारने के लिए घर में घुस आते हैं, शासन प्रशासन और थाने को गलत सूचना देकर हमारे ऊपर फर्जी मुकदमा भी लिखवा रहे हैं। प्रार्थीनी का आरोप है कि जहां पर उसका मकान है वहां पर उक्त विपक्षी ओमप्रकाश का उससे कोई लेना-देना नहीं उसके बाद भी वह हमारे जमीन में बेवजह के दखल डाल रहे हैं। इस मामले को लेकर मीरा देवी ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर अपनी सुरक्षा के लिए पुलिस महानिदेशक और संबंधित अधिकारियों को आईजीआरएस के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज कराई है।
- Post by Firdosh journalist1
- पलिया कलां खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व में इन दिनों वन्यजीव प्रेमियों के लिए गेंडा परिवार आकर्षण का केंद्र बना हुआ है । जिनकी वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और इसी वजह से पर्यटक बंगाल टाइगर के साथ-साथ खुले में विचरण करते एक सींग वाले गैंडे के दीदार भी कर रहे हैं । बताया जा रहा है बीते 15 अप्रैल को मुंबई से सफारी के लिए आए फोटोग्राफरों के एक दल के सामने उस वक्त रोमांचक पल आया,जब मादा गेंडा 'विजय श्री' अपने शावक के साथ मुख्य मार्ग को पार कर रही थी। इस दौरान दल के साथ मौजूद गाइड राजू और पर्यटकों ने इस दुर्लभ दृश्य को अपने कैमरे में कैद कर लिया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है मादा गेंडा और उसका बच्चा बेहद शांत भाव से जंगल की सड़क पार करते नजर आ रहे हैं। बता दें दुधवा के जंगलों में गेंडा संरक्षण क्षेत्र में गेंडों की साइटिंग काफी बढ़ गई है, जिससे यहां आने वाले पर्यटक उत्साहित हैं। पार्क प्रशासन का कहना है कि दुधवा में गेंडा पुनर्वास परियोजना के सफल होने से अब इनके कुनबे में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अनुकूल वातावरण और सुरक्षा के चलते गेंडा परिवार अक्सर खुले मैदानों और रास्तों के करीब देखे जा रहे हैं, जो पर्यटन के लिहाज से बेहद सुखद संकेत है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मादा गेंडा और शावक की इस तरह की बेखौफ आवाजाही जंगल के बेहतर स्वास्थ्य और वन्यजीवों की सुरक्षा को दर्शाती है। मुंबई से आए फोटोग्राफरों ने इस अनुभव को यादगार बताते हुए कहा कि दुधवा जैसा प्राकृतिक परिवेश गेंडों के लिए स्वर्ग जैसा है।1
- संपूर्णानगर खीरी उत्तर प्रदेश में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब कलम के सिपाहियों को खुलेआम निशाना बनाया जा रहा है। लखीमपुर खीरी जिले के संपूर्णानगर थाना क्षेत्र में वरिष्ठ पत्रकार गोविंद गोयल पर बीती रात हथियारबंद दबंगों ने जानलेवा हमला कर दिया। वर्तमान में पत्रकार जीवन और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। इस घटना ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि पत्रकार गोविंद गोयल ने हमले से कुछ घंटे पहले ही पुलिस को अपनी जान के खतरे की आशंका जताते हुए अवगत कराया था। इसके बावजूद, पुलिस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। देर रात दबंगों ने उन पर घातक हथियारों से हमला किया, जिसके बाद वे लहूलुहान अवस्था में पाए गए। स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवार का आरोप है कि संपूर्णानगर पुलिस इस मामले को रफा-दफा करने के लिए परिवार पर दबाव बना रही है। विशेष रूप से हल्का दरोगा अमरपाल की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। आरोप है कि: तस्करों, भू-माफियाओं और मादक पदार्थों के धंधेबाजों को पुलिस का खुला संरक्षण प्राप्त है। पत्रकारों पर फर्जी मुकदमे लिखवाना और उन पर हमले करवाना पुलिस की कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है। समय रहते कार्रवाई न करना ही पत्रकार की इस हालत का मुख्य कारण है। एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश में 'जीरो टॉलरेंस' नीति की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर खीरी जिले में "कलमकार" खून से नहा रहा है। उत्तर प्रदेश डीजीपी के आदेशों को ठेंगे पर रखकर स्थानीय पुलिस अपनी मनमानी कर रही है। जिले की एसपी ख्याति गर्ग की इस मामले पर चुप्पी ने भी स्थानीय पत्रकारों में भारी रोष पैदा कर दिया है। "क्या कानून के रखवाले ही भारत-नेपाल सीमा के थानों में बैठकर अपराधियों और तस्करों के साथ मिलकर नियम-कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं?" — यह सवाल आज संपूर्णानगर का हर जागरूक नागरिक पूछ रहा है। गोविंद गोयल पर हुए इस कायराना हमले के बाद स्थानीय पत्रकारों में जबरदस्त गुस्सा है। पत्रकारों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई और दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित नहीं किया गया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।1
- हाँ हमारे यहाँ सम्पूर्णा नगर में भारत गैस एजेंसी कोई भी कर्मचारी नहीं है1
- सूरज वही है, चाँद वही है, आसमान भी वैसा ही है… पर इंसानियत कहीं खो गई है। आज दिल बहुत भारी है। पत्रकार आनंद गोस्वामी कल रात (16 अप्रैल) की रात करीब 12:30 बजे ग्राम पंचायत ढाका में एक दिल दहला देने वाली घटना हुई। एक साल की मासूम गाय की बछड़ी—जिसे अभी दुनिया देखनी भी ठीक से नसीब नहीं हुई—कई कुत्तों के बीच फँसी हुई थी। वे उसे नोच रहे थे, काट रहे थे… उसकी दर्द भरी चीखें रात की खामोशी को चीर रही थीं। तभी हमारे पड़ोसी अनुराग राठौर जी ने उसकी आवाज सुनी। अगर वो कुछ मिनट और देर कर देते, तो शायद आज वो बछड़ी जिंदा नहीं होती। उन्होंने उसे कुत्तों से बचाया… और वो सहमी हुई, कांपती हुई हमारे घर के पास आ गई। जब हमने उसे देखा… तो दिल कांप उठा। उसका मासूम चेहरा लहूलुहान था, मुँह बुरी तरह से जख्मी… आंखों में डर और दर्द साफ दिख रहा था। हम उसे अपने घर के बरामदे में ले आए। अब सबसे पहले उसका इलाज कराया जाएगा—क्योंकि इंसान होने का मतलब सिर्फ बोलना नहीं, बल्कि दया करना भी है। लेकिन एक सवाल अंदर से झकझोर रहा है— आखिर कौन है वो निर्दयी, जिसने इस नन्हीं जान को यूँ मरने के लिए छोड़ दिया? क्या एक साल की इस मासूम बछड़ी का कोई कसूर था? “दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान। तुलसी दया न छोड़िए, जब लग घट में प्राण॥” “परहित सरिस धरम नहि भाई, पर पीड़ा सम नहि अधमाई। जीव दया बिनु धर्म न होई, यह कह गए संतों की वाणी॥” आज जरूरत है कि हम सब अपनी इंसानियत को फिर से जगा लें। क्योंकि अगर हम आज भी नहीं जागे… तो कल शायद हम इंसान कहलाने के लायक भी नहीं रहेंगे। 🙏 निवेदन है—इस संदेश को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें, ताकि लोगों की आँखें खुलें… और कोई भी मासूम जान इस तरह तड़पने के लिए मजबूर न हो।2
- Post by Sanjay Kumar1
- लखनऊ: डीसीपी पूर्वी डॉक्टर दीक्षा शर्मा का बयान। विकास नगर में भीषण अग्निकांड में दो बच्चों की हुई मौत देर रात दोनों बच्चों के मिले शव 2 साल के मासूम बच्चों की हुई मौत परिजनों ने पुलिस के सामने की शिनाख्त बच्चों के शवों को भेजा गया पीएम के लिए।1
- Post by Sanjay Kumar1