हरियाणा में कार्यरत नर्सिंग ऑफिसर्स ने स्वास्थ्य विभाग के टेली ईसीजी ट्रेनिंग करने के आदेश को सिरे से नकार दिया है। नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग ने ईसीजी तकनीशियन की भर्ती नहीं की है, जिसके चलते नर्सिंग कैडर पर यह अतिरिक्त कार्यभार डाला जा रहा है, जो बिल्कुल भी न्यायसंगत नहीं है। एसोसिएशन की प्रदेश अध्यक्ष विनीता बांगड़ ने बताया कि उन्हें 24 मई को पता चला कि महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं ने सभी सिविल सर्जन को पत्र के माध्यम से टेली ईसीजी ट्रेनिंग के लिए नर्सिंग स्टाफ की ड्यूटी लगाई थी। एसोसिएशन का स्पष्ट मत है कि यह कार्य नर्सिंग के कार्यक्षेत्र में नहीं आता है, बावजूद इसके सभी जिलों के सिविल सर्जन ने नर्सिंग स्टाफ पर ट्रेनिंग लेने का दबाव बनाया और इनकार करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की धमकी दी। एसोसिएशन ने ज्ञापन के माध्यम से डीजीएचएस के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग ने पूरे हरियाणा में बड़ी संख्या में ईसीजी मशीनें खरीदी हैं, लेकिन उन्हें संचालित करने के लिए कोई ईसीजी तकनीशियन नियुक्त नहीं किए हैं। बांगड़ ने नर्सिंग कैडर पर पहले से ही मौजूद अत्यधिक कार्यभार का विस्तृत उल्लेख किया। इसमें मरीजों की देखभाल के साथ-साथ फार्मेसी, लैब टेक्नीशियन का कार्य (जैसे ब्लड कलेक्शन), कोल्ड चेन, डॉक्टरों के बिना डिलीवरी करवाना, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, टांके लगाना, केन्यूला लगाना, मरीजों का एडमिशन व डिस्चार्ज, रेफर बनाना और कंप्यूटर संबंधी कार्य शामिल हैं। उन्होंने बताया कि शाम और रात के समय, जहां डॉक्टर उपलब्ध नहीं होते, वहां भी नर्सिंग ऑफिसर ही सेवाएं देती हैं। अस्पतालों में वार्डों में मरीजों की अधिक संख्या और नर्सिंग स्टाफ की कमी के कारण मरीजों की सेवा पहले से ही प्रभावित हो रही है, और ऐसे में अन्य पैरामेडिकल का काम थोपे जाने से नर्सिंग कैडर डिप्रेशन और भारी तनाव का शिकार हो रहा है। एसोसिएशन ने मांग की है कि ईसीजी करना तकनीशियन का कार्य है, जिसके लिए दो साल का डिप्लोमा आवश्यक होता है। विभाग को नियमित या आउटसोर्सिंग के माध्यम से ईसीजी तकनीशियनों की भर्ती करनी चाहिए, ताकि कोई गड़बड़ी न हो और मरीजों की जान पर कोई असर न पड़े। उन्होंने यह भी बताया कि हरियाणा में नर्सिंग कैडर के अलावा किसी अन्य पैरामेडिकल कर्मचारी से उसके कार्यक्षेत्र से बाहर का कोई कार्य नहीं करवाया जाता, जबकि नर्सिंग कैडर पर समय-समय पर अन्य पैरामेडिकल के कार्य थोपने के पत्र जारी किए जा रहे हैं, जिससे उनके अपने मूल कार्य पर बहुत अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
हरियाणा में कार्यरत नर्सिंग ऑफिसर्स ने स्वास्थ्य विभाग के टेली ईसीजी ट्रेनिंग करने के आदेश को सिरे से नकार दिया है। नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग ने ईसीजी तकनीशियन की भर्ती नहीं की है, जिसके चलते नर्सिंग कैडर पर यह अतिरिक्त कार्यभार डाला जा रहा है, जो बिल्कुल भी न्यायसंगत नहीं है। एसोसिएशन की प्रदेश अध्यक्ष विनीता बांगड़ ने बताया कि उन्हें 24 मई को पता चला कि महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं ने सभी सिविल सर्जन को पत्र के माध्यम से टेली ईसीजी ट्रेनिंग के लिए नर्सिंग स्टाफ की ड्यूटी लगाई थी। एसोसिएशन का स्पष्ट मत है कि यह कार्य नर्सिंग के कार्यक्षेत्र में नहीं आता है, बावजूद इसके सभी जिलों के सिविल सर्जन ने नर्सिंग स्टाफ पर ट्रेनिंग लेने का दबाव बनाया और इनकार करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की धमकी दी। एसोसिएशन ने ज्ञापन के माध्यम से डीजीएचएस के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग ने पूरे हरियाणा में बड़ी संख्या में ईसीजी मशीनें खरीदी हैं, लेकिन उन्हें संचालित करने के लिए कोई ईसीजी तकनीशियन नियुक्त नहीं किए हैं। बांगड़ ने नर्सिंग कैडर पर पहले से ही मौजूद अत्यधिक कार्यभार का विस्तृत उल्लेख किया। इसमें मरीजों की देखभाल के साथ-साथ फार्मेसी, लैब टेक्नीशियन का कार्य (जैसे ब्लड कलेक्शन), कोल्ड चेन, डॉक्टरों के बिना डिलीवरी करवाना, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, टांके लगाना, केन्यूला लगाना, मरीजों का एडमिशन व डिस्चार्ज, रेफर बनाना और कंप्यूटर संबंधी कार्य शामिल हैं। उन्होंने बताया कि शाम और रात के समय, जहां डॉक्टर उपलब्ध नहीं होते, वहां भी नर्सिंग ऑफिसर ही सेवाएं देती हैं। अस्पतालों में वार्डों में मरीजों की अधिक संख्या और नर्सिंग स्टाफ की कमी के कारण मरीजों की सेवा पहले से ही प्रभावित हो रही है, और ऐसे में अन्य पैरामेडिकल का काम थोपे जाने से नर्सिंग कैडर डिप्रेशन और भारी तनाव का शिकार हो रहा है। एसोसिएशन ने मांग की है कि ईसीजी करना तकनीशियन का कार्य है, जिसके लिए दो साल का डिप्लोमा आवश्यक होता है। विभाग को नियमित या आउटसोर्सिंग के माध्यम से ईसीजी तकनीशियनों की भर्ती करनी चाहिए, ताकि कोई गड़बड़ी न हो और मरीजों की जान पर कोई असर न पड़े। उन्होंने यह भी बताया कि हरियाणा में नर्सिंग कैडर के अलावा किसी अन्य पैरामेडिकल कर्मचारी से उसके कार्यक्षेत्र से बाहर का कोई कार्य नहीं करवाया जाता, जबकि नर्सिंग कैडर पर समय-समय पर अन्य पैरामेडिकल के कार्य थोपने के पत्र जारी किए जा रहे हैं, जिससे उनके अपने मूल कार्य पर बहुत अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
- भिवानी में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी की जिला कमेटी ने शहर में एक प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन पेट्रोल, डीजल और गैस के बढ़ते दामों के साथ-साथ किसानों के लिए खरीफ सीजन में उर्वरकों की पर्याप्त व्यवस्था न होने की मांग को लेकर आयोजित किया गया था।1
- भोले बाबा के भक्तों के मन में यह सवाल उठता है कि जब नंदी जी महाराज घर पर आते हैं, तो यह क्या संदेश लेकर आता है।1
- भिवानी में कामरेड ओमप्रकाश ने महंगाई के मुद्दे को लेकर जिला उपायुक्त (डीसी) को एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन महंगाई के विरोध में दिया गया।1
- शहीद भगतसिंह के प्रपौत्र युग्वेंदर सिंह सिन्धु ने युवाओं से रक्तदान करने की भावुक अपील की है। उन्होंने बताया कि 13 जून 2026 को विश्व रक्तदाता दिवस की पूर्व संध्या पर एक रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें उन्होंने युवाओं से अधिक से अधिक संख्या में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आग्रह किया। युग्वेंदर सिंह सिन्धु ने जोर देकर कहा कि रक्तदान करना शहीदों को एक सच्ची श्रद्धांजलि है, क्योंकि यह किसी के अनमोल जीवन को बचाने में सहायक होता है।1
- निजी अस्पतालों द्वारा की जा रही लूट का पर्दाफाश हुआ है, जहाँ आयुष्मान कार्ड धारकों से भी पैसे वसूले गए। इस घटना ने एक बार फिर निजी स्वास्थ्य सेवाओं में व्याप्त अनियमितताओं को उजागर किया है। इस गंभीर मामले में, कष्ट निवारण समिति की बैठक में मंत्री राजेश नागर ने तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने नोडल अधिकारी विनोद शर्मा को निलंबित कर दिया और संबंधित अस्पताल पर भी कड़ी गाज़ गिरी, जो दिखाता है कि इस धोखाधड़ी पर प्रशासन ने सख्ती बरती है।1
- भिवानी में आयोजित ग्रीवेंस कमेटी की मीटिंग में मंत्री राजेश नागर ने शिकायत सुनी।1
- भिवानी के निवासियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। अब शहर में ही स्पाइन और सर्वाइकल से संबंधित समस्याओं के लिए एक बड़े और विशेषज्ञ डॉक्टर की सेवाएँ उपलब्ध होंगी, जिससे स्थानीय लोगों को इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।1
- एक फौजी की बेटी की पुकार अब बड़े पैमाने पर चर्चा का विषय बन गई है, जिसे समाज के मुँह पर एक सीधा तमाचा बताया जा रहा है। लोगों का कहना है कि फौजी की बेटी ने ऐसा क्या माँग लिया कि उनकी इस बहादुर पहल की अब हर तरफ बात हो रही है।1