नोएडा सेक्टर-122 के सफेद फ्लैटों में सुरक्षा पर बड़ा सवाल, छज्जा टूटकर गिरा दिल्ली से सटे नोएडा शहर के सेक्टर-122 स्थित सफेद फ्लैटों में दिन-प्रतिदिन ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जो लोगों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। ताजा मामला सामने आया है, जहां एक मकान का छज्जा पूरी तरह जर्जर होकर टूटकर नीचे गिर गया। गनीमत रही कि उस समय कोई व्यक्ति इसकी चपेट में नहीं आया, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। सवाल यह है कि अगर किसी व्यक्ति की जान चली जाती है या कोई गंभीर रूप से घायल हो जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या इन मकानों के निर्माण में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता से समझौता किया गया है? क्या सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री का उचित मात्रा में इस्तेमाल नहीं किया गया? आखिर कुछ ही समय में ये मकान और इनके छज्जे जर्जर होकर क्यों टूट रहे हैं? इन सफेद फ्लैटों में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले गरीब परिवारों को आवास उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन अगर मकान की मजबूती और सुरक्षा ही सुनिश्चित नहीं की गई, तो इन परिवारों की जान की जिम्मेदारी कौन लेगा? बारिश के मौसम में जगह-जगह मकानों के कमजोर होने और निर्माण संबंधी खामियां सामने आने से लोगों में डर का माहौल है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित विभाग और सरकार इस मामले का संज्ञान लेकर निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराएगी? क्या जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाएगा? फिलहाल जरूरत है कि प्रशासन इन फ्लैटों का तकनीकी निरीक्षण और निर्माण गुणवत्ता की जांच कराए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को होने से पहले रोका जा सके। ऐसी ही जमीनी खबरों के लिए हमारे साथ बने रहिए। आप देख रहे हैं आवाज़-ए-हिंदुस्तान। कैमरामैन सुनील चौहान के साथ, मैं रवि पार्चा।
नोएडा सेक्टर-122 के सफेद फ्लैटों में सुरक्षा पर बड़ा सवाल, छज्जा टूटकर गिरा दिल्ली से सटे नोएडा शहर के सेक्टर-122 स्थित सफेद फ्लैटों में दिन-प्रतिदिन ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जो लोगों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। ताजा मामला सामने आया है, जहां एक मकान का छज्जा पूरी तरह जर्जर होकर टूटकर नीचे गिर गया। गनीमत रही कि उस समय कोई व्यक्ति इसकी चपेट में नहीं आया, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। सवाल यह है कि अगर किसी व्यक्ति की जान चली जाती है या कोई गंभीर रूप से घायल हो जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या इन मकानों के निर्माण में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता से समझौता किया गया है? क्या सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री का उचित मात्रा में इस्तेमाल नहीं किया गया? आखिर कुछ ही समय में ये मकान और इनके छज्जे जर्जर होकर क्यों टूट रहे हैं? इन सफेद फ्लैटों में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले गरीब परिवारों को आवास उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन अगर मकान की मजबूती और सुरक्षा ही सुनिश्चित नहीं की गई, तो इन परिवारों की जान की जिम्मेदारी कौन लेगा? बारिश के मौसम में जगह-जगह मकानों के कमजोर होने और निर्माण संबंधी खामियां सामने आने से लोगों में डर का माहौल है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित विभाग और सरकार इस मामले का संज्ञान लेकर निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराएगी? क्या जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाएगा? फिलहाल जरूरत है कि प्रशासन इन फ्लैटों का तकनीकी निरीक्षण और निर्माण गुणवत्ता की जांच कराए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को होने से पहले रोका जा सके। ऐसी ही जमीनी खबरों के लिए हमारे साथ बने रहिए। आप देख रहे हैं आवाज़-ए-हिंदुस्तान। कैमरामैन सुनील चौहान के साथ, मैं रवि पार्चा।
- बिना टिकट चढ़ रहे कांवड़ियों को स्टेशन पर उतारा,जुर्माना और पूरा किराया भरने को कहा! viral video ---- ट्रेन के स्लीपर कोच में बिना टिकट चढ़ रहे कांवड़ियों को स्टेशन पर ऑन-ड्यूटी TTE ने सख्ती से रोक दिया और साफ़ कहा कि बिना टिकट स्लीपर में यात्रा के लिए नियमानुसार ₹500 जुर्माना और पूरा किराया देना होगा। जब कांवड़ियों ने फ्री यात्रा का दावा किया, तो TTE ने ऑन-कैमरा सरकारी आदेश दिखाने को कहा। रेलवे नियमों के अनुसार कांवड़ यात्रा के लिए ट्रेनों में फ्री सफर का कोई सरकारी आदेश नहीं है। रेलवे एक्ट के तहत बिना टिकट यात्रा पर ₹500 पेनल्टी का नियम लागू है।1
- स्वतंत्रता दिवस पर यमुना पुत्रबबाबा हरिदास जी का पैगाम देश पहले धर्म बाद में1
- शाहदरा के ASB सेल ने 'ऑपरेशन स्ट्रीट शील्ड' के तहत दो ऐसे लोगों को गिरफ़्तार किया है जो झपटमारी और गाड़ी चोरी दोनों करते थे इससे झपटमारी/चोरी और मोटर वाहन चोरी के चार मामलों का खुलासा हुआ है। चोरी की दो दो-पहिया गाड़ियां और झपटमारी/चोरी के दो मोबाइल फ़ोन बरामद किए गए। शाहदरा के एंटी-स्नैचिंग एंड बर्गरी सेल ने 'ऑपरेशन स्ट्रीट शील्ड' के तहत सड़क पर होने वाले अपराधों को रोकने में बड़ी कामयाबी हासिल की है और झपटमारी व गाड़ी चोरी करने वाले दो लोगों को गिरफ़्तार किया है। उनकी गिरफ़्तारी से चार आपराधिक मामलों का पता चला है, जिनमें मोबाइल फ़ोन झपटमारी/चोरी के दो मामले और मोटर वाहन चोरी के दो मामले शामिल हैं। साथ ही, चोरी की दो दो-पहिया गाड़ियां और झपटमारी/चोरी के दो मोबाइल फ़ोन भी बरामद किए गए हैं।2
- रेखा गुप्ता सरकार के नित नए घोटाले सामने आ रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि भाजपा नेताओं को ‘लूट की छूट’ मिली हुई है। ये रेखा गुप्ता सरकार के नित नए घोटाले सामने आ रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि भाजपा नेताओं को ‘लूट की छूट’ मिली हुई है।1
- ग्राम मसूरी जिला गाजियाबाद के वाल्मीकि समाज के लोगों ने हरिद्वार से जल लेकर आ रहे भोलो का किया स्वागत आज दिनांक 09/08/2026 ग्राम मसूरी जिला गाजियाबाद के वाल्मीकि समाज के लोगों ने हरिद्वार से जल लेकर आ रहे भोलो का किया स्वागत किया और सभी ने सेवा भाव से फल पानी हलवा आदि वितरण किया साथ में गए बच्चों ने कांवड़ियों के साथ मिलकर भोले शंकर के गानों पर मस्त डांस किया इस सेवा कार्य में राजेंद्र वाल्मीकि विकास वाल्मीकि हर्ष वाल्मीकि किरसू वाल्मीकि अनुज वाल्मीकि ऋतिक वाल्मीकि अक्षय वाल्मीकि बंटी वाल्मीकि महेश वाल्मीकि करण वाल्मीकि अरुण वाल्मीकि विक्की वाल्मीकि एवं अन्य आदि लोग उपस्थित रहे4
- 61 लीटर जल लेकर हरिद्वार से मोदीनगर पहुंची 15 वर्षीय खुशी, किसान यूनियन ने भेंट की होंडा एक्टिवा। मोदीनगर में कांवड़ यात्रा के दौरान 15 वर्षीय खुशी चौधरी ने अपनी आस्था और साहस से लोगों का दिल जीत लिया। ग्राम अबूपुर निवासी किसान सुनील चौधरी की बेटी खुशी हरिद्वार से 61 लीटर जल लेकर मोदीनगर पहुंचीं। उनकी इस कठिन यात्रा और दृढ़ संकल्प को देखते हुए भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) गाजियाबाद इकाई की ओर से भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष विनीत त्यागी सौंदा, संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी मांगेराम त्यागी और एसडीएम की मौजूदगी में खुशी चौधरी को होंडा एक्टिवा स्कूटी भेंट कर सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि इतनी कम उम्र में 61 लीटर जल लेकर हरिद्वार से मोदीनगर तक पहुंचना साहस, अनुशासन और श्रद्धा का प्रतीक है। उन्होंने खुशी को बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत बताया। कार्यक्रम में किसान यूनियन पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया।2
- पुलिस धारा लगी बढाने, सपना पंकज गाने लगे, मांफी के गाने, माफी या सियासत का नयाऐ पैंतरा? गाजियाबाद :- मोदीनगर में महिलाओं के साथ बर्बरता करने वाली सपना पंकज अग्रवाल का एक नया वीडियो सामने आया है। लेकिन ये वीडियो माफीनामा है या अहसानों का नया पुलिंदा? घटना के पूरे 6 दिन बाद, जब खुद को चारों तरफ से घिरता देखा, तो 8 अगस्त की रात तकरीबन 11 बजे फेसबुक पर एक वीडियो डाला गया है । दावा किया गया कि ये माफी है। लेकिन इस वीडियो की टाइमिंग और लहजा कई बड़े सवाल खड़े करता है। जिसमें माफी कम, अहसान ज्यादा है। वीडियो को ध्यान से सुनिए। इसमें गुनाह का पछतावा कम और कश्यप समाज पर किए गए अहसान ज्यादा गिनाए गए हैं। मैडम का तर्क देखिए वो कहती हैं कि एक बार कश्यप समाज की बेटी के लिए वो थाने खड़ी हुई थीं। तो क्या किसी समाज की मदद करने का मतलब ये है कि आपको उसी समाज की महिलाओं को पीटने और बेइज्जती करने का लाइसेंस मिल जाता है? असली वजह कान का पर्दा फटना और जेल का डर है। आखिर 6 दिन तक जो जमीर सोया हुआ था, वो अचानक रात के 11 बजे ही क्यों जागा? जवाब सीधा है, डर, जब पीड़ित महिला दीपा के कान के पर्दे फटने की खबर आई, जब केस में गंभीर धाराएं बढ़ने की नौबत आई, और जब जेल जाने की सलाखें सामने दिखने लगीं, तो रसूख दबंगई का नशा फूर हो गया। जो अब तक सोच रहे थे कि छोटी-मोटी धाराओं में बच निकलेंगे, वो अब माफी का ड्रामा रच रहे हैं। दोमुंहा रवैया रात में माफी, सुबह फिर वही राजनीति, इस ड्रामे की स्क्रिप्ट यहीं खत्म नहीं होती। रात में माफी का ढोंग किया जाता है और सुबह होते ही अपने संगठनों के लोगों से, फेसबुक पर वीडियो डलवाकर पीड़ित महिलाओं को ही अपराधी साबित करने की कोशिश की जाती है। राजनीति का ये दोहरा चेहरा देखिए। दीपा को तो निशाना बनाया ही जा रहा है, लेकिन सवाल ये है कि उस पंडित परिवार की महिला का क्या कसूर था, जिसे बेरहमी से पीटा बेज्जत किया गया, पंडित को गौ मांस खाने वाला कसाई जैसे शब्दों से गरीब महिला की इज्जत को तार तार किया गया? चेहरे के हाव-भाव बता रहे हैं कि दिल में जरा सा भी पछतावा नहीं है, सिर्फ कानून से बचने की छटपटाहट है। लेकिन मोदीनगर की जनता और पीड़ित परिवार अब इस ड्रामे में आने वाले नहीं हैं। याद रखिए..माफी गलती की होती है, गुनाह की नहीं, और कानून को अब अपना काम करना ही होगा, क्योंकि गुनाहगार की सिर्फ एक ही जगह होती है, सलाखों के पीछे! मुंह में राम, बगल में छुरी, रखने वालो पर कानूनी कार्रवाई बहुत जरूरी।1