बलरामपुर जिले के रामानुजगंज स्थित सहकारी बैंक के सामने किसानों का अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन आज तीसरे दिन भी जारी रहा। अपनी गाढ़ी कमाई और हक के पैसे के लिए किसान कड़कड़ाती धूप और तमाम दिक्कतों के बीच बैंक के सामने डटे हुए हैं। किसानों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन ने जल्द ही उनकी सुध नहीं ली, तो वे कल शनिवार से सामूहिक भूख हड़ताल पर बैठने के लिए बाध्य होंगे। धरने पर बैठे किसानों ने बताया कि उन्होंने साल 2025-26 के सीजन में अपनी जमीन का धान सहकारी समिति में बेचा था। हालांकि, जब उन्होंने अपने खातों की स्थिति जाँची, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई, क्योंकि उनके खातों पर फर्जी तरीके से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) लोन बकाया दिखाया जा रहा है, जबकि उन्होंने ऐसा कोई ऋण कभी लिया ही नहीं। इस फर्जीवाड़े के कारण किसानों की धान खरीदी का बचा हुआ भुगतान अटक गया है और बैंक उन्हें पैसे देने से इनकार कर रहा है। किसानों का कहना है कि एक तरफ उनके नाम पर फर्जी कर्ज चढ़ा दिया गया है और दूसरी तरफ उनकी खून-पसीने की कमाई का पैसा उन्हें नहीं मिल रहा है, जिससे वे पाई-पाई के लिए मोहताज हो रहे हैं। यह पूरा मामला बलरामपुर जिले के प्रभावशाली नेता और क्षेत्रीय विधायक रामविचार नेताम के गृह ग्राम क्षेत्र का है, फिर भी पिछले तीन दिनों से किसान खुले आसमान के नीचे बैंक के सामने बैठे हैं। हैरत की बात यह है कि जिला प्रशासन या शासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी अब तक किसानों से बात करने या उनका ज्ञापन लेने नहीं पहुंचा है। प्रशासन के इस उदासीन रवैये से किसानों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
बलरामपुर जिले के रामानुजगंज स्थित सहकारी बैंक के सामने किसानों का अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन आज तीसरे दिन भी जारी रहा। अपनी गाढ़ी कमाई और हक के पैसे के लिए किसान कड़कड़ाती धूप और तमाम दिक्कतों के बीच बैंक के सामने डटे हुए हैं। किसानों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन ने जल्द ही उनकी सुध नहीं ली, तो वे कल शनिवार से सामूहिक भूख हड़ताल पर बैठने के लिए बाध्य होंगे। धरने पर बैठे किसानों ने बताया कि उन्होंने साल 2025-26 के सीजन में अपनी जमीन का धान सहकारी समिति में बेचा था। हालांकि, जब उन्होंने अपने खातों की स्थिति जाँची, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई, क्योंकि उनके खातों पर फर्जी तरीके से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) लोन बकाया दिखाया जा रहा है, जबकि उन्होंने ऐसा कोई ऋण कभी लिया ही नहीं। इस फर्जीवाड़े के कारण किसानों की धान खरीदी का बचा हुआ भुगतान अटक गया है और बैंक उन्हें पैसे देने से इनकार कर रहा है। किसानों का कहना है कि एक तरफ उनके नाम पर फर्जी कर्ज चढ़ा दिया गया है और दूसरी तरफ उनकी खून-पसीने की कमाई का पैसा उन्हें नहीं मिल रहा है, जिससे वे पाई-पाई के लिए मोहताज हो रहे हैं। यह पूरा मामला बलरामपुर जिले के प्रभावशाली नेता और क्षेत्रीय विधायक रामविचार नेताम के गृह ग्राम क्षेत्र का है, फिर भी पिछले तीन दिनों से किसान खुले आसमान के नीचे बैंक के सामने बैठे हैं। हैरत की बात यह है कि जिला प्रशासन या शासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी अब तक किसानों से बात करने या उनका ज्ञापन लेने नहीं पहुंचा है। प्रशासन के इस उदासीन रवैये से किसानों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
- छत्तीसगढ़ राज्य योग आयोग के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने अंबिकापुर पहुँचकर योग के संबंध में महत्वपूर्ण घोषणाएँ की हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि 21 जून को अब केवल 'अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस' के रूप में नहीं, बल्कि 'योग संकल्प दिवस' के रूप में मनाया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य आम जनता को नियमित रूप से योग करने के लिए प्रेरित करना है। इसी के तहत, उन्होंने यह भी ऐलान किया है कि स्कूलों में योग को अनिवार्य किया जाएगा।1
- केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी झारखंड के पलामू और गढ़वा जिलों को बड़ी सौगात देने जा रहे हैं। 3 जुलाई को शंखा से खजूरी के बीच 22.73 किलोमीटर लंबी सड़क का उद्घाटन किया जाएगा, जिसकी लागत 1129.48 करोड़ रुपये है। इसके अलावा, पलामू की जनता के लिए सिंगरा से घेड़ाबार तक 100 करोड़ रुपये की लागत से एक फ्लाईओवर का भी निर्माण किया जा रहा है। इन प्रमुख परियोजनाओं के अतिरिक्त, 16 अप्रैल 2026 को पलामू जिले में 23.6 किलोमीटर सड़क निर्माण को भी मंजूरी मिली है। बरहमोरिया मोड़ से दुर्गा माइंस रोड तक बनने वाली इस सड़क की लागत 103.60 करोड़ रुपये होगी, जिससे इस मार्ग पर यात्रा और भी आसान हो जाएगी। इस मंजूरी के लिए सांसद बी.डी. राम ने नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया है।4
- गढ़वा की राजनीतिक स्थिति पर तीखी आलोचना करते हुए एक टिप्पणी सामने आई है, जिसमें इसे 'गंदा राजनीतिक' करार दिया गया है। इस टिप्पणी में 'दोगोला कार्यक्रम' पर सवाल उठाते हुए कटाक्ष किया गया है कि क्या गढ़वा की राजनीति में अब बस 'एक नचनिया' की ही जरूरत रह गई है। यह सवाल स्थानीय राजनीति की गुणवत्ता और प्राथमिकताओं पर गहरा व्यंग्य करता है।1
- सरगुजा संभाग का शांतिपूर्ण दरिमा इलाका अब भ्रष्ट सिस्टम और शराब माफियाओं के खिलाफ एक सुलगता हुआ रणक्षेत्र बन गया है। स्थानीय ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आंदोलन दरिमा में संचालित सरकारी शराब दुकान को बंद कराने या अन्यत्र शिफ्ट कराने की मांग को लेकर अपने चरम पर है। अडिग छत्तीसगढ़िया न्यूज (ACCG NEWS) इस पूरे मामले की ग्राउंड रिपोर्ट पेश करते हुए प्रशासन के 'दोगलेपन' का पर्दाफाश कर रहा है, जिसके चलते कमीशन के लिए पूरे इलाके को नरक में धकेला जा रहा है। यह शराब दुकान अब सिर्फ एक दुकान नहीं, बल्कि अपराध, घरेलू हिंसा और परिवारों की बर्बादी का 'कमांड सेंटर' बन चुकी है। दिन भर की हाड़-तोड़ मेहनत के बाद मज़दूर जो पैसा कमाते हैं, वह शाम को इस ठेके की भेंट चढ़ जाता है, जिससे घरों में चूल्हे बुझ रहे हैं और शराब पीकर महिलाओं के साथ मारपीट की घटनाएं आम हो गई हैं। इसके साथ ही, स्कूल और कॉलेज जाने वाले युवाओं को नशे की इस भट्ठी में झोंका जा रहा है, और शाम ढलते ही शराबियों का जमावड़ा लग जाने से आम लोगों, खासकर लड़कियों का वहां से गुजरना दुश्वार हो गया है। नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाकर, स्कूल और रिहायशी इलाकों के तय मानकों को ताक पर रखकर यह दुकान प्रशासन के 'संरक्षण' में धड़ल्ले से चलाई जा रही है। ग्रामीण पिछले कई महीनों से लगातार ज्ञापन दे रहे हैं, कलेक्टर ऑफिस के चक्कर काट रहे हैं और स्थानीय नेताओं के सामने गुहार लगा चुके हैं, लेकिन प्रशासन और आबकारी विभाग कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है। साफ तौर पर दिख रहा है कि इस शराब दुकान से होने वाली काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा सीधे ऊपर बैठे सफेदपोश नेताओं और भ्रष्ट अधिकारियों की जेबों में जा रहा है, क्योंकि उनकी प्राथमिकता 'कमीशन' चालू रखना है, जनता की समस्या नहीं। चुनाव के वक्त 'जनता के सेवक' बनने वाले स्थानीय नेता आज इस मुद्दे पर अपने बिलों में छिप गए हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि शराब माफियाओं के खिलाफ बोलने से उनकी राजनीतिक फंडिंग बंद हो सकती है। ACCG NEWS इस आंदोलन का पूरा समर्थन करता है और प्रशासन को सीधा अल्टीमेटम देता है कि दरिमा कोई लावारिस जगह नहीं है, और यहां की जनता को कुचलने की भूल सिस्टम न करे। प्रशासन के पास समय कम है: या तो इस शराब दुकान पर तुरंत ताला लगाया जाए या इसे किसी ऐसी वीरान जगह पर शिफ्ट किया जाए जहां आम जनता का जीवन प्रभावित न हो। यदि प्रशासन ने मांग अनसुनी की, तो ACCG NEWS पूरी प्रशासनिक मशीनरी को नंगा कर देगा और आबकारी विभाग के टेंडर से लेकर नेताओं के कमीशन तक की सारी फाइलें पब्लिक डोमेन में ला देगा। यह आंदोलन सिर्फ दरिमा तक सीमित नहीं रहेगा; ज़रूरत पड़ने पर संभाग के मुख्यालय अंबिकापुर को जाम कर दिया जाएगा, और इसकी पूरी ज़िम्मेदारी सरगुजा जिला प्रशासन और स्थानीय 'नमक हराम नेताओं' की होगी। अडिग छत्तीसगढ़िया न्यूज का कहना है कि जनता के मुद्दों को दबने नहीं दिया जाएगा। रिपोर्ट शुभम पाठक, चीफ एडिटर - अडिग छत्तीसगढ़िया न्यूज द्वारा दी गई है, और लोगों से अंबिकापुर एवं सरगुजा संभाग की सभी राजनीतिक हलचल, प्रदर्शन और कड़क खबरें सबसे पहले देखने तथा 'खबरें शेयर करके कमाई करने' के लिए शुरू ऐप (Shuru App) डाउनलोड करने की अपील की गई है।4
- बोल बम सेवा समिति ने अपने सम्मानित सदस्यों को उनके जन्मदिन के अवसर पर विशेष रूप से सम्मानित किया है। समिति की ओर से सभी सदस्यों को अंग वस्त्र और प्रशस्ति पत्र भेंट कर उनके भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएं और मंगल कामनाएँ दी गईं। इस अवसर पर बोल बम सेवा समिति परिवार ने अपनी एकजुटता और सम्मान की भावना का प्रदर्शन किया, जिसकी कुछ झलकियां भी प्रस्तुत की गई हैं।1
- पलामू जिले के पंडवा प्रखंड में, प्रखंड नाजिर राजेश कुमार पर आरोप है कि उन्हें किसी का कोई भय नहीं है। जानकारी के अनुसार, राजेश कुमार कार्यालय में सुबह 11 बजे आते हैं और दोपहर 3 बजे ही चले जाते हैं।1
- खान सर (फैज़ल खान) के संस्थान और उनके गार्ड्स द्वारा हवा में कथित तौर पर गोली चलाने के वायरल वीडियो तथा पटना में कोचिंग विवाद के कारण यह पूरा मामला गरमाया हुआ है। इस विवाद की शुरुआत जून 2026 की शुरुआत में हुई, जब पटना के मुसल्लहपुर हाट इलाके में स्थित खान सर के Khan Global Studies कोचिंग संस्थान के बाहर कुछ लोगों ने कथित तौर पर पथराव और तोड़फोड़ की थी। इसके जवाब में संस्थान के गार्ड्स द्वारा हवा में गोली चलाने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे। पुलिस पूछताछ के दौरान गिरफ्तार गार्ड्स ने दावा किया कि उन्होंने खान सर के निर्देश पर गोली चलाई थी, जिसके बाद खान सर पर हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) और आर्म्स एक्ट के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी। हालांकि, खान सर ने इन आरोपों का खंडन करते हुए इसे एक बड़ी साजिश बताया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि संस्थान पर हुए हमले के दौरान गार्ड्स ने केवल आत्मरक्षा में कदम उठाया था। इस मामले में पटना सिविल कोर्ट ने खान सर को बड़ी अंतरिम राहत प्रदान की है। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया है कि मामले की अगली सुनवाई तक उन पर कोई सख्त या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस मामले की अगली और अंतिम सुनवाई 25 जून को निर्धारित की गई है।1
- गढ़वा जिले के रंका अंचल अधिकारी पर ₹6 लाख रुपये लेने का गंभीर आरोप लगाया गया है, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में इस मामले को लेकर जोरदार चर्चा छिड़ गई है। इन आरोपों के सामने आने के बाद लोगों के बीच तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करेगा। हालांकि, अभी तक इन आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, और सच्चाई केवल एक निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ पाएगी। मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों से पारदर्शी और गहन जांच की मांग की जा रही है, जिस पर अब जनता की निगाहें टिकी हुई हैं। लोग जांच रिपोर्ट और उसके बाद प्रशासन द्वारा की जाने वाली अगली कार्रवाई का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।1
- सोनभद्र के दुद्धी में शनिवार दोपहर करीब एक बजे 'दुद्धी को जिला बनाओ विकास कराओ चुनावी वादा पूरा करो' के बैनर तले, दुद्धी को जिला बनाने की मांग को लेकर एक बड़ा प्रदर्शन किया गया। कचहरी गेट के मुख्य द्वार पर दुद्धी को जिला बनाओ संघर्ष समिति के पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं ने जोरदार तरीके से प्रदर्शन करते हुए जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर चुनावी वादे पूरे न करने का आरोप लगाया। मोर्चा के पदाधिकारियों ने बताया कि विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश और केंद्र के मंत्रियों व नेताओं ने दुद्धी को जिला बनाने का वादा किया था। उन्होंने मांग की कि इस वादे को तुरंत पूरा किया जाए और दुद्धी को शीघ्र जिला घोषित किया जाए, ताकि क्षेत्र का समुचित विकास हो सके। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पूरा क्षेत्र विकास की प्रतीक्षा कर रहा है, लेकिन विकास की राह बहुत दूर तक दिखाई नहीं दे रही है, और लोग बेरोजगार घूम रहे हैं। पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि दुद्धी पिछले कई दशकों से जिला बनाने की मांग कर रहा है और सभी मानदंडों को पूरा करता है, इसके बावजूद इस भारी राजस्व देने वाले क्षेत्र को जिला का दर्जा नहीं मिला है। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस अवसर पर पूर्व सिविल बार अध्यक्ष प्रभु सिंह कुशवाहा, जितेंद्र श्रीवास्तव, विष्णुकांत तिवारी, वरुणोदय जौहरी, जय प्रकाश अग्रहरि, श्रीचंद, अमरावती देवी, वीरेंद्र कुमार, आदर्श कुमार, राकेश अग्रहरि, राजेंद्र चंद्रवंशी, जीवनराम चंद्रवंशी और अभिनव जायसवाल सहित कई संघर्ष समिति के लोग और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।3