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अपना घर आश्रम ने एक बार फिर बिछड़े परिवार को मिलाने का पुण्य कार्य किया है, जहाँ डेढ़ माह से लापता 75 वर्षीय आनंदी देवी को उनके बेटे प्रताप जाटव से मिलाया गया। अपनी माँ को कोटा में देखते ही प्रताप उनसे लिपट कर फूट-फूट कर रोने लगे, जिससे वहाँ मौजूद सभी लोग भावुक हो गए। दरअसल, आनंदी देवी को वृद्धावस्था की बीमारी के चलते इलाज के लिए ग्वालियर राजकीय चिकित्सालय ले जाया गया था। वहीं भीड़ के दौरान वे अचानक अपने परिवार से बिछड़ गईं, जिसके बाद से उनके बेटे प्रताप जाटव और उनका पूरा परिवार पिछले डेढ़ माह से दर-दर भटक कर उन्हें तलाश रहा था। इसी बीच, गत माह कोटा में समाजसेवी प्रतीक्षा पारीक ने जे.के. लोन हॉस्पिटल के बाहर एक वृद्धा को लावारिस अवस्था में भटकते देखा। उन्होंने तुरंत अपना घर आश्रम की टीम को सूचित किया, जिसके बाद आश्रम की टीम मौके पर पहुँची और वृद्धा को आश्रय प्रदान किया। आश्रम में शुरुआत में वृद्धा अपना नाम आनंदी देवी तो बता पाईं, लेकिन मानसिक अस्वस्थता के कारण वे अपने पते के बारे में कुछ भी बताने में असमर्थ थीं। आश्रम में मिली नियमित देखभाल और काउंसलिंग के बाद आनंदी देवी ने बताया कि वह मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले के बरैनी गाँव की रहने वाली हैं, जो डबरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। अपना घर आश्रम की टीम ने तुरंत डबरा थाने में यह सूचना भिजवाई, जिसके माध्यम से बेटे प्रताप जाटव से बात हुई। प्रताप ने फोटो देखकर तुरंत अपनी माँ को पहचान लिया। माँ के मिलने की खबर सुनते ही प्रताप अपने भतीजे रामदास को लेकर तुरंत कोटा के लिए रवाना हो गए। अपना घर आश्रम पहुँचते ही, माँ को देखते ही प्रताप दौड़कर उनसे लिपट गए और अपनी भावनाओं को रोक न पाए। प्रताप ने बताया कि माँ के बिछड़ने के बाद पिछले डेढ़ महीने से पूरा परिवार सो नहीं पाया था और उन्होंने थाने, अस्पताल, रिश्तेदारों, हर जगह तलाश की थी, जिससे उम्मीद लगभग छोड़ ही दी थी। उन्होंने कहा कि अपना घर आश्रम का फोन आया तो उन्हें लगा जैसे भगवान मिल गए हों। आश्रम टीम ने यह भी बताया कि जब आनंदी देवी मिली थीं, तो उनकी हालत बहुत कमजोर थी और अगर समय पर उन्हें इलाज व देखभाल न मिलती तो कोई अनहोनी भी हो सकती थी। यह घटना एक बार फिर मानवता की जीत को साबित करती है और अपना घर आश्रम ने दिखाया है कि सेवा और संवेदना से बड़े से बड़ा संकट भी टाला जा सकता है। डबरा पुलिस और समाजसेवी प्रतीक्षा पारीक के सहयोग से ही यह हृदयस्पर्शी माँ-बेटे का मिलन संभव हो पाया।

23 hrs ago
user_Jitendra Kumar
Jitendra Kumar
Local News Reporter लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
23 hrs ago

अपना घर आश्रम ने एक बार फिर बिछड़े परिवार को मिलाने का पुण्य कार्य किया है, जहाँ डेढ़ माह से लापता 75 वर्षीय आनंदी देवी को उनके बेटे प्रताप जाटव से मिलाया गया। अपनी माँ को कोटा में देखते ही प्रताप उनसे लिपट कर फूट-फूट कर रोने लगे, जिससे वहाँ मौजूद सभी लोग भावुक हो गए। दरअसल, आनंदी देवी को वृद्धावस्था की बीमारी के चलते इलाज के लिए ग्वालियर राजकीय चिकित्सालय ले जाया गया था। वहीं भीड़ के दौरान वे अचानक अपने परिवार से बिछड़ गईं, जिसके बाद से उनके बेटे प्रताप जाटव और उनका पूरा परिवार पिछले डेढ़ माह से दर-दर भटक कर उन्हें तलाश रहा था। इसी बीच, गत माह कोटा में समाजसेवी प्रतीक्षा पारीक ने जे.के. लोन हॉस्पिटल के बाहर एक वृद्धा को लावारिस अवस्था में भटकते देखा। उन्होंने तुरंत अपना घर आश्रम की टीम को सूचित किया, जिसके बाद आश्रम की टीम मौके पर पहुँची और वृद्धा को आश्रय प्रदान किया। आश्रम में शुरुआत में वृद्धा अपना नाम आनंदी देवी तो बता पाईं, लेकिन मानसिक अस्वस्थता के कारण वे अपने पते के बारे में कुछ भी बताने में असमर्थ थीं। आश्रम में मिली नियमित देखभाल और काउंसलिंग के बाद आनंदी देवी ने बताया कि वह मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले के बरैनी गाँव की रहने वाली हैं, जो डबरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। अपना घर आश्रम की टीम ने तुरंत डबरा थाने में यह सूचना भिजवाई, जिसके माध्यम से बेटे प्रताप जाटव से बात हुई। प्रताप ने फोटो देखकर तुरंत अपनी माँ को पहचान लिया। माँ के मिलने की खबर सुनते ही प्रताप अपने भतीजे रामदास को लेकर तुरंत कोटा के लिए रवाना हो गए। अपना घर आश्रम पहुँचते ही, माँ को देखते ही प्रताप दौड़कर उनसे लिपट गए और अपनी भावनाओं को रोक न पाए। प्रताप ने बताया कि माँ के बिछड़ने के बाद पिछले डेढ़ महीने से पूरा परिवार सो नहीं पाया था और उन्होंने थाने, अस्पताल, रिश्तेदारों, हर जगह तलाश की थी, जिससे उम्मीद लगभग छोड़ ही दी थी। उन्होंने कहा कि अपना घर आश्रम का फोन आया तो उन्हें लगा जैसे भगवान मिल गए हों। आश्रम टीम ने यह भी बताया कि जब आनंदी देवी मिली थीं, तो उनकी हालत बहुत कमजोर थी और अगर समय पर उन्हें इलाज व देखभाल न मिलती तो कोई अनहोनी भी हो सकती थी। यह घटना एक बार फिर मानवता की जीत को साबित करती है और अपना घर आश्रम ने दिखाया है कि सेवा और संवेदना से बड़े से बड़ा संकट भी टाला जा सकता है। डबरा पुलिस और समाजसेवी प्रतीक्षा पारीक के सहयोग से ही यह हृदयस्पर्शी माँ-बेटे का मिलन संभव हो पाया।

More news from राजस्थान and nearby areas
  • केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून के सक्रिय होने के बाद अब राजस्थान में इसके आगमन को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। भीषण गर्मी और लू से जूझ रहे प्रदेशवासियों को मानसून से राहत मिलने की उम्मीद है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, यदि समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियां अनुकूल बनी रहीं तो राजस्थान में मानसून 25 से 30 जून के बीच प्रवेश कर सकता है। मौसम विभाग के मानसून प्रोग्रेस चार्ट के मुताबिक, इस वर्ष मानसून सामान्य गति से आगे बढ़ रहा है। शुरुआती चरण में राज्य के कई हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं, जिनमें तेज हवाएं, बादलों की गरज, धूलभरी आंधियां और हल्की से मध्यम बारिश शामिल हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि राजस्थान में मानसून की पहली दस्तक दक्षिण-पूर्वी जिलों में हो सकती है, जिसके बाद यह धीरे-धीरे मध्य राजस्थान और फिर पश्चिमी क्षेत्रों की ओर बढ़ेगा। मानसून के सक्रिय होने से तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी से काफी राहत मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार भी दक्षिण-पश्चिम मानसून बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों शाखाओं के माध्यम से आगे बढ़ेगा। फिलहाल, मौसम विभाग इसकी प्रगति पर लगातार नजर बनाए हुए है। यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो जून के अंतिम सप्ताह में राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियां शुरू हो सकती हैं। प्रदेश में किसान, आमजन और जल संसाधनों से जुड़े विभाग मानसून की प्रतीक्षा कर रहे हैं, क्योंकि अच्छी बारिश से खेती, पेयजल व्यवस्था और भूजल स्तर को लाभ मिलने की उम्मीद है।
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    केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून के सक्रिय होने के बाद अब राजस्थान में इसके आगमन को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। भीषण गर्मी और लू से जूझ रहे प्रदेशवासियों को मानसून से राहत मिलने की उम्मीद है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, यदि समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियां अनुकूल बनी रहीं तो राजस्थान में मानसून 25 से 30 जून के बीच प्रवेश कर सकता है।

मौसम विभाग के मानसून प्रोग्रेस चार्ट के मुताबिक, इस वर्ष मानसून सामान्य गति से आगे बढ़ रहा है। शुरुआती चरण में राज्य के कई हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं, जिनमें तेज हवाएं, बादलों की गरज, धूलभरी आंधियां और हल्की से मध्यम बारिश शामिल हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि राजस्थान में मानसून की पहली दस्तक दक्षिण-पूर्वी जिलों में हो सकती है, जिसके बाद यह धीरे-धीरे मध्य राजस्थान और फिर पश्चिमी क्षेत्रों की ओर बढ़ेगा। मानसून के सक्रिय होने से तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी से काफी राहत मिलेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार भी दक्षिण-पश्चिम मानसून बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों शाखाओं के माध्यम से आगे बढ़ेगा। फिलहाल, मौसम विभाग इसकी प्रगति पर लगातार नजर बनाए हुए है। यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो जून के अंतिम सप्ताह में राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियां शुरू हो सकती हैं। प्रदेश में किसान, आमजन और जल संसाधनों से जुड़े विभाग मानसून की प्रतीक्षा कर रहे हैं, क्योंकि अच्छी बारिश से खेती, पेयजल व्यवस्था और भूजल स्तर को लाभ मिलने की उम्मीद है।
    user_Dushyant singh gehlot (journal
    Dushyant singh gehlot (journal
    लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • कोटा में आयोजित कांग्रेस ओबीसी अधिवेशन के दौरान, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने राज्य सरकार को खूब खरी-खोटी सुनाई। इस अवसर पर उन्होंने भाजपा नेताओं को 'चवन्नी चोर' तक कह डाला।
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    कोटा में आयोजित कांग्रेस ओबीसी अधिवेशन के दौरान, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने राज्य सरकार को खूब खरी-खोटी सुनाई। इस अवसर पर उन्होंने भाजपा नेताओं को 'चवन्नी चोर' तक कह डाला।
    user_Journalist Harish Yadav
    Journalist Harish Yadav
    Social Media Manager Ladpura, Kota•
    14 hrs ago
  • डोटासरा ने बीजेपी के मंत्रियों पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें 'चवन्नी चोर' करार दिया है। उन्होंने कहा कि जब काम नहीं होते तो वे गालियां देते हैं। डोटासरा ने मौजूदा व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह सरकार नहीं, बल्कि एक सर्कस है। उन्होंने लगातार हो रहे पेपर लीक को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त की।
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    डोटासरा ने बीजेपी के मंत्रियों पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें 'चवन्नी चोर' करार दिया है। उन्होंने कहा कि जब काम नहीं होते तो वे गालियां देते हैं। डोटासरा ने मौजूदा व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह सरकार नहीं, बल्कि एक सर्कस है। उन्होंने लगातार हो रहे पेपर लीक को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त की।
    user_Anubhav Mittal Journalist
    Anubhav Mittal Journalist
    Court reporter Ladpura, Kota•
    16 hrs ago
  • ज्येष्ठ अमावस्या 15 जून 2026, सोमवार को पड़ रही है, जिसे पितृ तर्पण, पितृ शांति, दान-पुण्य और पूर्वजों के स्मरण के लिए विशेष महत्वपूर्ण दिन माना गया है। यह दिन इस विचार को रेखांकित करता है कि कहीं आपके पूर्वज आज भी आपकी प्रतीक्षा तो नहीं कर रहे हैं, कि कब उनकी पीढ़ी के वंशज उन्हें श्रद्धा से स्मरण करेंगे, तर्पण देंगे और उनके प्रति अपना ऋण चुकाने का प्रयास करेंगे। यह बताया गया है कि मनुष्य के हाथ में मोक्ष भले ही न हो, लेकिन श्रद्धा, तर्पण, दान और सत्कर्मों से पितरों की तृप्ति एवं शांति का मार्ग अवश्य प्रशस्त किया जा सकता है। पूर्वजों को महंगे स्मारक या पत्थर के चबूतरे नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा, सम्मान और तर्पण चाहिए। पितृ दोष को केवल कुंडली से ही नहीं, बल्कि घर के वास्तु में दक्षिण और नैऋत्य दिशा की स्थिति से भी समझा जाता है। कुंडली में सूर्य, नवम भाव और द्वितीय भाव को पितृ पक्ष से जुड़ा माना गया है, वहीं घर का दक्षिण और नैऋत्य क्षेत्र पूर्वजों की स्थिरता और वंश ऊर्जा से सीधा संबंध रखता है। बार-बार पूर्वजों के सपने आना, पुराने घर की याद आना या दिवंगत परिजनों का संकेत मिलना कई बार महज संयोग नहीं माना जाता। यह भी स्पष्ट किया गया है कि पितृ दोष हमेशा श्राप नहीं होता, बल्कि कई बार यह अधूरे पारिवारिक दायित्वों का सूचक भी हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण संकेतों में से एक वह पुराना पैतृक घर है, जहाँ कभी परिवार की जड़ें थीं, उसे पूरी तरह बदहाल, जर्जर और उपेक्षित छोड़ देना। अक्सर व्यक्ति नए घर में सुख-सुविधाओं के साथ रहने लगता है, लेकिन पूर्वजों की स्मृतियों से जुड़े उस पुराने घर की देखभाल तक नहीं करता। वास्तु और परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, पैतृक धरोहर की इस उपेक्षा को भी पितृ असंतोष का एक प्रमुख कारण माना जाता है। यह भी सलाह दी जाती है कि घर में पूर्वजों की तस्वीरें कभी भी मंदिर में देवताओं के साथ नहीं रखनी चाहिए, बल्कि उनके लिए एक अलग और सम्मानजनक स्थान होना चाहिए। इसके अतिरिक्त, पूर्वजों का घर छोड़ने से पहले, पूर्वजों की ऊर्जाओं को भी वहां से अपने साथ नए स्थान पर स्थानांतरित करना चाहिए।
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    ज्येष्ठ अमावस्या 15 जून 2026, सोमवार को पड़ रही है, जिसे पितृ तर्पण, पितृ शांति, दान-पुण्य और पूर्वजों के स्मरण के लिए विशेष महत्वपूर्ण दिन माना गया है। यह दिन इस विचार को रेखांकित करता है कि कहीं आपके पूर्वज आज भी आपकी प्रतीक्षा तो नहीं कर रहे हैं, कि कब उनकी पीढ़ी के वंशज उन्हें श्रद्धा से स्मरण करेंगे, तर्पण देंगे और उनके प्रति अपना ऋण चुकाने का प्रयास करेंगे। यह बताया गया है कि मनुष्य के हाथ में मोक्ष भले ही न हो, लेकिन श्रद्धा, तर्पण, दान और सत्कर्मों से पितरों की तृप्ति एवं शांति का मार्ग अवश्य प्रशस्त किया जा सकता है।

पूर्वजों को महंगे स्मारक या पत्थर के चबूतरे नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा, सम्मान और तर्पण चाहिए। पितृ दोष को केवल कुंडली से ही नहीं, बल्कि घर के वास्तु में दक्षिण और नैऋत्य दिशा की स्थिति से भी समझा जाता है। कुंडली में सूर्य, नवम भाव और द्वितीय भाव को पितृ पक्ष से जुड़ा माना गया है, वहीं घर का दक्षिण और नैऋत्य क्षेत्र पूर्वजों की स्थिरता और वंश ऊर्जा से सीधा संबंध रखता है। बार-बार पूर्वजों के सपने आना, पुराने घर की याद आना या दिवंगत परिजनों का संकेत मिलना कई बार महज संयोग नहीं माना जाता। यह भी स्पष्ट किया गया है कि पितृ दोष हमेशा श्राप नहीं होता, बल्कि कई बार यह अधूरे पारिवारिक दायित्वों का सूचक भी हो सकता है।

सबसे महत्वपूर्ण संकेतों में से एक वह पुराना पैतृक घर है, जहाँ कभी परिवार की जड़ें थीं, उसे पूरी तरह बदहाल, जर्जर और उपेक्षित छोड़ देना। अक्सर व्यक्ति नए घर में सुख-सुविधाओं के साथ रहने लगता है, लेकिन पूर्वजों की स्मृतियों से जुड़े उस पुराने घर की देखभाल तक नहीं करता। वास्तु और परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, पैतृक धरोहर की इस उपेक्षा को भी पितृ असंतोष का एक प्रमुख कारण माना जाता है।

यह भी सलाह दी जाती है कि घर में पूर्वजों की तस्वीरें कभी भी मंदिर में देवताओं के साथ नहीं रखनी चाहिए, बल्कि उनके लिए एक अलग और सम्मानजनक स्थान होना चाहिए। इसके अतिरिक्त, पूर्वजों का घर छोड़ने से पहले, पूर्वजों की ऊर्जाओं को भी वहां से अपने साथ नए स्थान पर स्थानांतरित करना चाहिए।
    user_Vastuvid Bhagyesh
    Vastuvid Bhagyesh
    Vastu consultant लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    19 hrs ago
  • राज्य सरकार प्रदेश में दुग्ध उत्पादन, डेयरी विकास और पशुपालकों की आय में बढ़ोतरी के लिए संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रही है। इसी संकल्प को साकार करते हुए, 'सरस मायरा योजना' के अंतर्गत पंजीकृत दुग्ध उत्पादकों की दो बेटियों के विवाह हेतु 'मायरा' के रूप में 21 हजार रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की जा रही है। यह योजना सामाजिक सरोकारों को पूरा करने के साथ-साथ पशुपालकों को आर्थिक संबल प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
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    राज्य सरकार प्रदेश में दुग्ध उत्पादन, डेयरी विकास और पशुपालकों की आय में बढ़ोतरी के लिए संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रही है। इसी संकल्प को साकार करते हुए, 'सरस मायरा योजना' के अंतर्गत पंजीकृत दुग्ध उत्पादकों की दो बेटियों के विवाह हेतु 'मायरा' के रूप में 21 हजार रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की जा रही है।

यह योजना सामाजिक सरोकारों को पूरा करने के साथ-साथ पशुपालकों को आर्थिक संबल प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
    user_Jitendra Kumar
    Jitendra Kumar
    Local News Reporter लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    23 hrs ago
  • गुरुवार शाम को हाड़ौती क्षेत्र, जिसमें कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ जिले शामिल हैं, में मौसम ने अचानक करवट ली। तेज आंधी और 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली तूफानी हवाओं के साथ झमाझम बारिश का दौर शुरू हो गया, जिससे क्षेत्र का जनजीवन प्रभावित हुआ। कोटा शहर और आसपास के इलाकों में धूलभरी आंधी के बाद हुई इस बारिश से लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिली। इसी तरह, बूंदी, बारां और झालावाड़ जिलों में भी तेज हवाओं के साथ अच्छी बारिश दर्ज की गई। मौसम में आए इस बदलाव के कारण कई स्थानों पर पेड़ों की शाखाएं टूटकर सड़कों पर गिर गईं और कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति भी बाधित हुई। तापमान में गिरावट आने से लोगों को उमस और गर्मी से काफी राहत मिली। मौसम विभाग ने आगामी घंटों में भी हाड़ौती क्षेत्र के कुछ हिस्सों में तेज आंधी, बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने और अनावश्यक रूप से बाहर नहीं निकलने की अपील की है।
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    गुरुवार शाम को हाड़ौती क्षेत्र, जिसमें कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ जिले शामिल हैं, में मौसम ने अचानक करवट ली। तेज आंधी और 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली तूफानी हवाओं के साथ झमाझम बारिश का दौर शुरू हो गया, जिससे क्षेत्र का जनजीवन प्रभावित हुआ।

कोटा शहर और आसपास के इलाकों में धूलभरी आंधी के बाद हुई इस बारिश से लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिली। इसी तरह, बूंदी, बारां और झालावाड़ जिलों में भी तेज हवाओं के साथ अच्छी बारिश दर्ज की गई। मौसम में आए इस बदलाव के कारण कई स्थानों पर पेड़ों की शाखाएं टूटकर सड़कों पर गिर गईं और कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति भी बाधित हुई। तापमान में गिरावट आने से लोगों को उमस और गर्मी से काफी राहत मिली।

मौसम विभाग ने आगामी घंटों में भी हाड़ौती क्षेत्र के कुछ हिस्सों में तेज आंधी, बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने और अनावश्यक रूप से बाहर नहीं निकलने की अपील की है।
    user_Dushyant singh gehlot (journal
    Dushyant singh gehlot (journal
    लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • फरीदाबाद के पनहेड़ा खुर्द गांव में जेवर एयरपोर्ट से जुड़े एक फ्लाईओवर के निर्माण के दौरान एक भारी क्रेन पलटने से बड़ा हादसा हो गया। इस दुर्घटना में तीन मजदूरों की मौत हो गई, जबकि एक मजदूर अभी भी फंसा हुआ है। जानकारी के मुताबिक, यह हादसा तेज आंधी के कारण हुआ, जब हाइवे निर्माण में लगी दो क्रेन गर्डर रखते समय आपस में टकरा गईं। बताया गया है कि दुर्घटना से पहले हुई बारिश के कारण घटनास्थल पर कीचड़ और फिसलन की स्थिति थी, फिर भी बारिश रुकते ही मजदूरों को काम पर लगा दिया गया था, जिसके बाद यह दुखद घटना घटित हुई।
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    फरीदाबाद के पनहेड़ा खुर्द गांव में जेवर एयरपोर्ट से जुड़े एक फ्लाईओवर के निर्माण के दौरान एक भारी क्रेन पलटने से बड़ा हादसा हो गया। इस दुर्घटना में तीन मजदूरों की मौत हो गई, जबकि एक मजदूर अभी भी फंसा हुआ है।

जानकारी के मुताबिक, यह हादसा तेज आंधी के कारण हुआ, जब हाइवे निर्माण में लगी दो क्रेन गर्डर रखते समय आपस में टकरा गईं। बताया गया है कि दुर्घटना से पहले हुई बारिश के कारण घटनास्थल पर कीचड़ और फिसलन की स्थिति थी, फिर भी बारिश रुकते ही मजदूरों को काम पर लगा दिया गया था, जिसके बाद यह दुखद घटना घटित हुई।
    user_Ahmed Siraj Farooqi
    Ahmed Siraj Farooqi
    रिपोर्टर लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    9 hrs ago
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