18 वर्षीय सुरिंदर कौर बनी ध्रुव तारा चार जिंदगियां को दे गई अट्टू शहर मिली शाबाशी एक किडनी और अग्न्याशय का 31 वर्षीय मरीज में सफल संयुक्त प्रत्यारोपण, दूसरी किडनी 15 वर्षीय मरीज को दी गई; दो मरीजों को कॉर्निया से मिलेगी रोशनी चंडीगढ़ बुधवार 26 अगस्त 2026 एम आरके विक्रमा शर्मा रक्षत शर्मा प्रस्तुति ---जिंदगी भले ही 18 साल की उम्र में थम गई, लेकिन सुरिंदर कौर अपने पीछे ऐसी अमिट विरासत छोड़ गईं, जो कई लोगों के जीवन में हमेशा जीवित रहेगी। पंजाब के मोहाली जिले के खरड़ स्थित गांव तेउर की रहने वाली 18 वर्षीय सुरिंदर कौर की सड़क दुर्घटना के बाद मृत्यु हो गई। दुख की इस घड़ी में उनके परिवार ने अंगदान का साहसिक फैसला लेकर चार लोगों के जीवन में नई उम्मीद जगा दी। सुरिंदर कौर को 23 अगस्त 2026 को सड़क दुर्घटना के बाद पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उन्हें गंभीर और अपरिवर्तनीय न्यूरोलॉजिकल क्षति हुई। सभी निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल और आवश्यक परीक्षण पूरे किए जाने के बाद 25 अगस्त को ब्रेन स्टेम डेथ कमेटी ने उन्हें ब्रेन स्टेम डेड घोषित किया। इसके बाद सुरिंदर कौर की मां संतोष कौर और निकटतम परिजनों ने उनके अंग एवं ऊतक दान करने की सहमति दी। परिवार के इस निर्णय से उनकी दोनों किडनियां, अग्न्याशय और कॉर्निया दान किए जा सके। पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने दाता परिवार के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि अंगदान मानवता की महान अभिव्यक्तियों में से एक है। उन्होंने कहा कि जिस समय परिवार खुद गहरे दुख से गुजर रहा था, उस समय दूसरों के जीवन में उम्मीद जगाने का निर्णय असाधारण साहस और मानवीय संवेदना का परिचायक है। सुरिंदर कौर की मां संतोष कौर ने कहा कि परिवार अपनी बेटी को वापस नहीं ला सकता, लेकिन यदि उसका कोई हिस्सा किसी दूसरे के जीवन में जीवित रह सके तो उसके जीवन का अर्थ बना रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी बेटी के अंग प्राप्त करने वाले लोग स्वस्थ और खुशहाल जीवन जिएंगे। 31 वर्षीय मरीज का 13 घंटे चला जटिल किडनी-अग्न्याशय प्रत्यारोपण दान किए गए अंगों में से एक किडनी और अग्न्याशय को 31 वर्षीय पुरुष मरीज में एक साथ प्रत्यारोपित किया गया। इसे सिमल्टेनियस पैंक्रियाज-किडनी (एसपीके) प्रत्यारोपण कहा जाता है। दूसरी किडनी का 15 वर्षीय मरीज में सफल प्रत्यारोपण किया गया। वहीं दोनों कॉर्निया दो मरीजों को दृष्टि प्रदान करने में मदद करेंगे। पीजीआईएमईआर के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष प्रो. एच.एस. कोहली ने बताया कि दोनों मरीज लंबे समय से डायलिसिस पर थे। अंग उपलब्ध होने के बाद प्राप्तकर्ता मरीजों का तेजी से चिकित्सकीय मूल्यांकन किया गया। इम्यूनोलॉजिकल अनुकूलता सहित कई महत्वपूर्ण चिकित्सा मानकों की जांच के बाद उन्हें प्रत्यारोपण के लिए तैयार किया गया। रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष प्रो. आशीष शर्मा ने बताया कि 31 वर्षीय मरीज का एसपीके प्रत्यारोपण बेहद जटिल था। सात वर्ष पहले मरीज की मां द्वारा दान की गई किडनी का प्रत्यारोपण विफल हो चुका था। इसके अलावा दोनों पैरों और ऊपरी अंगों की प्रमुख नसों में रुकावट के कारण डायलिसिस के विकल्प भी सीमित हो गए थे। सर्जरी के दौरान नई किडनी और अग्न्याशय के प्रत्यारोपण के साथ पहले से मौजूद विफल किडनी को निकालना और इलियक वेन की मरम्मत भी करनी पड़ी। करीब 13 घंटे तक चली इस चार चरणों वाली जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया गया। पूरी प्रक्रिया में विभिन्न चिकित्सा टीमों ने लगभग 18 घंटे तक लगातार काम किया। परिवार को अंगदान के लिए तैयार करने में रिश्तेदार ने निभाई अहम भूमिका पीजीआईएमईआर के ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर डॉ. नवदीप बंसल ने कहा कि किसी प्रियजन की मृत्यु के तुरंत बाद परिवार से अंगदान की सहमति लेना बेहद संवेदनशील प्रक्रिया होती है। इस मामले में पीजीआईएमईआर में कार्यरत और परिवार के रिश्तेदार श्री सुरजीत सिंह ने भी परिवार को अंगदान के महत्व को समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रोटो नॉर्थ, पीजीआईएमईआर के नोडल अधिकारी डॉ. विजय टाडिया ने कहा कि इस पूरे मामले में संभावित अंगदाता की पहचान, ब्रेन स्टेम डेथ की घोषणा, परिवार की काउंसलिंग, सहमति, चिकित्सकीय जांच, अंगों की निकासी और प्रत्यारोपण तक कई स्तरों पर समन्वय की आवश्यकता थी। विभिन्न चिकित्सा टीमों के बेहतर तालमेल से यह संभव हो पाया। पीजीआईएमईआर का रोटो नॉर्थ उत्तरी क्षेत्र में मृतक अंगदान को बढ़ावा देने के लिए अस्पताल नेटवर्किंग, क्षमता निर्माण, जागरूकता कार्यक्रमों, परामर्श, प्रशिक्षण और प्रत्यारोपण से जुड़े संस्थानों को सहयोग प्रदान कर रहा है। सुरिंदर कौर अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके अंगों से मिली नई जिंदगी और दृष्टि उनके जीवन की कहानी को आगे बढ़ाती रहेगी। उनका अंगदान यह संदेश देता है कि अत्यंत कठिन और दुखद परिस्थितियों में भी एक परिवार का मानवीय फैसला कई जिंदगियों के लिए उम्मीद और नई शुरुआत का कारण बन सकता है। साभार।।।जय भारत।
18 वर्षीय सुरिंदर कौर बनी ध्रुव तारा चार जिंदगियां को दे गई अट्टू शहर मिली शाबाशी एक किडनी और अग्न्याशय का 31 वर्षीय मरीज में सफल संयुक्त प्रत्यारोपण, दूसरी किडनी 15 वर्षीय मरीज को दी गई; दो मरीजों को कॉर्निया से मिलेगी रोशनी चंडीगढ़ बुधवार 26 अगस्त 2026 एम आरके विक्रमा शर्मा रक्षत शर्मा प्रस्तुति ---जिंदगी भले ही 18 साल की उम्र में थम गई, लेकिन सुरिंदर कौर अपने पीछे ऐसी अमिट विरासत छोड़ गईं, जो कई लोगों के जीवन में हमेशा जीवित रहेगी। पंजाब के मोहाली जिले के खरड़ स्थित गांव तेउर की रहने वाली 18 वर्षीय सुरिंदर कौर की सड़क दुर्घटना के बाद मृत्यु हो गई। दुख की इस घड़ी में उनके परिवार ने अंगदान का साहसिक फैसला लेकर चार लोगों के जीवन में नई उम्मीद जगा दी। सुरिंदर कौर को 23 अगस्त 2026 को सड़क दुर्घटना के बाद पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उन्हें गंभीर और अपरिवर्तनीय न्यूरोलॉजिकल क्षति हुई। सभी निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल और आवश्यक परीक्षण पूरे किए जाने के बाद 25 अगस्त को ब्रेन स्टेम डेथ कमेटी ने उन्हें ब्रेन स्टेम डेड घोषित किया। इसके बाद सुरिंदर कौर की मां संतोष कौर और निकटतम परिजनों ने उनके अंग एवं ऊतक दान करने की सहमति दी। परिवार के इस निर्णय से उनकी दोनों किडनियां, अग्न्याशय और कॉर्निया दान किए जा सके। पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने दाता परिवार के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि अंगदान मानवता की महान अभिव्यक्तियों में से एक है। उन्होंने कहा कि जिस समय परिवार खुद गहरे दुख से गुजर रहा था, उस समय दूसरों के जीवन में उम्मीद जगाने का निर्णय असाधारण साहस और मानवीय संवेदना का परिचायक है। सुरिंदर कौर की मां संतोष कौर ने कहा कि परिवार अपनी बेटी को वापस नहीं ला सकता, लेकिन यदि उसका कोई हिस्सा किसी दूसरे के जीवन में जीवित रह सके तो उसके जीवन का अर्थ बना रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी बेटी के अंग प्राप्त करने वाले लोग स्वस्थ और खुशहाल जीवन जिएंगे। 31 वर्षीय मरीज का 13 घंटे चला जटिल किडनी-अग्न्याशय प्रत्यारोपण दान किए गए अंगों में से एक किडनी और अग्न्याशय को 31 वर्षीय पुरुष मरीज में एक साथ प्रत्यारोपित किया गया। इसे सिमल्टेनियस पैंक्रियाज-किडनी (एसपीके) प्रत्यारोपण कहा जाता है। दूसरी किडनी का 15 वर्षीय मरीज में सफल प्रत्यारोपण किया गया। वहीं दोनों कॉर्निया दो मरीजों को दृष्टि प्रदान करने में मदद करेंगे। पीजीआईएमईआर के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष प्रो. एच.एस. कोहली ने बताया कि दोनों मरीज लंबे समय से डायलिसिस पर थे। अंग उपलब्ध होने के बाद प्राप्तकर्ता मरीजों का तेजी से चिकित्सकीय मूल्यांकन किया गया। इम्यूनोलॉजिकल अनुकूलता सहित कई महत्वपूर्ण चिकित्सा मानकों की जांच के बाद उन्हें प्रत्यारोपण के लिए तैयार किया गया। रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष प्रो. आशीष शर्मा ने बताया कि 31 वर्षीय मरीज का एसपीके प्रत्यारोपण बेहद जटिल था। सात वर्ष पहले मरीज की मां द्वारा दान की गई किडनी का प्रत्यारोपण विफल हो चुका था। इसके अलावा दोनों पैरों और ऊपरी अंगों की प्रमुख नसों में रुकावट के कारण डायलिसिस के विकल्प भी सीमित हो गए थे। सर्जरी के दौरान नई किडनी और अग्न्याशय के प्रत्यारोपण के साथ पहले से मौजूद विफल किडनी को निकालना और इलियक वेन की मरम्मत भी करनी पड़ी। करीब 13 घंटे तक चली इस चार चरणों वाली जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया गया। पूरी प्रक्रिया में विभिन्न चिकित्सा टीमों ने लगभग 18 घंटे तक लगातार काम किया। परिवार को अंगदान के लिए तैयार करने में रिश्तेदार ने निभाई अहम भूमिका पीजीआईएमईआर के ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर डॉ. नवदीप बंसल ने कहा कि किसी प्रियजन की मृत्यु के तुरंत बाद परिवार से अंगदान की सहमति लेना बेहद संवेदनशील प्रक्रिया होती है। इस मामले में पीजीआईएमईआर में कार्यरत और परिवार के रिश्तेदार श्री सुरजीत सिंह ने भी परिवार को अंगदान के महत्व को समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रोटो नॉर्थ, पीजीआईएमईआर के नोडल अधिकारी डॉ. विजय टाडिया ने कहा कि इस पूरे मामले में संभावित अंगदाता की पहचान, ब्रेन स्टेम डेथ की घोषणा, परिवार की काउंसलिंग, सहमति, चिकित्सकीय जांच, अंगों की निकासी और प्रत्यारोपण तक कई स्तरों पर समन्वय की आवश्यकता थी। विभिन्न चिकित्सा टीमों के बेहतर तालमेल से यह संभव हो पाया। पीजीआईएमईआर का रोटो नॉर्थ उत्तरी क्षेत्र में मृतक अंगदान को बढ़ावा देने के लिए अस्पताल नेटवर्किंग, क्षमता निर्माण, जागरूकता कार्यक्रमों, परामर्श, प्रशिक्षण और प्रत्यारोपण से जुड़े संस्थानों को सहयोग प्रदान कर रहा है। सुरिंदर कौर अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके अंगों से मिली नई जिंदगी और दृष्टि उनके जीवन की कहानी को आगे बढ़ाती रहेगी। उनका अंगदान यह संदेश देता है कि अत्यंत कठिन और दुखद परिस्थितियों में भी एक परिवार का मानवीय फैसला कई जिंदगियों के लिए उम्मीद और नई शुरुआत का कारण बन सकता है। साभार।।।जय भारत।
- ਗੁਰੂ ਨਾਨਕ ਸੋਸਾਇਟੀ ਦੇ ਬਿਲਕੁਲ ਸਾਹਮਣੇ. ਰੋਡ ਤੇ ਅੱਜ ਪ੍ਰੀ ਮਿਕਸ ਪਾਈ ਗਈ.. ਐਸਡੀਐਮ ਸਾਹਿਬ ਅਤੇ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਦਾ ਅਤੇ ਚੇਅਰਮੈਨ ਪ੍ਰਮਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਗੋਲਡੀ ਦਾ ਧੰਨਵਾਦ ਕਰਦਿਆਂ ਸਮਾਜ ਸੇਵੀ ਪ੍ਰਭਜੋਤ ਸਿੰਘ ਖਾਲਸਾ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਵਾਰਡ ਨੰਬਰ ਛੇ ਖਰਡ ਦੇ ਪਾਰਟੀ ਦੇ ਵਰਕਰਾਂ ਵੱਲੋਂ ਦੱਸੇ ਕੰਮ ਹੁਣ ਹੋਲੀ ਹੋਲੀ ਹੋਣੇ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਗਏ ਹਨ।1
- ਫਤਿਹਗੜ੍ਹ ਸਾਹਿਬ ਤੋਂ ਨਤਮਸਤਕ ਹੋ ਕੇ ਪਰਤ ਰਹੇ ਪਤੀ-ਪਤਨੀ ਦੀ ਭਿਆਨਕ ਹਾਦਸੇ 'ਚ ਮੌਤ ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਸ਼੍ਰੀ ਫਤਿਹਗੜ੍ਹ ਸਾਹਿਬ ਵਿਖੇ ਮੱਥਾ ਟੇਕ ਕੇ ਆਪਣੀ ਸਕੂਟਰੀ 'ਤੇ ਵਾਪਸ ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਪਰਤ ਰਹੇ ਧਰਮਵੀਰ ਸਿੰਘ ਅਤੇ ਉਸ ਦੀ ਪਤਨੀ ਸ਼ਸ਼ੀ ਬਾਲਾ ਵਾਸੀ ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਦੀ ਇੱਕ ਭਿਆਨਕ ਸੜਕ ਹਾਦਸੇ ਵਿੱਚ ਦਰਦਨਾਕ ਮੌਤ ਹੋ ਗਈ। ਮਿਲੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਅਨੁਸਾਰ, ਜਦੋਂ ਇਹ ਦੋਵੇਂ ਨਤਮਸਤਕ ਹੋਣ ਉਪਰੰਤ ਆਪਣੇ ਘਰ ਵੱਲ ਜਾ ਰਹੇ ਸਨ, ਤਾਂ ਪਿੰਡ ਆਲਮਪੁਰ ਦੇ ਨਜ਼ਦੀਕ ਸਾਹਮਣੇ ਤੋਂ ਆ ਰਹੇ ਇੱਕ ਟਰੱਕ ਨੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਸਕੂਟਰੀ ਨੂੰ ਟੱਕਰ ਮਾਰ ਦਿੱਤੀ। ਟੱਕਰ ਇੰਨੀ ਜ਼ਬਰਦਸਤ ਸੀ ਕਿ ਦੋਵਾਂ ਦੀ ਮੌਕੇ 'ਤੇ ਹੀ ਮੌਤ ਹੋ ਗਈ। ਥਾਣਾ ਬੱਸੀ ਪਠਾਣਾ ਦੇ ਸਹਾਇਕ ਥਾਣੇਦਾਰ ਹਰਪਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਪੁਲਿਸ ਨੇ ਹਾਦਸਾਗ੍ਰਸਤ ਟਰੱਕ ਨੂੰ ਕਬਜ਼ੇ ਵਿੱਚ ਲੈ ਲਿਆ ਹੈ। ਪੁਲਿਸ ਵੱਲੋਂ ਟਰੱਕ ਚਾਲਕ ਦਲਜੀਤ ਸਿੰਘ ਵਿਰੁੱਧ ਮਾਮਲਾ ਦਰਜ ਕਰਕੇ ਅਗਲੇਰੀ ਕਾਨੂੰਨੀ ਕਾਰਵਾਈ ਅਮਲ ਵਿੱਚ ਲਿਆਂਦੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ।1
- ਦੋਰਾਹਾ ਵਿਖੇ ਦਾ ਸਾਊਥ ਕੈਫੇ ਵਾਲਿਆਂ ਨੇ ਰੱਖੜੀ ਮੌਕੇ ਲਗਾ ਦਿੱਤੀ 3 ਦਿਨ ਦੀ ਧਮਾਕੇ ਦਾ ਆਫਰ 27, 28 , 29 ਅਗਸਤ ਨੂੰ ਹੁਣ ਤੁਸੀਂ ਲਓ 7 ਆਈਟਮਾਂ ਸਿਰਫ 299 ਰੁਪਏ ਚ ਦੋਰਾਹਾ ਵਿਖੇ ਦਾ ਸਾਊਥ ਕੈਫੇ ਵਾਲਿਆਂ ਨੇ ਰੱਖੜੀ ਮੌਕੇ ਲਗਾ ਦਿੱਤੀ 3 ਦਿਨ ਦੀ ਧਮਾਕੇ ਦਾ ਆਫਰ 27, 28 , 29 ਅਗਸਤ ਨੂੰ ਹੁਣ ਤੁਸੀਂ ਲਓ 7 ਆਈਟਮਾਂ ਸਿਰਫ 299 ਰੁਪਏ ਚ1
- ਖੰਨਾ ਪੁਲਿਸ ਨੇ ਲੁੱਟਾਂ ਖੋਹਾਂ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਗਿਰੋਹ ਦਾ ਕੀਤਾ ਪਰਦਾਫਾਸ਼ 04 ਮੈਂਬਰਾਂ ਨੂੰ ਕੀਤਾ ਕਾਬੂ।1
- ਬੀਜੇਪੀ ਹਲਕਾ ਗੜ੍ਹਸ਼ੰਕਰ ਦੇ ਇੰਚਾਰਜ ਨਿਮਿਸ਼ਾ ਮਹਿਤਾ ਨੇ ਪੱਖੋਵਾਲ ਤੋਂ ਕੁਕੜਾਂ ਸੜਕ ਦੀ ਹਾਲਤ ਵਾਰੇ ਦੱਸਿਆ। ਗੜ੍ਹਸ਼ੰਕਰ (ਅਸ਼ਵਨੀ ਸ਼ਰਮਾ) ਗੜ੍ਹਸ਼ੰਕਰ ਤੋਂ ਬੀਜੇਪੀ ਦੇ ਹਲਕਾ ਗੜ੍ਹਸ਼ੰਕਰ ਦੇ ਇੰਚਾਰਜ ਨਿਮਿਸ਼ਾ ਮਹਿਤਾ ਨੇ ਪੱਤਰਕਾਰਾਂ ਨਾਲ ਗੱਲਬਾਤ ਕਰਦਿਆਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਦੇਖੋ ਲੋਕੋ ਹਲਕੇ ਦੀ ਅਸਲੀ ਤਸਵੀਰ, ਵਿਕਾਸ ਹੀ ਵਿਕਾਸ ਪਰ ਮਿੱਟੀ ਚੋਰ ਮਾਫ਼ੀਆ ਦਾ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ ਤੇ ਵੋਟਾਂ ਪਾ ਕੇ ਜਿਤਾਉਂਣ ਵਾਲੇ ਲੋਕ ਇਹਨਾਂ ਸੜਕਾਂ ਤੇ ਖੱਜਲ ਹੋ ਰਹੇ ਹਨ। ਉਹਨਾਂ ਨੇ ਪੱਖੋਵਾਲ ਤੋਂ ਕੁਕੜਾਂ ਸੜਕ ਦੀ ਹਾਲਤ ਦਿਖਾਈਂ।1
- CM ਭਗਵੰਤ ਮਾਨ ਦੀ ਲੋਕ ਮਿਲਣੀ, ਹਲਕਾ ਮਜੀਠਾ ਦੇ ਪਿੰਡ ਚਵਿੰਡਾ ਦੇਵੀ ਤੋਂ Live1
- ਮੁਸਲਿਮ ਭਾਈਚਾਰੇ ਦੇ ਮਹਾਂਪੁਰਸ਼ ਮੁਹੰਮਦ ਨਬੀ ਜੀ ਦੇ ਜਨਮ ਦਿਨ ਮੌਕੇ ਬਹੁਤ ਬਹੁਤ ਮੁਬਾਰਕ ਵੋਟਰ ਪਾਰਟੀ ਇਨਕਲਾਬ ਜਿੰਦਾਬਾਦ ਪਿੰਡ ਸੁਨੇਤ ਤੋਂ ਮੁਹੰਮਦ ਨਬੀ ਜੀ ਦੇ ਜਨਮਦਿਨ ਤੇ ਸੋਭਾ ਯਾਤਰਾ ਦਾ ਸਿਲਸਿਲਾ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋਇਆ ਜੋ ਸਵੇਰੇ 10 ਵਜੇ ਚੱਲ ਕੇ ਚਾਰ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਚੱਲਦਾ ਰਿਹਾ ਪਿੰਡ ਸੁਨੇਤ ਦੀਆਂ ਸੜਕਾਂ ਤੇ ਅੱਲਾਹ ਹੂ ਅੱਲਾਹ ਹੂ ਦੇ ਜੈਕਾਰੇ ਸੁਣਾਈ ਦਿੱਤੇ ਇਹਨਾਂ ਵੱਲੋਂ ਇਹ ਸੁਬਾ ਯਾਤਰਾ ਬਹੁਤ ਹੀ ਸ਼ਾਂਤਮਈ ਤਰੀਕੇ ਦੇ ਨਾਲ ਹਰ ਸਾਲ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਆਰੰਭ ਹੋਈ ਮੁਸਲਿਮ ਭਾਈਚਾਰੇ ਦਾ ਬੇਮਿਸਾਲ ਕੱਠ ਅਤੇ ਇਕ ਤਾਂ ਦੇਖਣ ਨੂੰ ਮਿਲੀ ਮੁਸਲਿਮ ਭਾਈਚਾਰੇ ਵੱਲੋਂ ਤੁਸੀਂ ਦੇਖਿਆ ਹੋਵੇਗਾ ਕਿ ਕਦੇ ਵੀ ਅਲੱਗ ਅਲੱਗ ਧੜੇ ਵੰਡੀਆਂ ਦੇ ਵਿੱਚ ਸੋਭਾ ਯਾਤਰਾ ਨਹੀਂ ਕੱਢੀਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਜਦੋਂ ਵੀ ਕੋਈ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਸਾਰਾ ਭਾਈਚਾਰਾ ਮਿਲ ਕੇ ਆਪਣੀਆਂ ਆਪਣੀਆਂ ਆਉਣ ਵਾਲੀਆਂ ਪੀੜੀਆਂ ਦੇ ਚੰਗੇ ਭਵਿੱਖ ਬਾਰੇ ਵਿਚਾਰ ਚਰਚਾ ਵੀ ਕਰਦੇ ਹਨ ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ ਆਪਣੇ ਪੰਜਾਬੀ ਭਾਈਚਾਰਾ ਆਪਾਂ ਦੇਖ ਲੈਦੇ ਆਂ ਕਿ ਸਾਡੇ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਲੋਕ ਪੰਜਾਬੀਅਤ ਨੂੰ ਭੁੱਲਦੇ ਹੋਏ ਇੱਕ ਦੂਜੇ ਦੀ ਲੱਤਾਂ ਖਿੱਚਣ ਨੂੰ ਤਾਂ ਟਾਈਮ ਹੈ ਪਰ ਭਾਈ ਚਾਰਕ ਸਾਂਝ ਨੂੰ ਮਜਬੂਤ ਕਰਨ ਲਈ ਗੁਰੂ ਸਾਹਿਬ ਜੀ ਦੇ ਦਿੱਤੇ ਹੋਏ ਅਸ਼ੀਰਵਾਦ ਨੂੰ ਕਿ ਮਾਨਸ ਕੀ ਜਾਤ ਸਭ ਏਕ ਪਹਿਚਾਨਬੋ ਦੇ ਸਲੋਕ ਨੂੰ ਭੁੱਲਦੇ ਹੋਏ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਧੜਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵੰਡੇ ਹੋਏ ਨੇ ਹਿੰਦੂ ਮੁਸਲਮਾਨ ਸਿੱਖ ਇਸਾਈ ਆਪਾਂ ਸਾਰੇ ਭਾਈ ਭਾਈ ਤੇ ਇਸ ਸਿਧਾਂਤ ਤੇ ਪਹਿਰਾ ਦੇਣਾ ਹੀ ਭੁੱਲ ਗਏ ਹਾਂ ਜੇਕਰ ਆਪਣੇ ਗੁਰੂਆਂ ਪੀਰਾਂ ਮਹਾਂਪੁਰਸ਼ਾਂ ਦੇ ਬਚਨਾਂ ਨੂੰ ਯਾਦ ਰੱਖਿਆ ਹੁੰਦਾ ਤਾਂ ਅੱਜ ਜੁਮਲੇਬਾਜ ਸਾਡੇ ਤੇ ਰਾਜ ਨਾ ਕਰਦੇ ਹੁੰਦੇ ਇਹਨਾਂ ਜੁਮਲੇ ਬਾਜਾਂ ਤੋਂ ਪੰਜਾਬ ਅਤੇ ਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਆਜ਼ਾਦ ਕਰਾਉਣ ਲਈ ਆਪਣੀਆਂ ਆਉਣ ਵਾਲੀਆਂ ਪੀੜੀਆਂ ਦੇ ਚੰਗੇ ਭਵਿੱਖ ਲਈ ਮਿਲ ਕੇ ਆਵਾਜ਼ ਬੁਲੰਦ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ,,,,,,,,ਕੀ ਤੁਹਾਡੇ ਕੋਲ ਟਾਈਮ ਨਹੀਂ ਫਿਰ ਕੌਣ ਕਰੇਗਾ ਪਹਿਲ ਆਰਥਿਕ ਆਜ਼ਾਦੀ ਵੋਟਰ ਪੈਨਸ਼ਨ ਮਿਸਨ ਪੰਜਾਬ ਭਾਰਤ ਸਰਪ੍ਰਸਤ ਸਿਕੰਦਰ ਸਿੰਘ ਸੁਨੇਤ V,P,I1
- ਗਊਸ਼ਾਲਾਵਾਂ ਨੂੰ ਆਰਥਿਕ ਰਾਹਤ ਦੇਣ ਲਈ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਸੂਬੇ ਦੀਆਂ 518 ਗਊਸ਼ਾਲਾਵਾਂ ਦੇ ਬਿਜਲੀ ਬਿੱਲ ਕੀਤੇ ਮੁਆਫ-ਕੀਮਤੀ ਭਗਤ ਪੰਜਾਬ ਗਊ ਸੇਵਾ ਕਮਿਸ਼ਨ ਦੇ ਉਪ ਚੇਅਰਮੈਨ ਸ੍ਰੀ ਕੀਮਤੀ ਭਗਤ ਨੇ ਅੱਜ ਸਥਾਨਕ ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਪ੍ਰਬੰਧਕੀ ਕੰਪਲੈਕਸ ਵਿਖੇ ਬੇਸਹਾਰਾ ਗਊਧਨ ਦੀ ਸਾਂਭ ਸੰਭਾਲ ਅਤੇ ਜ਼ਿਲ੍ਹੇ ਦੀਆਂ ਗਉਸ਼ਾਲਾਵਾਂ ਅੰਦਰ ਗਊਧਨ ਲਈ ਲੋਂੜੀਦੇ ਪ੍ਰਬੰਧਾਂ ਸਬੰਧੀ ਵੱਖ ਵੱਖ ਵਿਭਾਗੀ ਅਧਿਕਾਰੀਆਂ ਅਤੇ ਗਊਸ਼ਾਲਾਵਾਂ ਦੇ ਪ੍ਰਬੰਧਕਾਂ ਨਾਲ ਅਹਿਮ ਮੀਟਿੰਗ ਕੀਤੀ। ਉਪ ਚੇਅਰਮੈਨ ਸ੍ਰੀ ਕੀਮਤੀ ਭਗਤ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਪੰਜਾਬ ਸ੍ਰ. ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਨੇ ਪੰਜਾਬ ਦੀਆਂ 518 ਗਊਸ਼ਾਲਾਵਾਂ ਦੇ ਬਿਜਲੀ ਮਾਫ਼ ਕਰਕੇ ਗਊਸ਼ਾਲਾਵਾਂ ਨੂੰ ਵੱਡੀ ਰਾਹਤ ਦਿੱਤੀ ਹੈ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਗਊਸ਼ਾਲਾਵਾਂ ਦੀ ਆਰਥਿਕ ਸਥਿਤੀ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੋਵੇਗੀ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਦੇ ਇਸ ਫੈਸਲੇ ਦਾ ਗਊਸ਼ਾਲਾਵਾਂ ਦੇ ਪ੍ਰਬੰਧਕਾਂ ਵੱਲੋਂ ਭਰਵਾਂ ਸਵਾਗਤ ਕੀਤਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਉਨ੍ਰਾਂ ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਫ਼ਤਹਿਗੜ੍ਹ ਸਾਹਿਬ ਵਿਖੇ ਸੜਕਾਂ ਤੇ ਬੇਸਹਾਰਾ ਗਊਧਨ ਨੁੰ ਸਰਕਾਰੀ ਜਾਂ ਨਿੱਜੀ ਗਊਸ਼ਾਲਾਵਾਂ ਵਿੱਚ ਪਹੁੰਚਾਉਣ ਲਈ ਸਬੰਧਤ ਵਿਭਾਗਾਂ ਨੂੰ ਪੂਰੀ ਜਿੰਮੇਵਾਰੀ ਅਤੇ ਸੇਵਾ ਭਾਵਨਾ ਨਾਲ ਮੋਹਰੀ ਭੂਮਿਕਾ ਨਿਭਾਉਣ ਦੇ ਆਦੇਸ਼ ਦਿੱਤੇ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਗੜੋਲੀਆਂ ਵਿਖੇ 18 ਏਕੜ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿੱਚ ਕਰੀਬ 1.76 ਕਰੋੜ ਰੁਪਏ ਦੀ ਲਾਗਤ ਨਾਲ ਸਰਕਾਰੀ ਗਊਸ਼ਾਲਾ ਬਣੀ ਹੋਈ ਹੈ ਜਿਸਦੇ ਵਿੱਚ 5 ਹਜਾਰ ਪਸ਼ੂ ਰੱਖਣ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਸ਼ਹਿਰੀ ਖੇਤਰ ਅੰਦਰ ਕਾਰਜਸਾਧਕ ਅਫ਼ਸਰ ਅਤੇ ਪਿੰਡਾਂ ਵਿੱਚ ਬੀ.ਡੀ.ਪੀ.ਓਜ਼ ਨੂੰ ਸੜਕਾਂ ਦੇ ਘੁੰਮਣ ਵਾਲੇ ਬੇਸਹਾਰਾ ਗਊਧਨ ਨੂੰ ਸਰਕਾਰੀ ਗਊਸ਼ਾਲਾ ਜਾਂ ਪ੍ਰਾਈਵੇਟ ਗਊਸਾਲਵਾਂ ਵਿੱਚ ਪਹੁੰਚਾਉਣ ਦੀ ਹਦਾਇਤ ਕੀਤੀ। ਸ੍ਰੀ ਕੀਮਤੀ ਭਗਤ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਜਖ਼ਮੀ ਜਾਂ ਬਿਮਾਰ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੇ ਇਲਾਜ ਲਈ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਫਤਹਿਗੜ੍ਹ ਸਾਹਿਬ ਦੀਆਂ 11 ਗਉਸ਼ਾਲਾਵਾਂ ਵਿੱਚ ਕਰੀਬ 3 ਕਰੋੜ 06 ਲੱਖ ਰੁਪਏ ਦੀ ਲਾਗਤ ਵਾਲੇ ਕਾਊ-ਲਿਫਟਰ ਮੁਹੱਈਆ ਕਰਵਾਏ ਗਏ ਹਨ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਡਿਪਟੀ ਡਾਇਰਕੈਟਰ ਪਸ਼ੂ ਪਾਲਣ ਡਾ ਭੁਪਿੰਦਰ ਪਾਲ ਸਿੰਘ ਨੂੰ ਹਦਾਇਤ ਕਰਦਿਆਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਸਰਕਾਰੀ ਅਤੇ ਪ੍ਰਾਈਵੇਟ ਗਊਸ਼ਾਲਾਵਾਂ ਵਿੱਚ ਪ਼ਸੂਆਂ ਦੇ ਮੈਡੀਕਲ ਚੈਕਅੱਪ ਲਈ ਵੈਟਨਰੀ ਅਫਸਰਾਂ ਦੀ ਡਿਊਟੀ ਲਗਾਈ ਜਾਵੇ ਅਤੇ ਸਬੰਧਤ ਦਾ ਡਿਊਟੀ ਰੋਸਟਰ ਹਰੇਕ ਗਉਸ਼ਾਲਾ ਵਿਖੇ ਨੋਟਿਸ ਬੋਰਡ ਦੇ ਤੋਰ ਤੇ ਲਗਾਇਆ ਜਾਵੇ। ਇਸ ਮੋਕੇ ਐਸ.ਡੀ.ਐਮ. ਬਸੀ ਪਠਾਣਾ ਦੀਪਜੋਤ ਕੌਰ, ਸਹਾਇਕ ਕਮਿਸ਼ਨਰ ਸੂਬਾ ਸਿੰਘ, ਡੀ.ਡੀ.ਪੀ.ਓ ਜਸਪ੍ਰੀਤ ਕੌਰ, ਡੀ.ਐਸ.ਪੀ. ਖੁਸ਼ਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ, ਕੌਮੀ ਪ੍ਰਧਾਨ ਸਤੀਸ਼ ਕੁਮਾਰ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਵਿਭਾਗਾਂ ਦੇ ਨੁਮਾਇੰਦਿਆਂ ਅਤੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਗਊਸ਼ਾਲਾਵਾਂ ਦੇ ਪ੍ਰਬੰਧਕ ਹਾਜਰ ਸਨ।1