राजाखेड़ा नगर पालिका के हनुमान बछेकी मंदिर पार्क, जिसे बछेकी उद्यान भी कहा जाता है, में नरेगा योजना के तहत सफाई और सौंदर्यीकरण का काम पिछले चार महीने से केवल कागजों में ही चल रहा है। इस 'कागजी' काम पर लाखों रुपये का भुगतान भी हो चुका है, लेकिन हकीकत में पार्क की हालत जस की तस बनी हुई है और गंदगी के कारण बच्चे भी यहां कदम नहीं रख पा रहे हैं। नगर पालिका के रिकॉर्ड दर्शाते हैं कि मई 2026 से बछेकी उद्यान की सफाई, घास कटाई और रंग-रोगन के लिए लगातार मस्टर रोल भरे जा रहे हैं, जिनमें हर हफ्ते 15-20 मजदूरों को काम पर दिखाया गया है। इसके विपरीत, पार्क में एक फुट तक ऊंची घास उगी है, झूले और फिसलपट्टी टूटे पड़े हैं, धूल की मोटी परत जमी है, और जगह-जगह शराब की बोतलें व कचरे के ढेर लगे हैं। मौके पर न तो कोई नया रंग किया गया है, न ही पौधे लगाए गए हैं, और घास तक नहीं काटी गई है। स्थानीय निवासियों विष्णु सिंह और मुकेश कुमार बघेल ने बताया कि पार्क के लिए कई कर्मचारियों की ड्यूटी लगी है, लेकिन उनमें से कोई भी नहीं आता। उन्होंने आरोप लगाया कि मेट अपने रिश्तेदारों व मजदूरों से पैसे लेकर जॉब कार्ड पर हाजिरी भर देते हैं, जबकि दिन में 10-15 लोग आकर केवल सेल्फी लेकर चले जाते हैं। उनके अनुसार, चार महीने में 8 लाख रुपये 'डकार' लिए गए हैं, लेकिन पार्क की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। बच्चों की एक मंडली ने बताया कि जब वे यहां खेलने आते थे तो उनके पैरों में कांच चुभ जाता था, और अब उनकी मां उन्हें पार्क में आने नहीं देती हैं। जनता की मांग है कि नरेगा की सोशल ऑडिट कराई जाए और एक सभा बुलाकर बछेकी उद्यान से संबंधित सभी मस्टर रोल सार्वजनिक किए जाएं। ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि फर्जी हाजिरी का पैसा दोषी मेट और सचिव से वसूला जाए, साथ ही दोषी मेट, रोजगार सहायक और ठेकेदार पर मुकदमा दर्ज किया जाए। उन्होंने नरेगा में फेस अटेंडेंस को अनिवार्य करने की भी मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 2 अक्टूबर गांधी जयंती से पहले पार्क को साफ नहीं किया गया, तो वे खुद झाड़ू उठाकर सफाई करेंगे।
राजाखेड़ा नगर पालिका के हनुमान बछेकी मंदिर पार्क, जिसे बछेकी उद्यान भी कहा जाता है, में नरेगा योजना के तहत सफाई और सौंदर्यीकरण का काम पिछले चार महीने से केवल कागजों में ही चल रहा है। इस 'कागजी' काम पर लाखों रुपये का भुगतान भी हो चुका है, लेकिन हकीकत में पार्क की हालत जस की तस बनी हुई है और गंदगी के कारण बच्चे भी यहां कदम नहीं रख पा रहे हैं। नगर पालिका के रिकॉर्ड दर्शाते हैं कि मई 2026 से बछेकी उद्यान की सफाई, घास कटाई और रंग-रोगन के लिए लगातार मस्टर रोल भरे जा रहे हैं, जिनमें हर हफ्ते 15-20 मजदूरों को काम पर दिखाया गया है। इसके विपरीत, पार्क में एक फुट तक ऊंची घास उगी है, झूले और फिसलपट्टी टूटे पड़े हैं, धूल की मोटी परत जमी है, और जगह-जगह शराब की बोतलें व कचरे के ढेर लगे हैं। मौके पर न तो कोई नया रंग किया गया है, न ही पौधे लगाए गए हैं, और घास तक नहीं काटी गई है। स्थानीय निवासियों विष्णु सिंह और मुकेश कुमार बघेल ने बताया कि पार्क के लिए कई कर्मचारियों की ड्यूटी लगी है, लेकिन उनमें से कोई भी नहीं आता। उन्होंने आरोप लगाया कि मेट अपने रिश्तेदारों व मजदूरों से पैसे लेकर जॉब कार्ड पर हाजिरी भर देते हैं, जबकि दिन में 10-15 लोग आकर केवल सेल्फी लेकर चले जाते हैं। उनके अनुसार, चार महीने में 8 लाख रुपये 'डकार' लिए गए हैं, लेकिन पार्क की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। बच्चों की एक मंडली ने बताया कि जब वे यहां खेलने आते थे तो उनके पैरों में कांच चुभ जाता था, और अब उनकी मां उन्हें पार्क में आने नहीं देती हैं। जनता की मांग है कि नरेगा की सोशल ऑडिट कराई जाए और एक सभा बुलाकर बछेकी उद्यान से संबंधित सभी मस्टर रोल सार्वजनिक किए जाएं। ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि फर्जी हाजिरी का पैसा दोषी मेट और सचिव से वसूला जाए, साथ ही दोषी मेट, रोजगार सहायक और ठेकेदार पर मुकदमा दर्ज किया जाए। उन्होंने नरेगा में फेस अटेंडेंस को अनिवार्य करने की भी मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 2 अक्टूबर गांधी जयंती से पहले पार्क को साफ नहीं किया गया, तो वे खुद झाड़ू उठाकर सफाई करेंगे।
- मनीषा मौत का मामला अब और गरमा गया है, जिसके चलते मनीषा के पिता संजय को भिवानी आने से रोक दिया गया है। भिवानी आने से रोके जाने के बाद, संजय ने कुडलबास में ही अपना अनशन शुरू कर दिया है।1
- भिवानी जिले के बीरण गांव के ग्रामीणों ने बिजली की समस्या के संबंध में भिवानी-महेंद्रगढ़ के सांसद धर्मबीर सिंह से मुलाकात की। ग्रामीणों ने अपनी बिजली संबंधी परेशानियों को सांसद के समक्ष रखा। यह मुलाकात बिजली कटौती और आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों के बीच हुई, जिसके चलते ग्रामीणों को सांसद से मिलकर अपनी आवाज़ उठानी पड़ी।1
- मनीषा के पिता को भिवानी जाने की अनुमति न मिलने के कारण उन्होंने रास्ते में ही आमरण अनशन प्रारंभ कर दिया है।1
- रोहतक पीजीआई में पिछले कई दिनों से सीवर का काम चल रहा है, लेकिन यह अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। वर्तमान में पीजीआई में सीवर खुला पड़ा है, जिसके कारण आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जनता ने सरकार से विनम्र विनती की है कि इस अधूरे सीवर के काम को जल्द से जल्द पूरा करवाया जाए, ताकि लोगों को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।1
- रोहतक की बाग़ वाली गली से जुड़े एक मामले में एक बड़ा खुलासा सामने आया है। इस खुलासे के अनुसार, फर्जी प्रॉपर्टी आईडी दिखाकर संपत्तियों की रजिस्ट्री करवाई गई और उन पर अवैध रूप से कब्ज़े किए गए हैं। इस पूरे मामले में यह सवाल उठ रहा है कि क्या फर्जी प्रॉपर्टी आईडी का उपयोग करके ही ये सभी कब्ज़े किए गए हैं।1
- कैबिनेट मंत्री रणवीर गंगवा ने एक अहम राजनीतिक बयान दिया है, जिसमें उन्होंने बहन आशा जी के भविष्य में बढ़ते राजनीतिक कद की ओर इशारा किया। गंगवा ने कहा, "इबकै तो विधायक बनगे, लाग्गै आग्गै बहन आशा जी के नाम के नारे लाने पड़ेंगे!" इस टिप्पणी को बहन आशा जी के लिए आगामी राजनीतिक भूमिका या बढ़ी हुई प्रमुखता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।1
- हरियाणा के सोनीपत में बिजली की भारी कटौती ने स्थानीय जनता को बेहद परेशान कर दिया है। भीषण गर्मी के इस मौसम में लोग बिजली की कमी से जूझ रहे हैं, जहाँ 24 घंटे में से मुश्किल से 2 से 3 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। इस अत्यधिक बिजली कटौती का खामियाजा बच्चों को भी भुगतना पड़ रहा है, जो भीषण गर्मी के कारण बेहद परेशान हैं। बिजली की लगातार अनुपलब्धता से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और लोग इस स्थिति से त्राहिमाम कर रहे हैं।1
- रोहतक के मेन रोड पर एक 'मौत का गड्ढा' बना हुआ है, जिसके कारण हर पल बड़े हादसे का गंभीर खतरा मंडरा रहा है।1