खस्ताहाल सड़कों का सबसे बुरा असर एम्बुलेंस सेवाओं पर पड़ता है। मरीजों को अस्पताल ले जाने में लगने वाला अतिरिक्त समय कई बार जानलेवा मेजा क्षेत्र की प्रमुख संपर्क मार्गों की बदहाल स्थिति पर एक संक्षिप्त रिपोर्ट: मेजा: विकास की दौड़ में पिछड़ती जर्जर सड़कें उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जनपद अंतर्गत मेजा तहसील के विभिन्न ग्रामीण और मुख्य संपर्क मार्ग वर्तमान में अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। कहने को तो सरकार 'गड्ढा मुक्त' सड़कों का दावा करती है, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। मेजा खास, कोहड़ार, सिरसा और मांडा को जोड़ने वाली कई महत्वपूर्ण सड़कें आज बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। प्रमुख समस्याएँ और जनजीवन पर प्रभाव * आवागमन में बाधा: सड़कों की गिट्टियां उखड़ जाने के कारण दोपहिया वाहन चालकों का संतुलन बिगड़ना आम बात हो गई है। बरसात के मौसम में ये गड्ढे तालाब का रूप ले लेते हैं, जिससे राहगीरों को यह अंदाजा ही नहीं मिल पाता कि सड़क कहाँ है और गड्ढा कहाँ। * स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट: खस्ताहाल सड़कों का सबसे बुरा असर एम्बुलेंस सेवाओं पर पड़ता है। मरीजों को अस्पताल ले जाने में लगने वाला अतिरिक्त समय कई बार जानलेवा साबित होता है। * आर्थिक नुकसान: बदहाल रास्तों के कारण वाहनों के पुर्जे जल्दी खराब हो रहे हैं, जिससे स्थानीय ट्रांसपोर्टरों और किसानों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। धूल के गुबार से सड़क किनारे स्थित दुकानों और घरों में रहने वाले लोग सांस की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। प्रशासनिक उदासीनता स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपने के बावजूद, केवल आश्वासन ही मिलते हैं। पैच वर्क के नाम पर खानापूर्ति की जाती है, जो पहली बारिश में ही बह जाती है। > निष्कर्ष: मेजा की इन सड़कों की मरम्मत केवल चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि हज़ारों लोगों की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा गंभीर विषय है। यदि समय रहते पीडब्ल्यूडी (PWD) और संबंधित विभाग ने सुध नहीं ली, तो क्षेत्र का विकास पूरी तरह ठप हो जाएगा। प्रशासन को चाहिए कि वह भ्रष्टाचार मुक्त और गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण सुनिश्चित करे। >
खस्ताहाल सड़कों का सबसे बुरा असर एम्बुलेंस सेवाओं पर पड़ता है। मरीजों को अस्पताल ले जाने में लगने वाला अतिरिक्त समय कई बार जानलेवा मेजा क्षेत्र की प्रमुख संपर्क मार्गों की बदहाल स्थिति पर एक संक्षिप्त रिपोर्ट: मेजा: विकास की दौड़ में पिछड़ती जर्जर सड़कें उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जनपद अंतर्गत मेजा तहसील के विभिन्न ग्रामीण और मुख्य संपर्क मार्ग वर्तमान में अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। कहने को तो सरकार 'गड्ढा मुक्त' सड़कों का दावा करती है, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। मेजा खास, कोहड़ार, सिरसा और मांडा को जोड़ने वाली कई महत्वपूर्ण सड़कें आज बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। प्रमुख समस्याएँ और जनजीवन पर प्रभाव * आवागमन में बाधा: सड़कों की गिट्टियां उखड़ जाने के कारण दोपहिया वाहन चालकों का संतुलन बिगड़ना आम बात हो गई है। बरसात के मौसम में ये गड्ढे तालाब का रूप ले लेते हैं, जिससे राहगीरों को यह अंदाजा ही नहीं मिल पाता कि सड़क कहाँ है और गड्ढा कहाँ। * स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट: खस्ताहाल सड़कों का सबसे बुरा असर एम्बुलेंस सेवाओं पर पड़ता है। मरीजों को अस्पताल ले जाने में लगने वाला अतिरिक्त समय कई बार जानलेवा साबित होता है। * आर्थिक नुकसान: बदहाल रास्तों के कारण वाहनों के पुर्जे जल्दी खराब हो रहे हैं, जिससे स्थानीय ट्रांसपोर्टरों और किसानों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। धूल के गुबार से सड़क किनारे स्थित दुकानों और घरों में रहने वाले लोग सांस की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। प्रशासनिक उदासीनता स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपने के बावजूद, केवल आश्वासन ही मिलते हैं। पैच वर्क के नाम पर खानापूर्ति की जाती है, जो पहली बारिश में ही बह जाती है। > निष्कर्ष: मेजा की इन सड़कों की मरम्मत केवल चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि हज़ारों लोगों की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा गंभीर विषय है। यदि समय रहते पीडब्ल्यूडी (PWD) और संबंधित विभाग ने सुध नहीं ली, तो क्षेत्र का विकास पूरी तरह ठप हो जाएगा। प्रशासन को चाहिए कि वह भ्रष्टाचार मुक्त और गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण सुनिश्चित करे। >
- Post by Manish Susari संपादकस्थानीयsi न्यूज़1
- Post by Questions News1
- करछना, प्रयागराज। थाना करछना क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) करछना में स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही और अव्यवस्था सामने आई है। मरीजों और उनके परिजनों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में पर्ची बनवाने के लिए लाइन में खड़े लोगों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि बिना लाइन वाले और परिचित लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि लंबे समय से लाइन में खड़े होने के बावजूद उनका नंबर नहीं आ रहा है। वहीं, कुछ लोग सीधे अंदर जाकर आसानी से पर्ची बनवा रहे हैं, जिससे आम मरीजों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। मरीजों ने यह भी आरोप लगाया कि डॉक्टरों का समय सीमित होता है और वे निर्धारित समय से पहले ही उठ जाते हैं, जिससे कई लोगों को बिना इलाज के वापस लौटना पड़ता है। इस अव्यवस्था के कारण खासकर दूर-दराज से आए मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।3
- Post by गुरु ज्ञान1
- प्रयागराज के पुरानी झूंसी निवासी मोहम्मद साहिल, जिसके घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं,शाम करीब 6 बजे तक घर पर सजावट का काम देख रहा था। उसके बाद साहिल रविवार की शाम कपड़ा खरीदने के लिए शहर के लिए निकला। घर में खुशियों का माहौल था और महज़ 2–4 दिन बाद शादी होनी थी,7 बजे के लगभग जैसे ही वे ECC कॉलेज के सामने पहुंचा एक पल में सब कुछ बदल गया। अचानक हवा में तना हुआ प्रतिबंधित चाइनीज मंझा सामने आ गया और मांझे ने साहिल की गर्दन को उलझा दिया। बाइक चला रहे साहिल के मामा इम्तियाज़ ने तुरंत गाड़ी रोकने की कोशिश की, लेकिन तब तक पीछे बैठे साहिल की गर्दन में मंझा गहराई तक घुस चुका था। धार इतनी तेज थी कि गर्दन बुरी तरह कट गई। खून से लथपथ हालत में साहिल को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी गर्दन पर टांके लगाए गए और किसी तरह उसकी जान बच सकी। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि प्रतिबंध के बावजूद शहर में चाइनीज मंझा खुलेआम बिक रहा है और लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ लगातार हो रहा है। ये प्रयागराज की पहली घटना नहीं ऐसी घटना बराबर देखने को मिल रही है जबकि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा इस पर सख्त प्रतिबंध के स्पष्ट आदेश दिए जा चुके हैं। जरूरत है कि प्रशासन तुरंत सख्त कदम उठाए, अवैध रूप से मंझा बेचने वालों पर कार्रवाई करे और मुख्यमंत्री के आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करे,ताकि किसी और घर की खुशियां इस तरह हादसे में न बदलें।1
- Post by द कहर न्यूज़ एजेंसी1
- Post by हिमांशु गुप्ता समाचार नेशन1
- Post by VB News Prayagraj1