कोटकपूरा में 55 करोड़ के कथित भुगतान विवाद में नया मोड़, वायरल ऑडियो-वीडियो से बढ़े सवाल आढ़तियों के धरने पर पहुंचे विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां, 11 सदस्यीय कमेटी को बातचीत के लिए बुलाया; दोनों पक्षों के दावों के बीच दस्तावेजी प्रमाण का इंतजार कोटकपूरा, 26 अगस्त। कोटकपूरा, जैतो, फरीदकोट और बरीवाला मंडियों के आढ़तियों और टीआर एग्रो इंडस्ट्रीज के बीच करीब 55 करोड़ रुपये के कथित भुगतान विवाद को लेकर चल रहा मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। आढ़तियों की ओर से भुगतान की मांग को लेकर धरना दिए जाने के बीच अब कथित फोन रिकॉर्डिंग की ऑडियो और माफी से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात सामने आई है। हालांकि, वायरल ऑडियो और वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आढ़तियों का आरोप है कि टीआर एग्रो इंडस्ट्रीज पर विभिन्न मंडियों के आढ़तियों की करीब 55 करोड़ रुपये की राशि बकाया है। आढ़तियों के अनुसार फर्म के मालिक की ओर से भुगतान को लेकर सकारात्मक आश्वासन नहीं मिलने के बाद उन्होंने धरना शुरू किया। दूसरी ओर, फर्म के मालिक ने कथित देनदारी से इनकार किया है और विवाद को लेकर अदालत का रुख करने की बात कही है। विधानसभा स्पीकर ने धरने पर पहुंचकर ली स्थिति की जानकारी विवाद के बीच पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां के आढ़तियों के धरने पर पहुंचने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि उन्होंने धरना स्थल पर पहुंचकर आढ़तियों की समस्याएं सुनीं और मामले को बातचीत के माध्यम से हल करने की पहल की। जानकारी के अनुसार, स्पीकर ने दोनों पक्षों के बीच बातचीत के लिए 11 सदस्यीय कमेटी को अपने कार्यालय में बुलाया है। इस पहल से विवाद के समाधान की उम्मीद जगी है, लेकिन वास्तविक देनदारी और भुगतान संबंधी विवाद का अंतिम समाधान संबंधित दस्तावेजों और दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत रिकॉर्ड के आधार पर ही संभव होगा। बरीवाला के आढ़तियों का भी विवाद में जुड़ने का दावा उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में बरीवाला मंडी के आढ़तियों के भी इस विवाद में शामिल होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, बरीवाला के करीब 15 आढ़तियों की लगभग 8 करोड़ रुपये की राशि संबंधित फर्म से कथित रूप से लेनी बताई गई है। हालांकि, विभिन्न पक्षों की ओर से बताए जा रहे आंकड़ों और दावों का स्वतंत्र दस्तावेजी सत्यापन अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। ऐसे में 55 करोड़ रुपये की पूरी कथित देनदारी को अंतिम रूप से प्रमाणित तथ्य मानना जल्दबाजी होगी। वायरल ऑडियो और वीडियो ने खड़े किए नए सवाल विवाद के बीच कथित फोन बातचीत की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग और माफी से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की चर्चा है। इन सामग्रियों को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। रिकॉर्डिंग कब और किस परिस्थिति में की गई, किसने इसे रिकॉर्ड किया, क्या रिकॉर्डिंग पूरी है, इसमें किसी प्रकार की एडिटिंग हुई है या नहीं और वीडियो का मूल स्रोत क्या है, इन सवालों का जवाब अभी स्पष्ट नहीं है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी फोन बातचीत की रिकॉर्डिंग और उसे सार्वजनिक रूप से प्रसारित करने की वैधानिक स्थिति परिस्थितियों पर निर्भर करती है। बातचीत को रिकॉर्ड करने वाला व्यक्ति स्वयं उस बातचीत का हिस्सा था या कोई तीसरा व्यक्ति, रिकॉर्डिंग किस तरीके से प्राप्त की गई और बाद में उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया, जैसे तथ्य कानूनी मूल्यांकन में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की प्रामाणिकता और साक्ष्य के रूप में स्वीकार्यता भी अलग कानूनी प्रश्न है। इसलिए केवल सोशल मीडिया पर वायरल हो रही किसी ऑडियो या वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं माना जा सकता। दोनों पक्षों के दावों के बीच दस्तावेजों की अहमियत इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण सवाल अब यह है कि कथित 55 करोड़ रुपये की देनदारी का दस्तावेजी आधार क्या है। आढ़तियों के पास संबंधित खरीद और भुगतान के कौन से रिकॉर्ड हैं, फर्म की बहीखाता और लेजर में क्या दर्ज है, बैंक लेनदेन क्या बताते हैं और मंडी से संबंधित दस्तावेजों में क्या जानकारी दर्ज है, इन सभी बिंदुओं का मिलान आवश्यक होगा। यदि किसी पक्ष के पास भुगतान या बकाया राशि से संबंधित बिल, रसीद, बैंक स्टेटमेंट, लेजर, मंडी रिकॉर्ड अथवा लिखित समझौते हैं तो इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर विवाद को अधिक स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है। विवाद में सोशल मीडिया की भूमिका पर भी सवाल इस मामले में सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री के कारण विवाद को लेकर चर्चाएं और आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हुए हैं। आपसी लेनदेन से जुड़े विवादों में सोशल मीडिया और पत्रकारों के माध्यम से एक-दूसरे पर आरोप लगाने के बजाय संबंधित दस्तावेज और आधिकारिक रिकॉर्ड सामने रखना अधिक प्रभावी रास्ता माना जा सकता है। पत्रकारिता के स्तर पर भी किसी वायरल ऑडियो या वीडियो को अंतिम सत्य मानने से पहले उसकी स्वतंत्र पुष्टि, दोनों पक्षों का पक्ष और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच आवश्यक है। किसी व्यक्ति के खिलाफ अप्रमाणित आरोपों को तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। समाधान के लिए स्वतंत्र जांच और दस्तावेजी मिलान जरूरी मामले के समाधान के लिए आढ़तियों की ओर से बताई जा रही बकाया राशि की व्यक्ति-वार और मंडी-वार सूची तैयार की जा सकती है। इसके साथ संबंधित फर्म के लेजर, खरीद रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन, मंडी दस्तावेज और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान कराया जाना विवाद को स्पष्ट करने में मदद कर सकता है। वायरल ऑडियो और वीडियो को लेकर भी मूल डिजिटल फाइल सुरक्षित रखकर आवश्यकता पड़ने पर तकनीकी या फोरेंसिक जांच कराई जा सकती है। यदि किसी पक्ष को कानूनी आपत्ति है तो वह सक्षम न्यायिक मंच के समक्ष अपने दस्तावेज और दावे प्रस्तुत कर सकता है। फिलहाल इस विवाद में आढ़तियों की ओर से करोड़ों रुपये के बकाये का दावा, फर्म की ओर से कथित इनकार, धरना और विधानसभा स्पीकर की मध्यस्थता की पहल सामने आई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि 11 सदस्यीय कमेटी के समक्ष दोनों पक्ष कौन से दस्तावेज प्रस्तुत करते हैं और विवाद के समाधान की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं। नोट: यह समाचार उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। 55 करोड़ रुपये की कथित देनदारी तथा वायरल ऑडियो-वीडियो की स्वतंत्र न्यायिक अथवा फोरेंसिक पुष्टि को अंतिम तथ्य नहीं माना गया है। संबंधित सभी पक्षों का पक्ष और कानूनी अधिकार सुरक्षित हैं।
कोटकपूरा में 55 करोड़ के कथित भुगतान विवाद में नया मोड़, वायरल ऑडियो-वीडियो से बढ़े सवाल आढ़तियों के धरने पर पहुंचे विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां, 11 सदस्यीय कमेटी को बातचीत के लिए बुलाया; दोनों पक्षों के दावों के बीच दस्तावेजी प्रमाण का इंतजार कोटकपूरा, 26 अगस्त। कोटकपूरा, जैतो, फरीदकोट और बरीवाला मंडियों के आढ़तियों और टीआर एग्रो इंडस्ट्रीज के बीच करीब 55 करोड़ रुपये के कथित भुगतान विवाद को लेकर चल रहा मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। आढ़तियों की ओर से भुगतान की मांग को लेकर धरना दिए जाने के बीच अब कथित फोन रिकॉर्डिंग की ऑडियो और माफी से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात सामने आई है। हालांकि, वायरल ऑडियो और वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आढ़तियों का आरोप है कि टीआर एग्रो इंडस्ट्रीज पर विभिन्न मंडियों के आढ़तियों की करीब 55 करोड़ रुपये की राशि बकाया है। आढ़तियों के अनुसार फर्म के मालिक की ओर से भुगतान को लेकर सकारात्मक आश्वासन नहीं मिलने के बाद उन्होंने धरना शुरू किया। दूसरी ओर, फर्म के मालिक ने कथित देनदारी से इनकार किया है और विवाद को लेकर अदालत का रुख करने की बात कही है। विधानसभा स्पीकर ने धरने पर पहुंचकर ली स्थिति की जानकारी विवाद के बीच पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां के आढ़तियों के धरने पर पहुंचने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि उन्होंने धरना स्थल पर पहुंचकर आढ़तियों की समस्याएं सुनीं और मामले को बातचीत के माध्यम से हल करने की पहल की। जानकारी के अनुसार, स्पीकर ने दोनों पक्षों के बीच बातचीत के लिए 11 सदस्यीय कमेटी को अपने कार्यालय में बुलाया है। इस पहल से विवाद के समाधान की उम्मीद जगी है, लेकिन वास्तविक देनदारी और भुगतान संबंधी विवाद का अंतिम समाधान संबंधित दस्तावेजों और दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत रिकॉर्ड के आधार पर ही संभव होगा। बरीवाला के आढ़तियों का भी विवाद में जुड़ने का दावा उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में बरीवाला मंडी के आढ़तियों के भी इस विवाद में शामिल होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, बरीवाला के करीब 15 आढ़तियों की लगभग 8 करोड़ रुपये की राशि संबंधित फर्म से कथित रूप से लेनी बताई गई है। हालांकि, विभिन्न पक्षों की ओर से बताए जा रहे आंकड़ों और दावों का स्वतंत्र दस्तावेजी सत्यापन अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। ऐसे में 55 करोड़ रुपये की पूरी कथित देनदारी को अंतिम रूप से प्रमाणित तथ्य मानना जल्दबाजी होगी। वायरल ऑडियो और वीडियो ने खड़े किए नए सवाल विवाद के बीच कथित फोन बातचीत की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग और माफी से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की चर्चा है। इन सामग्रियों को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। रिकॉर्डिंग कब और किस परिस्थिति में की गई, किसने इसे रिकॉर्ड किया, क्या रिकॉर्डिंग पूरी है, इसमें किसी प्रकार की एडिटिंग हुई है या नहीं और वीडियो का मूल स्रोत क्या है, इन सवालों का जवाब अभी स्पष्ट नहीं है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी फोन बातचीत की रिकॉर्डिंग और उसे सार्वजनिक रूप से प्रसारित करने की वैधानिक स्थिति परिस्थितियों पर निर्भर करती है। बातचीत को रिकॉर्ड करने वाला व्यक्ति स्वयं उस बातचीत का हिस्सा था या कोई तीसरा व्यक्ति, रिकॉर्डिंग किस तरीके से प्राप्त की गई और बाद में उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया, जैसे तथ्य कानूनी मूल्यांकन में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की प्रामाणिकता और साक्ष्य के रूप में स्वीकार्यता भी अलग कानूनी प्रश्न है। इसलिए केवल सोशल मीडिया पर वायरल हो रही किसी ऑडियो या वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं माना जा सकता। दोनों पक्षों के दावों के बीच दस्तावेजों की अहमियत इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण सवाल अब यह है कि कथित 55 करोड़ रुपये की देनदारी का दस्तावेजी आधार क्या है। आढ़तियों के पास संबंधित खरीद और भुगतान के कौन से रिकॉर्ड हैं, फर्म की बहीखाता और लेजर में क्या दर्ज है, बैंक लेनदेन क्या बताते हैं और मंडी से संबंधित दस्तावेजों में क्या जानकारी दर्ज है, इन सभी बिंदुओं का मिलान आवश्यक होगा। यदि किसी पक्ष के पास भुगतान या बकाया राशि से संबंधित बिल, रसीद, बैंक स्टेटमेंट, लेजर, मंडी रिकॉर्ड अथवा लिखित समझौते हैं तो इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर विवाद को अधिक स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है। विवाद में सोशल मीडिया की भूमिका पर भी सवाल इस मामले में सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री के कारण विवाद को लेकर चर्चाएं और आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हुए हैं। आपसी लेनदेन से जुड़े विवादों में सोशल मीडिया और पत्रकारों के माध्यम से एक-दूसरे पर आरोप लगाने के बजाय संबंधित दस्तावेज और आधिकारिक रिकॉर्ड सामने रखना अधिक प्रभावी रास्ता माना जा सकता है। पत्रकारिता के स्तर पर भी किसी वायरल ऑडियो या वीडियो को अंतिम सत्य मानने से पहले उसकी स्वतंत्र पुष्टि, दोनों पक्षों का पक्ष और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच आवश्यक है। किसी व्यक्ति के खिलाफ अप्रमाणित आरोपों को तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। समाधान के लिए स्वतंत्र जांच और दस्तावेजी मिलान जरूरी मामले के समाधान के लिए आढ़तियों की ओर से बताई जा रही बकाया राशि की व्यक्ति-वार और मंडी-वार सूची तैयार की जा सकती है। इसके साथ संबंधित फर्म के लेजर, खरीद रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन, मंडी दस्तावेज और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान कराया जाना विवाद को स्पष्ट करने में मदद कर सकता है। वायरल ऑडियो और वीडियो को लेकर भी मूल डिजिटल फाइल सुरक्षित रखकर आवश्यकता पड़ने पर तकनीकी या फोरेंसिक जांच कराई जा सकती है। यदि किसी पक्ष को कानूनी आपत्ति है तो वह सक्षम न्यायिक मंच के समक्ष अपने दस्तावेज और दावे प्रस्तुत कर सकता है। फिलहाल इस विवाद में आढ़तियों की ओर से करोड़ों रुपये के बकाये का दावा, फर्म की ओर से कथित इनकार, धरना और विधानसभा स्पीकर की मध्यस्थता की पहल सामने आई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि 11 सदस्यीय कमेटी के समक्ष दोनों पक्ष कौन से दस्तावेज प्रस्तुत करते हैं और विवाद के समाधान की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं। नोट: यह समाचार उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। 55 करोड़ रुपये की कथित देनदारी तथा वायरल ऑडियो-वीडियो की स्वतंत्र न्यायिक अथवा फोरेंसिक पुष्टि को अंतिम तथ्य नहीं माना गया है। संबंधित सभी पक्षों का पक्ष और कानूनी अधिकार सुरक्षित हैं।
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- श्री अकाल तख्त साहिब पर अरदास के बाद पंथिक संगठनों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की इमान सिंह मान ने कहा – गुरु साहिब ने अकाल पुरख को सबसे ऊपर माना, दूसरे धार्मिक विचारों को नहीं भाई रणजीत सिंह दमदमी टकसाल ने कहा – किसी पर भी ज़बरदस्ती धर्म या विश्वास थोपना संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ है भारत की नींव अलग-अलग धर्मों, भाषाओं और विचारधाराओं की आज़ादी पर टिकी है: पंथिक नेता अमृतसर. श्री अकाल तख्त साहिब पर पंज प्यारों के अरदास के बाद पंथिक संगठनों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान पंथिक नेताओं ने धार्मिक आज़ादी, सिख धर्म के बुनियादी उसूलों और किसी भी धार्मिक विचार या रिवाज को ज़बरदस्ती लागू करने से जुड़े मुद्दों पर अपना रुख बताया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, पूर्व MP और शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के नेता सिमरनजीत सिंह मान के बेटे इमान सिंह मान ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बाणी में अकाल पुरख का उसूल और ‘एक ओंकार’ इसकी बाणी के सेंटर में है। उन्होंने कहा कि गुरुओं ने लोगों को समझाने के लिए अलग-अलग नामों और निशानों का इस्तेमाल किया, लेकिन सबसे बड़ी ताकत अकाल पुरख से जोड़ी। इमान सिंह मान ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी की बाणी में यह भी साफ किया गया है कि सिख धर्म किसी खास धार्मिक ग्रंथ या परंपरा को सिख धर्म का आधार नहीं मानता, बल्कि गुरु की बाणी का सेंट्रल स्थान है। उन्होंने कहा कि लोगों को रूहानी सच समझाने के लिए अलग-अलग धार्मिक नामों का ज़िक्र किया गया है और आखिर में सारी ताकत अकाल पुरख की है। सिख नेता भाई रणजीत सिंह दमदमी टकसाल, जो सिख यूथ फेडरेशन भिंडरावाले के प्रेसिडेंट हैं, ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सिख अपनी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार जीते हैं, लेकिन हर व्यक्ति को भारतीय संविधान के दायरे में अपने धर्म का पालन करने की आज़ादी होनी चाहिए। भाई रणजीत सिंह ने कानून के ज़रिए हर व्यक्ति पर किसी भी धार्मिक रस्म या विचार को ज़रूरी बनाने पर एतराज़ जताया। उन्होंने कहा कि भारत एक कई धर्मों वाला और कई भाषाओं वाला देश है, जहाँ अलग-अलग देशों, धर्मों और सोच के लोग रहते हैं। ऐसे में किसी एक धार्मिक प्रथा को ज़बरदस्ती लागू करना देश की अलग-अलग तरह की बुनियाद के लिए चुनौती बन सकता है। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म के अंदर भी अलग-अलग सोच है और कुछ लोग देवी-देवताओं के कॉन्सेप्ट में यकीन नहीं करते। इसी तरह देश में ऐसे लोग भी हैं जो किसी भी धार्मिक विश्वास में यकीन नहीं करते। इसलिए हर नागरिक की आस्था और धार्मिक आज़ादी का सम्मान किया जाना चाहिए। पंथिक नेताओं ने कहा कि वे किसी दूसरे धर्म या उसकी मान्यताओं का विरोध नहीं करते, लेकिन सिखों की धार्मिक भावनाओं और आज़ादी की भी संवैधानिक दायरे में रक्षा होनी चाहिए। उन्होंने इस मामले पर श्री अकाल तख्त साहिब से सफाई की मांग करते हुए कहा कि धार्मिक मामलों में किसी भी तरह की ज़बरदस्ती के बजाय आपसी सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। बाइट:--- शिरोमणि अकाली दल अमृतसर के नेता ईमान सिंह मान बाइट:--- सिख नेता भाई रणजीत सिंह दमदमी टकसाल1
- ਗੋਇੰਦਵਾਲ ਸਾਹਿਬ ’ਚ ਮਾਵਾਂ-ਧੀਆਂ ਸਤਿਕਾਰ ਯੋਜਨਾ ਦੇ ਸਮਾਗਮ ’ਚ ਨਹੀਂ ਪੁੱਜੇ CM ਮਾਨ, ਕਈਆਂ ਦੇ ਚਿਹਰਿਆਂ ’ਤੇ ਨਜ਼ਰ ਆਈ ਨਿਰਾਸ਼ਾ ਗੋਇੰਦਵਾਲ ਸਾਹਿਬ ਵਿਖੇ ਮਾਵਾਂ-ਧੀਆਂ ਸਤਿਕਾਰ ਯੋਜਨਾ ਤਹਿਤ ਰੱਖੇ ਗਏ ਸਮਾਗਮ ਦੌਰਾਨ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਦੇ ਨਾ ਪੁੱਜਣ ਕਾਰਨ ਮੌਕੇ ’ਤੇ ਮੌਜੂਦ ਗੋਇੰਦਵਾਲ ਸਾਹਿਬ ’ਚ ਮਾਵਾਂ-ਧੀਆਂ ਸਤਿਕਾਰ ਯੋਜਨਾ ਦੇ ਸਮਾਗਮ ’ਚ ਨਹੀਂ ਪੁੱਜੇ CM ਮਾਨ, ਕਈਆਂ ਦੇ ਚਿਹਰਿਆਂ ’ਤੇ ਨਜ਼ਰ ਆਈ ਨਿਰਾਸ਼ਾ ਗੋਇੰਦਵਾਲ ਸਾਹਿਬ ਵਿਖੇ ਮਾਵਾਂ-ਧੀਆਂ ਸਤਿਕਾਰ ਯੋਜਨਾ ਤਹਿਤ ਰੱਖੇ ਗਏ ਸਮਾਗਮ ਦੌਰਾਨ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਦੇ ਨਾ ਪੁੱਜਣ ਕਾਰਨ ਮੌਕੇ ’ਤੇ ਮੌਜੂਦ ਕਈ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਚਿਹਰਿਆਂ ’ਤੇ ਨਿਰਾਸ਼ਾ ਦੇਖਣ ਨੂੰ ਮਿਲੀ। ਲੋਕ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਦੇ ਆਉਣ ਦੀ ਉਮੀਦ ਨਾਲ ਸਮਾਗਮ ਵਿੱਚ ਪਹੁੰਚੇ ਸਨ।1
- नशा तस्करी के खिलाफ फाजिल्का पुलिस की सख्त कार्रवाई नशा तस्करी से संबंधित व्यक्तियों द्वारा सरकारी जगह पर किए गए अवैध कब्जे को कानून के अनुसार करवाया कब्जा मुक्त फाजिल्का, 25 अगस्त 2026: नशा तस्करी और समाज विरोधी गतिविधियों के खिलाफ फाजिल्का पुलिस द्वारा चलाई जा रही मुहिम के तहत आज आर्य नगर, फाजिल्का में कृष्ण कुमार और अमन, पुत्र आत्मा राम, निवासी आर्य नगर, फाजिल्का के मकान संबंधी डेमोलिशन की कार्रवाई की गई। जानकारी के अनुसार, उक्त व्यक्तियों द्वारा सरकारी जगह पर गैर-कानूनी तरीके से कब्जा किया हुआ था। इस संबंध में नगर कौंसिल के अधिकारियों की मौजूदगी में कानून के अनुसार कार्रवाई करते हुए सरकारी जगह को कब्जा मुक्त करवाया गया। दर्ज मुकदमों का विवरण कृष्ण कुमार के खिलाफ कुल 09 मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें 02 मुकदमे एक्साइज एक्ट और 01 मुकदमा एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज है। इसी तरह, उसके भाई अमन के खिलाफ कुल 05 मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें 03 मुकदमे एनडीपीएस एक्ट और 02 मुकदमे एक्साइज एक्ट के तहत दर्ज हैं। फाजिल्का पुलिस द्वारा नशा तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने और इससे जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई लगातार जारी है। इसके साथ ही सरकारी जमीन पर किए गए अवैध कब्जों के खिलाफ भी संबंधित विभागों के सहयोग से कानून के अनुसार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। फाजिल्का पुलिस द्वारा स्पष्ट किया गया है कि नशा तस्करी और समाज विरोधी गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसी गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कानून के दायरे में रहते हुए सख्त और निरंतर कार्रवाई जारी रहेगी4
- ਨਸ਼ਾ ਤਸਕਰੀ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਫਾਜ਼ਿਲਕਾ ਪੁਲਿਸ ਦੀ ਸਖ਼ਤ ਕਾਰਵਾਈ* *ਨਸ਼ਾ ਤਸਕਰੀ ਨਾਲ ਸਬੰਧਤ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਵੱਲੋਂ ਕੀਤੇ ਸਰਕਾਰੀ ਜਗ੍ਹਾ ’ਤੇ ਗੈਰ-ਕਾਨੂੰਨੀ ਕਬਜ਼ੇ ਨੂੰ ਕਾਨੂੰਨ ਅਨੁਸਾਰ ਕਰਵਾਇਆ ਕਬਜ਼ਾ ਮੁਕਤ ਫਾਜ਼ਿਲਕਾ, 25 ਅਗਸਤ 2026: ਨਸ਼ਾ ਤਸਕਰੀ ਅਤੇ ਸਮਾਜ ਵਿਰੋਧੀ ਗਤੀਵਿਧੀਆਂ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਫਾਜ਼ਿਲਕਾ ਪੁਲਿਸ ਵੱਲੋਂ ਚਲਾਈ ਜਾ ਰਹੀ ਮੁਹਿੰਮ ਤਹਿਤ ਅੱਜ ਆਰੀਆ ਨਗਰ, ਫਾਜ਼ਿਲਕਾ ਵਿਖੇ ਕ੍ਰਿਸ਼ਨ ਕੁਮਾਰ ਅਤੇ ਅਮਨ, ਪੁੱਤਰ ਆਤਮਾ ਰਾਮ, ਵਾਸੀ ਆਰੀਆ ਨਗਰ, ਫਾਜ਼ਿਲਕਾ ਦੇ ਮਕਾਨ ਸਬੰਧੀ ਡੇਮੋਲਿਸ਼ਨ ਦੀ ਕਾਰਵਾਈ ਕੀਤੀ ਗਈ। ਜਾਣਕਾਰੀ ਅਨੁਸਾਰ, ਉਕਤ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਵੱਲੋਂ ਸਰਕਾਰੀ ਜਗ੍ਹਾ ’ਤੇ ਗੈਰ-ਕਾਨੂੰਨੀ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਕਬਜ਼ਾ ਕੀਤਾ ਹੋਇਆ ਸੀ। ਇਸ ਸਬੰਧੀ ਮਿਉਂਸਪਲ ਕਮੇਟੀ ਦੇ ਅਧਿਕਾਰੀਆਂ ਦੀ ਹਾਜ਼ਰੀ ਵਿੱਚ ਕਾਨੂੰਨ ਅਨੁਸਾਰ ਕਾਰਵਾਈ ਕਰਦਿਆਂ ਸਰਕਾਰੀ ਜਗ੍ਹਾ ਨੂੰ ਕਬਜ਼ਾ ਮੁਕਤ ਕਰਵਾਇਆ ਗਿਆ। ਦਰਜ ਮੁਕੱਦਮਿਆਂ ਦਾ ਵੇਰਵਾ ਕ੍ਰਿਸ਼ਨ ਕੁਮਾਰ ਦੇ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਕੁੱਲ 09 ਮੁਕੱਦਮੇ ਦਰਜ ਹਨ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ 02 ਮੁਕੱਦਮੇ ਐਕਸਾਈਜ਼ ਐਕਟ ਅਤੇ 01 ਮੁਕੱਦਮਾ NDPS ਐਕਟ ਤਹਿਤ ਦਰਜ ਹੈ। ਇਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ, ਉਸਦੇ ਭਰਾ ਅਮਨ ਦੇ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਕੁੱਲ 05 ਮੁਕੱਦਮੇ ਦਰਜ ਹਨ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ 03 ਮੁਕੱਦਮੇ NDPS ਐਕਟ ਅਤੇ 02 ਮੁਕੱਦਮੇ ਐਕਸਾਈਜ਼ ਐਕਟ ਤਹਿਤ ਦਰਜ ਹਨ। ਫਾਜ਼ਿਲਕਾ ਪੁਲਿਸ ਵੱਲੋਂ ਨਸ਼ਾ ਤਸਕਰੀ ਦੇ ਨੈੱਟਵਰਕ ਨੂੰ ਤੋੜਨ ਅਤੇ ਇਸ ਨਾਲ ਜੁੜੇ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਸਖ਼ਤ ਕਾਨੂੰਨੀ ਕਾਰਵਾਈ ਲਗਾਤਾਰ ਜਾਰੀ ਹੈ। ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ ਹੀ ਸਰਕਾਰੀ ਜ਼ਮੀਨ ’ਤੇ ਕੀਤੇ ਗਏ ਗੈਰ-ਕਾਨੂੰਨੀ ਕਬਜ਼ਿਆਂ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਵੀ ਸਬੰਧਤ ਵਿਭਾਗਾਂ ਦੇ ਸਹਿਯੋਗ ਨਾਲ ਕਾਨੂੰਨ ਅਨੁਸਾਰ ਪ੍ਰਭਾਵਸ਼ਾਲੀ ਕਾਰਵਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ। ਫਾਜ਼ਿਲਕਾ ਪੁਲਿਸ ਵੱਲੋਂ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ ਕਿ ਨਸ਼ਾ ਤਸਕਰੀ ਅਤੇ ਸਮਾਜ ਵਿਰੋਧੀ ਗਤੀਵਿਧੀਆਂ ਨੂੰ ਕਿਸੇ ਵੀ ਕੀਮਤ ’ਤੇ ਬਰਦਾਸ਼ਤ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇਗਾ। ਅਜਿਹੀਆਂ ਗਤੀਵਿਧੀਆਂ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮਲ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਕਾਨੂੰਨ ਦੇ ਦਾਇਰੇ ਵਿੱਚ ਰਹਿੰਦਿਆਂ ਸਖ਼ਤ ਅਤੇ ਨਿਰੰਤਰ ਕਾਰਵਾਈ ਜਾਰੀ ਰਹੇਗੀ।4
- ਗੋਇੰਦਵਾਲ ਸਾਹਿਬ ਵਿਖੇ ਪੁੱਜ ਰਹੇ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਵੱਡੀ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੂੰ ਸਵਾਲ ਕਰਨ ਜਾ ਰਹੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਪੁਲਿਸ ਪ੍ਰਸ਼ਾਸਨ ਵੱਲੋਂ ਬੈਰੀਗੇਟ ਲਗਾ ਕੇ ਗਿਆ ਰੋਕਿਆ । ਪੁਲਸ ਤੇ ਕਿਸਾਨ ਹੋ ਗਏ ਧਕਮ ਧਕੀ। ਗੋਇੰਦਵਾਲ ਸਾਹਿਬ ਵਿਖੇ ਪੁੱਜ ਰਹੇ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਸਿੰਘ ਮਾਨ ਵੱਡੀ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੂੰ ਸਵਾਲ ਕਰਨ ਜਾ ਰਹੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਪੁਲਿਸ ਪ੍ਰਸ਼ਾਸਨ ਵੱਲੋਂ ਬੈਰੀਗੇਟ ਲਗਾ ਕੇ ਗਿਆ ਰੋਕਿਆ । ਪੁਲਸ ਤੇ ਕਿਸਾਨ ਹੋ ਗਏ ਧਕਮ ਧਕੀ। ਕਿਸਾਨ ਮਜ਼ਦੂਰ ਸੰਘਰਸ਼ ਕਮੇਟੀ ਪੰਜਾਬ ਵੱਲੋਂ ਸ਼ੰਭੂ ਅਤੇ ਖਨੌਰੀ ਬਾਰਡਰਾਂ 'ਤੇ ਸ਼ਾਂਤਮਈ ਅੰਦੋਲਨ ਦੌਰਾਨ ਹੋਏ ਟਰੈਕਟਰਾਂ, ਟਰਾਲੀਆਂ ਅਤੇ ਹੋਰ ਸਾਜ਼ੋ-ਸਾਮਾਨ ਦੇ ਕਰੀਬ ਕਰੋੜ ਦੇ ਭਾਰੀ ਮਾਲੀ ਨੁਕਸਾਨ ਦੇ ਮੁਆਵਜ਼ੇ ਅਤੇ ਕਿਸਾਨੀ ਮਸਲਿਆਂ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਕਿਸਾਨ ਮਜ਼ਦੂਰ ਮੋਰਚੇ ਵੱਲੋਂ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਨੂੰ ਤਿੱਖੇ ਸਵਾਲ ਕੀਤੇ ਜਾਣਗੇ। ਇਸ ਮੌਕੇ ਸੂਬਾ ਆਗੂ ਤੇ ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਪ੍ਰਧਾਨ ਸ ਸਤਨਾਮ ਸਿੰਘ ਮਾਣੋਚਹਾਲ, ਸਕੱਤਰ ਹਰਜਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਸ਼ਕਰੀ, ਸੀਨੀਅਰ ਮੀਤ ਪ੍ਰਧਾਨ ਜਰਨੈਲ ਸਿੰਘ ਨੂਰਦੀ ਖਜਾਨਚੀ ਫਤਿਹ ਸਿੰਘ ਪਿੱਦੀ ਨੇ ਪ੍ਰੈਸ ਨੋਟ ਜਾਰੀ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਕਿਹਾ ਕਿ, ਸ਼ੰਭੂ ਅਤੇ ਖਨੌਰੀ ਮੋਰਚਿਆਂ ਦੌਰਾਨ ਅੱਥਰੂ ਗੈਸ ਦੇ ਗੋਲਿਆਂ, ਪੁਲਿਸ ਕਾਰਵਾਈ ਅਤੇ ਹੋਰ ਕਾਰਨਾਂ ਕਰਕੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਦੇ ਟਰੈਕਟਰਾਂ-ਟਰਾਲੀਆਂ ਦਾ ਜੋ ਲਗਭਗ ₹3.77 ਕਰੋੜ ਦਾ ਨੁਕਸਾਨ ਹੋਇਆ ਹੈ, ਉਸ ਦੀ ਭਰਪਾਈ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਕਦੋਂ ਕਰੇਗੀ, ਅੰਦੋਲਨ ਦੌਰਾਨ ਸ਼ਹੀਦ ਹੋਏ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਅਤੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਦੇ ਪਰਿਵਾਰਾਂ ਨੂੰ ਵਾਅਦੇ ਮੁਤਾਬਕ ਪੂਰਾ ਮੁਆਵਜ਼ਾ ਅਤੇ ਸਰਕਾਰੀ ਨੌਕਰੀ ਦੇਣ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਕਿਉਂ ਲਟਕਾਈ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ? ਸਾਰੀਆਂ ਫ਼ਸਲਾਂ 'ਤੇ MSP ਦੀ ਕਾਨੂੰਨੀ ਗਾਰੰਟੀ: ਕੇਂਦਰ ਸਰਕਾਰ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਸੂਬਾ ਪੱਧਰ 'ਤੇ ਬਦਲਵੀਂਆਂ ਫ਼ਸਲਾਂ (ਜਿਵੇਂ ਦਾਲਾਂ, ਮੱਕੀ, ਬਾਸਮਤੀ) 'ਤੇ ਪੱਕੀ ਖ਼ਰੀਦ ਅਤੇ ਭਾਅ ਦੀ ਗਾਰੰਟੀ ਦੇਣ ਲਈ ਕੀ ਠੋਸ ਨੀਤੀ ਬਣਾ ਰਹੀ ਹੈ? ਕਿਸਾਨੀ ਕਰਜ਼ਾ ਮੁਕਤੀ: ਚੋਣਾਂ ਦੌਰਾਨ ਕਿਸਾਨਾਂ ਅਤੇ ਮਜ਼ਦੂਰਾਂ ਦੇ ਸਮੁੱਚੇ ਕਰਜ਼ੇ ਮੁਆਫ਼ ਕਰਨ ਦੇ ਕੀਤੇ ਵਾਅਦੇ 'ਤੇ ਸਰਕਾਰ ਕਦੋਂ ਅਮਲ ਕਰੇਗੀ? ਫ਼ਸਲੀ ਖ਼ਰਾਬੇ ਦਾ ਮੁਆਵਜ਼ਾ: ਕੁਦਰਤੀ ਆਫ਼ਤਾਂ ਕਾਰਨ ਪਿਛਲੇ ਸਮੇਂ ਦੌਰਾਨ ਤਬਾਹ ਹੋਈਆਂ ਫ਼ਸਲਾਂ ਦਾ ਰਹਿੰਦਾ ਮੁਆਵਜ਼ਾ ਬਿਨਾਂ ਦੇਰੀ ਕਿਸਾਨਾਂ ਦੇ ਖਾਤਿਆਂ ਵਿੱਚ ਪਾਇਆ ਜਾਵੇ। ਕਿਸਾਨ ਆਗੂਆਂ ਨੇ ਚਿਤਾਵਨੀ ਦਿੱਤੀ ਹੈ ਕਿ ਜੇਕਰ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਸ਼ੰਭੂ-ਖਨੌਰੀ ਨੁਕਸਾਨ ਦੇ ਮੁਆਵਜ਼ੇ ਅਤੇ ਕਿਸਾਨੀ ਮੰਗਾਂ ਸਬੰਧੀ ਜਲਦ ਕੋਈ ਠੋਸ ਫ਼ੈਸਲਾ ਨਾ ਲਿਆ, ਤਾਂ ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਸੰਘਰਸ਼ ਨੂੰ ਹੋਰ ਤਿੱਖਾ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇਗਾ।1
- ਕੋਟਕਪੂਰਾ ਵਿੱਚ ਸਿਹਤ ਵਿਭਾਗ ਦੀ ਮਠਿਆਈਆਂ ਦੀਆਂ ਦੁਕਾਨਾਂ ’ਤੇ ਛਾਪੇਮਾਰੀ ਰੱਖੜੀ ਦੇ ਤਿਉਹਾਰ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਚੈਕਿੰਗ ਮੁਹਿੰਮ, ਕਈ ਮਠਿਆਈਆਂ ਦੇ ਸੈਂਪਲ ਭਰੇ; ਖਰਾਬ ਮਠਿਆਈਆਂ ਮੌਕੇ ’ਤੇ ਕਰਵਾਈਆਂ ਨਸ਼ਟ ਕੋਟਕਪੂਰਾ, 25 ਅਗਸਤ 2026: ਰੱਖੜੀ ਦੇ ਤਿਉਹਾਰ ਨੂੰ ਧਿਆਨ ਵਿੱਚ ਰੱਖਦਿਆਂ ਫਰੀਦਕੋਟ ਜ਼ਿਲ੍ਹੇ ਦੇ ਸਿਹਤ ਵਿਭਾਗ ਵੱਲੋਂ ਕੋਟਕਪੂਰਾ ਸ਼ਹਿਰ ਵਿੱਚ ਮਠਿਆਈਆਂ ਦੀਆਂ ਦੁਕਾਨਾਂ ਦੀ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਚੈਕਿੰਗ ਕੀਤੀ ਗਈ। ਇਸ ਦੌਰਾਨ ਵਿਭਾਗ ਦੀ ਟੀਮ ਨੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਹਲਵਾਈਆਂ ਦੀਆਂ ਦੁਕਾਨਾਂ ’ਤੇ ਮਠਿਆਈਆਂ ਦੀ ਗੁਣਵੱਤਾ ਦੀ ਜਾਂਚ ਕੀਤੀ ਅਤੇ ਕਈ ਮਠਿਆਈਆਂ ਦੇ ਸੈਂਪਲ ਭਰੇ। ਚੈਕਿੰਗ ਦੌਰਾਨ ਕੁਝ ਦੁਕਾਨਾਂ ’ਤੇ ਖਰਾਬ ਪਾਈਆਂ ਗਈਆਂ ਮਠਿਆਈਆਂ ਨੂੰ ਮੌਕੇ ’ਤੇ ਹੀ ਨਸ਼ਟ ਕਰਵਾਇਆ ਗਿਆ। ਇਹ ਚੈਕਿੰਗ ਮੁਹਿੰਮ ਡੀਐਚਓ ਫਰੀਦਕੋਟ ਡਾ. ਸੁਰੇਸ਼ ਕੁਮਾਰ ਦੇ ਦਿਸ਼ਾ-ਨਿਰਦੇਸ਼ਾਂ ਤਹਿਤ ਫੂਡ ਸੇਫਟੀ ਇੰਸਪੈਕਟਰ ਨਵਦੀਪ ਚਹਿਲ ਦੀ ਅਗਵਾਈ ਹੇਠ ਚਲਾਈ ਗਈ। ਸਿਹਤ ਵਿਭਾਗ ਦੀ ਟੀਮ ਵੱਲੋਂ ਕੋਟਕਪੂਰਾ ਦੇ ਨਵੇਂ ਬੱਸ ਸਟੈਂਡ, ਬੱਤੀਆਂ ਵਾਲਾ ਚੌਕ ਸਮੇਤ ਸ਼ਹਿਰ ਦੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿੱਚ ਸਥਿਤ ਹਲਵਾਈਆਂ ਦੀਆਂ ਦੁਕਾਨਾਂ ਦੀ ਜਾਂਚ ਕੀਤੀ ਗਈ। ਮਠਿਆਈਆਂ ਦੇ ਸੈਂਪਲ ਲਏ ਚੈਕਿੰਗ ਦੌਰਾਨ ਟੀਮ ਵੱਲੋਂ ਮਠਿਆਈਆਂ ਦੀ ਗੁਣਵੱਤਾ ਦੀ ਜਾਂਚ ਕਰਦਿਆਂ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਮਠਿਆਈਆਂ ਦੇ ਸੈਂਪਲ ਲਏ ਗਏ। ਸੈਂਪਲਾਂ ਨੂੰ ਨਿਯਮਾਂ ਅਨੁਸਾਰ ਜਾਂਚ ਲਈ ਭੇਜਿਆ ਜਾਣਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਜੋ ਮਠਿਆਈਆਂ ਦੀ ਗੁਣਵੱਤਾ ਅਤੇ ਖਾਣ-ਪੀਣ ਸਬੰਧੀ ਮਾਪਦੰਡਾਂ ਦੀ ਪਾਲਣਾ ਬਾਰੇ ਪਤਾ ਲੱਗ ਸਕੇ। ਖਰਾਬ ਮਠਿਆਈਆਂ ਕੀਤੀਆਂ ਨਸ਼ਟ ਚੈਕਿੰਗ ਦੌਰਾਨ ਕੁਝ ਦੁਕਾਨਾਂ ’ਤੇ ਖਰਾਬ ਪਾਈਆਂ ਗਈਆਂ ਮਠਿਆਈਆਂ ਨੂੰ ਵਿਭਾਗ ਦੀ ਟੀਮ ਨੇ ਮੌਕੇ ’ਤੇ ਹੀ ਨਸ਼ਟ ਕਰਵਾ ਦਿੱਤਾ। ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ ਹੀ ਦੁਕਾਨਦਾਰਾਂ ਨੂੰ ਸਖ਼ਤ ਹਦਾਇਤ ਕੀਤੀ ਗਈ ਕਿ ਉਹ ਗਾਹਕਾਂ ਨੂੰ ਸਿਰਫ਼ ਤਾਜ਼ੀਆਂ, ਸਾਫ਼-ਸੁਥਰੀਆਂ ਅਤੇ ਮਿਆਰਾਂ ਅਨੁਸਾਰ ਮਠਿਆਈਆਂ ਹੀ ਵੇਚਣ। ਫੂਡ ਸੇਫਟੀ ਵਿਭਾਗ ਨੇ ਦੁਕਾਨਦਾਰਾਂ ਨੂੰ ਚੇਤਾਵਨੀ ਦਿੱਤੀ ਕਿ ਖਰਾਬ ਜਾਂ ਮਿਲਾਵਟੀ ਖਾਣ-ਪੀਣ ਵਾਲੀਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਵੇਚਣ ਵਾਲਿਆਂ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਨਿਯਮਾਂ ਅਨੁਸਾਰ ਕਾਰਵਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇਗੀ। ਤਿਉਹਾਰਾਂ ਦੇ ਮੱਦੇਨਜ਼ਰ ਚੈਕਿੰਗ ਮੁਹਿੰਮ ਤੇਜ਼ ਫੂਡ ਸੇਫਟੀ ਇੰਸਪੈਕਟਰ ਨਵਦੀਪ ਚਹਿਲ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਸਿਹਤ ਵਿਭਾਗ ਵੱਲੋਂ ਖਾਣ-ਪੀਣ ਵਾਲੀਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਦੀ ਵਿਕਰੀ ’ਤੇ ਲਗਾਤਾਰ ਨਿਗਰਾਨੀ ਰੱਖੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ। ਤਿਉਹਾਰਾਂ ਦੇ ਸੀਜ਼ਨ ਦੌਰਾਨ ਮਠਿਆਈਆਂ ਦੀ ਮੰਗ ਵਧਣ ਕਾਰਨ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਚੈਕਿੰਗ ਮੁਹਿੰਮ ਚਲਾਈ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਚੈਕਿੰਗ ਦੌਰਾਨ ਮਠਿਆਈਆਂ ਦੇ ਸੈਂਪਲ ਲੈਣ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਜਿੱਥੇ ਮਠਿਆਈਆਂ ਖਰਾਬ ਪਾਈਆਂ ਗਈਆਂ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਨਸ਼ਟ ਕਰਵਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕੀਤਾ ਕਿ ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਵੀ ਇਹ ਚੈਕਿੰਗ ਮੁਹਿੰਮ ਫਰੀਦਕੋਟ ਜ਼ਿਲ੍ਹੇ ਦੇ ਹੋਰ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਜਾਰੀ ਰਹੇਗੀ। ਗਾਹਕਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਸਾਵਧਾਨ ਰਹਿਣ ਦੀ ਅਪੀਲ ਤਿਉਹਾਰਾਂ ਦੌਰਾਨ ਮਠਿਆਈਆਂ ਦੀ ਵਿਕਰੀ ਵਧਣ ਦੇ ਮੱਦੇਨਜ਼ਰ ਗਾਹਕਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਮਠਿਆਈ ਖਰੀਦਣ ਸਮੇਂ ਸਾਵਧਾਨ ਰਹਿਣ ਦੀ ਲੋੜ ਹੈ। ਖਰੀਦਦਾਰੀ ਕਰਦੇ ਸਮੇਂ ਮਠਿਆਈ ਦੀ ਤਾਜ਼ਗੀ, ਸਫਾਈ ਅਤੇ ਦੁਕਾਨ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਵੱਲ ਧਿਆਨ ਦੇਣ ਦੇ ਨਾਲ ਖਰੀਦ ਦੀ ਰਸੀਦ ਲੈਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ। ਸਿਹਤ ਵਿਭਾਗ ਵੱਲੋਂ ਚਲਾਈ ਜਾ ਰਹੀ ਇਹ ਮੁਹਿੰਮ ਤਿਉਹਾਰਾਂ ਦੌਰਾਨ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਸੁਰੱਖਿਅਤ ਅਤੇ ਗੁਣਵੱਤਾ ਵਾਲੀਆਂ ਖਾਣ-ਪੀਣ ਦੀਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਮੁਹੱਈਆ ਕਰਵਾਉਣ ਦੇ ਉਦੇਸ਼ ਨਾਲ ਕੀਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ। ਵਿਭਾਗ ਨੇ ਸਪੱਸ਼ਟ ਕੀਤਾ ਹੈ ਕਿ ਖਾਣ-ਪੀਣ ਦੀਆਂ ਵਸਤੂਆਂ ਦੀ ਗੁਣਵੱਤਾ ਨਾਲ ਸਮਝੌਤਾ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਦੁਕਾਨਦਾਰਾਂ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਨਿਯਮਾਂ ਅਨੁਸਾਰ ਕਾਰਵਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇਗੀ।1
- ਸੰਧਵਾਂ ਵਿੱਚ ਕਲੀਨਿਕ ਦਾ ਸ਼ਟਰ ਤੋੜ ਕੇ 22 ਹਜ਼ਾਰ ਰੁਪਏ ਚੋਰੀ ਮੋਟਰਸਾਈਕਲ ’ਤੇ ਆਏ ਤਿੰਨ ਨਕਾਬਪੋਸ਼ਾਂ ਨੇ ਦਿੱਤਾ ਵਾਰਦਾਤ ਨੂੰ ਅੰਜਾਮ, CCTV ਕੈਮਰਿਆਂ ਵਿੱਚ ਕੈਦ ਹੋਈ ਘਟਨਾ; ਥਾਣਾ ਸਦਰ ਕੋਟਕਪੂਰਾ ਪੁਲਿਸ ਜਾਂਚ ਵਿੱਚ ਜੁਟੀ ਸੰਧਵਾਂ/ਕੋਟਕਪੂਰਾ, 25 ਅਗਸਤ: ਫਰੀਦਕੋਟ ਜ਼ਿਲ੍ਹੇ ਦੇ ਪਿੰਡ ਸੰਧਵਾਂ ਵਿੱਚ ਚੋਰਾਂ ਦੇ ਹੌਸਲੇ ਬੁਲੰਦ ਹੋਣ ਦਾ ਮਾਮਲਾ ਸਾਹਮਣੇ ਆਇਆ ਹੈ। ਅਣਪਛਾਤੇ ਚੋਰਾਂ ਨੇ ਪਿੰਡ ਵਿੱਚ ਸਥਿਤ ਕਟਾਰੀਆ ਕਲੀਨਿਕ ਨੂੰ ਨਿਸ਼ਾਨਾ ਬਣਾਉਂਦਿਆਂ ਰਾਤ ਸਮੇਂ ਕਲੀਨਿਕ ਦਾ ਸ਼ਟਰ ਤੋੜ ਕੇ ਗੱਲੇ ਵਿੱਚ ਰੱਖੀ ਕਰੀਬ 22 ਹਜ਼ਾਰ ਰੁਪਏ ਦੀ ਨਕਦੀ ਚੋਰੀ ਕਰ ਲਈ। ਚੋਰੀ ਦੀ ਇਹ ਵਾਰਦਾਤ ਕਲੀਨਿਕ ਦੇ ਬਾਹਰ ਅਤੇ ਅੰਦਰ ਲੱਗੇ CCTV ਕੈਮਰਿਆਂ ਵਿੱਚ ਕੈਦ ਹੋ ਗਈ ਹੈ। ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਟਰ ਅੱਧਾ ਖੁੱਲ੍ਹਾ ਮਿਲਿਆ ਕਲੀਨਿਕ ਦੇ ਸੰਚਾਲਕ ਗੋਪਾਲ ਕਟਾਰੀਆ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਉਹ ਹਰ ਰੋਜ਼ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਰਾਤ ਨੂੰ ਆਪਣਾ ਕਲੀਨਿਕ ਬੰਦ ਕਰਕੇ ਘਰ ਚਲੇ ਗਏ ਸਨ। ਸਵੇਰੇ ਸਥਾਨਕ ਲੋਕਾਂ ਜਾਂ ਗੁਆਂਢੀਆਂ ਰਾਹੀਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਸੂਚਨਾ ਮਿਲੀ ਕਿ ਕਲੀਨਿਕ ਦਾ ਸ਼ਟਰ ਅੱਧਾ ਖੁੱਲ੍ਹਾ ਹੋਇਆ ਹੈ। ਸੂਚਨਾ ਮਿਲਦੇ ਹੀ ਉਹ ਕਲੀਨਿਕ ਪਹੁੰਚੇ। ਅੰਦਰ ਜਾ ਕੇ ਜਾਂਚ ਕਰਨ ’ਤੇ ਪਤਾ ਲੱਗਾ ਕਿ ਚੋਰਾਂ ਨੇ ਸ਼ਟਰ ਨੂੰ ਵਿਚਕਾਰੋਂ ਤੋੜ ਕੇ ਕਲੀਨਿਕ ਵਿੱਚ ਦਾਖਲ ਹੋ ਕੇ ਗੱਲੇ ਵਿੱਚ ਰੱਖੀ ਕਰੀਬ 22,000 ਰੁਪਏ ਦੀ ਨਕਦੀ ਚੋਰੀ ਕਰ ਲਈ। ਸ਼ਟਰ ਤੋੜ ਕੇ ਕਲੀਨਿਕ ਅੰਦਰ ਦਾਖਲ ਹੋਏ ਚੋਰ ਕਲੀਨਿਕ ਵਿੱਚ ਲੱਗੇ CCTV ਕੈਮਰਿਆਂ ਦੀ ਫੁਟੇਜ ਖੰਗਾਲਣ ’ਤੇ ਵਾਰਦਾਤ ਦਾ ਤਰੀਕਾ ਸਾਹਮਣੇ ਆਇਆ। ਫੁਟੇਜ ਅਨੁਸਾਰ ਇੱਕ ਮੋਟਰਸਾਈਕਲ ’ਤੇ ਤਿੰਨ ਵਿਅਕਤੀ ਕਲੀਨਿਕ ਦੇ ਬਾਹਰ ਆ ਕੇ ਰੁਕੇ। ਆਲੇ-ਦੁਆਲੇ ਦਾ ਮਾਹੌਲ ਦੇਖਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਕਲੀਨਿਕ ਦੇ ਸ਼ਟਰ ਨਾਲ ਛੇੜਛਾੜ ਕੀਤੀ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਵਿਚਕਾਰੋਂ ਤੋੜ ਦਿੱਤਾ। ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਇੱਕ ਵਿਅਕਤੀ ਸ਼ਟਰ ਹੇਠੋਂ ਅੰਦਰ ਦਾਖਲ ਹੋਇਆ, ਜਦਕਿ ਬਾਕੀ ਸਾਥੀ ਬਾਹਰ ਰਹੇ। ਕੁਝ ਸਮੇਂ ਬਾਅਦ ਅੰਦਰ ਗਿਆ ਵਿਅਕਤੀ ਨਕਦੀ ਲੈ ਕੇ ਬਾਹਰ ਆਇਆ ਅਤੇ ਤਿੰਨੇ ਮੋਟਰਸਾਈਕਲ ’ਤੇ ਫਰਾਰ ਹੋ ਗਏ। CCTV ਫੁਟੇਜ ਪੁਲਿਸ ਲਈ ਬਣੀ ਅਹਿਮ ਕੜੀ CCTV ਫੁਟੇਜ ਵਿੱਚ ਤਿੰਨ ਨਕਾਬਪੋਸ਼ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਦੀਆਂ ਗਤੀਵਿਧੀਆਂ ਕੈਦ ਹੋਈਆਂ ਹਨ। ਫੁਟੇਜ ਵਿੱਚ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਆਉਣ, ਸ਼ਟਰ ਨਾਲ ਛੇੜਛਾੜ ਕਰਨ, ਕਲੀਨਿਕ ਅੰਦਰ ਦਾਖਲ ਹੋਣ ਅਤੇ ਵਾਰਦਾਤ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਫਰਾਰ ਹੋਣ ਦੀਆਂ ਤਸਵੀਰਾਂ ਸਾਹਮਣੇ ਆਈਆਂ ਹਨ। CCTV ਫੁਟੇਜ ਹੁਣ ਪੁਲਿਸ ਜਾਂਚ ਲਈ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਸੁਰਾਗ ਮੰਨੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ। ਪੁਲਿਸ ਵੱਲੋਂ ਫੁਟੇਜ ਦੇ ਆਧਾਰ ’ਤੇ ਸ਼ੱਕੀ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਦੀ ਪਛਾਣ ਕਰਨ ਦੇ ਯਤਨ ਕੀਤੇ ਜਾ ਰਹੇ ਹਨ। ਥਾਣਾ ਸਦਰ ਕੋਟਕਪੂਰਾ ਪੁਲਿਸ ਵੱਲੋਂ ਜਾਂਚ ਘਟਨਾ ਦੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਮਿਲਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਕਲੀਨਿਕ ਸੰਚਾਲਕ ਵੱਲੋਂ ਤੁਰੰਤ ਪੁਲਿਸ ਨੂੰ ਸੂਚਿਤ ਕੀਤਾ ਗਿਆ। ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਥਾਣਾ ਸਦਰ ਕੋਟਕਪੂਰਾ ਦੀ ਪੁਲਿਸ ਟੀਮ ਨੇ ਮੌਕੇ ’ਤੇ ਪਹੁੰਚ ਕੇ ਕਲੀਨਿਕ ਦਾ ਜਾਇਜ਼ਾ ਲਿਆ ਅਤੇ ਘਟਨਾ ਸਬੰਧੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਇਕੱਠੀ ਕੀਤੀ। ਪੁਲਿਸ ਵੱਲੋਂ CCTV ਫੁਟੇਜ ਨੂੰ ਜਾਂਚ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮਲ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ। ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਵਾਰਦਾਤ ਵਿੱਚ ਵਰਤੇ ਗਏ ਮੋਟਰਸਾਈਕਲ ਅਤੇ ਸ਼ੱਕੀ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਦੀ ਪਛਾਣ ਨਾਲ ਸਬੰਧਤ ਹੋਰ ਸੁਰਾਗਾਂ ਦੀ ਵੀ ਜਾਂਚ ਕੀਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ। ਦੁਕਾਨਦਾਰਾਂ ਵਿੱਚ ਚਿੰਤਾ, ਰਾਤ ਦੀ ਗਸ਼ਤ ਵਧਾਉਣ ਦੀ ਮੰਗ ਸੰਧਵਾਂ ਵਿੱਚ ਕਲੀਨਿਕ ਵਿੱਚ ਹੋਈ ਇਸ ਚੋਰੀ ਦੀ ਘਟਨਾ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਸਥਾਨਕ ਦੁਕਾਨਦਾਰਾਂ ਅਤੇ ਕਾਰੋਬਾਰੀਆਂ ਵਿੱਚ ਚਿੰਤਾ ਪਾਈ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ। ਲੋਕਾਂ ਦਾ ਕਹਿਣਾ ਹੈ ਕਿ ਰਾਤ ਸਮੇਂ ਪਿੰਡ ਦੇ ਬਾਜ਼ਾਰ ਅਤੇ ਵਪਾਰਕ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਪੁਲਿਸ ਗਸ਼ਤ ਹੋਰ ਵਧਾਈ ਜਾਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ। ਸਥਾਨਕ ਲੋਕਾਂ ਨੇ ਪੁਲਿਸ ਪ੍ਰਸ਼ਾਸਨ ਤੋਂ ਮੰਗ ਕੀਤੀ ਹੈ ਕਿ ਪਿੰਡ ਅਤੇ ਆਸ-ਪਾਸ ਦੇ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਰਾਤ ਸਮੇਂ ਨਿਯਮਤ ਗਸ਼ਤ ਯਕੀਨੀ ਬਣਾਈ ਜਾਵੇ, ਤਾਂ ਜੋ ਚੋਰੀ ਦੀਆਂ ਅਜਿਹੀਆਂ ਘਟਨਾਵਾਂ ’ਤੇ ਰੋਕ ਲਗਾਈ ਜਾ ਸਕੇ। CCTV ਅਤੇ ਸੁਰੱਖਿਆ ਪ੍ਰਬੰਧਾਂ ਦੀ ਮਹੱਤਤਾ ਇਸ ਘਟਨਾ ਵਿੱਚ ਕਲੀਨਿਕ ’ਤੇ ਲੱਗੇ CCTV ਕੈਮਰੇ ਪੁਲਿਸ ਲਈ ਇੱਕ ਅਹਿਮ ਸੁਰਾਗ ਸਾਬਤ ਹੋ ਰਹੇ ਹਨ। ਵਪਾਰਕ ਅਦਾਰਿਆਂ ਦੇ ਮਾਲਕਾਂ ਲਈ ਇਹ ਘਟਨਾ ਇੱਕ ਵਾਰ ਫਿਰ ਸੰਕੇਤ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਕਿ ਦੁਕਾਨਾਂ, ਕਲੀਨਿਕਾਂ ਅਤੇ ਹੋਰ ਸੰਸਥਾਵਾਂ ਵਿੱਚ CCTV ਕੈਮਰੇ, ਮਜ਼ਬੂਤ ਸ਼ਟਰ ਅਤੇ ਹੋਰ ਸੁਰੱਖਿਆ ਪ੍ਰਬੰਧ ਹੋਣੇ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹਨ। ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ ਹੀ CCTV ਦੀ ਰਿਕਾਰਡਿੰਗ ਨੂੰ ਸੁਰੱਖਿਅਤ ਰੱਖਣਾ ਵੀ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਹੈ, ਤਾਂ ਜੋ ਕਿਸੇ ਘਟਨਾ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਵਿੱਚ ਪੁਲਿਸ ਨੂੰ ਤੁਰੰਤ ਸਬੰਧਤ ਫੁਟੇਜ ਉਪਲਬਧ ਕਰਵਾਈ ਜਾ ਸਕੇ। ਪੁਲਿਸ ਸਾਹਮਣੇ ਹੁਣ ਚੋਰਾਂ ਦੀ ਪਛਾਣ ਦੀ ਚੁਣੌਤੀ CCTV ਵਿੱਚ ਵਾਰਦਾਤ ਦੀਆਂ ਤਸਵੀਰਾਂ ਕੈਦ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਹੁਣ ਪੁਲਿਸ ਲਈ ਮੁੱਖ ਚੁਣੌਤੀ ਇਨ੍ਹਾਂ ਸ਼ੱਕੀ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਦੀ ਪਛਾਣ ਕਰਕੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਤੱਕ ਪਹੁੰਚਣਾ ਹੈ। ਮੋਟਰਸਾਈਕਲ ਅਤੇ CCTV ਫੁਟੇਜ ਸਮੇਤ ਹੋਰ ਉਪਲਬਧ ਸੁਰਾਗਾਂ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਜਾਂਚ ਨੂੰ ਅੱਗੇ ਵਧਾਇਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਫਿਲਹਾਲ ਮਾਮਲਾ ਜਾਂਚ ਅਧੀਨ ਹੈ ਅਤੇ ਪੁਲਿਸ ਵੱਲੋਂ ਦੋਸ਼ੀਆਂ ਦੀ ਪਛਾਣ ਅਤੇ ਗ੍ਰਿਫ਼ਤਾਰੀ ਲਈ ਕਾਰਵਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ। ਨੋਟ: CCTV ਫੁਟੇਜ ਵਿੱਚ ਦਿਖਾਈ ਦੇ ਰਹੇ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਨੂੰ ਪੁਲਿਸ ਜਾਂ ਅਦਾਲਤ ਵੱਲੋਂ ਦੋਸ਼ੀ ਸਾਬਤ ਕੀਤੇ ਜਾਣ ਤੱਕ ਕਾਨੂੰਨੀ ਤੌਰ ’ਤੇ ਦੋਸ਼ੀ ਨਹੀਂ ਮੰਨਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ।1