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आपदा आए तो क्या करना है? DM पब्लिक स्कूल में दिखा PRACTICAL DEMO! गढ़ में आज DM पब्लिक स्कूल में आपदा प्रबंधन को लेकर मॉकड्रिल का आयोजन किया गया। बच्चों और स्टाफ को आपदा की स्थिति में सतर्कता, बचाव और सुरक्षित बाहर निकलने के तरीके बताए गए। मॉकड्रिल के जरिए छात्रों को समझाया गया कि घबराने के बजाय सही समय पर सही कदम उठाना कितना जरूरी है।

20 hrs ago
user_RAJA KUMAR
RAJA KUMAR
पत्रकार पूर्वी चंपारण, पूर्वी चंपारण, बिहार•
20 hrs ago

आपदा आए तो क्या करना है? DM पब्लिक स्कूल में दिखा PRACTICAL DEMO! गढ़ में आज DM पब्लिक स्कूल में आपदा प्रबंधन को लेकर मॉकड्रिल का आयोजन किया गया। बच्चों और स्टाफ को आपदा की स्थिति में सतर्कता, बचाव और सुरक्षित बाहर निकलने के तरीके बताए गए। मॉकड्रिल के जरिए छात्रों को समझाया गया कि घबराने के बजाय सही समय पर सही कदम उठाना कितना जरूरी है।

More news from Purbi Champaran and nearby areas
  • रक्सौल मेंबड़ी कार्रवाई की है।अनुमंडल अस्पताल के पीछे से 14 संदिग्ध स्मैकर्स को पुलिस ने पकड़ा है
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    रक्सौल मेंबड़ी कार्रवाई की है।अनुमंडल अस्पताल के पीछे से 14 संदिग्ध स्मैकर्स को पुलिस ने पकड़ा है
    user_Khabar Of Point
    Khabar Of Point
    प्रेस रिर्पोटर Pakri Dayal, Purbi Champaran•
    4 hrs ago
  • 26 सितंबर को बेतिया समाहरणालय पर ईख उत्पादकों का विशाल धरना नौतन। बिहार राज्य ईख उत्पादक संघ की नौतन अंचल कमिटी की विस्तारित बैठक श्यामपुर कोतराहा पंचायत में जिला अध्यक्ष लालबाबू यादव के आवास पर हुई। बैठक में अखिल भारतीय गन्ना किसान महासंघ के राष्ट्रीय वित्त सचिव प्रभुराज नारायण राव ने कहा कि गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर अब संघर्ष तेज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 21 सितंबर को सासामुसा चीनी मिल को कबाड़ी के हाथों बेचे जाने के विरोध में सासामुसा स्टेशन चौक पर सभा होगी। साथ ही 26 सितंबर को सुबह 11 बजे बेतिया समाहरणालय पर पश्चिम चंपारण के ईख उत्पादक किसान विशाल धरना देंगे। धरने के माध्यम से गन्ने का समर्थन मूल्य 650 रुपये प्रति क्विंटल करने, चीनी मिलों की घटतौली पर रोक लगाने, सभी किस्म के गन्ने का समान चालान जारी करने तथा इथेनॉल, बिजली व अन्य बायो-प्रोडक्ट से होने वाले लाभ में किसानों की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की मांग उठाई जाएगी। बैठक की अध्यक्षता मुखिया अंबिका यादव ने की।
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    26 सितंबर को बेतिया समाहरणालय पर ईख उत्पादकों का विशाल धरना

नौतन। बिहार राज्य ईख उत्पादक संघ की नौतन अंचल कमिटी की विस्तारित बैठक श्यामपुर कोतराहा पंचायत में जिला अध्यक्ष लालबाबू यादव के आवास पर हुई। बैठक में अखिल भारतीय गन्ना किसान महासंघ के राष्ट्रीय वित्त सचिव प्रभुराज नारायण राव ने कहा कि गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर अब संघर्ष तेज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 21 सितंबर को सासामुसा चीनी मिल को कबाड़ी के हाथों बेचे जाने के विरोध में सासामुसा स्टेशन चौक पर सभा होगी। साथ ही 26 सितंबर को सुबह 11 बजे बेतिया समाहरणालय पर पश्चिम चंपारण के ईख उत्पादक किसान विशाल धरना देंगे। धरने के माध्यम से गन्ने का समर्थन मूल्य 650 रुपये प्रति क्विंटल करने, चीनी मिलों की घटतौली पर रोक लगाने, सभी किस्म के गन्ने का समान चालान जारी करने तथा इथेनॉल, बिजली व अन्य बायो-प्रोडक्ट से होने वाले लाभ में किसानों की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की मांग उठाई जाएगी। बैठक की अध्यक्षता मुखिया अंबिका यादव ने की।
    user_Makhan Kumar
    Makhan Kumar
    Bettiah, Pashchim Champaran•
    3 hrs ago
  • कश्मीर नहीं, बिहार में लहलहा रहे सेब के बागान, 45 डिग्री की गर्मी में भी फलन, किसानों की आमदनी डबल पश्चिम चंपारण. जिस सेब की खेती को अब तक कश्मीर और हिमाचल जैसे ठंडे पहाड़ी इलाकों का समझा जाता था, वह अब बिहार जैसे गर्म प्रदेश की पहचान बन चुकी है.बड़ी बात यह है कि जिले के दर्जनों किसानों ने सीमित संसाधनों के बावजूद भी इसकी बागवानी बड़ी खूबसूरती से की है, जिससे उन्हें शानदार फलन की प्राप्ति भी हुई है. बताते चलें कि ज़िले में इसकी शुरुआत मझौलिया प्रखंड निवासी रविकांत पांडे ने वर्ष 2019 में ही की थी.रविकांत एक कृषि विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने गर्म प्रदेश में होने वाले सेव की HRMN 99 किस्म को सबसे पहले सफलता पूर्वक उपजाया था. बकौल रविकांत, HRMN के अलावे सेव की अन्ना, ट्रॉपिकल स्वीट, डोर्सेट गोल्डन और ग्रैनी स्मिथ जैसी किस्मों को भी बिहार सहित कुछ अन्य गर्म राज्यों में उपजाया जा सकता है. सेब के पौधे तैयार करने में M7 और M9 रूटस्टॉक का इस्तेमाल किया जाता है. रूटस्टॉक के ऊपर इच्छित सेब की प्रजाति की ग्राफ्टिंग यानी कलम बांधी जाती है. इसके लिए अन्ना, ट्रॉपिकल स्वीट, डोर्सेट गोल्डन और ग्रैनी स्मिथ जैसी किस्मों का इस्तेमाल किया जा रहा है.पौधे की ग्राफ्टिंग के बाद उचित समय और तापमान में उसकी देखभाल की जाती है. ध्यान रहे कि ग्राफ्टिंग वाले स्थान के ऊपर निकलने वाली शाखाओं को विकसित किया जाता है, जबकि रूटस्टॉक के नीचे से निकलने वाली अनावश्यक शाखाओं को हटा दिया जाता है. सेब के पेड़ में विकसित होने वाली फलदार छोटी शाखाएं ही आगे चलकर फल देने का आधार बनती हैं. इन्हीं शाखाओं पर फूल आते हैं और बाद में सेब के फल विकसित होते हैं. मजे की बात है कि HRMN को सिर्फ खेत में ही नहीं, बल्कि सीमित मिट्टी वाले कंटेनर में भी लगाया जा सकता है.बड़ी बात यह है कि रवीकांत ने इन्हीं कैरेट और गमलों में सेब की सफल उपज करके दिखाई है. बताते चलें कि सेब के पौधों के लिए करीब 8 फीट प्लांट-टू-प्लांट और 10 फीट लाइन-टू-लाइन दूरी रखने पर एक एकड़ में 500 से अधिक पौधे लगाए जा सकते हैं। कुछ किस्में शुरुआती वर्षों में ही फल देना शुरू कर देती हैं, लेकिन कुछ को एक वर्ष से भी अधिक समय लगता है. मैदानी इलाकों में गर्मी पहाड़ी क्षेत्रों की तुलना में पहले आने के कारण यहां सेब का विकास और फल तैयार होने का समय भी पहले हो सकता है। उनका दावा है कि बिहार में तैयार होने वाला सेब कश्मीर के पारंपरिक सीजन से करीब डेढ़ से दो महीने पहले बाजार में आने की संभावना रखता है। रवीकांत पांडेय ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल पौधे तैयार करना नहीं, बल्कि किसानों को सेब की खेती की पूरी तकनीक समझाना भी है। इसमें पौधारोपण, प्रूनिंग यानी छंटाई, पोषण प्रबंधन, फलदार शाखाओं की देखभाल और उत्पादन बढ़ाने की तकनीक शामिल है। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में सेब के पौधों की कीमत करीब 1200 रुपये तक थी, लेकिन अब अपने उत्पादन के कारण अपेक्षाकृत कम कीमत पर पौधे उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इच्छुक किसान स्क्रीन पर जारी संपर्क नंबर के माध्यम से पौधों के लिए संपर्क कर सकते हैं।
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    कश्मीर नहीं, बिहार में लहलहा रहे सेब के बागान, 45 डिग्री की गर्मी में भी फलन, किसानों की आमदनी डबल
पश्चिम चंपारण. जिस सेब की खेती को अब तक कश्मीर और हिमाचल जैसे ठंडे पहाड़ी इलाकों का समझा जाता था, वह अब बिहार जैसे गर्म प्रदेश की पहचान बन चुकी है.बड़ी बात यह है कि जिले के दर्जनों किसानों ने सीमित संसाधनों के बावजूद भी इसकी बागवानी बड़ी खूबसूरती से की है, जिससे उन्हें शानदार फलन की प्राप्ति भी हुई है.
बताते चलें कि ज़िले में इसकी शुरुआत मझौलिया प्रखंड निवासी रविकांत पांडे ने वर्ष 2019 में ही की थी.रविकांत एक  कृषि विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने गर्म प्रदेश में होने वाले सेव की HRMN 99 किस्म को सबसे पहले सफलता पूर्वक उपजाया था.
बकौल रविकांत, HRMN के अलावे सेव की अन्ना, ट्रॉपिकल स्वीट, डोर्सेट गोल्डन और ग्रैनी स्मिथ जैसी किस्मों को भी बिहार सहित कुछ अन्य गर्म राज्यों में उपजाया जा सकता है.
सेब के पौधे तैयार करने में M7 और M9 रूटस्टॉक का इस्तेमाल किया जाता है. रूटस्टॉक के ऊपर इच्छित सेब की प्रजाति की ग्राफ्टिंग यानी कलम बांधी जाती है. इसके लिए अन्ना, ट्रॉपिकल स्वीट, डोर्सेट गोल्डन और ग्रैनी स्मिथ जैसी किस्मों का इस्तेमाल किया जा रहा है.पौधे की ग्राफ्टिंग के बाद उचित समय और तापमान में उसकी देखभाल की जाती है. 
ध्यान रहे कि ग्राफ्टिंग वाले स्थान के ऊपर निकलने वाली शाखाओं को विकसित किया जाता है, जबकि रूटस्टॉक के नीचे से निकलने वाली अनावश्यक शाखाओं को हटा दिया जाता है. सेब के पेड़ में विकसित होने वाली फलदार छोटी शाखाएं ही आगे चलकर फल देने का आधार बनती हैं. इन्हीं शाखाओं पर फूल आते हैं और बाद में सेब के फल विकसित होते हैं.
मजे की बात है कि HRMN को सिर्फ खेत में ही नहीं, बल्कि सीमित मिट्टी वाले कंटेनर में भी लगाया जा सकता है.बड़ी बात यह है कि रवीकांत ने इन्हीं कैरेट और गमलों में सेब की सफल उपज करके दिखाई है.
बताते चलें कि सेब के पौधों के लिए करीब 8 फीट प्लांट-टू-प्लांट और 10 फीट लाइन-टू-लाइन दूरी रखने पर एक एकड़ में 500 से अधिक पौधे लगाए जा सकते हैं। कुछ किस्में शुरुआती वर्षों में ही फल देना शुरू कर देती हैं, लेकिन कुछ को एक वर्ष से भी अधिक समय लगता है.
मैदानी इलाकों में गर्मी पहाड़ी क्षेत्रों की तुलना में पहले आने के कारण यहां सेब का विकास और फल तैयार होने का समय भी पहले हो सकता है। उनका दावा है कि बिहार में तैयार होने वाला सेब कश्मीर के पारंपरिक सीजन से करीब डेढ़ से दो महीने पहले बाजार में आने की संभावना रखता है।
रवीकांत पांडेय ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल पौधे तैयार करना नहीं, बल्कि किसानों को सेब की खेती की पूरी तकनीक समझाना भी है। इसमें पौधारोपण, प्रूनिंग यानी छंटाई, पोषण प्रबंधन, फलदार शाखाओं की देखभाल और उत्पादन बढ़ाने की तकनीक शामिल है।
उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में सेब के पौधों की कीमत करीब 1200 रुपये तक थी, लेकिन अब अपने उत्पादन के कारण अपेक्षाकृत कम कीमत पर पौधे उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इच्छुक किसान स्क्रीन पर जारी संपर्क नंबर के माध्यम से पौधों के लिए संपर्क कर सकते हैं।
    user_S9 Bihar
    S9 Bihar
    News Anchor बेतिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    8 hrs ago
  • , महिला गुड़िया देवी बनाता बाडी रिल लोग चाहता उनका वीडियो के
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    , महिला गुड़िया देवी बनाता बाडी  रिल लोग चाहता उनका वीडियो के
    user_Triloki rai
    Triloki rai
    TV News Anchor बेतिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    14 hrs ago
  • कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर द्वारा सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में स्वच्छता अभियान का आयोजन।। भारत सरकार द्वारा प्रायोजित स्वच्छता ही सेवा अभियान के अंतर्गत आज कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर, पश्चिमी चम्पारण द्वारा सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, माधोपुर में एक विशेष स्वच्छता जागरूकता एवं स्वच्छता अभियान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने किया। उन्होंने बताया कि यह स्वच्छता अभियान 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक पूरे जिले में चलाया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य जन-जन तक स्वच्छता का संदेश पहुंचाना है। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के बच्चों को संबोधित करते हुए बताया गया कि स्वच्छता केवल विद्यालय तक ही सीमित नहीं है, बल्कि स्कूल से घर तक और घर से समाज तक स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बच्चों को व्यक्तिगत स्वच्छता, हाथ धोने के महत्व और कचरा प्रबंधन के बारे में जागरूक किया गया। इसके उपरांत सभी छात्रों, शिक्षकों एवं केवीके कर्मियों ने मिलकर विद्यालय परिसर में झाड़ू लगाकर श्रमदान किया और पूरे परिसर को साफ किया। इस अभियान के नोडल अधिकारी एवं वैज्ञानिक (फसल उत्पादन) डॉ. हर्षा बी.आर. द्वारा बच्चों को पोषण वाटिका के महत्व पर विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के साथ-साथ पोषण भी स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक है। प्रत्येक घर में पोषण वाटिका लगाकर कुपोषण को दूर किया जा सकता है और मौसमी सब्जियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है। डॉ चेलपुरी रामलू वैज्ञानिक कृषि अभियंत्रण द्वारा उपस्थित बच्चों को कृषि शिक्षा के बारे मे विस्तार पूर्वक जानकारी दिया गया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य सहित सभी शिक्षकगण एवं सैकड़ों छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से श्री कमलेश कुमार, श्री मनोज कुमार, श्री शंभू कुमार एवं श्री शैलेंद्र कुमार का सराहनीय सहयोग रहा।
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    कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर द्वारा सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में स्वच्छता अभियान का आयोजन।।
भारत सरकार द्वारा प्रायोजित स्वच्छता ही सेवा अभियान के अंतर्गत आज कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर, पश्चिमी चम्पारण द्वारा सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, माधोपुर में एक विशेष स्वच्छता जागरूकता एवं स्वच्छता अभियान कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का नेतृत्व केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने किया। उन्होंने बताया कि यह स्वच्छता अभियान 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक पूरे जिले में चलाया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य जन-जन तक स्वच्छता का संदेश पहुंचाना है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के बच्चों को संबोधित करते हुए बताया गया कि स्वच्छता केवल विद्यालय तक ही सीमित नहीं है, बल्कि स्कूल से घर तक और घर से समाज तक स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बच्चों को व्यक्तिगत स्वच्छता, हाथ धोने के महत्व और कचरा प्रबंधन के बारे में जागरूक किया गया। इसके उपरांत सभी छात्रों, शिक्षकों एवं केवीके कर्मियों ने मिलकर विद्यालय परिसर में झाड़ू लगाकर श्रमदान किया और पूरे परिसर को साफ किया।
इस अभियान के नोडल अधिकारी एवं वैज्ञानिक (फसल उत्पादन) डॉ. हर्षा बी.आर. द्वारा बच्चों को पोषण वाटिका के महत्व पर विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के साथ-साथ पोषण भी स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक है। प्रत्येक घर में पोषण वाटिका लगाकर कुपोषण को दूर किया जा सकता है और मौसमी सब्जियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है। डॉ चेलपुरी रामलू वैज्ञानिक कृषि अभियंत्रण द्वारा उपस्थित बच्चों को कृषि शिक्षा के बारे मे विस्तार पूर्वक जानकारी दिया गया।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य सहित सभी शिक्षकगण एवं सैकड़ों छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से श्री कमलेश कुमार, श्री मनोज कुमार, श्री शंभू कुमार एवं श्री शैलेंद्र कुमार का सराहनीय सहयोग रहा।
    user_RAVI PANDEY
    RAVI PANDEY
    Media and information sciences faculty मझौलिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    18 hrs ago
  • बिहार में दारू बंदी है और दारू माफिया अपना अलग अलग दिमाग चला रहा है,, तरह तरह का दिमाग चला रहा है दारू माफिया,, जिसका पर्दाफाश हुआ,,
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    बिहार में दारू बंदी है और दारू माफिया अपना अलग अलग दिमाग चला रहा है,,
तरह तरह का दिमाग चला रहा है दारू माफिया,, जिसका पर्दाफाश हुआ,,
    user_गोपालगंज की जनता
    गोपालगंज की जनता
    Local News Reporter गोपालगंज, गोपालगंज, बिहार•
    6 hrs ago
  • लोकप्रिय शिक्षक और एजुकेटर खान सर ने बिहार में आई गंभीर बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए एक बड़ा राहत अभियान चलाया है Khan sir motivational
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    लोकप्रिय शिक्षक और एजुकेटर खान सर ने बिहार में आई गंभीर बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए एक बड़ा राहत अभियान चलाया है
Khan sir motivational
    user_RAJA KUMAR
    RAJA KUMAR
    पत्रकार पूर्वी चंपारण, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    20 hrs ago
  • छपरा में लगातार 6 दिनों से बिजली नहीं आने से लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। परेशान ग्रामीणों ने बांस-बल्ले लगाकर सड़क जाम कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद बिजली SDO और JE समस्या सुनने को तैयार नहीं थे।
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    छपरा में लगातार 6 दिनों से बिजली नहीं आने से लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। परेशान ग्रामीणों ने बांस-बल्ले लगाकर सड़क जाम कर दिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद बिजली SDO और JE समस्या सुनने को तैयार नहीं थे।
    user_Khabar Of Point
    Khabar Of Point
    प्रेस रिर्पोटर Pakri Dayal, Purbi Champaran•
    4 hrs ago
  • समेकित आजीविका परियोजना सम्मेलन-सह-कृषि मेला का आयोजन, ग्रामीण विकास पर जोर मझौलिया। राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, अमवा मझार में एसएसवीएस (समग्र शिक्षण एवं विकास संस्थान), बेतिया के तत्वावधान में आयोजित समेकित आजीविका परियोजना सम्मेलन-सह-कृषि मेला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। सम्मेलन में कृषि और आजीविका के नए अवसरों पर चर्चा करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास पर विशेष जोर दिया गया। किसानों को आधुनिक खेती, स्वरोजगार, आय बढ़ाने के उपाय तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि ऐसी पहल ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कृषि मेले में आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीज, जैविक खेती और आजीविका से जुड़े विभिन्न मॉडल भी प्रदर्शित किए गए, जिन्हें किसानों और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक देखा। आयोजकों ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ सतत और समावेशी ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना है।
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    समेकित आजीविका परियोजना सम्मेलन-सह-कृषि मेला का आयोजन, ग्रामीण विकास पर जोर
मझौलिया। राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, अमवा मझार में एसएसवीएस (समग्र शिक्षण एवं विकास संस्थान), बेतिया के तत्वावधान में आयोजित समेकित आजीविका परियोजना सम्मेलन-सह-कृषि मेला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। सम्मेलन में कृषि और आजीविका के नए अवसरों पर चर्चा करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास पर विशेष जोर दिया गया। किसानों को आधुनिक खेती, स्वरोजगार, आय बढ़ाने के उपाय तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि ऐसी पहल ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कृषि मेले में आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीज, जैविक खेती और आजीविका से जुड़े विभिन्न मॉडल भी प्रदर्शित किए गए, जिन्हें किसानों और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक देखा। आयोजकों ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ सतत और समावेशी ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना है।
    user_Makhan Kumar
    Makhan Kumar
    Bettiah, Pashchim Champaran•
    3 hrs ago
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