रक्षा बंधन पर लिया प्रण: पौधों को देंगे बंद घेरे से आजादी, हरियाली को मिलेगा नया जीवन संजय रामफल की अनूठी पहल—पेड़ की सिर्फ रक्षा नहीं, उसकी जड़ों को भी चाहिए आजादी चरखी दादरी। रक्षाबंधन का पर्व केवल भाई-बहन के रिश्ते की डोर मजबूत करने का अवसर नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ अपने रिश्ते को मजबूत करने का भी संदेश देता है। इसी भावना को एक नई पहल का रूप देते हुए सामाजिक कार्यकर्ता संजय रामफल ने इस रक्षाबंधन पर पौधों की रक्षा के साथ-साथ उनकी जड़ों को आजादी देने का प्रण लिया है। इसी संकल्प के साथ ‘प्रोजेक्ट पुनर्जीवन’ की शुरुआत की जा रही है। इस पहल के तहत ऐसे पौधों और पेड़ों को कृत्रिम अवरोधों से मुक्त करने का प्रयास किया जाएगा, जो ट्री गार्ड, कंक्रीट या पेवर से इस तरह घिरे हुए हैं कि उनकी जड़ों तक मिट्टी, बारिश का पानी और हवा प्राकृतिक रूप से नहीं पहुंच पा रही। संजय रामफल ने कहा, “हम अक्सर पेड़ लगाकर समझ लेते हैं कि हमारी जिम्मेदारी पूरी हो गई, लेकिन असली जिम्मेदारी तो उसके बाद शुरू होती है। जिस तरह हम अपने रिश्तों को बंधन में नहीं, विश्वास और आजादी के साथ मजबूत करते हैं, उसी तरह पेड़ों को भी बढ़ने के लिए खुली मिट्टी और जगह चाहिए।” उन्होंने कहा कि कई जगह पौधे तो लगाए गए हैं, लेकिन समय के साथ उनके चारों ओर कंक्रीट और पेवर बिछ जाने से उनकी जड़ों के लिए पर्याप्त स्थान नहीं बचता। ऐसे पौधों को बचाने और उनके प्राकृतिक विकास में सहयोग करने के लिए जरूरत के अनुसार उनके आसपास के अनावश्यक अवरोध हटाने तथा मिट्टी और पानी के लिए जगह उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। संजय रामफल ने कहा कि इस रक्षाबंधन एक नई तरह की राखी बांधने का समय है—ऐसी राखी, जो केवल हाथ पर नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी और संकल्प पर बंधे। उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि वे अपने आसपास लगे पौधों को केवल सजावट या हरियाली का हिस्सा न समझें, बल्कि उन्हें जीवित साथी मानकर उनकी देखभाल करें। यदि किसी पौधे की जड़ों के आसपास अनावश्यक कंक्रीट या पेवर हो, तो उसे प्राकृतिक रूप से विकसित होने में सहयोग देने के लिए संबंधित विभाग और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर प्रयास करें। ‘प्रोजेक्ट पुनर्जीवन’ का संदेश बेहद सरल है—पेड़ लगाना शुरुआत है, उसे जीने की जगह देना असली सेवा है। इस रक्षाबंधन संजय रामफल ने संकल्प लिया है कि “एक पौधे की रक्षा करेंगे, उसकी जड़ों को मिट्टी देंगे, उसे पानी देंगे और उसके प्राकृतिक विकास का रास्ता खोलेंगे।” रक्षाबंधन पर इस बार एक अनोखा रिश्ता—इंसान और प्रकृति के बीच।
रक्षा बंधन पर लिया प्रण: पौधों को देंगे बंद घेरे से आजादी, हरियाली को मिलेगा नया जीवन संजय रामफल की अनूठी पहल—पेड़ की सिर्फ रक्षा नहीं, उसकी जड़ों को भी चाहिए आजादी चरखी दादरी। रक्षाबंधन का पर्व केवल भाई-बहन के रिश्ते की डोर मजबूत करने का अवसर नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ अपने रिश्ते को मजबूत करने का भी संदेश देता है। इसी भावना को एक नई पहल का रूप देते हुए सामाजिक कार्यकर्ता संजय रामफल ने इस रक्षाबंधन पर पौधों की रक्षा के साथ-साथ उनकी जड़ों को आजादी देने का प्रण लिया है। इसी संकल्प के साथ ‘प्रोजेक्ट पुनर्जीवन’ की शुरुआत की जा रही है। इस पहल के तहत ऐसे पौधों और पेड़ों को कृत्रिम अवरोधों से मुक्त करने का प्रयास किया जाएगा, जो ट्री गार्ड, कंक्रीट या पेवर से इस तरह घिरे हुए हैं कि उनकी जड़ों तक मिट्टी, बारिश का पानी और हवा प्राकृतिक रूप से नहीं पहुंच पा रही। संजय रामफल ने कहा, “हम अक्सर पेड़ लगाकर समझ लेते हैं कि हमारी जिम्मेदारी पूरी हो गई, लेकिन असली जिम्मेदारी तो उसके बाद शुरू होती है। जिस तरह हम अपने रिश्तों को बंधन में नहीं, विश्वास और आजादी के साथ मजबूत करते हैं, उसी तरह पेड़ों को भी बढ़ने के लिए खुली मिट्टी और जगह चाहिए।” उन्होंने कहा कि कई जगह पौधे तो लगाए गए हैं, लेकिन समय के साथ उनके चारों ओर कंक्रीट और पेवर बिछ जाने से उनकी जड़ों के लिए पर्याप्त स्थान नहीं बचता। ऐसे पौधों को बचाने और उनके प्राकृतिक विकास में सहयोग करने के लिए जरूरत के अनुसार उनके आसपास के अनावश्यक अवरोध हटाने तथा मिट्टी और पानी के लिए जगह उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। संजय रामफल ने कहा कि इस रक्षाबंधन एक नई तरह की राखी बांधने का समय है—ऐसी राखी, जो केवल हाथ पर नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी और संकल्प पर बंधे। उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि वे अपने आसपास लगे पौधों को केवल सजावट या हरियाली का हिस्सा न समझें, बल्कि उन्हें जीवित साथी मानकर उनकी देखभाल करें। यदि किसी पौधे की जड़ों के आसपास अनावश्यक कंक्रीट या पेवर हो, तो उसे प्राकृतिक रूप से विकसित होने में सहयोग देने के लिए संबंधित विभाग और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर प्रयास करें। ‘प्रोजेक्ट पुनर्जीवन’ का संदेश बेहद सरल है—पेड़ लगाना शुरुआत है, उसे जीने की जगह देना असली सेवा है। इस रक्षाबंधन संजय रामफल ने संकल्प लिया है कि “एक पौधे की रक्षा करेंगे, उसकी जड़ों को मिट्टी देंगे, उसे पानी देंगे और उसके प्राकृतिक विकास का रास्ता खोलेंगे।” रक्षाबंधन पर इस बार एक अनोखा रिश्ता—इंसान और प्रकृति के बीच।
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