रीवा जिले के गुढ़ तहसील अंतर्गत ग्राम महसांव के बहुचर्चित भूमि विवाद मामले में लगभग 14 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि विवादित भूमि मंदिर की नहीं, बल्कि निजी स्वामित्व की है। यह मामला वर्ष 2012 में तहसीलदार गुढ़ द्वारा प्रस्तुत एक व्यवहार वाद से शुरू हुआ था, जिसमें खसरा नंबर 468, 469, 470, 471, 474, 477, 478, 479, 480, 481, 482, 483 एवं 484 कुल 19.0520 रकबे की भूमि को रामलला मंदिर महसांव की संपत्ति बताते हुए कलेक्टर रीवा को प्रबंधक घोषित करने की मांग की गई थी। नवम् व्यवहार न्यायाधीश, रीवा ने 19 दिसंबर 2024 को सुनाए गए अपने फैसले में वादी का दावा खारिज कर दिया था, जिसके बाद वादी पक्ष द्वारा जिला न्यायालय में सिविल अपील दायर की गई। वरिष्ठ जिला न्यायाधीश रीवा की अदालत में अपील की विस्तृत सुनवाई के बाद, न्यायालय ने 5 जून 2026 को अपना अंतिम निर्णय सुनाते हुए निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया। अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंधित भूमि मंदिर की नहीं है और न ही कलेक्टर रीवा को उसका प्रबंधक माना जा सकता है। न्यायालय ने दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर यह भी माना कि भूमि का विधिवत क्रय-विक्रय वर्ष 1980 में किया गया था और उसका नामांतरण भी विधि अनुसार प्रतिवादी के नाम दर्ज है, जिसकी पुष्टि पूर्व में राजस्व मंडल ग्वालियर द्वारा भी की जा चुकी है। मामले में प्रतिवादी पक्ष डॉ. नरेश चंद्र चौरसिया, दुर्गा चौरसिया, डॉ. अमित चौरसिया, अभिषेक चौरसिया, अंकुर चौरसिया की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पुष्पेन्द्र सिंह के नेतृत्व में अधिवक्ता रमेश सोधिया, अधिवक्ता संजय यादव, सत्यभान सिंह एवं राहुल सोधिया ने प्रभावी पैरवी की। वरिष्ठ अधिवक्ताओं द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत ठोस कानूनी तथ्यों और सशक्त तर्कों के चलते प्रतिवादी पक्ष को बड़ी सफलता मिली। इस फैसले के बाद लंबे समय से चल रहा विवाद समाप्त हो गया है और प्रतिवादी पक्ष को बड़ी राहत मिली है।
रीवा जिले के गुढ़ तहसील अंतर्गत ग्राम महसांव के बहुचर्चित भूमि विवाद मामले में लगभग 14 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि विवादित भूमि मंदिर की नहीं, बल्कि निजी स्वामित्व की है। यह मामला वर्ष 2012 में तहसीलदार गुढ़ द्वारा प्रस्तुत एक व्यवहार वाद से शुरू हुआ था, जिसमें खसरा नंबर 468, 469, 470, 471, 474, 477, 478, 479, 480, 481, 482, 483 एवं 484 कुल 19.0520 रकबे की भूमि को रामलला मंदिर महसांव की संपत्ति बताते हुए कलेक्टर रीवा को प्रबंधक घोषित करने की मांग की गई थी। नवम् व्यवहार न्यायाधीश, रीवा ने 19 दिसंबर 2024 को सुनाए गए अपने फैसले में वादी का दावा खारिज कर दिया था, जिसके बाद वादी पक्ष द्वारा जिला न्यायालय में सिविल अपील दायर की गई। वरिष्ठ जिला न्यायाधीश रीवा की अदालत में अपील की विस्तृत सुनवाई के बाद, न्यायालय ने 5 जून 2026 को अपना अंतिम निर्णय सुनाते हुए निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया। अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंधित भूमि मंदिर की नहीं है और न ही कलेक्टर रीवा को उसका प्रबंधक माना जा सकता है। न्यायालय ने दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर यह भी माना कि भूमि का विधिवत क्रय-विक्रय वर्ष 1980 में किया गया था और उसका नामांतरण भी विधि अनुसार प्रतिवादी के नाम दर्ज है, जिसकी पुष्टि पूर्व में राजस्व मंडल ग्वालियर द्वारा भी की जा चुकी है। मामले में प्रतिवादी पक्ष डॉ. नरेश चंद्र चौरसिया, दुर्गा चौरसिया, डॉ. अमित चौरसिया, अभिषेक चौरसिया, अंकुर चौरसिया की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पुष्पेन्द्र सिंह के नेतृत्व में अधिवक्ता रमेश सोधिया, अधिवक्ता संजय यादव, सत्यभान सिंह एवं राहुल सोधिया ने प्रभावी पैरवी की। वरिष्ठ अधिवक्ताओं द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत ठोस कानूनी तथ्यों और सशक्त तर्कों के चलते प्रतिवादी पक्ष को बड़ी सफलता मिली। इस फैसले के बाद लंबे समय से चल रहा विवाद समाप्त हो गया है और प्रतिवादी पक्ष को बड़ी राहत मिली है।
- रीवा जिले में एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ चेन स्नेचिंग की एक घटना का खुलासा किया गया है। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।1
- मध्य प्रदेश के सीधी जिले में स्थित बुधगौना गाँव से यह निवेदन किया गया है कि गाँव में नाली का निर्माण कार्य आधा-अधूरा छोड़ दिया गया है। गाँव के शुरुआती बिंदु से आने वाला पानी आधे रास्ते में ही जमा हो रहा है, क्योंकि आगे की निकासी के लिए नाली का निर्माण नहीं किया गया है। इस स्थिति के कारण गाँव में लगातार बदबू का माहौल बना रहता है और मच्छरों की संख्या भी काफी बढ़ गई है, जिससे गाँववालों के लिए बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। इस गंभीर मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई करने की अपील की गई है।1
- जनहित संकल्प पार्टी की न्याय यात्रा का ऐतिहासिक रूप से आगाज़ हो गया है।1
- रीवा शहर में स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के नाम पर किए जा रहे दावों के बावजूद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। शुक्रवार, 12 जून को शहर के व्यस्त ओल्ड बस स्टैंड रोड क्षेत्र में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली खुले रूप से कचरा और गंदगी का परिवहन करती हुई दिखाई दी। वाहन में कचरा बिना ढंके भरा हुआ था, जिससे सड़क पर चलते समय धूल, दुर्गंध और कचरे के कण लगातार वातावरण में फैल रहे थे। यह मामला नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़ा एक गंभीर विषय है, क्योंकि खुले वाहनों में कचरे का परिवहन न केवल स्वच्छता नियमों की सीधी अवहेलना है, बल्कि आमजन के स्वास्थ्य के साथ भी सीधा खिलवाड़ है। जिस मार्ग से यह वाहन गुजर रहा था, वहाँ बड़ी संख्या में दोपहिया वाहन चालक, राहगीर, व्यापारी, छात्र एवं अन्य नागरिक आवागमन करते हैं, और ऐसे में उड़ती हुई गंदगी तथा कचरे के कण उनके लिए संक्रमण एवं बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इस घटना ने जिला प्रशासन, नगर निगम एवं संबंधित विभागों पर सवाल खड़े किए हैं कि जब स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, तब खुले में कचरा परिवहन जैसी लापरवाही क्यों हो रही है। नागरिकों ने इस मामले की तत्काल जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और भविष्य में कचरा परिवहन केवल ढंके हुए एवं मानक अनुरूप वाहनों से सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि स्वच्छता अभियान के दावे केवल कागजों तक ही सीमित न रह जाएं।1
- रीवा की एक बेटी, जिसे जीवन की गाड़ी चलाने की उम्मीद थी, अब वह रेल गाड़ी चलाएगी।1
- मध्य प्रदेश के रीवा जिले के सरपंच शनि समदरिया जेल से बाहर आने के बाद जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं। खुद को 'विकास पुरुष' बताने वाले सरपंच के कार्यों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं, और दावा किया गया है कि उनके विकास के वादे केवल खोखले हैं। सरपंच के कार्यों की आलोचना करते हुए बताया गया है कि मुड़ियारी में उनके द्वारा एक नया पंचायत भवन बनवाया गया है। इसके बावजूद, इस पंचायत भवन के सामने कम से कम 200 से 250 आदिवासी लोगों के घर हैं, जहाँ तक पहुँचने के लिए कोई सड़क नहीं है। इस कारण बारिश होने पर वहाँ गाड़ियाँ नहीं जा पातीं, बच्चे स्कूल नहीं पहुँच पाते और शिक्षकों सहित किसी भी प्रकार का कोई कार्य नहीं हो पाता।1
- मध्यप्रदेश के जबलपुर में गैस सिलेंडरों से भरा एक ट्रक पलट गया। इस हादसे में ट्रक का चालक घायल हो गया है, जिसका इलाज जारी है।1
- मध्य प्रदेश के सतना जिले की परसमनिया गढ़ी में एक पारिवारिक विवाद ने सनसनी फैला दी है। इस विवाद के कारण राजपरिवार की एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई हैं।1