मध्यप्रदेश के खण्डवा जिले की आदिवासी बाहुल्य हरसूद विधानसभा क्षेत्र में विद्युत विभाग पर बड़े फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। शिवसेना ने दावा किया है कि बिजली विभाग के कर्मचारी आदिवासियों से बिना मीटर और बिना रसीद के जबरन मोटी रकम वसूल रहे हैं, जिससे उन्हें शासन की '100 यूनिट फ्री बिजली योजना' का लाभ नहीं मिल पा रहा। इस गंभीर मामले को लेकर शिवसेना जिला प्रमुख गणेश भावसार और हरसूद विधानसभा अध्यक्ष सत्यम सोनी ने खंडवा कलेक्टर और इंदौर संभाग के अधीक्षण यंत्री को लिखित शिकायत सौंपी है, जिसमें विभागीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायती पत्र में यह आरोप लगाया गया है कि हरसूद विधानसभा क्षेत्र के आदिवासी इलाकों में, जहां कई घरों में बिजली के मीटर तक नहीं लगे हैं, वहाँ सुपरवाइजर और लाइनमैन की मिलीभगत से उपभोक्ताओं को मनमाना बिल थमाया जा रहा है, जिससे उन्हें 'जंगल राज' का अहसास हो रहा है। ये कर्मचारी आदिवासियों को डरा-धमकाकर बिजली बिल के नाम पर मोटी रकम वसूल रहे हैं। पैसे न देने पर तुरंत लाइट काट दी जाती है और जेल भेजने की धमकी दी जाती है। आरोप है कि वसूली सिर्फ़ मोटी रकम तक सीमित नहीं है; कर्मचारियों द्वारा अंग्रेजों की तर्ज पर "2-2 बोरी गेहूं और चना" की मांग भी की जा रही है, जिसे गरीब आदिवासियों के लिए "अंग्रेजों के लगान" जैसा बताया गया है, और इस वजह से गरीब आदिवासी भारी-भरकम रकम चुकाने को मजबूर हैं। शिवसेना पदाधिकारियों ने बताया कि इस मामले की लिखित शिकायत पहले 25 मई 2026 को कनिष्ठ यंत्री (वितरण केंद्र, म.प्र.प.क्षे.वि.वि.कं.लि. खालवा/हरसूद) को भी की गई थी। हालांकि, चार दिन बीत जाने के बाद भी भ्रष्ट कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। विभाग की इस चुप्पी को अधिकारियों की मिलीभगत का प्रमाण बताते हुए शिवसेना ने कहा कि इससे आदिवासियों का लगातार शोषण हो रहा है और कर्मचारी शासन की योजनाओं को विफल करके सरकार को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचा रहे हैं। शिवसेना ने अपनी प्रमुख मांगों में कहा है कि सरकार की '100 यूनिट मुफ्त बिजली योजना' का लाभ वास्तविक उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए। इसके साथ ही, मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष विभागीय जांच कराने, आदिवासियों को डराने-धमकाने वाले दोषी सुपरवाइजर और लाइनमैन पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने, पीड़ित आदिवासियों को उनके द्वारा जमा किए गए रुपयों की लिखित बिजली बिल रसीद प्रदान करने और भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों व कर्मचारियों की अवैध संपत्ति की जांच कर उनसे वसूली करने की मांग की गई है।
मध्यप्रदेश के खण्डवा जिले की आदिवासी बाहुल्य हरसूद विधानसभा क्षेत्र में विद्युत विभाग पर बड़े फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। शिवसेना ने दावा किया है कि बिजली विभाग के कर्मचारी आदिवासियों से बिना मीटर और बिना रसीद के जबरन मोटी रकम वसूल रहे हैं, जिससे उन्हें शासन की '100 यूनिट फ्री बिजली योजना' का लाभ नहीं मिल पा रहा। इस गंभीर मामले को लेकर शिवसेना जिला प्रमुख गणेश भावसार और हरसूद विधानसभा अध्यक्ष सत्यम सोनी ने खंडवा कलेक्टर और इंदौर संभाग के अधीक्षण यंत्री को लिखित शिकायत सौंपी है, जिसमें विभागीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायती पत्र में यह आरोप लगाया गया है कि हरसूद विधानसभा क्षेत्र के आदिवासी इलाकों में, जहां कई घरों में बिजली के मीटर तक नहीं लगे हैं, वहाँ सुपरवाइजर और लाइनमैन की मिलीभगत से उपभोक्ताओं को मनमाना बिल थमाया जा रहा है, जिससे उन्हें 'जंगल राज' का अहसास हो रहा है। ये कर्मचारी आदिवासियों को डरा-धमकाकर बिजली बिल के नाम पर मोटी रकम वसूल रहे हैं। पैसे न देने पर तुरंत लाइट काट दी जाती है और जेल भेजने की धमकी दी जाती है। आरोप है कि वसूली सिर्फ़ मोटी रकम तक सीमित नहीं है; कर्मचारियों द्वारा अंग्रेजों की तर्ज पर "2-2 बोरी गेहूं और चना" की मांग भी की जा रही है, जिसे गरीब आदिवासियों के लिए "अंग्रेजों के लगान" जैसा बताया गया है, और इस वजह से गरीब आदिवासी भारी-भरकम रकम चुकाने को मजबूर हैं। शिवसेना पदाधिकारियों ने बताया कि इस मामले की लिखित शिकायत पहले 25 मई 2026 को कनिष्ठ यंत्री (वितरण केंद्र, म.प्र.प.क्षे.वि.वि.कं.लि. खालवा/हरसूद) को भी की गई थी। हालांकि, चार दिन बीत जाने के बाद भी भ्रष्ट कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। विभाग की इस चुप्पी को अधिकारियों की मिलीभगत का प्रमाण बताते हुए शिवसेना ने कहा कि इससे आदिवासियों का लगातार शोषण हो रहा है और कर्मचारी शासन की योजनाओं को विफल करके सरकार को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचा रहे हैं। शिवसेना ने अपनी प्रमुख मांगों में कहा है कि सरकार की '100 यूनिट मुफ्त बिजली योजना' का लाभ वास्तविक उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए। इसके साथ ही, मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष विभागीय जांच कराने, आदिवासियों को डराने-धमकाने वाले दोषी सुपरवाइजर और लाइनमैन पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने, पीड़ित आदिवासियों को उनके द्वारा जमा किए गए रुपयों की लिखित बिजली बिल रसीद प्रदान करने और भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों व कर्मचारियों की अवैध संपत्ति की जांच कर उनसे वसूली करने की मांग की गई है।
- शिवसेना जिला प्रमुख गणेश भावसार ने स्वतंत्रता सेनानी माखनलाल चतुर्वेदी बस स्टैंड पर फैली गंदगी को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का काम निगम क्षेत्र में साफ-सफाई बनाए रखना है, जिसकी स्थिति स्वच्छता के नाम पर 'नंबर सिस्टम' के आधार पर भी देखी जा सकती है। भावसार ने इस बात पर जोर दिया कि बस स्टैंड पर गंदगी साफ दिख रही है, जिससे संबंधित जिम्मेदारियों पर सवाल उठते हैं।1
- रविवार शाम खरगोन शहर के बिस्टान रोड पर एक तेज रफ्तार ट्रक ने एक बाइक को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में एक युवक के हाथ में गंभीर चोटें आई हैं, जबकि एक बच्चा भी घायल हुआ है। दोनों घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।1
- खरगोन जिले के ऊन थाना क्षेत्र के सुरपाला बैडी में एक महिला की हत्या के अंधे कत्ल का पुलिस ने 48 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है। पुलिस जांच में यह सामने आया कि मृतका का पति ही उसकी हत्या का दोषी था। मृतका संगीताबाई की हत्या उसके पति मुकेश भील ने चरित्र पर संदेह के चलते की थी। यह हत्या 27 मई को एक विवाद के दौरान हुई, जब मुकेश ने अपनी पत्नी की बेरहमी से पिटाई की, जिससे उसकी मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपी ने शव को खेत के पास नाले किनारे फेंक दिया था। महिला का शव 28 मई को मिलने के बाद ऊन थाना पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की थी। पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर जब पति मुकेश शक के घेरे में आया, तो पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। पुलिस अधीक्षक रविंद्र वर्मा के निर्देशन में ऊन पुलिस ने इस हत्या की गुत्थी को सुलझाया। एसडीओपी रोहित लखारे ने इस पूरे मामले का खुलासा किया।4
- खरगोन जिले के भैरूघाट क्षेत्र में नर्मदा-शिप्रा पाइपलाइन फूटने से बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए। पाइपलाइन में अचानक हुए रिसाव के कारण पानी का फव्वारा लगभग 40 फीट की ऊंचाई तक उठने लगा, जिससे आसपास के पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।1
- बुरहानपुर के गणपति नाका थाना क्षेत्र की लोहार मंडी में 31 तारीख को रविवार सुबह एक बहुमंजिला मकान में स्थित रस्सी के गोदाम में अज्ञात कारणों से भीषण आग लग गई। इस आग को पूरी तरह बुझाने में कुल छह घंटे की कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।1