चंदौली के चकिया स्थित गांधी पार्क में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर के बाद छात्र-छात्राओं और युवाओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ जमकर जश्न मनाया और मिठाइयां बांटीं। प्रदर्शनकारियों के दावों पर आधारित इस आयोजन में युवाओं ने शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर अपने संघर्ष को याद करते हुए एक विजय जुलूस भी निकाला। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनके लोकतांत्रिक आंदोलन ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। इस कार्यक्रम के आयोजन में शैलेश कुमार और यश सोनकर ने प्रमुख भूमिका निभाई। दोनों ने कहा कि छात्र-युवा लंबे समय से शिक्षा सुधार की मांग शांतिपूर्ण ढंग से कर रहे हैं और यह जश्न छात्रों की आवाज को मिले महत्व का प्रतीक है। मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने भी युवाओं के इस लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके की सराहना की। आयोजकों ने ऐलान किया कि निष्पक्ष भर्ती परीक्षाओं और छात्रों के हितों से जुड़े मुद्दों पर उनका यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
चंदौली के चकिया स्थित गांधी पार्क में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर के बाद छात्र-छात्राओं और युवाओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ जमकर जश्न मनाया और मिठाइयां बांटीं। प्रदर्शनकारियों के दावों पर आधारित इस आयोजन में युवाओं
ने शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर अपने संघर्ष को याद करते हुए एक विजय जुलूस भी निकाला। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनके लोकतांत्रिक आंदोलन ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। इस कार्यक्रम के आयोजन
में शैलेश कुमार और यश सोनकर ने प्रमुख भूमिका निभाई। दोनों ने कहा कि छात्र-युवा लंबे समय से शिक्षा सुधार की मांग शांतिपूर्ण ढंग से कर रहे हैं और यह जश्न छात्रों की आवाज को मिले महत्व का प्रतीक है।
मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने भी युवाओं के इस लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके की सराहना की। आयोजकों ने ऐलान किया कि निष्पक्ष भर्ती परीक्षाओं और छात्रों के हितों से जुड़े मुद्दों पर उनका यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
- उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के विकासखंड चकिया में पानी की भीषण किल्लत के बीच एक किसान सूखी मिट्टी में ही धान लगाने पर मजबूर है। पूरा चंदौली क्षेत्र इस समय पानी की भारी मार झेल रहा है, जिससे खेती-किसानी पर संकट मंडरा रहा है। इस स्थिति को देखते हुए चंदौली के डीएम महोदय, चकिया के एसडीएम, चकिया के विधायक श्री कैलाश आचार्य और क्षेत्र के तमाम अधिकारियों से अनुरोध किया गया है कि वे इस क्षेत्र में पानी की उचित और जल्द से जल्द व्यवस्था करने का कष्ट करें।1
- चंदौली के थाना बलुआ क्षेत्र स्थित ग्राम अमिलाई में दो पक्षों के बीच मारपीट की घटना सामने आई है। इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्राधिकारी सदर महोदय का आधिकारिक वक्तव्य जारी हुआ है।1
- चन्दौली जिले के चकिया क्षेत्र अंतर्गत ग्राम लालपुर में विगत कई महीनों से नाली खराब पड़ी है, जिससे ग्रामीणों को आने-जाने में बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नाली के गंदे पानी की वजह से गांव के लोगों को कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। इस गंभीर समस्या के बावजूद गांव के प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य पूरी तरह बेपरवाह बने हुए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि मामले को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से आज तक कोई एक्शन नहीं लिया गया है।4
- चंदौली जिले के चकिया स्थित गांधी पार्क में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर आते ही छात्रों ने इसे देशभर के विद्यार्थियों की बड़ी जीत बताते हुए ढोल-नगाड़ों की थाप पर जबरदस्त डांस किया। 'छात्र एकता जिंदाबाद' और 'हम अपना अधिकार मांगते, नहीं किसी से भीख मांगते' के नारों के बीच छात्रों ने गांधी पार्क में जमकर हर्षोल्लास जताया और अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया।1
- उत्तराखंड में 4,369 पेड़ों की प्रस्तावित कटाई के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुका है। इस विरोध के प्रतीक के रूप में एक महिला पर्यावरण कार्यकर्ता ने अपना सिर मुंडवा लिया है। स्थानीय लोगों के विरोध और बढ़ते जनाक्रोश के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है।1
- कैमूर जिले के चैनपुर में मंत्री जी की पहल पर तीन कृषि विद्युत ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं।1
- फतेहपुर में मुख्यमंत्री योगी ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा बयान दिया है कि नकल माफिया मिट्टी में मिल जाएंगे और उन्हें कोई रोक नहीं सकता। उन्होंने कहा कि सोमवार को देश की संसद में यह बिल आने वाला है। इसके बाद मानकर चलिए कि माफिया मिट्टी में मिल जाएंगे और इस कार्रवाई को कोई रोक नहीं सकता।1
- दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपने हक और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही युवा पीढ़ी की लड़ाई की जीत हुई है। न्याय, अधिकार, लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ दमनकारी रवैये का विरोध करते हुए यह क्रांति जन्मी थी। इस जीत को संविधान के जीवंत मूल्यों का एक ऐतिहासिक क्षण, न्याय की विजय और अत्याचार की पराजय बताया गया है। इस सफलता पर उस तमाम युवा शक्ति और देशवासियों को बधाई दी गई है, जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से युवाओं का सहयोग किया और उनका हौसला बढ़ाया।1