कटनी जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रीठी में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल में वर्षों से तैनात कर्मचारियों की कार्यशैली को लेकर अब जनप्रतिनिधियों ने भी मोर्चा खोल दिया है, जिसमें जिला पंचायत सदस्य माला मौसी प्रमुख हैं। शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे, माला मौसी ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर कड़े आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यहाँ मरीजों को न तो उचित इलाज मिल रहा है और न ही सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर उन तक पहुँच पा रहा है। उनका आरोप है कि अस्पताल के कई कर्मचारी वर्षों से एक ही पद पर जमे हुए हैं, जिससे उनकी कार्यप्रणाली प्रभावित हुई है। इन कर्मचारियों की प्राथमिकता जनता की समस्याओं का समाधान करने की बजाय गपशप में व्यस्त रहना है, जिसका सीधा असर सरकारी कामकाज पर पड़ रहा है। माला मौसी ने यह भी बताया कि कई कर्मचारी समय पर अस्पताल नहीं आते और जब आते भी हैं, तो केवल औपचारिकता निभाते हैं। अस्पताल परिसर में काम की बजाय आपसी बातचीत में उनकी व्यस्तता आम मरीजों को भुगतनी पड़ रही है। जनता के हित को ध्यान में रखते हुए, जिला पंचायत सदस्य माला मौसी ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने ज्ञापन में मांग की है कि एक सप्ताह के भीतर वर्षों से अस्पताल में जमे हुए कर्मचारियों को हटाया जाए। माला मौसी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इस मामले में समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की, तो वे अस्पताल के सामने धरने पर बैठने को विवश होंगी। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मांग पर कब तक संज्ञान लेता है और लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।
कटनी जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रीठी में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल में वर्षों से तैनात कर्मचारियों की कार्यशैली को लेकर अब जनप्रतिनिधियों ने भी मोर्चा खोल दिया है, जिसमें जिला पंचायत सदस्य माला मौसी प्रमुख हैं। शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे, माला मौसी ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर कड़े आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यहाँ मरीजों को न तो उचित इलाज मिल रहा है और न ही सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर उन तक पहुँच पा रहा है। उनका आरोप है कि अस्पताल के कई कर्मचारी वर्षों से एक ही पद पर जमे हुए हैं, जिससे उनकी कार्यप्रणाली प्रभावित हुई है। इन कर्मचारियों की प्राथमिकता जनता की समस्याओं का समाधान करने की बजाय गपशप में व्यस्त रहना है, जिसका सीधा असर सरकारी कामकाज पर पड़ रहा है। माला मौसी ने यह भी बताया कि कई कर्मचारी समय पर अस्पताल नहीं आते और जब आते भी हैं, तो केवल औपचारिकता निभाते हैं। अस्पताल परिसर में काम की बजाय आपसी बातचीत में उनकी व्यस्तता आम मरीजों को भुगतनी पड़ रही है। जनता के हित को ध्यान में रखते हुए, जिला पंचायत सदस्य माला मौसी ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने ज्ञापन में मांग की है कि एक सप्ताह के भीतर वर्षों से अस्पताल में जमे हुए कर्मचारियों को हटाया जाए। माला मौसी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इस मामले में समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की, तो वे अस्पताल के सामने धरने पर बैठने को विवश होंगी। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मांग पर कब तक संज्ञान लेता है और लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।
- कटनी जिले के बहोरीबंद तहसील क्षेत्र के ग्राम अमाड़ी में आंगनवाड़ी भवन वर्षों से बेहद जर्जर हालत में पड़ा हुआ है। भवन की दीवारें जगह-जगह से दरक चुकी हैं और छत का प्लास्टर गिर रहा है, जिसके कारण कभी भी कोई बड़ा और गंभीर हादसा होने की आशंका बनी हुई है। भवन के असुरक्षित होने की वजह से, छोटे बच्चों को तेज धूप और मौसम की मार के बीच खुले आसमान के नीचे ही पढ़ाई करनी पड़ रही है और वहीं पोषण आहार लेना भी पड़ रहा है। यहां तक कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी बच्चों को पेड़ों की छांव में या खुले मैदान में संभालने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर स्थिति को लेकर कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन महिला एवं बाल विकास विभाग और स्थानीय प्रशासन ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। अभिभावकों में अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों की यह मांग है कि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जल्द ही एक नया आंगनवाड़ी भवन बनाया जाए या फिर इस जर्जर भवन का तत्काल पुनर्निर्माण कराया जाए।1
- कटनी जिले के रीठी थाना क्षेत्र के ग्राम अमगवां से कानून व्यवस्था पर सवाल उठाता एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जहाँ एक अपाहिज किसान रामकिशोर पिछले दो महीनों से न्याय की गुहार लगाने के लिए रीठी थाने और पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर है। शारीरिक रूप से अक्षम होने के कारण यह पीड़ित किसान दूसरों के कंधों पर सवार होकर पुलिस के आला अफसरों तक पहुँच रहा है, लेकिन रीठी पुलिस पर कोई कार्रवाई न करने का आरोप है। शुक्रवार को पीड़ित किसान रामकिशोर एक बार फिर एसपी कार्यालय पहुँचा और अपनी आपबीती सुनाते हुए स्थानीय पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उसका कहना है कि बीते 8 अप्रैल 2026 की रात करीब 10:30 बजे, पुरानी रंजिश और एक सोची-समझी साजिश के तहत गांव के ही 14 रसूखदार दबंग लाठी, डंडे, लोहे की रॉड और कुल्हाड़ी जैसे जानलेवा हथियारों से लैस होकर उसके घर में घुस आए और जान से मारने की नीयत से उस पर और उसके पूरे परिवार पर हमला किया। हमलावरों में मिल्लूलाल उर्फ बंधा, शंकर कुशवाहा, राघवेंद्र, सुखलाल बर्मन, राहुल बंशकार, धर्मेंद्र, एकलव्य, शनि, लक्ष्मीकांत, सुकल, वर्षा, कमलेश बाई, बल्लू और तेजीलाल शामिल थे। किसान रामकिशोर का आरोप है कि इस हमले में उसकी बेटियों के हाथ टूट गए और परिवार के कई सदस्य घायल हुए। घटना के तुरंत बाद रीठी थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन स्थानीय पुलिस ने मामले को पूरी तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया। पुलिस ने न तो आरोपियों के खिलाफ उचित और कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और न ही उनकी गिरफ्तारी के लिए कोई ठोस कदम उठाया, जिसके चलते सभी 14 आरोपी आज भी खुलेआम घूम रहे हैं और केस वापस न लेने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। पीड़ित परिवार अब खौफ के साये में अपने ही घर में जीने को मजबूर है। स्थानीय रीठी पुलिस की इस हीलाहवाली से निराश होकर, रामकिशोर ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि इस पूरे मामले की किसी निष्पक्ष अधिकारी से जांच कराई जाए और आरोपियों के खिलाफ साधारण धाराओं के बजाय 'हत्या के प्रयास' (अटेम्प्ट टू मर्डर) का मामला दर्ज किया जाए। इस संबंध में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. संतोष कुमार डेहरिया ने बताया कि यह भूमि विवाद का मामला था, जिसमें दोनों पक्षों की ओर से प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। उन्होंने कहा कि अभी मेडिकल रिपोर्ट आनी बाकी है और डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।1
- पन्ना जिले की पवई पुलिस ने बाइक चोरी के एक बड़े मामले का खुलासा किया है, जहाँ लगभग डेढ़ लाख रुपये मूल्य की तीन चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद की गई हैं। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है। पवई पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर इस मामले को सुलझाया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने पवई और अमानगंज क्षेत्र से इन बाइकों की चोरी करने का जुर्म कबूल कर लिया है।1
- कटनी में जायन्ट्स ग्रुप ऑफ कटनी सहेली एवं जायन्ट्स वेलफेयर फाउंडेशन ने मंगलवार को माधव नगर गेट के सामने स्थित बजरंगबली जी मंदिर में विशाल मां भंडारा और शरबत वितरण कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया। भीषण गर्मी और लगभग 42 डिग्री सेल्सियस तापमान के बावजूद, संगठन के सदस्यों और महिला शक्ति ने पूरे उत्साह, अनुशासन तथा सेवा भावना के साथ इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक रूप दिया, जिससे यह सेवा, समर्पण और संगठन शक्ति का अद्भुत संगम बन गया। इस दौरान, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान बजरंगबली के दर्शन किए और प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम में कटनी जिले के समाजसेवी बसंती यादव, शिवराज गोस्वामी, राजेंद्र शर्मा, देशराज, बालकिशन नामदेव, बसंत भैया के बेटे सहित सैकड़ों की संख्या में महिला मित्र मंडली, ग्रुप के सदस्य एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। महिला शक्ति का योगदान विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहा, जहाँ ग्रुप की अध्यक्ष और महिला सदस्यों ने तपती धूप में श्रद्धालुओं को शरबत वितरित कर मानव सेवा की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की। उन्होंने पूरी व्यवस्था को कुशलतापूर्वक संभालते हुए यह प्रमाणित किया कि समाज सेवा, धार्मिक आस्था और संगठन को मजबूत बनाने में महिला शक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल से गूंजता रहा और श्रद्धालुओं के लिए मां भंडारे तथा शरबत वितरण की सुव्यवस्थित व्यवस्था की गई, जिसकी स्थानीय नागरिकों ने जमकर सराहना की। आयोजकों ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य मानव सेवा, सामाजिक एकता, धार्मिक आस्था और संगठन को और अधिक मजबूत बनाना था। कार्यक्रम के अंत में, सभी सदस्यों ने भगवान बजरंगबली से क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की, और यह सेवा, सहयोग तथा सामाजिक समर्पण की भावना से आयोजित कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जो लोगों के लिए प्रेरणा का केंद्र बना।4
- कटनी नगर के निमिहा क्षेत्र से मिली जानकारी के अनुसार, 31 मई 2026 को ज्येष्ठ पूर्णिमा का दिन आदिशक्ति माँ विंध्यवासिनी से संबंधित है।1
- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 29 मई को जम्मू-कश्मीर के कटरा पहुँचे, जहाँ वे माता वैष्णों देवी के दर्शन करने के साथ-साथ भीड़ प्रबंधन और अन्य सभी व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे। इस अध्ययन के लिए उनके साथ एक प्रतिनिधिमंडल भी आया है, और इसी तरह के अध्ययन के लिए मुख्यमंत्री ने देश के अलग-अलग हिस्सों में कई अन्य प्रतिनिधिमंडल भी भेजे हैं। कटरा पहुँचने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया को बताया कि उनका यहाँ आने का उद्देश्य महाकाल मंदिर, महाकालेश्वर देवस्थान, ओंकारेश्वर देवस्थान तथा हाल ही में उच्च न्यायालय द्वारा माँ वाग्देवी के मंदिर के रूप में मान्यता प्राप्त भोजशाला जैसे प्रमुख धार्मिक संस्थानों का अध्ययन करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्य लक्ष्य धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ के कुशल प्रबंधन, जनसुविधाओं की उपलब्धता और धार्मिक सेवाओं के लिए एक उत्कृष्ट एवं प्रभावी मॉडल विकसित करने की समझ प्राप्त करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी बताया कि उनकी टीमें देश के विभिन्न हिस्सों में व्यवस्थाओं और प्रबंधन प्रणालियों का अवलोकन और अध्ययन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि वे देवी माँ के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करेंगे और उन्हें जानकारी दी गई है कि यहाँ मंदिर प्रबंधन के साथ-साथ एक विश्वविद्यालय, एक मेडिकल कॉलेज और अनेक सेवा-प्रधान संस्थाएँ भी संचालित की जा रही हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यहाँ श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु सुव्यवस्थित और सुनियोजित व्यवस्थाएँ उपलब्ध हैं, जिससे उन्हें सहज, सुगम और सुविधाजनक दर्शन का अनुभव प्राप्त होता है।1
- कटनी के मसुरहा वार्ड में पिछले आठ महीनों से सीसी नाली का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। गुप्ता जी खाद वालों से लेकर महाकाल गली तक की यह नाली पूरी न होने के कारण क्षेत्रीय नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, नाली के अधूरे निर्माण के चलते लगातार जलभराव, गंदगी और आवागमन में दिक्कतें बनी हुई हैं। क्षेत्रवासियों ने नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों से जल्द से जल्द इस निर्माण कार्य को पूरा कराने की मांग की है। नागरिकों ने विशेष रूप से नगर निगम कमिश्नर से निवेदन किया है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण कराया जाए।1
- कटनी जिले में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का आक्रोश चरम पर पहुँच गया है, जिसके चलते शुक्रवार को मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के जिला सचिव हरप्रीत लक्की सिंह के नेतृत्व में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ, कटनी ने अधीक्षक भू अभिलेख अधिकारी को कलेक्टर आशीष तिवारी के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगले 20 दिनों के भीतर उनकी लंबित और जायज मांगों का निराकरण नहीं किया गया, तो प्रदेश भर के 32 हजार संविदा कर्मचारी चरणबद्ध तरीके से उग्र आंदोलन और अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। ज्ञापन सौंपते हुए संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कार्यरत 32 हजार संविदा कर्मचारी मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रखने में रात-दिन निष्ठापूर्वक अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। इन्हीं कर्मचारियों की कड़ी मेहनत के कारण मध्य प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत किया गया है, बावजूद इसके सरकार द्वारा लगातार उनके हितों की अनदेखी की जा रही है। कर्मचारियों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि माननीय मुख्यमंत्री की उपस्थिति में उनकी मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन एक वर्ष से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी शासन स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे प्रदेश भर के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों में भारी असंतोष व्याप्त है। संविदा कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में मुख्यमंत्री द्वारा 30 जनवरी 2026 को दशहरा मैदान (टी.टी. नगर) में आयोजित अभिनंदन कार्यक्रम में की गई घोषणा के अनुसार तत्काल नियमितीकरण शामिल है। इसके अतिरिक्त, वे सामान्य प्रशासन विभाग की 2023 की नीति के तहत एन.पी.एस. (NPS) और स्वास्थ्य बीमा का लाभ, अन्य राज्यों की तर्ज पर प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत की वार्षिक वेतनवृद्धि, नियमित कर्मचारियों के समान महंगाई भत्ता (DA), सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) के वेतन में पी.बी.आई. (PBI) का समायोजन और पूर्व की तरह इंडिकेटर लागू करने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों ने शासन द्वारा किए गए समकक्षता (वेतन विसंगति) के गलत निर्धारण पर तुरंत पुनर्विचार कर संशोधन करने और नियमित कर्मचारियों की तरह सभी अवकाश स्वीकृत करने की भी मांग की है। साथ ही, जब तक 'समान कार्य-समान वेतन' और समान सुविधाएँ नहीं मिल जातीं, तब तक 'सार्थक ऐप' के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था बंद करने की अपील की गई है। कर्मचारियों ने बताया कि 02 जून से वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे और इस दिन से जिले के सभी कर्मचारी विभाग द्वारा दिए गए सभी प्रकार के ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्यों का पूर्णतः बहिष्कार करेंगे। संघ ने ज्ञापन के माध्यम से स्पष्ट किया है कि वे जनता को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन सरकार के उदासीन रवैये के कारण वे आंदोलन के लिए विवश हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 2 जून से स्वास्थ्य सुविधाएँ ठप होती हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।1