आप सभी लक्ष्मण छपरा ग्राम वाशियो को बता दे कि हम जनवरी माह में कोटेदार मोहन सिंह के काम राशन वितरण करने की शिकायत पत्र बैरिया तहसील दिवस पर अधिकारी महोदय को दिया था जिसकी जंच के लिए supply inspector महोदाय को दिया गया था जो कि वो जंच नहीं किये और ना ही आवेदन का जबाब दिए बाल्की फोन पर धमकी भी दी, और बोले कि आप सब अपने मन से टिप लगाकर राशन छोड़ देते हैं, आप सब को बता दे कि शिकायत वापस लेने के लिए हमे लोभ लालाच दिया गया और हमारे ऊपर दबाव भी बनाया गया, पर इसका प्रभाव हम पर नहीं पड़ा ,उसके बाद हमारा राशन कार्ड को दूसरे कोटेदार पर ट्रांसफर करने की कोशिश की गई, वो भी नहीं हुआ, तब जाके ये लोग हमारा राशन कार्ड से नाम कटावा दिए ताकि हम परेशान होकर चुप हो जाएं, जब की हमें पता था कि ये लोग यहीं करेंगे इसलिए हम जनवरी माह से मार्च माह तक हम राशन नहीं लिये,और ना ही इस वीडियो को पोस्ट किया थे! तकी ये लोग गलती करे,और यह वीडियो हम जिला पूर्ति विभाग और जिला प्रशासन महोदय को दिखा सके ! Mob - 8935897752 Surendra Nath Singh #CMYogiAdityanath #reelschallenge
आप सभी लक्ष्मण छपरा ग्राम वाशियो को बता दे कि हम जनवरी माह में कोटेदार मोहन सिंह के काम राशन वितरण करने की शिकायत पत्र बैरिया तहसील दिवस पर अधिकारी महोदय को दिया था जिसकी जंच के लिए supply inspector महोदाय को दिया गया था जो कि वो जंच नहीं किये और ना ही आवेदन का जबाब दिए बाल्की फोन पर धमकी भी दी, और बोले कि आप सब अपने मन से टिप लगाकर राशन छोड़ देते हैं, आप सब को बता दे कि शिकायत वापस लेने के लिए हमे लोभ लालाच दिया गया और हमारे ऊपर दबाव भी बनाया गया, पर इसका प्रभाव हम पर नहीं पड़ा ,उसके बाद हमारा राशन कार्ड को दूसरे कोटेदार पर ट्रांसफर करने की कोशिश की गई, वो भी नहीं हुआ, तब जाके ये लोग हमारा राशन कार्ड से नाम कटावा दिए ताकि हम परेशान होकर चुप हो जाएं, जब की हमें पता था कि ये लोग यहीं करेंगे इसलिए हम जनवरी माह से मार्च माह तक हम राशन नहीं लिये,और ना ही इस वीडियो को पोस्ट किया थे! तकी ये लोग गलती करे,और यह वीडियो हम जिला पूर्ति विभाग और जिला प्रशासन महोदय को दिखा सके ! Mob - 8935897752 Surendra Nath Singh #CMYogiAdityanath #reelschallenge
- आरा, जगदेव नगर। आर एस मेमोरियल गर्ल्स स्कूल सह शिशु सदन में माईल्सस्टोन 2026- राईज एण्ड साईन थीम पर फेयरवेल व ग्रेजुएशन डे का आयोजन किया गया जो भावनाओं, उपलब्धियों और भविष्य की आशाओं का सुंदर संगम बनकर उभरा। इस अवसर पर नर्सरी व केजी के नन्हे बच्चों का ग्रेजुएशन तथा कक्षा 10 के विद्यार्थियों का फेयरवेल एक ही मंच पर संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई, जिसमें छोटे बच्चों की मासूम प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया, वहीं 10वीं के विद्यार्थियों ने विद्यालय जीवन की यादों को भावनात्मक रूप से प्रस्तुत किया। नन्हे ग्रेजुएट्स को कैप और प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए, जबकि 10वीं के छात्रों को सर्टिफिकेट व सौवन्वियर प्रदान करते हुए सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। विद्यालय प्रबंधन ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि शिक्षा केवल अंकों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के संपूर्ण व्यक्तित्व निर्माण का माध्यम है। राईज एण्ड साईन थीम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि हर बच्चा अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सकता है, बशर्ते उसे सही मार्गदर्शन और सकारात्मक वातावरण मिले। अभिभावकों की सक्रिय उपस्थिति और सहभागिता ने कार्यक्रम को और भी गरिमामय बना दिया। विद्यालय ने अभिभावकों से बच्चों की तुलना न करने और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने का आग्रह किया। इस अवसर पर विभिन्न श्रेणियों में विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया गया, जिससे यह संदेश गया कि विद्यालय हर बच्चे की विशेषता को महत्व देता है। समारोह के अंत में यह स्पष्ट हुआ कि यह संस्थान केवल शिक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं, बल्कि संवेदनशील, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की प्रधानाध्यापिका डॉ शशि कला राय ने अतिथि के रूप में पधारे रामनाथ ठाकुर, डॉ रवि शेखर, डॉ राजेश कुमार राय, डॉ जितेन्द्र शुक्ला, डॉ सुनिल कुमार सिंह, आदी को सम्मानित किया। अंत में विद्यालय के निदेशक श्री सुदर्शन राय ने धन्यवाद ज्ञापन किया।1
- 🌸 नए सत्र का भव्य आगाज: बच्चों के स्वागत में सजा Sanskar Valley Academy परिसर 🌸 मझुआ/आफिमी खोटी। नए शैक्षणिक सत्र के पहले दिन Sanskar Valley Academy में उत्साह, उमंग और पारंपरिक स्वागत का अनोखा संगम देखने को मिला। विद्यालय परिसर में बच्चों का स्वागत तिलक और आरती के साथ किया गया, वहीं उन्हें चॉकलेट और पेंसिल देकर खास एहसास दिलाया गया। इस दौरान नन्हे-मुन्ने बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी।1
- Post by बागी बलिया1
- बलिया के सुखपुरा में प्यार में पागल लड़की चढ़ी टावर पर1
- फिल्म: मोहब्बत मेरी जान कॉमेडी सिन चिंटू तिवारी1
- आरा। भोजपुर पुलिस अधीक्षक मिस्टर राज द्वारा जिले के स्वर्ण व्यवसायियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनके साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान पुलिस अधीक्षक महोदय ने सभी व्यवसायियों को अपने प्रतिष्ठानों में उच्च गुणवत्ता के CCTV कैमरे लगाने, प्रशिक्षित सुरक्षा गार्ड की तैनाती सुनिश्चित करने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने हेतु निर्देशित किया। इसके साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि बाजार क्षेत्रों में पुलिस गश्त को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। पुलिस अधीक्षक महोदय ने स्पष्ट किया कि स्वर्ण व्यवसायियों की सुरक्षा पुलिस प्रशासन की प्राथमिकता है। बैठक में उपस्थित व्यवसायियों ने भी पुलिस के साथ पूर्ण सहयोग करने का भरोसा जताया।1
- वे एक ब्राह्मण परिवार से थे और बचपन से ही साहसी स्वभाव के थे। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में 34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री के सिपाही थे। उस समय भारतीय सैनिकों के साथ भेदभाव और अन्याय किया जाता था, जिससे उनमें असंतोष बढ़ रहा था। 1857 की क्रांति की एक बड़ी वजह एनफील्ड राइफल के कारतूस थे, जिनमें गाय और सूअर की चर्बी होने की बात कही गई। इससे सैनिकों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और विद्रोह की स्थिति बन गई। 29 मार्च 1857 को बैरकपुर में मंगल पांडेय ने अंग्रेज अधिकारियों के खिलाफ विद्रोह कर दिया। उन्होंने अपने अधिकारियों पर गोली चलाई और अन्य सैनिकों को भी क्रांति के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई। उनका बलिदान भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ और पूरे देश में क्रांति की चिंगारी फैल गई। मंगल पांडेय आज भी साहस, देशभक्ति और बलिदान के प्रतीक माने जाते हैं।सन् 1857 की क्रांति का नाम आते ही जिस वीर सिपाही की छवि सबसे पहले उभरती है, वह हैं मंगल पांडे। उन्हें भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का अग्रदूत और पहला शहीद माना जाता है। 8 अप्रैल का दिन उनके बलिदान की याद दिलाता है, जब उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह का बिगुल बजाकर इतिहास रच दिया। 29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी में मंगल पांडे ने अंग्रेज अधिकारियों के खिलाफ खुला विद्रोह कर दिया। उन्होंने अपने साथियों को पुकारते हुए अंग्रेजों के खिलाफ उठ खड़े होने का आह्वान किया और दो अंग्रेज अधिकारियों पर गोली चला दी। यह वह क्षण था जब पहली बार किसी भारतीय सिपाही ने खुलेआम अंग्रेज सत्ता को चुनौती दी। उत्तर प्रदेश के बलिया (तत्कालीन गाजीपुर) जिले के नगवा गांव में 30 जनवरी 1831 को जन्मे मंगल पांडे बचपन से ही साहसी और स्वाभिमानी थे। उनके पिता सुदिष्ट पांडे और माता जानकी देवी थीं। कम उम्र में ही वे ब्रिटिश सेना की 34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री में भर्ती हो गए, जहां उनकी बहादुरी और अनुशासन के लिए पहचान बनी। 1857 के विद्रोह की चिंगारी उस समय भड़की जब नई एनफील्ड राइफल के कारतूसों में गाय और सूअर की चर्बी होने की बात सामने आई। इससे हिंदू और मुस्लिम दोनों सैनिकों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। यह घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम 1857 की मुख्य वजह बनी। हालांकि उनके साथियों ने उस समय खुलकर साथ नहीं दिया, लेकिन उनके साहस ने पूरे देश में विद्रोह की आग फैला दी। अंततः उन्हें गिरफ्तार कर सैन्य अदालत में पेश किया गया और 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई। एक ब्राह्मण परिवार से थे और बचपन से ही साहसी स्वभाव के थे। वे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में 34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री के सिपाही थे। उस समय भारतीय सैनिकों के साथ भेदभाव और अन्याय किया जाता था, जिससे उनमें असंतोष बढ़ रहा था।1
- आरा। बिहार के भोजपुर जिले के आरा में राज्य खाद्य निगम के कर्मियों द्वारा एकदिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया। धरना के दौरान कर्मियों ने बताया कि राजस्व जिला भोजपुर अंतर्गत राज्य खाद्य निगम में वे वर्ष 2014 से लगभग 40 कर्मियों के रूप में निरंतर सेवा दे रहे हैं। इसके बावजूद पिछले 6 माह से उन्हें वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। साथ ही पूर्व वर्षों का लगभग 18 माह का वेतन भी लंबित है। कर्मियों ने कहा कि वे सभी अल्प वेतनभोगी हैं और लगातार वेतन नहीं मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है। इस संबंध में वे पूर्व में भी कई बार पत्र के माध्यम से संबंधित अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं किया गया है। कर्मियों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि अब उनके समक्ष “करो या मरो” की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इसी के तहत दिनांक 07 अप्रैल 2026 को सभी 40 कर्मियों ने एक दिन का कार्य स्थगित कर जिला मुख्यालय स्थित राज्य खाद्य निगम, भोजपुर में शांतिपूर्ण धरना दिया और निगम मुख्यालय को अपनी मांगों से अवगत कराया। उन्होंने मांग की है कि शीघ्र वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य में उन्हें अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसे कदम उठाने के लिए बाध्य न होना पड़े।4