नौ साल पुराने मुकदमे में आचार्य विवेक दास बरी, अदालत ने झूठे आरोप लगाने वालों पर मानहानि का दावा करने की दी छूट विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) ने साक्ष्यों के अभाव में सुनाया फैसला, अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में रहा असफल। संतकबीरनगर। लगभग नौ वर्षों से विचाराधीन चर्चित आपराधिक मुकदमे में विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आचार्य महंत विवेक दास को सभी आरोपों से दोषमुक्त (बरी) कर दिया। न्यायालय ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं हो सका।यह मामला थाना खलीलाबाद में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 419/2018 से संबंधित था, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की तत्कालीन धाराओं 504, 506 तथा एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(ध) के तहत आरोप लगाए गए थे। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध करने का प्रयास किया, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों को निराधार बताते हुए उनका खंडन किया।सुनवाई के दौरान न्यायालय ने गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य और विवेचना का विस्तृत परीक्षण किया। निर्णय में कहा गया कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में आरोपी को दोषसिद्ध नहीं किया जा सकता, इसलिए उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी किया जाता है। फैसले की खास बात यह रही कि न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि बरी हुआ पक्ष स्वयं को झूठे आरोपों के कारण प्रतिष्ठा की क्षति का शिकार मानता है, तो वह कानून के अनुसार संबंधित पक्ष के विरुद्ध मानहानि (Defamation) का दावा करने के लिए स्वतंत्र होगा। इस निर्णय के साथ वर्षों से लंबित यह बहुचर्चित मामला न्यायालय में समाप्त हो गया। फैसले के बाद कानूनी और सामाजिक हलकों में इसकी व्यापक चर्चा बनी हुई है। 🚨 BREAKING NEWS - हर खबर, सबसे पहले 🚨 खबरें 24 न्यूज़ - आपका अपना न्यूज़ चैनल जुड़े रहें हर पल, हर खबर से!
नौ साल पुराने मुकदमे में आचार्य विवेक दास बरी, अदालत ने झूठे आरोप लगाने वालों पर मानहानि का दावा करने की दी छूट विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) ने साक्ष्यों के अभाव में सुनाया फैसला, अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में रहा असफल। संतकबीरनगर। लगभग नौ वर्षों से विचाराधीन चर्चित आपराधिक मुकदमे में विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आचार्य महंत विवेक दास को सभी आरोपों से दोषमुक्त (बरी) कर दिया। न्यायालय ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं हो सका।यह मामला थाना खलीलाबाद में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 419/2018 से संबंधित था, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की तत्कालीन धाराओं 504, 506 तथा एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(ध) के तहत आरोप लगाए गए थे। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध करने का प्रयास किया, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों को निराधार बताते हुए उनका खंडन किया।सुनवाई के दौरान न्यायालय ने गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य और विवेचना का विस्तृत परीक्षण किया। निर्णय में कहा गया कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में आरोपी को दोषसिद्ध नहीं किया जा सकता, इसलिए उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी किया जाता है। फैसले की खास बात यह रही कि न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि बरी हुआ पक्ष स्वयं को झूठे आरोपों के कारण प्रतिष्ठा की क्षति का शिकार मानता है, तो वह कानून के अनुसार संबंधित पक्ष के विरुद्ध मानहानि (Defamation) का दावा करने के लिए स्वतंत्र होगा। इस निर्णय के साथ वर्षों से लंबित यह बहुचर्चित मामला न्यायालय में समाप्त हो गया। फैसले के बाद कानूनी और सामाजिक हलकों में इसकी व्यापक चर्चा बनी हुई है। 🚨 BREAKING NEWS - हर खबर, सबसे पहले 🚨 खबरें 24 न्यूज़ - आपका अपना न्यूज़ चैनल जुड़े रहें हर पल, हर खबर से!
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- जिला अस्पताल में डीएम का छापा, अव्यवस्थाओं पर कड़ी चेतावनी गोरखपुर जिला चिकित्सालय के औचक निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी दीपक मीणा ने अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर कई खामियां पकड़ीं। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि “अगले एक महीने बाद जब दोबारा निरीक्षण होगा, तब कोई भी कमी नहीं मिलनी चाहिए।” डीएम ने साफ शब्दों में कहा कि अस्पताल में हर व्यवस्था पारदर्शी, व्यवस्थित और ऑनलाइन होनी चाहिए, लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निरीक्षण के दौरान डीएम ने ILR सिस्टम सहित विभिन्न व्यवस्थाओं की बारीकी से जांच की। उन्होंने दवा भंडारण व्यवस्था को लेकर विशेष नाराजगी जताई। निर्देश देते हुए कहा कि हर अलमारी के ऊपर स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए कि उसमें कौन-कौन सी दवाएं रखी गई हैं और उनका स्थान क्या है। बिना लेबल और अव्यवस्थित तरीके से रखी दवाओं पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई। डीएम ने कहा कि अस्पताल में कौन कर्मचारी कहां बैठता है, इसकी स्पष्ट जानकारी बोर्ड पर अंकित होनी चाहिए, ताकि मरीजों और तीमारदारों को भटकना न पड़े। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि पूरे अस्पताल परिसर में कहीं भी कचरा दिखाई नहीं देना चाहिए। साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि यह सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि नियमित और प्रभावी तरीके से लागू होनी चाहिए। बायोमीट्रिक अटेंडेंस सिस्टम की भी डीएम ने मौके पर जांच की। कई स्थानों पर उपस्थिति को लेकर ढिलाई सामने आने पर उन्होंने सख्त नाराजगी जाहिर की और निर्देश दिया कि सभी कर्मचारी समय से उपस्थित रहें और बायोमीट्रिक प्रणाली का अनिवार्य रूप से पालन करें। उन्होंने कहा कि अनुपस्थित रहने या नियमों की अनदेखी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर व्यवस्थाएं संतोषजनक नहीं मिलने पर डीएम ने मौके पर ही जिम्मेदार अधिकारियों को सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर लापरवाही किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी। यहां आने वाला हर व्यक्ति बेहतर इलाज और सम्मान की उम्मीद लेकर आता है, ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है । जिला चिकित्सालय में चल रहे निर्माण कार्यों का भी निरीक्षण कर आवश्य दिशा निर्देश दिये। निरीक्षण के दौरान ज्वाइंट मजिस्ट्रेट मुकुल खंडेलवाल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओ.पी. सिंह सहित अन्य चिकित्सक और अधिकारी मौजूद रहे।1
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- पाली क्षेत्र के बनौली ग्राम सभा में नाली निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल, आने-जाने में हो रही परेशानी पाली क्षेत्र के बनौली ग्राम सभा में नाली निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल, आने-जाने में हो रही परेशानी गोरखपुर जिले के पाली विकासखंड अंतर्गत बनौली ग्राम सभा में नाली निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने अनियमितता का आरोप लगाया है। गांव के एक व्यक्ति ने बताया कि उसके घर तक जाने के रास्ते पर जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण लंबे समय से आने-जाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण का कहना है कि ग्राम सभा की ओर से नाली का निर्माण नहीं कराया गया, जिसके कारण बरसात के दिनों में रास्ते पर पानी भर जाता है और कीचड़ की समस्या बनी रहती है। मजबूरी में वह स्वयं अपने घर तक पहुंचने के लिए नाली का निर्माण कराने का प्रयास कर रहा है। ग्रामीणों के अनुसार इस समस्या की शिकायत कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से की गई। कई बार अधिकारी मौके पर निरीक्षण करने भी पहुंचे, लेकिन निरीक्षण के बाद भी समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि ग्राम सभा प्रशासन और संबंधित विभाग इस मामले का संज्ञान लेते हुए जल्द से जल्द नाली का निर्माण कराए, ताकि जलभराव की समस्या समाप्त हो और ग्रामीणों को आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते नाली निर्माण नहीं कराया गया तो बरसात के मौसम में स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई करने तथा नाली निर्माण कार्य शीघ्र शुरू कराने की मांग की है।3