मध्य प्रदेश के अंबाह नगर में भूमिया रोड स्थित वार्ड क्रमांक 17 में जलभराव की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। बारिश के बाद सड़कों पर जमा पानी अब लोगों के घरों में घुस रहा है, जिसके कारण निवासियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वार्ड के पार्षद सुनील साखवार ने इस मामले में नगर पालिका प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उन्होंने जलभराव की इस गंभीर समस्या को लेकर नगर पालिका प्रशासन से कई बार शिकायतें की हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है और शिकायतों के बावजूद अधिकारी समस्या का स्थायी समाधान नहीं कर रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, जलभराव के कारण बच्चों को स्कूल जाने में काफी दिक्कत होती है, क्योंकि उन्हें भरे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे वे अक्सर देर से स्कूल पहुँचते हैं। वहीं, बुजुर्गों, महिलाओं और अन्य राहगीरों को भी आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। घरों में पानी घुसने से लोगों के घरेलू सामान को भी नुकसान पहुँचने की आशंका बनी हुई है। वार्डवासियों ने नगर पालिका प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था को जल्द से जल्द दुरुस्त किया जाए। उन्होंने नालियों की उचित सफाई कराने और समस्या के स्थायी समाधान के लिए आवश्यक निर्माण कार्य कराने की भी अपील की है, ताकि आने वाली बारिश में लोगों को इस परेशानी से राहत मिल सके।
मध्य प्रदेश के अंबाह नगर में भूमिया रोड स्थित वार्ड क्रमांक 17 में जलभराव की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। बारिश के बाद सड़कों पर जमा पानी अब लोगों के घरों में घुस रहा है, जिसके कारण निवासियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वार्ड के पार्षद सुनील साखवार ने इस मामले में नगर पालिका प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उन्होंने जलभराव की इस गंभीर समस्या को लेकर नगर पालिका प्रशासन से कई बार शिकायतें की हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है और शिकायतों के बावजूद अधिकारी समस्या का स्थायी समाधान नहीं कर रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, जलभराव के कारण बच्चों को स्कूल जाने में काफी दिक्कत होती है, क्योंकि उन्हें भरे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे वे अक्सर देर से स्कूल पहुँचते हैं। वहीं, बुजुर्गों, महिलाओं और अन्य राहगीरों को भी आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। घरों में पानी घुसने से लोगों के घरेलू सामान को भी नुकसान पहुँचने की आशंका बनी हुई है। वार्डवासियों ने नगर पालिका प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था को जल्द से जल्द दुरुस्त किया जाए। उन्होंने नालियों की उचित सफाई कराने और समस्या के स्थायी समाधान के लिए आवश्यक निर्माण कार्य कराने की भी अपील की है, ताकि आने वाली बारिश में लोगों को इस परेशानी से राहत मिल सके।
- अंबाह नगर में हीरो माता मंदिर और श्मशान घाट जाने वाले मार्ग पर लंबे समय से जारी जलभराव की समस्या को लेकर गुरुवार को स्थानीय श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों का गुस्सा फूट पड़ा। मंदिर परिसर में जुटे लोगों ने अंबाह नगर पालिका के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। श्रद्धालुओं ने बताया कि सड़क पर लगातार पानी भरे रहने से मंदिर आने वाले भक्तों, राहगीरों और श्मशान घाट जाने वाले लोगों को काफी परेशानी हो रही है, और कई शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। इस मामले की जानकारी मिलने पर क्षेत्रीय विधायक मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने नगर पालिका अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और उन्हें तीन दिन के भीतर जल निकासी तथा सड़क की समस्या का समाधान करने का निर्देश दिया। इस दौरान लोगों ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन के समय मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) अनुपस्थित थे, जिससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई। विधायक ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि निर्धारित तीन दिन में समस्या हल नहीं हुई तो जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रवासियों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जवाबदेही नगर पालिका प्रशासन की होगी।1
- मुरैना में जौहां-श्यामपुर मार्ग के निर्माण को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है, जिससे यह मुद्दा अब जनआक्रोश का प्रतीक बन गया है। गुरुवार को सड़क की मांग को लेकर ग्रामीण धरने पर बैठ गए, उनका आरोप है कि उन्हें एक बार फिर सिर्फ 'भरोसे का झुनझुना' थमा दिया गया है। यह विवाद सांसद के आश्वासन और पीडब्ल्यूडी के एक कथित पत्र के सामने आने के बाद और गहरा गया है। धरने की अगुवाई कर रहे नवनीत तोमर ने सरकार और प्रशासन पर सीधा हमला बोलते हुए कड़े शब्दों में कहा, "अब आश्वासन नहीं, सड़क चाहिए... नहीं तो मेरी अर्थी ही यहां से उठेगी।" इस बयान के बाद धरना स्थल पर मौजूद लोगों का आक्रोश और बढ़ गया। ग्रामीणों ने बताया कि सांसद के पुत्र और तहसीलदार ने गुरुवार सुबह 11 बजे से सड़क निर्माण शुरू कराने का भरोसा दिया था। हालांकि, तय समय पर न तो कोई मशीन पहुंची और न ही काम शुरू हो पाया, जिसने उनके गुस्से को और भड़का दिया। इसी बीच, पीडब्ल्यूडी के एक पत्र के सामने आने से विवाद और बढ़ गया है, क्योंकि ग्रामीणों का आरोप है कि एक तरफ उन्हें निर्माण का भरोसा दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सड़क नहीं बनने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों ने जोर देकर कहा कि वर्षों से बदहाल इस सड़क की भारी कीमत गांव के बच्चे, किसान, गर्भवती महिलाएं और मरीज चुका रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक सड़क निर्माण शुरू नहीं होगा, उनका आंदोलन जारी रहेगा और यदि स्थिति बिगड़ती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन व संबंधित विभाग की होगी।2
- मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में पोरसा के ग्राम खुर्द रायपुर रोड पर भारी पानी भर गया है। इस जलजमाव के कारण पैदल यात्रियों को आवागमन में बहुत असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।1
- श्री राष्ट्रीय क्षत्रिय युवा एकता भारत (एकता क्रांति सेवा) के संस्थापक कृष्णा परमार (सैंपऊ) के जन्मोत्सव के अवसर पर अम्बाह के खेरागढ़ क्षेत्र के ग्राम नगला वीरभान में एक सामाजिक कार्यक्रम और सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संगठन के पदाधिकारियों, समाज के प्रबुद्धजनों और ग्रामीणों ने भाग लिया, जहाँ सामाजिक एकता, भाईचारे और संगठन को मजबूत करने का संदेश दिया गया। सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष लोकेश सिकरवार ने कहा कि समाज की प्रगति तभी संभव है, जब सभी लोग आपसी मतभेदों को भुलाकर एकजुट होकर समाजहित में कार्य करें। उन्होंने युवाओं से सामाजिक बुराइयों के प्रति जागरूक रहते हुए शिक्षा, संगठन और सेवा की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। राष्ट्रीय महासचिव जितेंद्र परमार ने समाज को संगठित रखने को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया, वहीं प्रदेश सोशल मीडिया प्रभारी रामेश्वर तोमर ने संगठन की विचारधारा को गाँव-गाँव तक पहुँचाने और युवाओं को सामाजिक कार्यों से जोड़ने पर बल दिया। कार्यक्रम के आयोजक और जिला अध्यक्ष (आगरा) विश्वास परमार ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए संगठन का उद्देश्य समाज में एकता, भाईचारा और सेवा की भावना को मजबूत करना बताया। इस मौके पर संस्थापक कृष्णा परमार के स्वस्थ, दीर्घायु और सफल जीवन की कामना की गई। कार्यक्रम में ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष विष्णु सिकरवार, प्रधान मनोज परमार, अतुल परमार, नेहल सिकरवार, निरीति शर्मा, गिर्राज शर्मा, ओमी शर्मा, ओमवीर सिकरवार, फेरन सिंह परमार, विनोद परमार, प्रताप सिंह परमार, मातादीन सिकरवार, रामदीन परमार, सत्यप्रकाश परमार, रामविलास परमार, डॉ. सुरेंद्र परमार, कोमल परमार, महावीर परमार, हरिओम परमार, दिवान सिंह परमार, विकाश परमार सहित बड़ी संख्या में संगठन के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और ग्रामीण उपस्थित रहे।1
- जनता का धैर्य टूट रहा है, और युवा सड़कों पर उतर आए हैं। विकास के दावों के बीच बढ़ता जनाक्रोश अब व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। चेतावनी दी गई है कि यदि जनप्रतिनिधि और प्रशासन समय रहते नहीं चेते, तो जनता का यह मौन विद्रोह सत्ता पर भारी पड़ सकता है। लोकतंत्र में सरकार की सबसे बड़ी पूंजी जनता का विश्वास होता है; जब यह विश्वास कमजोर होता है, तो विरोध केवल नारों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जनआंदोलन का रूप लेने लगता है। आज यह तस्वीर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अनेक हिस्सों में उभर रही है। कहीं युवा सड़क निर्माण की मांग को लेकर दंडवत यात्रा कर रहे हैं, तो कहीं ग्रामीण धरने पर बैठे हैं, और लोग पानी, बिजली तथा स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसे केवल विकास कार्यों में देरी नहीं, बल्कि व्यवस्था के प्रति बढ़ते अविश्वास का संकेत माना जा रहा है। इन आंदोलनों की अगुवाई युवा पीढ़ी कर रही है, जो बदलाव चाहती है, सवाल पूछती है और लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों के लिए लड़ना जानती है। जब ज्ञापन, आवेदन, जनसुनवाई और अधिकारियों के चक्कर लगाने के बाद भी समाधान नहीं मिलता, तब आंदोलन एक मजबूरी बन जाता है। ऐसे आंदोलनों को मात्र विरोध समझकर नजरअंदाज करना दूरदर्शिता नहीं होगी। सरकारी योजनाओं की घोषणा तो तेजी से होती है, लेकिन उनका जमीनी क्रियान्वयन अक्सर निराशाजनक रहता है। ठेकेदार समय पर काम पूरा नहीं करते, अधूरे निर्माण महीनों-वर्षों तक लटके रहते हैं, और जो कार्य पूरे होते भी हैं, उनकी गुणवत्ता पहली बारिश में ही सवालों के घेरे में आ जाती है। इससे जनता में यह धारणा बनती है कि जवाबदेही की कोई व्यवस्था नहीं बची है। भ्रष्टाचार भी इस अविश्वास को और गहरा कर रहा है। यदि एक नागरिक को अपनी जायज मांग मनवाने के लिए धरना देना पड़े, सड़क पर उतरना पड़े या अनूठे प्रदर्शन करने पड़ें, तो यह केवल उसकी पीड़ा नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरी का प्रमाण है। जनप्रतिनिधियों को भी आत्ममंथन करना होगा, क्योंकि जनता अब केवल चुनावी वादों पर नहीं, बल्कि पूरे पाँच वर्षों के परिणामों पर हिसाब मांगती है। आज का मतदाता जागरूक है और उसकी चुप्पी भी लोकतंत्र में एक महत्वपूर्ण संदेश देती है। सरकार और प्रशासन के पास अभी भी इस स्थिति को सुधारने का अवसर है। अधूरे विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाए, भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई हो, लापरवाह अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय की जाए, तथा जनता की शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए। ये कदम जनता का विश्वास वापस दिला सकते हैं। अन्यथा, यह बढ़ता असंतोष कल बड़े जनविद्रोह का रूप ले सकता है, क्योंकि इतिहास गवाह है कि जब जनता का धैर्य टूटता है, तो बड़े-बड़े राजनीतिक समीकरण बदल जाते हैं। लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता ही करती है, और उसकी अदालत में केवल वादे नहीं, बल्कि काम बोलते हैं।1