Suresh Chandra Agrawal: सदा जपिये हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे I हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे और हमेशा खुश रहिये Ii हमेशा प्रसन्न रहो 🌹🙏🏾 *।।श्रीकृष्ण।।* *श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,* *हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!!* सभी कृष्ण भक्तों को सादर दंडवत प्रणाम 🙏🌹 *Bhagavad Gita App* *Chapter:* 2 *श्लोक:* 52 *श्लोक:* यदा ते मोहकलिलं बुद्धिर्व्यतितरिष्यति । तदा गन्तासि निर्वेदं श्रोतव्यस्य श्रुतस्य च ॥ ५२ ॥ *अनुवाद:* जब तुम्हारी बुद्धि मोह रूपी सघन वन को पार कर जायेगी तो तुम सुने हुए तथा सुनने योग्य सब के प्रति अन्यमनस्क हो जाओगे। *तात्पर्य:* भगवद्भक्तों के जीवन में ऐसे अनेक उदाहरण प्राप्त हैं जिन्हें भगवद्भक्ति के कारण वैदिक कर्मकाण्ड से विरक्ति हो गई। जब मनुष्य श्रीकृष्ण को तथा उनके साथ अपने सम्बन्ध को वास्तविक रूप में समझ लेता है तो वह सकाम कर्मों के अनुष्ठानों के प्रति पूर्णतया अन्यमनस्क हो जाता है, भले ही वह अनुभवी ब्राह्मण क्यों न हो। भक्त परम्परा के महान भक्त तथा आचार्य श्री माधवेन्द्रपुरी का कहना है— सन्ध्यावन्दन भद्रमस्तु भवतो भो: स्नान तुभ्यं नमो। भो देवा: पितरश्च तर्पणविधौ नाहं क्षम: क्षम्यताम् ॥ यत्र क्वापि निषद्य यादवकुलोत्तमस्य कंसद्विष:। स्मारं स्मारमघं हरामि तदलं मन्ये किमन्येन मे ॥ “हे मेरी त्रिकाल प्रार्थनाओ, तुम्हारी जय हो। हे स्नान, तुम्हें प्रणाम है। हे देवपितृगण, अब मैं आप लोगों के लिए तर्पण करने में असमर्थ हूँ। अब तो जहाँ भी बैठता हूँ, यादव कुलवंशी, कंस के हंता श्रीकृष्ण का ही स्मरण करता हूँ और इस तरह मैं अपने पापमय बन्धन से मुक्त हो सकता हूँ। मैं सोचता हूँ कि यही मेरे लिए पर्याप्त है।” वैदिक रस्में तथा अनुष्ठान यथा त्रिकाल संध्या, प्रात:कालीन स्नान, पितृ-तर्पण आदि नवदीक्षितों के लिए अनिवार्य हैं। किन्तु जब कोई पूर्णतया कृष्णभावनाभावित हो और कृष्ण की दिव्य प्रेमाभक्ति में लगा हो, तो वह इन विधि-विधानों के प्रति उदासीन हो जाता है, क्योंकि उसे पहले ही सिद्धि प्राप्त हो चुकी होती है। यदि कोई परमेश्वर कृष्ण की सेवा करके ज्ञान को प्राप्त होता है तो उसे शास्त्रों में वर्णित विभिन्न प्रकार की तपस्याएँ तथा यज्ञ करने की आवश्यकता नहीं रह जाती। इसी प्रकार जो यह नहीं समझता कि वेदों का उद्देश्य कृष्ण तक पहुँचना है और अपने आपको अनुष्ठानादि में व्यस्त रखता है, वह केवल अपना समय नष्ट करता है। कृष्णभावनाभावित व्यक्ति शब्द-ब्रह्म की सीमा या वेदों तथा उपनिषदों की परिधि को भी लाँघ जाते हैं। जय श्री कृष्ण 🙏🌹 🦚❤️ *राधा कृष्ण संवाद* ❤️🦚 मन की उलझन ✨ एक दिन राधा ने श्रीकृष्ण से पूछा — *"कान्हा, मन कभी-कभी बिना कारण ही उदास क्यों हो जाता है?* " *कृष्ण मुस्कुराकर बोले —* "राधे, जब मन अपने भीतर से दूर हो जाता है और संसार की बातों में उलझ जाता है, तभी उदासी जन्म लेती है। जो अपने हृदय की शांति से जुड़ा रहे, उसका मन फिर कभी खाली नहीं लगता।"💞 *राधा मुस्कुरा दीं…* क्योंकि कृष्ण के साथ उन्हें हमेशा वही शांति मिलती थी। 🌸 > मन की सच्ची शांति बाहर नहीं, > अपने भीतर मिलती है। ✨ *राधे राधे* 🥰 🚩 *रामायण की सीख* 🚩 > 📖 चौपाई (रामचरितमानस) “राम काज कीन्हें बिनु मोहि कहाँ विश्राम।” 🌿 *अर्थ:* जब तक भगवान का कार्य पूरा न हो जाए, तब तक मुझे विश्राम नहीं मिल सकता। ✨ *जीवन की सीख:* _जब हमारे जीवन में लक्ष्य स्पष्ट और पवित्र होता है, तो आलस्य अपने आप समाप्त हो जाता है।_ समर्पण और जिम्मेदारी के साथ किया गया कार्य ही हमें सच्ची संतुष्टि देता है। इसलिए *अपने लक्ष्य को इतना महत्वपूर्ण बनाइए कि मेहनत बोझ नहीं, बल्कि आनंद लगे।* > 🔥"समर्पण से किया गया कार्य ही सफलता दिलाता है।" 🪷 *जय श्री राम* 🪷 *♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️* *!! सपने और हकीकत !!* °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° बहुत समय पहले की बात हैं, एक व्यक्ति था जो बेहद आलसी और साथ ही साथ गरीब भी था। वह कुछ भी मेहनत नहीं करना चाहता था। लेकिन अमीर बनने का सपना देखता रहता था। वह भिक्षा मांगकर अपना गुजारा करता था। एक सुबह उसे भिक्षा के रूप में दूध से भरा एक घड़ा मिला। वह बहुत प्रसन्न हुआ और दूध का घड़ा लेकर घर चला गया। उसने दूध को उबाला, उसमें से कुछ दूध पिया और बचा हुआ दूध, एक बर्तन में डाल दिया। दूध को दही में बदलने के लिए उसने बर्तन में थोड़ा सा दही डाला। इसके बाद वह सोने के लिए लेट गया। वह सोते समय दही के बर्तन के बारे में सोचने लगा। उसने सोचा, “सुबह तक दूध दही बन जायेगा। मैं दही को मथकर उससे मक्खन बना लूंगा। फिर मक्खन को गर्म करके उससे घी बना लूंगा। फिर घी को बाजार में जाकर उसे बेच दूँगा और कुछ पैसे कमा लूंगा। उस पैसे से मैं एक मुर्गी खरीदूंगा। मुर्गी अंडे देगी, उन अंडो से बहुत सारे मुर्गे मुर्गी पैदा होंगे। फिर ये मुर्गियां सैकड़ों अंडे देगी और मेरे पास जल्द ही एक पोल्ट्री फार्म होगा।” वह कल्पना में डूबा रहा। फिर उसने सोचा, “मैं सारी मुर्गियां बेच दूंगा और फिर कुछ गाय भैंस खरीद लूंगा और दूध की डेयरी खोल दूंगा। शहर के सभी लोग मुझसे दूध खरीदने आएंगे और मैं बहुत जल्दी ही अमीर हो जाऊंगा। फिर में अमीर परिवार की खूबसूरत लड़की से शादी कर कर लूंगा। फिर मेरा एक सुंदर सा बेटा होगा। अगर वह कोई शरारत करेगा तो मुझे बहुत गुस्सा आएगा और उसे सबक सिखाने के लिए मैं उसे डंडे से ऐसे मारूंगा।” यह सोचने के दौरान उसने बिस्तर के बगल में पड़ा डंडा उठाया और मारने का नाटक करने लगा। यही डंडा उसके दूध के बर्तन में लग गया और दूध का बर्तन टूट गया, इससे सारा दूध जमीन पर फैल गया। बर्तन की आवाज सुनकर उस आदमी की नींद उड़ गई। फैला हुआ दूध देखकर उसने अपना सिर पकड़ लिया। *शिक्षा:-* सपने देखो, लेकिन खाली सपने देखने से कुछ नहीं होगा। हमें कड़ी मेहनत करनी होगी। कुछ भी जिंदगी में आसानी से नहीं मिलता हैं। हमारी जिंदगी को बेहतरीन बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। क्योंकि कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। अगर आप केवल सपने ही देखते रहते हैं उनको साकार करने के लिए कोई कदम नहीं उठाते हैं, तो ऐसा करके आप खुद को धोखा दे रहे हैं। इसलिए पहले खुद का 100% दीजिए, फिर सफलता खुद आपके कदम चूमने आएगी। *सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।* *जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।* ✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️ *जुकाम होने पर* जुकाम होने पर नीम की पत्तियां काली मिर्च के साथ पीसकर गोलियां बना लें। गर्म पानी के साथ ये तीन−चार गोलियां खाने से जुकाम ठीक हो जाता है। --नीम के पत्ते, छाल और निम्बोली को बराबर मात्रा में मिलाकर पीसने से बने लेप से त्वचा पर होने वाले फोड़े−फुसियां तथा घाव जल्दी ठीक हो जाते हैं। जय जय श्री राधे 🙏🌹
Suresh Chandra Agrawal: सदा जपिये हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे I हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे और हमेशा खुश रहिये Ii हमेशा प्रसन्न रहो 🌹🙏🏾 *।।श्रीकृष्ण।।* *श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,* *हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!!* सभी कृष्ण भक्तों को सादर दंडवत प्रणाम 🙏🌹 *Bhagavad Gita App* *Chapter:* 2 *श्लोक:* 52 *श्लोक:* यदा ते मोहकलिलं बुद्धिर्व्यतितरिष्यति । तदा गन्तासि निर्वेदं श्रोतव्यस्य श्रुतस्य च ॥ ५२ ॥ *अनुवाद:* जब तुम्हारी बुद्धि मोह रूपी सघन वन को पार कर जायेगी तो तुम सुने हुए तथा सुनने योग्य सब के प्रति अन्यमनस्क हो जाओगे। *तात्पर्य:* भगवद्भक्तों के जीवन में ऐसे अनेक उदाहरण प्राप्त हैं जिन्हें भगवद्भक्ति के कारण वैदिक कर्मकाण्ड से विरक्ति हो गई। जब मनुष्य श्रीकृष्ण को तथा उनके साथ अपने सम्बन्ध को वास्तविक रूप में समझ लेता है तो वह सकाम कर्मों के अनुष्ठानों के प्रति पूर्णतया अन्यमनस्क हो जाता है, भले ही वह अनुभवी ब्राह्मण क्यों न हो। भक्त परम्परा के महान भक्त तथा आचार्य श्री माधवेन्द्रपुरी का कहना है— सन्ध्यावन्दन भद्रमस्तु भवतो भो: स्नान तुभ्यं नमो। भो देवा: पितरश्च तर्पणविधौ नाहं क्षम: क्षम्यताम् ॥ यत्र क्वापि निषद्य यादवकुलोत्तमस्य कंसद्विष:। स्मारं स्मारमघं हरामि तदलं मन्ये किमन्येन मे ॥ “हे मेरी त्रिकाल प्रार्थनाओ, तुम्हारी जय हो। हे स्नान, तुम्हें प्रणाम है। हे देवपितृगण, अब मैं आप लोगों के लिए तर्पण करने में असमर्थ हूँ। अब तो जहाँ भी बैठता हूँ, यादव कुलवंशी, कंस के हंता श्रीकृष्ण का ही स्मरण करता हूँ और इस तरह मैं अपने पापमय बन्धन से मुक्त हो सकता हूँ। मैं सोचता हूँ कि यही मेरे लिए पर्याप्त है।” वैदिक रस्में तथा अनुष्ठान यथा त्रिकाल संध्या, प्रात:कालीन स्नान, पितृ-तर्पण आदि नवदीक्षितों के लिए अनिवार्य हैं। किन्तु जब कोई पूर्णतया कृष्णभावनाभावित हो और कृष्ण की दिव्य प्रेमाभक्ति में लगा हो, तो वह इन विधि-विधानों के प्रति उदासीन हो जाता है, क्योंकि उसे पहले ही सिद्धि प्राप्त हो चुकी होती है। यदि कोई परमेश्वर कृष्ण की सेवा करके ज्ञान को प्राप्त होता है तो उसे शास्त्रों में वर्णित विभिन्न प्रकार की तपस्याएँ तथा यज्ञ करने की आवश्यकता नहीं रह जाती। इसी प्रकार जो यह नहीं समझता कि वेदों का उद्देश्य कृष्ण तक पहुँचना है और अपने आपको अनुष्ठानादि में व्यस्त रखता है, वह केवल अपना समय नष्ट करता है। कृष्णभावनाभावित व्यक्ति शब्द-ब्रह्म की सीमा या वेदों तथा उपनिषदों की परिधि को भी लाँघ जाते हैं। जय श्री कृष्ण 🙏🌹 🦚❤️ *राधा कृष्ण संवाद* ❤️🦚 मन की उलझन ✨ एक दिन राधा ने श्रीकृष्ण से पूछा — *"कान्हा, मन कभी-कभी बिना कारण ही उदास क्यों हो जाता है?* " *कृष्ण मुस्कुराकर बोले —* "राधे, जब मन अपने भीतर से दूर हो जाता है और संसार की बातों में उलझ जाता है, तभी उदासी जन्म लेती है। जो अपने हृदय की शांति से जुड़ा रहे, उसका मन फिर कभी खाली नहीं लगता।"💞 *राधा मुस्कुरा दीं…* क्योंकि कृष्ण के साथ उन्हें हमेशा वही शांति मिलती थी। 🌸 > मन की सच्ची शांति बाहर नहीं, > अपने भीतर मिलती है। ✨ *राधे राधे* 🥰 🚩 *रामायण की सीख* 🚩 > 📖 चौपाई (रामचरितमानस) “राम काज कीन्हें बिनु मोहि कहाँ विश्राम।” 🌿 *अर्थ:* जब तक भगवान का कार्य पूरा न हो जाए, तब तक मुझे विश्राम नहीं मिल सकता। ✨ *जीवन की सीख:* _जब हमारे जीवन में लक्ष्य स्पष्ट और पवित्र होता है, तो आलस्य अपने आप समाप्त हो जाता है।_ समर्पण और जिम्मेदारी के साथ किया गया कार्य ही हमें सच्ची संतुष्टि देता है। इसलिए *अपने लक्ष्य को इतना महत्वपूर्ण बनाइए कि मेहनत बोझ नहीं, बल्कि आनंद लगे।* > 🔥"समर्पण से किया गया कार्य ही सफलता दिलाता है।" 🪷 *जय श्री राम* 🪷 *♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️* *!! सपने और हकीकत !!* °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° बहुत समय पहले की बात हैं, एक व्यक्ति था जो बेहद आलसी और साथ ही साथ गरीब भी था। वह कुछ भी मेहनत नहीं करना चाहता था। लेकिन अमीर बनने का सपना देखता रहता था। वह भिक्षा मांगकर अपना गुजारा करता था। एक सुबह उसे भिक्षा के रूप में दूध से भरा एक घड़ा मिला। वह बहुत प्रसन्न हुआ और दूध का घड़ा लेकर घर चला गया। उसने दूध को उबाला, उसमें से कुछ दूध पिया और बचा हुआ दूध, एक बर्तन में डाल दिया। दूध को दही में बदलने के लिए उसने बर्तन में थोड़ा सा दही डाला। इसके बाद वह सोने के लिए लेट गया। वह सोते समय दही के बर्तन के बारे में सोचने लगा। उसने सोचा, “सुबह तक दूध दही बन जायेगा। मैं दही को मथकर उससे मक्खन बना लूंगा। फिर मक्खन को गर्म करके उससे घी बना लूंगा। फिर घी को बाजार में जाकर उसे बेच दूँगा और कुछ पैसे कमा लूंगा। उस पैसे से मैं एक मुर्गी खरीदूंगा। मुर्गी अंडे देगी, उन अंडो से बहुत सारे मुर्गे मुर्गी पैदा होंगे। फिर ये मुर्गियां सैकड़ों अंडे देगी और मेरे पास जल्द ही एक पोल्ट्री फार्म होगा।” वह कल्पना में डूबा रहा। फिर उसने सोचा, “मैं सारी मुर्गियां बेच दूंगा और फिर कुछ गाय भैंस खरीद लूंगा और दूध की डेयरी खोल दूंगा। शहर के सभी लोग मुझसे दूध खरीदने आएंगे और मैं बहुत जल्दी ही अमीर हो जाऊंगा। फिर में अमीर परिवार की खूबसूरत लड़की से शादी कर कर लूंगा। फिर मेरा एक सुंदर सा बेटा होगा। अगर वह कोई शरारत करेगा तो मुझे बहुत गुस्सा आएगा और उसे सबक सिखाने के लिए मैं उसे डंडे से ऐसे मारूंगा।” यह सोचने के दौरान उसने बिस्तर के बगल में पड़ा डंडा उठाया और मारने का नाटक करने लगा। यही डंडा उसके दूध के बर्तन में लग गया और दूध का बर्तन टूट गया, इससे सारा दूध जमीन पर फैल गया। बर्तन की आवाज सुनकर उस आदमी की नींद उड़ गई। फैला हुआ दूध देखकर उसने अपना सिर पकड़ लिया। *शिक्षा:-* सपने देखो, लेकिन खाली सपने देखने से कुछ नहीं होगा। हमें कड़ी मेहनत करनी होगी। कुछ भी जिंदगी में आसानी से नहीं मिलता हैं। हमारी जिंदगी को बेहतरीन बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। क्योंकि कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। अगर आप केवल सपने ही देखते रहते हैं उनको साकार करने के लिए कोई कदम नहीं उठाते हैं, तो ऐसा करके आप खुद को धोखा दे रहे हैं। इसलिए पहले खुद का 100% दीजिए, फिर सफलता खुद आपके कदम चूमने आएगी। *सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।* *जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।* ✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️ *जुकाम होने पर* जुकाम होने पर नीम की पत्तियां काली मिर्च के साथ पीसकर गोलियां बना लें। गर्म पानी के साथ ये तीन−चार गोलियां खाने से जुकाम ठीक हो जाता है। --नीम के पत्ते, छाल और निम्बोली को बराबर मात्रा में मिलाकर पीसने से बने लेप से त्वचा पर होने वाले फोड़े−फुसियां तथा घाव जल्दी ठीक हो जाते हैं। जय जय श्री राधे 🙏🌹
- श्री हनुमान जी महाराज सेवा मंडल जयपुर द्वारा सामूहिक 21 वीं ध्वज पद यात्रा जयपुर से रवाना होकर शाहपुरा पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया, श्री बद्रीनाथ जी का मंदिर,खजाने वालों का रास्ता मुर्ति मोहल जयपुर से थानागाजी अलवर 2 अप्रैल को पहुंचेंगे,प्रति अटूट आस्था का प्रतीक है1
- Post by Yogesh Kumar Gupta4
- ye mhila jaipur nagori khor se lapta he inhone hre rang ki Sadi phni hui he inki hight 5 inch 2 foot he inki thodi mansik sthiti theek nahin Hai per batchit karne per Naam pata Bata sakti hai yah Rahane wali tonkk Rajasthan Aligarh ki hai Inka pihar chauth ka barwada hai kisi ko bhi mile to diye hue number per sampark Karen batane Wale Ko uchit inam Diya jaega contact number.. 8696556627 95091241901
- Post by Raj.JANTA SEVA-84 NEWS1
- आज दिनांक 31.3.2026 को शाम 7:40 मिनट अचानक उदयपुरवाटी मे बारिश शुरू जिसके कारण मौसम हुआ सुहाना और सर्दी बढी लोगो को कुलर पंखे से राहत मिली!1
- Post by @nilesh Verma-19971
- Post by Raj.JANTA SEVA-84 NEWS1
- मीठड़ी कस्बे सहित आसपास ग्रामीण क्षेत्र सोमवार मध्य रात्री व मंगलवार को हल्की बारिश हुई। जिससे तापमान में गिरावट दर्ज हुई। वही किसानो को फसल समेटने को लेकर परेशानी हो रही है। साथ शादी-ब्याह के घरो में व्यवस्थाए प्रभावित हुई। पूर्व पंचायत समिति सदस्य दिलीप गुर्जर उलाणा ने बताया कि ग्राम उलाणा रात्री व आज दोपहर में दोनो समय चना आकार के ओले गिरे। पर जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ है।2
- Post by RAJESH PATRKAR SIKAR सीकर1