गाजियाबाद के कौशांबी थाना क्षेत्र के वैशाली निवासी मंदबुद्धि युवक गिरधर सिंह विष्ट के लापता होने के बाद उसका शव मिलने से यह पूरा मामला गंभीर हो गया है। परिजनों ने कौशांबी थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए इस मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। शव की पहचान के बाद शनिवार को बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और परिवार कौशांबी थाने पहुंचे, जहां घटना को लेकर गहरा आक्रोश देखने को मिला। गिरधर सिंह के परिवार का आरोप है कि 16 मई को कॉलोनी के बाहर कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट की थी, जिसके बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। परिजनों के अनुसार, कौशांबी थाना पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए युवक को जेल भेज दिया। परिवार का कहना है कि गिरधर सिंह मानसिक रूप से कमजोर था और उसका वर्षों से इलाज चल रहा था, लेकिन उसकी इस चिकित्सीय स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया गया। मृतक की मां देवकी देवी ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे को जेल भेजे जाने के दौरान और उसके बाद कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने पूरे मामले को संदेहास्पद बना दिया। उन्होंने दावा किया कि कुछ पुलिसकर्मी उनके घर से बेटे के इलाज से संबंधित मेडिकल दस्तावेज लेकर गए थे, लेकिन बाद में इस संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई कि वे पुलिसकर्मी कौन थे, और पूछताछ करने पर पुलिसकर्मियों ने इन कागजातों को मंगाए जाने की बात से इनकार कर दिया था। अब परिवार सवाल कर रहा है कि आखिर वे पुलिसकर्मी कौन थे और किस मंशा से इलाज संबंधी कागजों को गायब किया गया। परिजनों के मुताबिक, डासना जेल प्रशासन ने उन्हें बताया कि 21 मई को युवक को किसी रिश्तेदार की सुपुर्दगी में रिहा कर दिया गया था, जबकि परिवार का दृढ़ता से कहना है कि उनका कोई भी सदस्य उसे लेने जेल नहीं गया था। ऐसे में यह बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि युवक को किसके हवाले किया गया और उसकी रिहाई की पूरी प्रक्रिया किस आधार पर की गई। परिवार का यह भी आरोप है कि युवक के लापता होने की सूचना पुलिस को दिए जाने के बावजूद उसकी तलाश में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई। अब शव मिलने के बाद परिजन पूरे घटनाक्रम को संदिग्ध मान रहे हैं और हत्या की आशंका जताते हुए मांग कर रहे हैं कि 21 मई से लेकर शव मिलने तक युवक कहां रहा और किन परिस्थितियों में उसकी मौत हुई, इसकी निष्पक्ष जांच की जाए। मृतक की मां ने पुलिस प्रशासन से यह भी मांग की है कि कौशांबी थाना इंचार्ज और अन्य पुलिस कर्मियों के साथ-साथ, जेल प्रशासन और इस मामले से जुड़े सभी व्यक्तियों की भूमिका की गहन जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। दूसरी ओर, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच चल रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित सभी तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, मंदबुद्धि युवक की इस संदिग्ध मौत ने पुलिस और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजन लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं और इस पूरे मामले की सच्चाई को सामने लाने की मांग भी तेज हो गई है।
गाजियाबाद के कौशांबी थाना क्षेत्र के वैशाली निवासी मंदबुद्धि युवक गिरधर सिंह विष्ट के लापता होने के बाद उसका शव मिलने से यह पूरा मामला गंभीर हो गया है। परिजनों ने कौशांबी थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए इस मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। शव की पहचान के बाद शनिवार को बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और परिवार कौशांबी थाने पहुंचे, जहां घटना को लेकर गहरा आक्रोश देखने को मिला। गिरधर सिंह के परिवार का आरोप है कि 16 मई को कॉलोनी के बाहर कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट की थी, जिसके बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। परिजनों के अनुसार, कौशांबी थाना पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए युवक को जेल भेज दिया। परिवार का कहना है कि गिरधर सिंह मानसिक रूप से कमजोर था और उसका वर्षों से इलाज चल रहा था, लेकिन उसकी इस चिकित्सीय स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया गया। मृतक की मां देवकी देवी ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे को जेल भेजे जाने के दौरान और उसके बाद कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने पूरे मामले को संदेहास्पद बना दिया। उन्होंने दावा किया कि कुछ पुलिसकर्मी उनके घर से बेटे के इलाज से संबंधित मेडिकल दस्तावेज लेकर गए थे, लेकिन बाद में इस संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई कि वे पुलिसकर्मी कौन थे, और पूछताछ करने पर पुलिसकर्मियों ने इन कागजातों को मंगाए जाने की बात से इनकार कर दिया था। अब परिवार सवाल कर रहा है कि आखिर वे पुलिसकर्मी कौन थे और किस मंशा से इलाज संबंधी कागजों को गायब किया गया। परिजनों के मुताबिक, डासना जेल प्रशासन ने उन्हें बताया कि 21 मई को युवक को किसी रिश्तेदार की सुपुर्दगी में रिहा कर दिया गया था, जबकि परिवार का दृढ़ता से कहना है कि उनका कोई भी सदस्य उसे लेने जेल नहीं गया था। ऐसे में यह बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि युवक को किसके हवाले किया गया और उसकी रिहाई की पूरी प्रक्रिया किस आधार पर की गई। परिवार का यह भी आरोप है कि युवक के लापता होने की सूचना पुलिस को दिए जाने के बावजूद उसकी तलाश में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई। अब शव मिलने के बाद परिजन पूरे घटनाक्रम को संदिग्ध मान रहे हैं और हत्या की आशंका जताते हुए मांग कर रहे हैं कि 21 मई से लेकर शव मिलने तक युवक कहां रहा और किन परिस्थितियों में उसकी मौत हुई, इसकी निष्पक्ष जांच की जाए। मृतक की मां ने पुलिस प्रशासन से यह भी मांग की है कि कौशांबी थाना इंचार्ज और अन्य पुलिस कर्मियों के साथ-साथ, जेल प्रशासन और इस मामले से जुड़े सभी व्यक्तियों की भूमिका की गहन जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। दूसरी ओर, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच चल रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित सभी तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, मंदबुद्धि युवक की इस संदिग्ध मौत ने पुलिस और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजन लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं और इस पूरे मामले की सच्चाई को सामने लाने की मांग भी तेज हो गई है।
- गाजियाबाद के लोनी स्थित ट्रॉनिका सिटी में जिला प्रशासन ने अवैध कब्जों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। यूपीसीडा की सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बनी एक मजार को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। यह कार्रवाई ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं एसडीएम लोनी दीपक सिंघनवाल के नेतृत्व में की गई, जिसमें पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन ने इस कदम पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देशों और जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ के नेतृत्व में पूरे जनपद में अतिक्रमण हटाओ अभियान लगातार जारी है। डीसीपी ग्रामीण सुरेन्द्रनाथ तिवारी ने बताया कि अवैध निर्माण कराने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भूमाफियाओं और सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही और पूरे क्षेत्र में शांति बनाए रखी गई।1
- उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित शाही थाना क्षेत्र में वित्तीय धोखाधड़ी के एक मामले में संलिप्त तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। इस संबंध में जानकारी एसपी साउथ श्रीमती अंशिका वर्मा द्वारा दी गई है।1
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- मालवीय नगर अग्निकांड के आरोपी कुकिंग के पक्ष में उत्तराखंड के लोगों ने जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन मालवीय नगर अग्निकांड से जुड़े आरोपी कुकिंग के समर्थन में आयोजित किया गया।1
- दिल्ली के शाहदरा जिले के गांधीनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत कैलाश नगर रेलवे लाइन के पास स्थित एक झुग्गी बस्ती में 34 वर्षीय महिला रुखसार की हत्या कर दी गई है। पुलिस ने इस मामले में हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। जानकारी के अनुसार, घटना के बाद से ही महिला का पति फरार है। पुलिस ने फरार पति को गिरफ्तार करने के लिए कई टीमें गठित की हैं और उसकी तलाश में जुटी हुई है।1
- यमन के 'स्पाइडर-मैन' के नाम से मशहूर सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर अल-कह्का बिन अंतर का यमन के दामत स्थित एक ज्वालामुखी के क्रेटर पर खतरनाक स्टंट करते हुए निधन हो गया है। अल-कह्का बिना किसी सुरक्षा उपकरण (सेफ्टी गियर) के 120 मीटर गहरे ज्वालामुखी के क्रेटर पर स्टंट कर रहे थे, तभी उनका पैर फिसल गया। वे सीधे क्रेटर में मौजूद गर्म सल्फ्यूरिक पानी में जा गिरे, जिससे उनकी दर्दनाक मौत हो गई। उनके निधन के बाद उनका आखिरी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।1
- गाजियाबाद में डासना जेल से रिहा किए गए एक मंदबुद्धि युवक का शव मिलने से सनसनी फैल गई है। मृतक की पहचान वैशाली निवासी गिरधर सिंह विष्ट के रूप में हुई है। इस संदिग्ध मौत पर परिजनों ने हत्या की आशंका व्यक्त करते हुए कौशांबी थाना पुलिस और जेल प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परिवार ने आरोप लगाया है कि मई महीने में एक मारपीट के मामले में युवक को जेल भेजा गया था। बाद में जेल प्रशासन ने उसकी रिहाई की जानकारी दी थी, लेकिन परिवार का कोई सदस्य उसे लेने नहीं पहुंचा। इस पर परिजनों ने यह बड़ा सवाल उठाया है कि आखिर युवक को किसकी सुपुर्दगी में छोड़ा गया और रिहाई के बाद वह कहां रहा। मृतक की कैंसर पीड़ित मां देवकी देवी ने इस मामले में उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। शव मिलने की सूचना के बाद परिजन और स्थानीय लोग थाने पहुंचे और निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई। पुलिस ने बताया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच जारी है।1
- यह पोस्ट KP TECHNOLOGY HD वॉलपेपर से संबंधित जानकारी को 'शुद्ध देसी हिंदी' भाषा शैली में प्रस्तुत करने का आग्रह करती है।1
- बुलंदशहर के ककोड़ क्षेत्र के वैर में दबंगों द्वारा एक युवक को बेरहमी से पीटने का मामला सामने आया है। इस घटना में दबंगों ने युवक पर हमला करने के लिए लाठी-डंडों और लोहे की रॉड का इस्तेमाल किया। इस पूरी वारदात का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।1