हिसार में सफाई कर्मचारियों का हल्ला बोल! मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे, पुलिस ने किया लाठीचार्जआखिर कब तक लाठियां खाएगा सफाई कर्मचारी? हिसार में हक-अधिकार की लड़ाई तेज हिसार से सफाई कर्मचारियों के आंदोलन की ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जो सरकार और प्रशासन के सामने कई बड़े सवाल खड़े करती हैं। अपने हक, अधिकार और मांगों को लेकर सफाई कर्मचारी कई दिनों से प्रदर्शन और हड़ताल पर हैं। लेकिन आरोप है कि लगातार आवाज उठाने के बावजूद सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली। वीओ: जब बातचीत से समाधान नहीं निकला, तो सफाई कर्मचारियों ने अपना विरोध और तेज कर दिया। शहर की सड़कों पर कूड़ा डालकर सफाई व्यवस्था को प्रभावित किया गया, ताकि सरकार तक उनकी आवाज पहुंचे और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए। लेकिन इसके बाद जो तस्वीरें सामने आईं, उन्होंने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। आरोप है कि प्रदर्शन कर रहे सफाई कर्मचारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और कई कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया। सफाई कर्मचारियों का कहना है कि जो लोग वर्षों से शहर को साफ रखने का काम करते हैं, उनकी मांगों को सुनने के बजाय उनके साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है? एक तरफ सफाई कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए सड़क पर संघर्ष कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ सरकार और प्रशासन के रवैये को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सवाल ये है— आखिर सफाई कर्मचारियों को अपने हक और अधिकार के लिए बार-बार सड़कों पर क्यों उतरना पड़ता है? कब तक अपनी मांगों को मनवाने के लिए उन्हें आंदोलन और हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ेगा? और सबसे बड़ा सवाल— क्या अपनी मांगों के लिए आवाज उठाना इतना बड़ा गुनाह है कि उसके बदले कर्मचारियों को पुलिस की लाठियां और हिरासत झेलनी पड़े? सफाई कर्मचारी सिर्फ कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि वही लोग हैं जो रोज हमारे शहरों को साफ रखने के लिए सड़कों पर उतरते हैं। अब जरूरत है कि सरकार और प्रशासन बातचीत के जरिए इस विवाद का समाधान निकाले और सफाई कर्मचारियों की जायज मांगों पर गंभीरता से विचार करे। क्योंकि सवाल सिर्फ हिसार के सफाई कर्मचारियों का नहीं है… सवाल उन तमाम सफाई सैनिकों के सम्मान, अधिकार और भविष्य का है, जो हर दिन हमारे शहरों को स्वच्छ रखने के लिए अपना पसीना बहाते हैं।
हिसार में सफाई कर्मचारियों का हल्ला बोल! मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे, पुलिस ने किया लाठीचार्जआखिर कब तक लाठियां खाएगा सफाई कर्मचारी? हिसार में हक-अधिकार की लड़ाई तेज हिसार से सफाई कर्मचारियों के आंदोलन की ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जो सरकार और प्रशासन के सामने कई बड़े सवाल खड़े करती हैं। अपने हक, अधिकार और मांगों को लेकर सफाई कर्मचारी कई दिनों से प्रदर्शन और हड़ताल पर हैं। लेकिन आरोप है कि लगातार आवाज उठाने के बावजूद सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली। वीओ: जब बातचीत से समाधान नहीं निकला, तो सफाई कर्मचारियों ने अपना विरोध और तेज कर दिया। शहर की सड़कों पर कूड़ा डालकर सफाई व्यवस्था को प्रभावित किया गया, ताकि सरकार तक उनकी आवाज पहुंचे और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए। लेकिन इसके बाद जो तस्वीरें सामने आईं, उन्होंने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। आरोप है कि प्रदर्शन कर रहे सफाई कर्मचारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और कई कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया। सफाई कर्मचारियों का कहना है कि जो लोग वर्षों से शहर को साफ रखने का काम करते हैं, उनकी मांगों को सुनने के बजाय उनके साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है? एक तरफ सफाई कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए सड़क पर संघर्ष कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ सरकार और प्रशासन के रवैये को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सवाल ये है— आखिर सफाई कर्मचारियों को अपने हक और अधिकार के लिए बार-बार सड़कों पर क्यों उतरना पड़ता है? कब तक अपनी मांगों को मनवाने के लिए उन्हें आंदोलन और हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ेगा? और सबसे बड़ा सवाल— क्या अपनी मांगों के लिए आवाज उठाना इतना बड़ा गुनाह है कि उसके बदले कर्मचारियों को पुलिस की लाठियां और हिरासत झेलनी पड़े? सफाई कर्मचारी सिर्फ कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि वही लोग हैं जो रोज हमारे शहरों को साफ रखने के लिए सड़कों पर उतरते हैं। अब जरूरत है कि सरकार और प्रशासन बातचीत के जरिए इस विवाद का समाधान निकाले और सफाई कर्मचारियों की जायज मांगों पर गंभीरता से विचार करे। क्योंकि सवाल सिर्फ हिसार के सफाई कर्मचारियों का नहीं है… सवाल उन तमाम सफाई सैनिकों के सम्मान, अधिकार और भविष्य का है, जो हर दिन हमारे शहरों को स्वच्छ रखने के लिए अपना पसीना बहाते हैं।
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- Jan Sunwai is where Delhi speaks as one family, with every concern heard as our own and every solution carried as a responsibility towards our own people. Jan Sunwai is where Delhi speaks as one family, with every concern heard as our own and every solution carried as a responsibility towards our own people.1
- सहारनपुर में नकली दवाओं के पैकिंग ठिकाने का खुलासा, बेसमेंट से 32.5 किलो दवा स्ट्रिप्स और सैकड़ों कार्टन बरामद उत्तर प्रदेश में नकली दवाओं के खिलाफ कार्रवाई के दौरान सहारनपुर में एक बड़े पैकिंग ठिकाने का खुलासा हुआ है। लखनऊ में नकली दवाओं की सप्लाई के मामले में पकड़े गए ऐज़ाज़ से पूछताछ के बाद मिली जानकारी के आधार पर सहारनपुर के नागल क्षेत्र में एक मकान पर कार्रवाई की गई। तलाशी के दौरान मकान के बेसमेंट में दवाओं की पैकिंग से जुड़ा पूरा सेटअप मिला। यहां स्ट्रिपिंग मशीन, बैच स्टीरियो, डाई-पंच और बड़ी मात्रा में प्रिंटेड पैकिंग सामग्री बरामद की गई। कार्रवाई में करीब 32.555 किलो Defcort-6 की दवा स्ट्रिप्स, 973 प्रिंटेड कार्टन और Rosuvas F-10 के 472 प्रिंटेड कार्टन मिले। इसके अलावा करीब 6.950 किलो पीली गोलियां और 4.900 किलो सफेद गोलियां भी बरामद की गईं। मौके से Defcort-6 और Rosuvas F-10 की प्रिंटेड एल्युमिनियम फॉयल के साथ करीब 6.370 किलो सादा एल्युमिनियम फॉयल भी मिला। बरामद सामग्री को सील कर दिया गया है और कुछ दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। जांच में इस पूरे मामले के तार लखनऊ से जुड़े नकली दवा सप्लाई नेटवर्क से जुड़ते नजर आए हैं। अधिकारियों के मुताबिक मामले में कई लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है और सप्लाई चेन से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। मामले में FIR दर्ज कर आगे की कार्रवाई जारी है।1
- दिल्ली: CJP-डेमोक्रेटिक के फाउंडर मनीष ब्रह्मभट्ट ने कहा, "आज हम 'कॉकरोच जनता पार्टी डेमोक्रेटिक' लॉन्च कर रहे हैं... हमें ऐसा क्यों करना पड़ा? #WATCH दिल्ली: CJP-डेमोक्रेटिक के फाउंडर मनीष ब्रह्मभट्ट ने कहा, "आज हम 'कॉकरोच जनता पार्टी डेमोक्रेटिक' लॉन्च कर रहे हैं... हमें ऐसा क्यों करना पड़ा? यह आंदोलन देश का था; यह इसलिए सफल हुआ क्योंकि लोगों ने इसमें अपना खून-पसीना बहाया था। लेकिन, आंदोलन की सफलता के बाद इसे बेच दिया गया और इसका राजनीतिकरण कर दिया गया। अब यह 'टीम केजरीवाल' बन गई है क्योंकि अभिजीत दिपके और अन्य लोगों ने अपने घरों में आराम से बैठकर 12 सदस्यों की टीम बना ली। आंदोलन की सफलता के बाद, किसी भी वॉलंटियर या प्रदर्शनकारी को न तो बुलाया गया और न ही उनसे राय ली गई। सोशल मीडिया या इंस्टाग्राम से जुड़े लोगों से भी ज़रूरी शर्तों के बारे में नहीं पूछा गया; इसके बजाय, उन्होंने आम आदमी पार्टी से जुड़े आठ लोगों, एक महिला मित्र और कॉलेज के दोस्तों को शामिल करके टीम बना ली। हम चाहते थे कि यह एक राष्ट्रीय टीम हो—जिसमें हर राज्य से पांच लोग हों और उन क्षेत्रों से प्रदर्शनकारियों और वॉलंटियर्स को चुना जाए। हमने इच्छा जताई थी कि चयन प्रक्रिया 'हाई कमांड' या किसी मनमाने अधिकारी के इशारे पर न हो; लेकिन उन्होंने इस इच्छा को ठुकरा दिया और मनमाने ढंग से टीम बना ली। इस टीम को बनाने का विचार भी अरविंद केजरीवाल का ही था क्योंकि वे शुरू से ही धोखेबाज़ रहे हैं। जब अन्ना आंदोलन शुरू हुआ, तो उन्होंने अन्ना का फ़ायदा उठाया..."1
- नई दिल्ली के यशोभूमि द्वारका में IMM India 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। तीन दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय B2B प्रदर्शनी में 100 से अधिक प्रदर्शक और 8 हजार से ज्यादा ट्रेड बायर्स हिस्सा ले रहे हैं। उद्योग जगत को उम्मीद है कि बेहतर नीतियों, लॉजिस्टिक्स और वैश्विक व्यापार समझौतों से भारतीय फर्नीचर और हैंडीक्राफ्ट निर्यात में अगले तीन वर्षों में 20 से 22 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। आयोजन का उद्देश्य भारत को वैश्विक फर्नीचर और इंटीरियर कारोबार का मजबूत सोर्सिंग एवं मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है।1
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