आज से गूंजेगा क्षमा, संयम और आत्मशुद्धि का संदेश, शुरू हुआ पर्युषण राज महापर्व "दस दिवसीय आध्यात्मिक साधना में तप, त्याग और आत्मचिंतन से स्वयं को निखारेंगे जैन समाज के श्रद्धालु" मनेंद्रगढ़/एमसीबी। जैन समाज के सबसे पवित्र और आध्यात्मिक महापर्व पर्युषण राज पर्व का आज से शुभारंभ हो गया। दस दिनों तक चलने वाला यह महापर्व केवल पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का अवसर नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर झांकने, अपनी गलतियों का आत्मावलोकन करने और जीवन को संयम, सदाचार तथा अहिंसा की राह पर आगे बढ़ाने का पावन अवसर है। इन दिनों जिनालयों में भक्ति और साधना का वातावरण रहेगा, वहीं श्रद्धालुओं के मन में क्षमा, त्याग, तप और आत्मशुद्धि की भावना और अधिक प्रबल होगी। पर्युषण पर्व जैन धर्म की उस महान जीवन-दृष्टि का प्रतीक है, जो मनुष्य को बाहरी संसार को बदलने से पहले अपने भीतर परिवर्तन लाने की प्रेरणा देती है। भगवान महावीर स्वामी द्वारा बताए गए अहिंसा, सत्य, संयम और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हुए जैन अनुयायी इन दस दिनों में अपने जीवन के क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषायों को कम करने का प्रयास करेंगे। जैन अनुयायी राजेश कुमार जैन ने बताया कि पर्युषण राज महापर्व जैन समाज का सबसे बड़ा आध्यात्मिक पर्व है। यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि स्वयं को भीतर से बदलने और आत्मचिंतन करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि पर्युषण मनुष्य को यह संदेश देता है कि जीवन की वास्तविक शांति बाहरी सुख-सुविधाओं में नहीं, बल्कि मन की पवित्रता, संयम और सदाचार में निहित है। दस धर्मों की साधना मनुष्य को आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ाती है। *दस उत्तम धर्मों की साधना से जीवन को नई दिशा* पर्युषण पर्व के दौरान जैन धर्म के दस उत्तम धर्मों का विशेष चिंतन एवं पालन किया जाता है। इनमें उत्तम क्षमा क्रोध छोड़कर क्षमा और समता का भाव अपनाने की प्रेरणा देती है। उत्तम मार्दव अहंकार और अभिमान त्यागकर विनम्र बनने का संदेश देता है। उत्तम आर्जव मन, वचन और कर्म में सरलता तथा ईमानदारी की राह दिखाता है। इसी तरह उत्तम शौच लोभ छोड़कर संतोष और आंतरिक पवित्रता का भाव जगाता है। उत्तम सत्य असत्य का त्याग कर सत्य एवं संयमित वाणी अपनाने की प्रेरणा देता है। उत्तम संयम इंद्रियों पर नियंत्रण रखते हुए सभी जीवों के प्रति दया, करुणा और अहिंसा का भाव सिखाता है। उत्तम तप आत्मशुद्धि और कर्मों की निर्जरा की साधना है, वहीं उत्तम त्याग दान, सेवा और सांसारिक मोह से दूर होने का संदेश देता है। उत्तम आकिंचन्य परिग्रह और अनावश्यक संग्रह की भावना को छोड़ने तथा उत्तम ब्रह्मचर्य आत्मसंयम एवं आध्यात्मिक साधना की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है। *जिनालयों में भक्ति और साधना का रहेगा विशेष वातावरण* पर्युषण राज पर्व के दौरान जैन मंदिरों एवं जिनालयों में प्रातःकाल से ही धार्मिक आयोजनों का सिलसिला शुरू होगा। श्रद्धालुओं द्वारा श्रीजी का अभिषेक, वृहद शांति धारा, अष्टद्रव्य पूजन एवं विभिन्न धार्मिक विधान संपन्न किए जाएंगे। इसके साथ ही प्रवचन, स्वाध्याय, तपस्या एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से धर्म और आत्मचिंतन का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। दस दिनों तक चलने वाला यह महापर्व मनुष्य को आडंबरों से दूर होकर अपने अंतर्मन को देखने की प्रेरणा देता है। यह पर्व याद दिलाता है कि जीवन में सबसे बड़ी विजय किसी दूसरे पर नहीं, बल्कि अपने क्रोध, अहंकार, लोभ और मोह पर विजय प्राप्त करना है। पर्युषण का आध्यात्मिक संदेश बेहद सरल, लेकिन गहरा है, अपनी भूलों को पहचानिए, दूसरों को क्षमा कीजिए, स्वयं से भी क्षमा मांगिए और अहिंसा एवं सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़िए। यही पर्युषण है, यही आत्मशुद्धि है और यही भगवान महावीर के बताए मार्ग की वास्तविक साधना है। *पर्युषण पर्व का संदेश* “कषायों पर विजय, कर्मों की निर्जरा, आत्मा की शुद्धि और जीवन में क्षमा-अहिंसा का संचार।”
आज से गूंजेगा क्षमा, संयम और आत्मशुद्धि का संदेश, शुरू हुआ पर्युषण राज महापर्व "दस दिवसीय आध्यात्मिक साधना में तप, त्याग और आत्मचिंतन से स्वयं को निखारेंगे जैन समाज के श्रद्धालु" मनेंद्रगढ़/एमसीबी। जैन समाज के सबसे पवित्र और आध्यात्मिक महापर्व पर्युषण राज पर्व का आज से शुभारंभ हो गया। दस दिनों तक चलने वाला यह महापर्व केवल पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का अवसर नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर झांकने, अपनी गलतियों का आत्मावलोकन करने और जीवन को संयम, सदाचार तथा अहिंसा की राह पर आगे बढ़ाने का पावन अवसर है। इन दिनों जिनालयों में भक्ति और साधना का वातावरण रहेगा, वहीं श्रद्धालुओं के मन में क्षमा, त्याग, तप और आत्मशुद्धि की भावना और अधिक प्रबल होगी। पर्युषण पर्व जैन धर्म की उस महान जीवन-दृष्टि का प्रतीक है, जो मनुष्य को बाहरी संसार को बदलने से पहले अपने भीतर परिवर्तन लाने की प्रेरणा देती है। भगवान महावीर स्वामी द्वारा बताए गए अहिंसा, सत्य, संयम और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हुए जैन अनुयायी इन दस दिनों में अपने जीवन के क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषायों को कम करने का प्रयास करेंगे। जैन अनुयायी राजेश कुमार जैन ने बताया कि पर्युषण राज महापर्व जैन समाज का सबसे बड़ा आध्यात्मिक पर्व है। यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि स्वयं को भीतर से बदलने और आत्मचिंतन करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि पर्युषण मनुष्य को यह संदेश देता है कि जीवन की वास्तविक शांति बाहरी सुख-सुविधाओं में नहीं, बल्कि मन की पवित्रता, संयम और सदाचार में निहित है। दस धर्मों की साधना मनुष्य को आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ाती है। *दस उत्तम धर्मों की साधना से जीवन को नई दिशा* पर्युषण पर्व के दौरान जैन धर्म के दस उत्तम धर्मों का विशेष चिंतन एवं पालन किया जाता है। इनमें उत्तम क्षमा क्रोध छोड़कर क्षमा और समता का भाव अपनाने की प्रेरणा देती है। उत्तम मार्दव अहंकार और अभिमान त्यागकर विनम्र बनने का संदेश देता है। उत्तम आर्जव मन, वचन और कर्म में सरलता तथा ईमानदारी की राह दिखाता है। इसी तरह उत्तम शौच लोभ छोड़कर संतोष और आंतरिक पवित्रता का भाव जगाता है। उत्तम सत्य असत्य का त्याग कर सत्य एवं संयमित वाणी अपनाने की प्रेरणा देता है। उत्तम संयम इंद्रियों पर नियंत्रण रखते हुए सभी जीवों के प्रति दया, करुणा और अहिंसा का भाव सिखाता है। उत्तम तप आत्मशुद्धि और कर्मों की निर्जरा की साधना है, वहीं उत्तम त्याग दान, सेवा और सांसारिक मोह से दूर होने का संदेश देता है। उत्तम आकिंचन्य परिग्रह और अनावश्यक संग्रह की भावना को छोड़ने तथा उत्तम ब्रह्मचर्य आत्मसंयम एवं आध्यात्मिक साधना की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है। *जिनालयों में भक्ति और साधना का रहेगा विशेष वातावरण* पर्युषण राज पर्व के दौरान जैन मंदिरों एवं जिनालयों में प्रातःकाल से ही धार्मिक आयोजनों का सिलसिला शुरू होगा। श्रद्धालुओं द्वारा श्रीजी का अभिषेक, वृहद शांति धारा, अष्टद्रव्य पूजन एवं विभिन्न धार्मिक विधान संपन्न किए जाएंगे। इसके साथ ही प्रवचन, स्वाध्याय, तपस्या एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से धर्म और आत्मचिंतन का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। दस दिनों तक चलने वाला यह महापर्व मनुष्य को आडंबरों से दूर होकर अपने अंतर्मन को देखने की प्रेरणा देता है। यह पर्व याद दिलाता है कि जीवन में सबसे बड़ी विजय किसी दूसरे पर नहीं, बल्कि अपने क्रोध, अहंकार, लोभ और मोह पर विजय प्राप्त करना है। पर्युषण का आध्यात्मिक संदेश बेहद सरल, लेकिन गहरा है, अपनी भूलों को पहचानिए, दूसरों को क्षमा कीजिए, स्वयं से भी क्षमा मांगिए और अहिंसा एवं सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़िए। यही पर्युषण है, यही आत्मशुद्धि है और यही भगवान महावीर के बताए मार्ग की वास्तविक साधना है। *पर्युषण पर्व का संदेश* “कषायों पर विजय, कर्मों की निर्जरा, आत्मा की शुद्धि और जीवन में क्षमा-अहिंसा का संचार।”
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